अपराजिता -9

भावना अपना दुपट्टा डाल कर कुसुम के साथ जाने खड़ी हो गयी..
कुसुम ने वहीं प्लेट में रखी बालूशाही उठा कर अपने साथ रखें डिब्बे में डाली और डिब्बे के तीखे किनारे से अपनी बाँह में ज़ोर से चीरा लगा दिया..
ख़ून बलबला कर बहने लगा, उस पर वहीँ पड़ा रुमाल बांध कर मुस्कुरा कर वो कमरे से बाहर निकल गयी…

एक बार फिर उसकी फटफटिया गाँव में धुल उड़ाती सरकारी अस्पताल की तरफ भाग निकली…


मानव के साथ रेशम अपने घर पहुँच गयी…
ऐसा लगा मानो सुख की लम्बी साँस मिल गयी… तुरंत ऊपर अपने कमरे में जाकर उसने सबसे पहले साड़ी उतार फेंकी… अपना लोवर और टीशर्ट निकाल कर उसने पहना और अपना हाथ मुँह धो कर अपने पलंग पर पसर गयी..

अपने तकिये में मुँह गड़ाए वो कुछ पल उसे सूंघती रहीं..
हाय.. अपने कमरे की चिरपरिचित खुशबू… कितनी मोहक कितनी मनभावन लगती है.. ।
वो दिवार पर दोनों हाथ फ़ैला कर ऐसे खड़ी हो गयी,जैसे अपने कमरे की दीवारों के गले लग रहीं हो..
उसी वक्त दरवाज़ा खोल कर मानव अंदर चला आया..

उसके पीछे ही उसकी माँ भी चली आई..

“हाय ये क्या नमूना बन गयी फिर ?”

इसकी माँ उसे देख हॅंस पड़ी..

” करार आ गया मम्मी.. अपने कपड़े वापस पहन..! गज भर की साड़ी लपेटी तक नही जाती ढंग से.. ये शादी के बाद साड़ी पहनने का घटिया रिवाज़ बनाया किसने ? मैं मेरी भाभी को ये सारे फालतू काम नहीं करने दूंगी.. समझा मानव !”

“इसकी आवाज़ नहीं निकल रहीं थी अपनी ससुराल में, और यहाँ बड़े डायलॉग चिपका रही है.. !”

मानव ने उसके सर पर एक चपत लगा दी..

“चल आजा, सब तेरी पसंद का बनाया है.. खा कर थोड़ा आराम कर ले.. फिर शाम को रघु का संगीत है, वहाँ भी तो जाना है ना.. !”

रेशम मुस्कुरा उठी.. उसके सामने उसकी माँ ने उसकी पसंद का सब कुछ बना कर रख दिया था..

“मम्मी इतना सब.. मैं कहाँ खा पाऊँगी ?”

उसने तले हुए रसाज़ की प्लेट से एक टुकड़ा उठा कर मुहँ में रख लिया..

“ओह्ह्ह्ह मम्मा टू गुड.. ! बिल्कुल मलाई सा मुहँ में घुल गया.. क्या बनाती हो, वाह !”

“अच्छा सुन सास कैसी हैं तेरी ?”..

रेशम को चहकते देख कर उसकी माँ का कलेजा ठंडा पड़ गया था..

” हम्म अच्छी हैं, सब अच्छे हैं, लेकिन अभी सब को जानती नहीं हूँ ना… !”

उसी वक्त उसके मोबाइल पर मेसेज बीप बजी, “अथर्व सर ” लिखा देख उसने एकदम से सामने बैठे भाई और माँ पर नज़र डाली और फ़ोन किनारे रख दिया..

पता नहीं इस आदमी ने क्या ऊलजलूल मेसेज भेजा हो….पढ़ कर ही शर्मिंदा हो गयी तो माँ और मानव क्या सोचेंगे..

पूर्वा को मालूम चल गया था की रेशम आई है, वो भी कूदती फांदती उससे मिलने चली आई..
आते ही वो उसके गले से लिपट गयी.. अब तो दो तीन बार मेसेज बीप बज गयी..

उसी समय मानव का फ़ोन आया और वो फ़ोन उठाये बात करने निकल गया.. माँ नीचे काम निपटाने चली गयी
रेशम को राहत सी लगी..
उसने धीरे से मोबाइल खोला..

“घर पहुँच गयी.. ?”

“ओह्ह हेलो… कहाँ हो.. ?”

“जवाब तो दो यार.. ?”

” रेशु… कहाँ हो.. ?”

आधे घंटे में उस बेसब्रे ने चार मेसेज भेज दिये थे..
पूर्वा से ऐसी कोई शरम संकोच ना थी..
रेशम ने जवाब लिख दिया..

“हाँ पहुँच गयी.. !”

“थैंक गाॅड! तुमने जवाब तो दिया..!”

अथर्व का तुरंत जवाब आ गया..
हे भगवान ये आदमी बस फ़ोन हाथ में लिए बैठा था क्या..

उसके बाद सीधे अथर्व का फ़ोन ही आ गया..

रेशम ने पूर्वा की तरफ देखा पूर्वा ने उसे देख एक ऑंख दबा दी..

“जीजू का फ़ोन है ना.. उठा लें.. !”

रेशम ने फ़ोन जैसे ही उठाया उधर से एक अजीब सी आवाज़ आई.. उसे ठीक से समझ में नहीं आया, लेकिन उसे अंदेशा हो गया..
अथर्व उसे किस कर रहा था.. उसकी कान की लोरिया वापस जलने लगी…

“सुनो… क्या पहनी हो अभी.. ?”

ये कैसा सवाल था ? सवाल तो सामान्य ही था लेकिन पूर्वा के सामने जवाब देने में जाने क्यूँ रेशम की जान निकल रहीं थी..

“अच्छा ठीक है !” रेशम ने गोलमोल जवाब दे दिया

“कोई बैठा है सामने ?”

हे भगवान ! ये कैसे सब समझ जाता है..

“अच्छा सुनो.. एक किस दो ना ?”

अथर्व फिर उसे छेड़ उठा..
अजब आदमी है, अभी खुद ही पूछ रहा कोई बैठा है क्या सामने और अब खुद किस मांग रहा.. छी लाज शरम कुछ नहीं है इसके पास..

“दो ना प्लीज़. “
अजीब नशीली सी आवाज़ में अथर्व ने कहा और रेशम ने वहीँ रखा पानी का गिलास उठा कर मुँह से लगा लिया..

अथर्व के धीमे से हंसने की आवाज़ भी उसे सुनाई दे गयी.. अच्छा तो उसे चिढ़ा कर बंदा हॅंस रहा है..

“फ़ोन रखूं… पूर्वा मुझसे मिलने आई हुई है !”

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ritakumariverma23
2 years ago

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