अपराजिता -15

अपराजिता -15

सरना अनिर्वान के सामने बैठा अपने दोस्त राजेंद्र की कहानी सुना रहा है...

रेशम और कुसुम की कहानी एक साथ चल रहीं लेकिन रेशम की रोज़ की दिनचर्या दिख रहीं जबकि कुसुम की कहानी सरना वहीँ बैठे सुना रहा है..
कहानी मनोरंजक बनी रहें इसलिए दोनों नायिकाओं के हिस्से एक साथ दिखाती हूँ…


रेशम और अथर्व की रात में फ्लाइट थी, और वो दोनों निकल गए..
टैक्सी से एयरपोर्ट के रास्ते पर रेशम के दिमाग में एक ही बात चल रहीं थी कि काश एक बार मम्मी पापा और मानव से भी मिल पाती तो कितना अच्छा होता, लेकिन अथर्व इतना व्यस्त था कि वो कुछ कह नहीं पायी…

एयरपोर्ट पर वो लोग सामान लिए अंदर जाने को थे कि, उसके कानों में वहीं मीठी सी आवाज़ घुल गयी जो आज तक उसे थपक के लोरी सुना कर सुलाने से लेकर सुबह जगाने तक का काम करती थी..

“रेशु… !”

और वो ख़ुशी से चौंक कर पलट गयी… पीछे मानव के साथ उसके माता पिता खड़े थे.. वो भाग कर अपनी माँ के गले से लग गयी.. अथर्व ने सबके पैर छुए और वो सभी लोग एक साथ ही एयरपोर्ट के गेट तक चले आये…
उसकी माँ उसे कुछ ना कुछ बताती समझाती रहीं, चेक इन का वक्त करीब आता देख कर मानव ने ही उन दोनों को टोका और रेशम एक बार फिर सबके गले से लग कर अपने पति का हाथ थामे अंदर चली गयी…।

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Avantika
Avantika
2 years ago

Nice