
जीवनसाथी -3 भाग 155
अब तक आपने पढ़ा…
राजकुमार हर्षवर्धन और मीठी की शादी की तैयारी महल में शुरू हो चुकी है! हर्ष की मां रूपा के मन में बार-बार यह ख्याल शंका उत्पन्न कर रहा है कि, दोनों की कुंडलियाँ सही मिली नहीं है। बावजूद घर के बाकी लोगों की बात मानकर वह भी तैयारी में लगी हुई है..।
हालांकि फुफू साहब बीच-बीच में रूपा के मन में कोई ना कोई खटका डाले ही रहती है..
दूसरी तरफ शौर्य अपने व्यापारिक कार्यों के कारण लंदन जो गया तो अब तक वापस नहीं लौटा है, घर में शादी की तैयारी के बीच बांसुरी को अचानक शौर्य की बहुत याद आती है, और वह अपने राजा साहब को मना कर उन्हें साथ लिए लंदन चली जाती है। जहां इत्तेफाक से उसकी मुलाकात कली और उसके परिवार से होती है। कली और वासुकी से मिलने पर बांसुरी एक बार फिर भावुक हो जाती है।
उसके मन में तो बस कली के लिए प्यार और वासुकी के लिए ढेर सारा सम्मान है, लेकिन वह नहीं जानती कि उसे देखकर वासुकी के मन में क्या उथलपुथल मचती है। वासुकी से अनुनय कर वह कली को अपने साथ हर्ष की शादी में जाने के लिए मना लेती है। हर्ष की शादी का निमंत्रण पूरे परिवार को देकर वह अपने साथ कली और सारिका को लेकर अपने घर चली आती है।
उन लोगों के जाते ही वासुकी एक बार फिर बेहद अकेला रह जाता है। अपने घर पर अपने सामने कली को देख शौर्य ठगा सा खड़ा रह जाता है..।
वह पूरी कोशिश करता है कि कली के साथ उसका आमना सामना न हो..
कली के मन में बार-बार यह विचार चक्कर काटता है कि आखिर वह क्या वजह है, जिसके कारण शौर्य उससे दूरी बना रहा है। क्योंकि जब इसके पहले आखिरी बार वह दोनों मिले थे, उस वक्त उन दोनों के बीच प्यार भरी बातें शुरू होने ही वाली थी कि शौर्य अचानक गायब हो गया। और उसके लौटने के बाद से वह काफी बदला बदला सा है।
अब वह कली से ढंग से बात तक नहीं करता। कली मौके की तलाश में है कि किसी तरह वह शौर्य से एक बार उसके मन की बात पूछ सके।
यह सभी लोग लंदन से भारत के लिए प्रस्थान कर जाते हैं ।
यहां भारत में उतरते ही राजा साहब के लोग उनका स्वागत करने पहुंच चुके होते हैं। गाड़ियों का काफिला एक बार फिर विजय राघवगढ़ की सीमा की तरफ बढ़ चला है। विजय राघवगढ़ के निवासी अपने राजा साहब और रानी बांसुरी के लिए पलक पांवड़े बिछाए आधी रात से ही इंतजार में बैठे होते हैं।
ढेर सारी पुष्प वर्षा और करतल ध्वनि के बीच वह लोग अपनी रियासत के लोगों से मिलते हुए उन्हें उपहार देते हुए आगे बढ़ते हैं।
अब आगे…
महल में कली और सारिका को मेहमानों वाला खास कमरा दिया गया था..
वैसे भी महल में अनगिनत कमरे थे, कई ऐसे भी थे जो जाने कब से खोले ही नहीं गए थे।कभी साल छह महीने में एक बार खोल कर उनकी सफाई कर उन्हें बंद कर दिया जाता था..।
ये कमरे उन पूर्वजों की याद में बंद रखें जाते थे, जो कभी इस महल का हिस्सा थे और अब सिर्फ यादो में रह गए थे… ।
रियासत के पास से महानदी बहा करती थी ! रियासत के पास बंजारी गांव था जहाँ महानदी में एक दूसरी नदी का जल आकर मिलता था.. ।
महल में मनाये जाने वाले उत्सव त्योहारों में यही का जल लाकर पूरे महल में सींचा जाता था…
महल में पूरे जोर शोर से हर्ष की शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थी..
कली को बांसुरी बिलकुल भी बाहर का महसूस नहीं होने दे रही थी.. ।
कभी बांसुरी भी इस महल में बाहर से आकर रह चुकी थी, इसलिए उसे अनुभव था कि यहाँ कैसा लगता है..? कली की मदद के लिए एक परिचारिका नियुक्त थी जिसका नाम गजरा था !
गजरा की उम्र कम थी। अभी उसका ब्याह भी नहीं हुआ था। वो सारा वक्त यहाँ से वहां डोलती फिरती थी। और महल की सारी बातें किसी गुप्त रहस्य सी किसी न किसी को बताने को आतुर रहा करती थी.. अब उसे कली मिल गयी थी..।
कली जब पहली बार गजरा से मिली तो कली संकुचित हो उठी..।
“मैं अपना काम कर लुंगी.. ऐसी कोई खास मदद की ज़रूरत नहीं है मुझे।”
“लेकिन हमें तो महारानी हुकुम ने भेजा है, हम तो यहाँ से अब नहीं जायेंगे..।”
“लेकिन यहाँ सारा वक्त करोगी क्या?”
“आप दोनों की सेवा टहल।”
“जैसे ?”
