अपराजिता -33

“मतलब परिहार बाबू अपनी नैकी को ससुराल छोड़ आये… बहुते बढ़िया.. अब तो ऊ पंकजवा को जिन्दा जलने से कोई नहीं रोक सकता !”

“अखंड बिना ज़रूरत ख़ून खराबा करने या जान से मारने वालों में से नहीं है !”

वहीं बैठे एक लड़के शाश्वत चौधरी ने धीरेन्द्र को टोक दिया..

“तो कौन बोल रहा कि परिहार बाबू जान से मारेंगे.. मारेंगे हम, नाम उनका होगा.. भाई उन्हें तो ख्याति से मतलब है और हम उनकी ख्याति चहूँ दिशा में फैलाएंगे..
अखंड बाबू कोई ऐसा वैसा नाम तो है नहीं..
चलो मुन्ना.. !”

“कहाँ चलना है धीरू भैया ?”

“अस्पताल बे.. और कहाँ ?”..

शाश्वत धीरेन्द्र के साथ का लड़का था और अखंड परिहार से चुनाव में अध्यक्ष पद से हारा था… पिछले दो बार से अखंड और शाश्वत एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो रहें थे, शाश्वत के चाचा वर्तमान सरकार से जुड़े किसी अच्छे मंत्री पद पर थे और उसके बावजूद शाश्वत अखंड से हार गया था..
दिल ही दिल में वो उससे बहुत बैर रखता था..
धीरेन्द्र शाश्वत के साथ उप अध्यक्ष के पद पर खड़ा हुआ था…
धीरेन्द्र भी अखंड से चिढ़ता था और बेइंतिहा चिढ़ता था…
और अपनी चिढ के कारण वो शाश्वत और अखंड के बीच की खाई को कभी पटने नहीं दे रहा था..

धीरेन्द्र अपनी चंडाल चौकड़ी को साथ लिए अस्पताल की तरफ निकल गया…
उसे नहीं मालूम था कि उसके पीछे शाश्वत भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा था..

उधर अस्पताल में अखंड पहुँच गया..
वो अपने दोस्तों लल्लन और गोलू के साथ अंदर बढ़ गया…

पंकज के दोस्त उसके साथ वहाँ मौजूद थे.. पंकज की हालत अब काफी ठीक थी, वो अब भी अपने दोस्तों के साथ हंसी मजाक में लगा था..

“मजाक मजाक में कुछ ज्यादा ही पिट गया बे पंकज !”

“हाँ तो… मार खा कर लड़की की नज़र में और ऊँचा उठ जाऊंगा ना.. अब रेशम को लगेगा कि मैं उसके कारण मार खाया हूँ…
लड़कियों के दिल का यहीं तो हाल रहता है.. उसे जैसे ही लगेगा कि मैं उसके कारण पिट रहा हूँ, उसके दिल में तुरंत मेरे लिए दया का सागर उमड़ेगा और फिर वो मेंरी केयर करेगी, फिर हमारी दोस्ती होगी और वो दोस्ती प्यार में बदलेगी, और बस ऐसे वो मेरी झोली में टपक पड़ेगी.. !”

“हाँ, बस झोली में ही टपका कर खुश हो लेना !”

“अबे, सब कुछ स्टेप बाय स्टेप होता है ना, इसी के बाद तो मेरे कमरे तक पहुंचेगी और फिर मेरे बिस्तर..

पंकज अपनी बात पूरी कर पाता उसके पहले एक ज़ोर का चांटा उसके गाल में पड़ा और वो थोड़ी देर के लिए सुन्न पड़ गया..
अपना गाल सहलाता हुआ वो सामने खड़े अखंड को देख चौंक गया…
उसे एकाएक समझ नहीं आया कि अखंड उसे क्यूँ मार रहा हैं.. अखंड ने आगे बढ़ कर उसका कॉलर पकड़ लिया..

“आज के बाद उनके लिए कुछ भी ऐसा वैसा बोला ना तो जान लें लेंगे तुम्हारी.. !”

पंकज के दोस्त जो अब तक ही ही करते दाँत दिखाते खड़े थे भी एकदम से सतर खड़े रह गए..
किसी को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है ?”..

“उनके लिए… ?”
.धीरे से अपना गाल सहलाते हुए पंकज ने पूछा और अखंड ने उसका सर पकड़ा कर ज़ोर से हिला दिया.. पंकज कसमसा कर रह गया..

“अभी अभी किसके बारे में इतना गन्दा गंदा बोल रहें थे !”..

“रेशम ?” पंकज ने सवाल सा किया और अखंड ने वापस उसे एक तमाचा रसीद कर दिया..

