कुसुम के घर परिवार का मामला ज़रा उलट था.. वो राजपूत थी..।
उसके परिवार का सिर्फ उसी गाँव भर में नहीं बल्कि आसपास के चालीस गाँवो में दबदबा था..
कुसुम के पूर्वज अंग्रेज़ो के समय के ताल्लुकेदार थे.. खानदानी रईस थे… ।
और हर एक पीढ़ी ने बाप दादाओं के कमाए इस नाम का मान रखा था…
दूर्वागंज और मानौर लगे हुए गाँव थे… दोनों एक दूजे से ऐसे जुड़े गाँव थे कि लोग भी आपस में मिल जुल कर ही रहते थे..।
मानौर गांव के जाने माने रईस जमींदार थे इंद्रभान सिंह परिहार।
जिन्हे लोग बड़ा ठाकुर नाम से जानते थे..।
इंद्रभान और उनके छोटे भाई उदयभान का परिवार एक साथ रहता था..।
उनकी कोठी किसी महल से कम नहीं थी.. बीसियों नौकर घर परिवार की सेवा टहल में लगे रहते थे..।
इंद्रभान के दो बेटे थे.. अखंड सिंह परिहार और यज्ञ सिंह परिहार !
वहीँ उदयभान के एक ही लड़का था वीर सिंह परिहार !
उदयभान की दो बेटियों की शादी हो चुकी थी..
घर परिवार में अब घर के दूसरे बेटे यानी यज्ञ सिंह के लिए लड़की देखी जा रहीं थी…
अखंड सिंह परिहार की ज़िंदगी में ऐसा कुछ घटा था कि जिसके बाद उसने आजीवन शादी ना करने का फैसला ले लिया था..
उसकी माँ दादी काकी सब अपने जीवन मरण की कसमें देकर भी उसे उसके प्रण से हटाने में असफल रहीं थी….
जाने उसके अतीत में ऐसा क्या था जो वो शादी नहीं करना चाहता था…

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