“पर सर सामान्य वर्ग की पांच सीट है, तो उस पांच में सामान्य वालों को बिठाइये ना.. काहें को किसी और को दे रहें..।
अब पढाई लिखाई में तो मिलता ही है ना आरक्षण.. फेर अब इसमें काहे दिये दे रहें हैं बताइये.. !”
“यहीं प्रारूप है परिहार.. कि अगर कोई अनुसूचित जाति
जनजाति, पिछड़ा वर्ग का बालक बालिका समान्य वालों से अधिक या बराबरी का नंबर ले आता है तो, उसे सामान्य का सीट ही दिया जायेगा.. ! “
“पर ये तो मनमानी है ना सर ?”
“पर हम कुछ कर भी नहीं सकते परिहार.. !”
“सर कोनो रास्ता नहीं है ?”
“ऊहुँ…. नहीं है.. एक ही उपाय है, वो लड़की का अगर कहीं पीजी विजि में सलेक्शन हो जाये या शादी ब्याह हुई जायें और वो अपना सीट छोड़ जायें.. तभी कुछ हो पायेगा…।”
“और कोई रास्ता नहीं है सर.. ?”
डीन ने ना में गर्दन हिला दी..
“जो रास्ता है हम बता दिये… अब और कोई रास्ता नहीं है अखंड बाबू.. का करे बताओ.. ! तुम यार हमरे गाँव के होने का बहुतै फ़ायदा उठाने लगे हो.. !”
“अरे सर.. !”
अखंड ने खड़े होकर प्रिंसिपल के पैर छुए और अपने चेलों को लिए बाहर निकल गया..
“भैया जी कोई उपाय हुआ ?”
अंबर ने उचक कर पूछा..
अखंड उसे ध्यान से देखने लगा..
“कुंवारे हो कि शादीशुदा ?”
अखंड के सवाल पर अंबर उसे आंखें फाड़े देखने लगा..
“कहना क्या चाहते हैं भइया जी.. ?”
“अबे.. अगर वो लड़की का शादी हो जाता है या कहीं और सेलेक्शन हो जाता है तभी वो ये सीट छोड़ेगी वरना नहीं.. अब तुम सोच लो… ये सीट चाहिए तो शादी कर लो और नहीं तो उसे कर लेने दो ये काम.. !”
अंबर का चेहरा लटक गया..
“आप जानते नहीं है हमारे लिए वो सीट कितना महत्वपूर्ण था… !” रुआंसा सा अंबर वहाँ से जाने लगा.. जाते जाते पलट कर रुका और अखंड को देखने लगा..
“हमें लगा था अखंड परिहार वो जादूगर है जो कुछ भी कर सकता है.. लेकिन हमें नहीं पता था कि सब बतौलेबाजी भर है.. !”
अंबर मुड़ा और वहाँ से चला गया..
सुबह सुबह छैः बजे का वक्त था, अंबर अपने कमरे में गहरी नींद सोया हुआ था कि उसके होस्टल के कमरे में किसी ने जोर-जोर से दस्तक देनी शुरू कर दी.. अंबर चौंक कर उठ बैठा, उसने दरवाजा खोला ही था कि किसी ने उसके चेहरे पर एक काला कपड़ा डाला और उसके लगातार हाथ पैर पटकने के बावजूद उसे उठाकर अपने कंधों पर डाल कर बाहर ले गया..
हॉस्टल से बाहर एक लंबी सी वेन खड़ी थी.. जिसमें चेहरे पर मास्क डालें अंबर को अंदर डाल दिया गया! कुछ देर बाद ही वह गाड़ी एक छोटे से मंदिर के सामने खड़ी थी। उन लड़कों ने अंबर को गाड़ी से नीचे उतारा, और उसके चेहरे से नकाब हटा दिया। अंबर तिलमिलाकर उन लड़कों की तरफ देखकर बिफर गया…
” सुबह-सुबह यह क्या लगा रखा है? पगला गए हो क्या..?”
” पगला तो तुम गए हो डाक्टर!! जो कल अखंड भैया का उल्टा सीधा बोल दिहिन…
अब यहाँ मंदिर में सब तुम्हारे प्यार का रास्ता देख रहे हैं..!”
“अबे करने क्या वाले हो तुम लोग.. ?”
“मदद मांगे थे ना बाबू.. मदद कर रहें हैं तुम्हारी.. !”
अखंड की कड़कती आवाज़ अंबर के कान में पड़ी और वो आंखें मलता उसे देखने लगा..
“चलो तुम्हारे ब्याह का बखत हुई गवा… !”
उसे कॉलर से पकड़ कर खींचता गोलू सीढियों से ऊपर ले गया..
वहाँ अंबर की क्लास की वहीं टॉपर लड़की बबिता जाटव खड़ी थी…..
लड़की बेहद होशियार थी और उसने बारहवीं में भी स्टेट टॉप किया था.. उसके चेहरे पर नाराज़गी साफ़ झलक रहीं थी..
“आओ भी पंडित… ये दोनों वर वधु का फेरा करवाना है.. !”