“स्साले अगर ये नाम दुबारा तुम्हारी ज़बान पर आया ना तो तुम्हारी ज़बान काट कर फेंक देंगे, अपाहिज कर के छोड़ेंगे कि किसी काम के ना रहो…।”

पंकज अस्पताल के पलंग पर पड़ा था, इसलिए अखंड ने अपना हाथ रोक लिया वरना पंकज को देख कर अखंड को जैसे गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो अस्पताल में नहीं होता तो तबियत से उसकी धुनाई हो जानी थी…

“निकालो अपना मोबाइल.. !”

अखंड ने पंकज से कहा और पंकज ने बहाना मार दिया…

“इस वक्त नहीं है मेरे पास … !”

अखंड ने उसका गला पकड़ लिया..
गले पर अखंड की पकड़ मजबूत होती देख पंकज छटपटाने लगा, उसने अपने दोस्तों को इशारा किया कि बाहर से डॉक्टर और बाकी स्टाफ को बुला लाये, लेकिन अखंड के लड़के उस कमरे के दरवाज़े के बाहर तैनात इसी बात का ध्यान रखे हुए थे कि बाहर से अस्पताल का कोई स्टाफ भीतर ना चला आये….

अखंड ने अपनी जेब से गन निकाली और पंकज के माथे पर लगा दी..
“तुम हमको चूज़ा समझ रहें थे क्या बे ?”

अखंड के हाथ में गन देख कर पंकज घबरा गया.. उसने तुरंत अपना मोबाइल अखंड के सामने कर दिया..

गन पकडे हुए ही अखंड ने पंकज का मोबाइल उससे खुलवाया और फिर उसी से उसके सारे सोशल मीडिया अकाउंट से रेशम के साथ वाली तस्वीर डिलीट करवाई..
पंकज को ऐसा करते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन जान से बढ़कर उस वक्त और कुछ नहीं लग रहा था..

“अब एक नोट लिख के डाल.. रेशम हमारी बहन जैसी है और हम उसे दिल से अपनी बहन मानते हैं.. !”

पंकज ने सर उठा कर अखंड की तरफ देखा, उन नजरों में बगावत नज़र आ रहीं थी..
वो बागी हो रहा था.. ।
अखंड ने उसकी आंखें देखी और उसकी गर्दन पर ज़ोर का वार कर दिया.. 
दर्द से पंकज कलबला गया, उसके मुहँ से चीख निकल गयी..
“जल्दी लिख साले ! और ऐसी बगावती नजरों से हमें ना देखो… बागी होना अच्छा है लेकिन तब जब आप सच्चे और सही हो..
आजकल हर लड़ाका खुद ही को खुद से भगत सिंह की उपाधि दे डालता है लेकिन इससे तुम जैसे अक्ल के सकोरे भगत सिंह नहीं बन जायेंगे..।
कोई भी गलत काम करो,और जब सामने वाला तुम्हारे गलत काम की तरफ इशारा करें, तुम्हें समझाए तब अक्ल लगा कर सामने वाले अक्लमंद की बात समझने की जगह बेवकूफो की तरह अपनी बकवास पर अड़े रहो और खुद को बागी, बगावती, समझते रहो लेकिन ऐसे बेवकूफी भरे काम कर के तुम कहीं से अक्लमंद साबित नहीं होते, बल्कि महा बेवकूफ नज़र आते हो..।
ऐसी बगावती आँखों से घूरोगे ना तो तुम्हारी आंखें ही फोड़ देंगे.. ना रहेगा बांस ना बजेगी बाँसुरी..।
साले पूरी ज़िंदगी फिर पानी पी पीकर हमें कोसना और हमारी उम्र बढ़ाना..।

हमारी अम्मा कहती है, जब कोई तुम्हारा मुकाबला नहीं कर पाता है या बार बार प्रयास कर के भी तुमसे पीछे रह जाता है तब तुम्हारा नाम अपने लोगों में ख़राब करना शुरू कर देता है..।
इससे और कोई फ़ायदा हो ना हो उसे खुद को ये महसूस होने लगता है कि वो तुम्हारे लिए खाई खोद रहा है। और तुम्हारा नाम बिगड़ रहा है।

जबकि सच्चाई तो ये है बाबू कि वो हमारे प्रभाव से निकल ही नहीं पा रहा और इसीलिए चाहे कोस कोस के हमारा नाम ले जप तो हमी को रहा है ना.. ।

बस यही हालत आज से तुम्हारी होनी है, तुम सोते जागते खाते पीते हर वक्त हमें कोसोगे और हमारा नाम जपोगे.. !”

अखंड ने पंकज के घुटनो पर ज़ोर का वार किया, पंकज बलबला कर रह गया.. दर्द से उसकी आँखों में ख़ून छलक आया और उसके फ़ोन को उससे छीन अखंड ने पूरे ज़ोर से वहीं फर्श पर पटक कर तोड़ दिया..

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