उसने अपने लिए कॉफ़ी बनायीं और पलंग के पास रखी इजी चेयर पर बैठ गयी.. उसे अथर्व का चेहरा साफ साफ दिखाई दे रहा था..
सोते हुए किसी भोले मासूम बच्चे सा नज़र आ रहा था वो…
छुट्टी पर जाना था इसलिए उसने शेव नहीं की थी और उसकी हलकी हलकी सी दाढ़ी उसके चेहरे की लुनाई बढ़ा रहीं थी…
दायीं ऑंख के ठीक किनारे ज़रा ऊपर कनपटी पर उसके एक तिल था…
रेशम की दादी जब थी तो कहा करती थी कनपटी और माथे पर तिल बुद्धिमानों के हुआ करता है..
अब अथर्व को देख कर लगता है, सही कहती थी..
अथर्व कॉलेज में भी खासा फेमस था… अपने लुक्स और दिमाग दोनों के ही कारण…
और उसके साथ ही उसका शांत और गंभीर स्वभाव सोने पे सुहागा हुआ जाता था.. आज तक उसने कॉलेज में अथर्व के किसी लिंकअप की चर्चा नहीं सुनी थी जबकि अथर्व की ही बेच में कई लोगों ने पढाई के दैरान ही शादी कर ली थी..
अथर्व उस समय भी फर्स्ट ईयर की लड़कियों के लिए प्रिंस चार्मिंग था..
और आज भी वो जानती थी, अपने अस्पताल में भी वो खासा फेमस होगा…
और वहीं कॉलेज के ज़माने का प्रिंस चार्मिंग उसे मिल गया था…।
वो धीरे से मुस्कुरा उठी..
उसे अपनी किस्मत पर नाज़ होने लगा..
लेकिन तभी अचानक उसे वो समय भी याद आने लगा जब उसे लगने लगा था कि उससे ज्यादा खराब किस्मत शायद ही भगवान ने किसी की लिखी होगी…
अचानक लाइब्रेरी का वो अँधेरा सा कोना, वो लिपलिपाती रौशनी, वो सन्नाटा और उसमें गूंजती वो आवाज़…. “अगर तुम मेरी नहीं हुई तो मेरा वादा है तुमसे अखंड तुम्हें किसी और का भी नहीं होने देगा.. !”
उसके दिल में मरोड़ सी उठने लगी… उसे ऐसी तेज़ घबराहट होने लगी, की लगा अभी साँस आनी बंद हो जायेगी…
एसी चलने के बावजूद वो पसीने से भीग गयी..
उसने खिड़की के पास जाकर खिड़की खोल दी.. ताज़ा हवा का झोंका अंदर धंसता चला आया..
तेज़ी से साँसे भर कर वो खुद को संयत करने की कोशिश में लग गयी…
क्यूँ वो जानबूझ कर उन अँधेरी गलियों की तरफ मुड़ जाती है ?
इतनी मुश्किल से तो उसने इन सब बातों से खुद को दूर किया है ? फिर क्यूँ वो वापस उन बातों को याद करने लगती है ? उसे ये सब भूलना होगा..
पूरी तरह से वरना वो अथर्व के साथ अन्याय कर जायेगी…
कुछ देर में उसने गहरी सी साँस भर कर खिड़की बंद कर दी और पलंग पर आकर लेट गयी…
लेटे लेटे अपने ख्यालों में मगन रेशम को आधा प्रहर बीत जाने के बाद आखिर नींद पड़ ही गयी…

Nice