अखंड की बात पर पंडित जी ने अंबर और बबिता की तरफ देखा… दोनों की आँखों और चेहरें के भाव देख कर नहीं लग रहा था कि वो दोनों शादी करना चाहते हैं..
” इन्हें देखकर लग तो नहीं रहा है दोनों ब्याह करना चाहते हैं?”
पंडित ने बिल्कुल निर्लिप्त भाव से अखंड की तरफ देख कर बोला। अखंड ने पंडित को घूरते हुए अपने मन की बात कह दी।
” देखिए पंडित जी, बात दरअसल यह है कि आजकल के लड़का लड़की शादी ब्याह करना ही नहीं चाहते। पहले के भी नहीं करना चाहते थे, लेकिन पहले सामाजिक दबाव हुआ करता था।
भाई जिसके कारण शादी-ब्याह करना पड़ता था ।
और तुमको क्या लगता है हमारे अम्मा बाबूजी बहुत हंसते खेलते ब्याह किए होंगे, नहीं किए।
तो ऐसा है ना कि आजकल किसी का मन नहीं करता वैसे जिम्मेदारी लेने का।
वही हाल इन दोनों का भी है।
करना चाहते हैं वैसे ! यह अंबर हमारे दोस्त हमारे पास चले आये और कहने लगे की इनको बिहाव करना है, हमनें जब बबीता जी से पूछताछ करवाई तो इन्होने भी स्वीकार कर लिया..
लेकिन दोनों के बीच में जात पात की लंबी दीवार खड़ी है..
हम कहे हम गिरा देंगे सारी दीवारों को…! ठीक कहें ना पंडित जी ?”
पंडित जी के चेहरे के भाव अब भी नहीं बदले.. उन्होंने भी अखंड की तारीफ में कसीदे सुन रखे थे, उन्होंने अंबर की तरफ देखा! अंबर के चेहरे पर नाराजगी नजर आ रही थी। और बबीता पंडित जी को यूं घूर रही थी जैसे खड़े-खड़े अपनी आंखों की गर्मी से ही उन्हें भूञ्ज डालेगी…
“क्यूँ कर रहें हैं आप ऐसा..? यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष ही है ना, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आपको अपनी मनमानी करने की छूट मिल गई। किसी भी लड़के और लड़की का ब्याह करवा देंगे आप?
इस बात का कानूनन आपको कोई हक नहीं है..समझे मिस्टर परिहार.. !”
बबिता गुस्से में फूट पड़ी..
एक गहरी सी फूँक छोड़कर अखंड बबीता के पास चला आया..
” समझदार तो आप बहुत लग रही है बबीता जी, तो फिर यह बात काहे नहीं समझ लेती कि अंबर को भी हाउस सर्जन शिप चाहिए..
आप अगर सामान्य वर्ग से नहीं भी खड़ी होंगी तो आपको अपने कोटे पर यह सीट मिल जाएगी। लेकिन अगर आप सामान्य वर्ग में जाकर दावेदारी प्रस्तुत कर देती हैं तो सामान्य वर्ग का एक लड़का उस लिस्ट से कम हो जाएगा। क्या आपको नहीं लगता कि यह थोड़ी सी बेईमानी है… ।
मेडिकल सिलेक्शन सीट से लेकर लाइब्रेरी के बुक बैंक तक में आपको सरकार सारी सुविधा प्रदान कर रही है। उसके बावजूद अगर आप यहां पर आकर किसी की मेहनत पर लात मारते हैं तो, उसके कलेजे में भी पीरा उठती है मैडम।
उस पीर को तो समझिए। हम तो डीन साहब से बात करने गए थे कि आप का पत्ता काट कर अंबर बाबू का रास्ता साफ कर दें, लेकिन डीन सर ईमानदार आदमी है, उन्होंने कहा अगर बालिका चाहे तभी ऐसा हो सकता है। और बालिका उसी कीमत पर जाएगी जब या तो उसका कहीं पीजी में सिलेक्शन हो जाए और या फिर शादी ब्याह हो जाए। पीजी में आपका सिलेक्शन हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन आप का ब्याह करवाना तो हमारे हाथ में है। हमें लगा अंबर से ही करवा देते हैं। जब दोनों जन पति पत्नी बन जाएंगे, तब एक पत्नी होकर आप अपने पति के लिए सीट तो बचाना ही चाहेंगी।
और जाहिर है उस समय सामान्य का सीट अंबर बाबू को देकर आप अपने एससी की सीट से ही हाउस सर्जन शिप करना चाहेंगी।

Mam mera matlab hai ki adhure hai naye episode toh koi aisa platform ho toh mujhe link share kare jisse main puri story padh saku
यहाँ पूरी कहानी मौजूद हैं मैम.. आप मुख्य पेज पर अपराजिता को kholiye उसमे आपको सारे पार्ट्स मिल जायेंगे
Mam aprajita story me 20 ke baad koi naye episode nahi hai or mujhe padhna hai please kuch help kariye.
Mam hum apke page pe aake padh rahe hai yaha bhi nahi mil rahe hai