जीवनसाथी -3 भाग -166

जीवनसाथी -3 भाग -166

  अब तक आपने पढ़ा…

शौर्य अपने साथ हुई आपबीती एक पर्चे मे लिख कर धनुष और विक्रम को बता चुका है। और सब कुछ जानने के बाद धनुष उसका साथ देने को तैयार है..
वो लोग भदौरिया की बताई जगह पर पहुँच जाते हैं। और भदौरिया के दोनों गार्ड्स को बेहोश कर के धनुष और यश उनके कपडे पहन कर शौर्य और विक्रम के साथ आगे बढ़ जाते हैं..

वासुकी भी दर्श के साथ विजयराघवगढ़ की तरफ बढ़ चुका है, इधर महल में सभी तरफ दुःख पसरा हुआ है। हर कोई महल के राजकुमार हर्ष के गायब होने से दुखी है..

अब आगे….

भदौरिया और गुरु के साथ शौर्य और उसकी टीम भी प्लेन में बैठ जाती है..।
भदौरिया की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था..
वो मानव की सबसे कठिन शर्त पूरी करने जा रहा था…

शौर्य भदौरिया की आरामदायक कुर्सी के ठीक पीछे ही बैठा था..
शौर्य ने आगे की तरफ झुक कर भदौरिया की तरफ देखा..

“कुछ पूछ सकता हूँ..?” शौर्य ने कहा

“पूछो.. ।”

“आखिर इतने रुपये कमा कर करना क्या चाहते हो.. ?”

भदौरिया इस वक्त संतुष्ट था, उसके चेहरे पर उसका आंतरिक आनंद छलका पड़ा था, मुस्कुरा कर उसने शौर्य को देखा और हलके से आंखे मूँद ली..

“अब तुम्हें सब कुछ सच बताने से कोई नुकसान नहीं। क्यूंकि यहाँ धरती से इतनी ऊंचाई पर जहाँ पायलट भी मेरा है और सिक्योरिटी भी मेरी है, वहां तू मेरा क्या ही बिगाड़ लेगा..।
तो सुन..
अजातशत्रु से तो मेरी दुश्मनी थी ही, मैं हमेशा से उसका नाम मिट्टी में मिलाना चाहता था.. उसके बेटे शौर्य को तो मैंने अपने कब्जे में कर रही रखा था। बचा महल का दूसरा राजकुमार, आज वो भी मेरे हत्थे चढ़ गया..
दोनों राजकुमारों को एक साथ मानव को सौंपने का सपना था मेरा..।
इसीलिए शौर्य को उस वक्त नहीं मारा था।
उसकी जान बख्श दी थी..।”

“ओह्ह तो इसलिए तुमने शौर्य को छुपा कर रखा हुआ था..।”

गुरु ने भदौरिया की तरफ देख कर सवाल जड़ दिया..

“हाँ.. मानव से हर्ष के बदले मैंने दस मिलियन डॉलर मांगे थे।  तब उसने कहा था, अगर दोनों प्रिंस साथ होते तो इतनी रकम वो मेरे मुँह पे फेंक के मारता, लेकिन अभी इसका आधा ही देगा..
तभी से दिमाग में ख्याल था कि जिस दिन हर्ष इसे दूंगा उसी दिन शौर्य की भी इसके हवाले कर दूंगा.. ।”

“तो तुमने शौर्य को रखा कहाँ है ?”

इस सवाल पर भदौरिया मुस्कुरा उठा..
“उसे मैं हर जगह अपने साथ लिए फिरता हूँ.. लेकिन कभी किसी का ध्यान ही नहीं गया.. ।”

गुरु के माथे पर बल पड़ गए। वो भी सोचने लगा क्यूंकि उसने खुद ने शौर्य को नहीं देखा था..

“अरे इतना सोचो मत गुरु..।
मेरे कमरे में ही शौर्य मौजूद है.. अब मैं इन दोनों राजकुमारों को मानव के हवाले कर दस मिलियन डॉलर का मालिक हो जाऊंगा, और जानते हो इतने रुपयों का मैं करूंगा क्या.. ?”
भदौरिया जोर से हंसने लगा..

