अपराजिता -9

“ओके.. रख देना, पहले एक बात सुन लो..
आज शाम को बादामी साड़ी पहनना, तुम्हारे पास है, हमारे यहाँ से चढाव में गयी थी.. मुझे बहुत पसंद आई थी वो साड़ी..

“हम्म ठीक है !”
.
“और सुनो… अपने पर्स में याद से लिपस्टिक रख लेना !”
.
“क्यूँ.. ?” पूछते साथ ही अपनी बेवकूफी और अथर्व का ऐसा कहना, दोनों बातें एक साथ समझ में आ गयी…
और रेशम फिर झेंप कर रह गयी..

“हाय रे मेरी मासूम डॉक्टरनी… लगता है प्यार की सारी बारहखड़ी मुझे ही सीखानी पड़ेगी…
लिपस्टिक रखने इसलिए कह रहा, मौका देख कर होंठो पर लगी तो मैं ही खा जाऊंगा…

उफ़ जलील इंसान.. ज़रा भी शरम नहीं आती इन्हें..

“एक काम और… !”

रेशम से उसकी बात का जवाब नहीं दिया गया..

“मेरी तरफ से पूर्वा के गाल पर किस कर लो.. !”

“बाई !”

रेशम ने तुरंत फ़ोन काट दिया..
उसे ऐसे लाल पड़ा देख पूर्वा भी मुस्कुराने लगी..
रेशम की शाम को अथर्व से मिलने पर क्या होगा सोच कर ही जान अटकने लगी थी…

क्रमशः

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ritakumariverma23
2 years ago

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