“मैं इन रूपों को लेकर जापान जाऊंगा। वहां एक डॉक्टर है, उससे मेरी पहले ही बातचीत हो रखी है। मेरे शरीर के वह सारे अंग जो अब धीरे-धीरे काम करना कम कर रहे हैं, उन अंगों को मैं बदलवा लूंगा। यहां तक कि उस डॉक्टर ने कहा है, वह मेरी पूरी स्किन भी बदल देगा। और मैं वापस पहले की तरह जवान हो जाऊंगा।”

गुरु आश्चर्य से भदोरिया की तरफ देख रहा था।

” जानते हो गुरु, अजातशत्रु से मेरा बदला भी पूरा हो जाएगा, और उस बदले के साथ मुझे इतने ढेर सारे रुपए मिलेंगे कि मैं अपनी काया पलट करके एक नए नाम और नई पहचान के साथ इस दुनिया पर राज करूंगा। मानव जेरा के काम में हर्ष की इतनी जोर-शोर से बोली लगेगी कि मानव के पास पैसे बरसेंगे और वह खरबों रुपए का मालिक बन जायेगा। हर्ष के बाद शौर्य की बोली लगेगी। यह खेल कभी नहीं रुकने वाला है। इन दोनों के मरने के बाद भी यूँ ही जारी रहेगा..।

जानते हो पहले वह लोग हर्ष और शौर्य को टॉर्चर करने के लिए बोली लगाएंगे। अपने मन मुताबिक वह लोग इन दो राजकुमारों को अलग-अलग तकलीफें देंगे। उस तकलीफ से उन्हें आनंद मिलेगा। कोई उनके बाल काटेगा, कोई इनकी त्वचा पर पिन चुभाएगा । कोई इन्हे नोचेगा। कोई ब्लेड से इन्हे काटेगा। इनका खून बहेगा और इस तरह जब उन लोगों का मन इस तरह के टॉर्चर से भर जाएगा। उसके बाद वह लोग इनके ऑर्गन्स पर बोलियां लगाएंगे।
  जो सबसे बड़ी बोली लगाएगा, उसे इन जवान राजकुमारों के ऑर्गन्स मिल जाएंगे। और वह लोग भी मेरी तरह अपने पुराने ऑर्गन्स बदलकर नये और युवा अंगों के साथ वापस जवान हो जाएंगे।”

गुरु आंखे फाडे उसकी बात सुन रहा था…

ये सारी बाते शौर्य और विक्रम के कानो में भी पड़ रही थी.. वही अपना भेस बदल कर बैठे धनुष और यश भी सब सुन पा रहे थे..

कुछ देर बाद ही उन लोगो को ऊपर से एक टापू सा नजर आने लगा..

समंदर के बीच बसा ये टापू कब और कैसे अस्तित्व में आया, फ़िलहाल उन लोगो के पास ये सोचने का वक्त नहीं था..
उनका हेलीकॉप्टर वहां उतरने लगा..

“एक बात पूछूं…।” शौर्य ने भदौरिया की तरफ देख सवाल किया..

“तुम क्या यहाँ केबीसी खेलने आये हो ? जो हर वक्त सवाल ही पूछते रहते हो.. पूछो.. ।”
भदौरिया ने चिढ कर कहा..

“यहाँ मानव के पास तो आदमियों की फ़ौज होगी..
हज़ारो तो सिक्युरिटी वाले ही लड़के होंगे, फिर उसके खास मेहमानो की सेवा के लिए अलग लड़के, खाना बनाने के लिए अलग.. इतने ढेर सरे लोग इतने छोटे से टापू में रहते कहाँ होंगे..?
वैसे मजा तो बहुत आता होगा, बिलकुल किसी पिकनिक की तरह.. है न..?”

“मानव का कहना है, बहुत ज़्यादा लोग जमा कर लेने से वो लोग हमारे लिए खतरा बन सकते हैं.. इसलिए उसकी टीम में ऐसे चुने हुए लोग हैं, जो सिक्योरिटी के लिए भी काम करते हैं, और साथ ही उसके मेहमानो का खास ख्याल भी.. ।
होंगे लगभग चालीस पचास लोग तो होंगे ही.. क्यों गुरु ?”

“हाँ..।” गुरु छोटा सा हुंकारा भर कर चुप हो गया..

“क्या हुआ? तुम ऐसे गुमसुम से क्यों बैठे हो?”
गुरु ने भदौरिया की तरफ देखा..

“बहुत जोर की भूख लगी है.. मुझे तो बस मानव का वो खानसामा याद आ रहा है।
क्य़ा गज़ब की यखनी बनाता है.. ।”

भदौरिया के चेहरे पर मुस्कान तिर गयी..

“क्या हुआ मुस्कुरा क्यों रहे हो? पता नहीं मानव उसे कहाँ से पकड़ कर लाया है। लेकिन खाना वो ज़बरदस्त बनाता है.. इंडियन चायनीज जैपनीज, अरबी सभी तरह का खाना ज़बरदस्त होता है उसका.. वो पिछली बार उसने मलाई कोफ्ते के साथ जो किसमिस डाल कर पुलाव बनाया था, उफ़ मैं तो उसकी डिशेज़ के स्वाद ही नहीं भूल पाता हूँ.. ।”

गुरु की बात ख़त्म होने पर भदौरिया बोलने लगा..

“उस लड़के को मानव के पास मैंने ही लाकर दिया था.. उसके ऑर्गन्स चाहिए थे।
जवान लड़का था, कुछ विजय अजय जैसा नाम था।
मुझे इसलिए याद है, क्यूंकि गजब मेहनती लड़का था..
और दिमाग का भी एकदम तेज़ था।
उसका तीन बार खून निकाला जा चुका था… उसकी किडनी की बात कहीं चल रही थी।
उसी समय जब डॉक्टर उसका परिक्षण कर रहे थे, मानव और मैं वहीँ बैठे थे।
मानव के सूप पीने का वक्त था। एक दूसरा लड़का सूप लेकर आया, लेकिन मानव को वो बिलकुल पसंद  नहीं आया और उसने सारा सूप फेंक दिया..।
बेड पर लेटे हुए ही विजय ने पूछ लिया क्या सूप अच्छा नहीं बना..?”

मानव कुछ बोलता उसके पहले वो बोल पड़ा कि एक बार उसके हाथ का बना सूप वो पीकर देखे..
मानव जाने किस झोंक में हाँ कह गया और इस तरह विजय हमारी रसोई में पहुँच गया..
बस वो दिन और आज का दिन है..
मानव ने उसके बनाये खाने से खुश होकर उसकी किडनी बेचने का प्लान केंसल कर दिया..।
अब विजय ही उस किचन का खानसामा है।

शौर्य ने विक्रम की तरफ देखा..
विक्रम के चेहरे पर हल्के राहत के भाव चले आये थे…

वैसे इस बात की पूरी गारंटी तो नहीं थी लेकिन जिस ढंग से भदौरिया उस शेफ विजय की खासियत बता रहा था वो विक्रम का खोया भाई विजय ही हो सकता था..

क्रमशः

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Jagriti
Jagriti
13 hours ago

रोमांचक भाग

Radhika Porwal
Radhika Porwal
3 days ago

Wow superb
Welcome back

Ashok Garg
Ashok Garg
5 days ago

Very nice part of the story and very interesting and very interesting and very interesting and very good 💯😊😊😊😊😊😊😊😊💯💯😊😊😊😊💯😊😊😊💯💯😊😊😊💯 waiting for the next

Veena
Veena
6 days ago

Very interesting and wonderful part

Sofiya Shaikh
Sofiya Shaikh
14 days ago

Nice part 👌👌👌👌👌👌

Ritu Jain
Ritu Jain
14 days ago

Dii kitne din laga diye din mein ek baar check karti thi kya hua hai aapko regular Kyu nhi aa rhi ho ab toh aapse baat bhi nhi hoti. Very nice part.

Raniya Memon
Raniya Memon
17 days ago

Bahot time ke baad part mila…bahot accha laga….can’t wait for more parts

Chanda Thakur
Chanda Thakur
17 days ago

Insaan se bada rakshas koi nahi apne manoranjan ke liye dusre insaan ko is tarah takleef dekar uska khoon bahakar khushi mehsoos karna bahut jyada khatarnak hai. Waiting for next part Mam 🙏🌹🙏

Jyoti
Jyoti
17 days ago

Very nyc part 👌
Thank you for this part

Geeta sidpara
Geeta sidpara
17 days ago

Very nice part 👌👌