“जैसे आपके पैर गर्म पानी से धो कर साफ़ कर देंगे..। आपके बालों को धो देंगे,उन्हें सूखा कर सुलझा कर हेयर स्टाइल बना देंगे।आपको कपड़े पहनाने में मदद कर देंगे, तैयार कर देंगे..।”
“ओह्ह बाबा मैं कपड़े खुद पहन लुंगी..।”
“यहाँ आपके ये जींस टॉप नहीं चलेंगे सरकार..।
आपके लिए विशेष कपड़े मंगवाए गए है, और उन्हें पहनाने में हमें आपकी मदद करनी होगी..।”
कली ने कुछ नहीं कहा..
सारिका कमरे में इधर से उधर डोलती हर एक वस्तु को उलट पलट कर देख रही थी ।
उसे इस वक्त चाय की बेहद ज़रूरत महसूस हो रही थी..
“आप कुछ ढूंढ रही है ?” गजरा ने पूछा
“एक बात बताओ गजरा, यहाँ तो पुरे महल को सुरक्षा की बेहद ज़रूरत है, तो क्या कमरों में भी सीसीटीवी कैमरा लगा रखा है इन्होने ?”
“अरे नहीं. कमरों में नहीं है। पर बाहर कॉरिडोर में है..।”
“अच्छा! और अगर चाय पीना हो तो क्या करे..? ये केतली में पानी उबाल कर डिप डिप वाली चाय में मुझे मजा नहीं आता ।”
गजरा के चेहरे पर विजय उल्लास की छटा निखर गयी..
“इसीलिए तो हम आपकी सेवा में है।
अभी बना देते है।”
उस बड़े से कमरे में एक रसोई लगी हुई थी। ओपन प्लेटफॉर्म था, जहाँ एक चूल्हा, छोटा फ्रिज और एक खाने की वस्तुओं की अलमारी थी…।
ये रसोई लिविंग रूम में ही थी।
लिविंग रूम से बैडरूम एक कांच के अपारदर्शी दरवाजे से अलग होता था।
महल के बाकी पररम्परिक कमरों की तुलना में ये ज़रा नए किस्म का कमरा बनवाया गया था।
गजरा और सारिका चाय बनाने में लगी और कली छिटक कर बालकनी में चली आई..
बालकनी में एक किनारे पर तिकोना सा बड़ा गद्दा पड़ा था जिस पर ढेर सारे कुशन बिछे थे..
वो उसी में बैठ गयी।
उसका मन शौर्य पर टिका हुआ था..
लेकिन उससे बात करने का कोई बहाना नहीं मिल पा रहा था, वो कुछ सोचते हुए सामने के बगीचे को बड़े ध्यान से देख रही थी..
उसे नहीं मालूम था कि अपने कमरे की खिड़की पर बैठा शौर्य उसे ही देख रहा है..
कुछ देर में गजरा उसके लिए चाय लिये बालकनी में चली आई।
चाय के साथ ही एक खूबसूरत रेशमी लिफाफे में लिपटा आमंत्रण उसने कली के सामने रख दिया।
अगले दिन से शुरू होने वाले शाही विवाहोत्सव के पहले आज की शाम महल के राजशाही बच्चे अपने हिसाब से कोई पार्टी करने वाले थे !
इस पार्टी का सारा दारोमदार धनुष और परी ने उठाया हुआ था !
कार्ड खोल कर कली पढ़ने लगी..
उस कार्ड में ड्रेस कोड के बारे में भी लिखा गया था..
“मेरे पास तो ये ड्रेस है ही नहीं ? अब मैं क्या करूँ ?”
वो परेशान सी हो उठी
राजमहल के विचित्र लोग और विचित्र नियम।
वो अभी सोच ही रही थी कि क्या करूँ, तभी उनके कमरे में दरवाजे पर दस्तक दे कर दो सहायिकाएं अंदर चली आई।
वो कली और सारिका के लिए शाम की पार्टी के लिए कपड़े और गहने लेकर आई थी।
कली के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई..
ये महल के लोग पहले खुद ही समस्या खड़ी करते हैं और फिर समाधान भी दे देते हैं।
मुस्कुरा कर उसने अपने कपड़े खोल कर देखे।
बहुत हलके नीले रंग का मोतियों की लड़ से सजा पार्टी गाउन था.. उसके साथ मोतियों और नग जड़ी बहुत सुंदर सी दुलड़ी थी। कान में पहनने के लिए लम्बी लटकन थी ! और साथ ही थी चांदी के रंग के ऊंची सी सेंडल!
सारिका कली के पास चली आई।
“हमारा तो मन नहीं है कहीं जाने का, बहुत थकान सी लग रही है। शाम में तुम ही चली जाना कली ।”
“क्यों.. ? आप भी चलो ना।”
“नहीं!” सारिका अपनी चाय के प्याले में थोड़ी और चाय डालते हुए बोल उठी..
“जब तक दूध चीनी के साथ पत्ती अच्छे से न खौल न जाए, चाय में मजा नहीं आता। हमें ये तुम्हारे दर्श अंकल वाली चाय बिलकुल पसंद नहीं आती… इस महल के लायक तो वो ही दोनों है।
एक खुद राजा है, दूसरे के शौक और आदते राजाओं वाली।”
कली हल्के से मुस्कुरा कर रह गयी।
शाम उतर आई थी..
महल के पिछले बगीचे में तैयारियां पूरी हो चुकी थी.. अब वहाँ खाने के स्टॉल सज रहे थे।
एक एक कर महल के राजकुमार राजकुमारियां और उनके दोस्त वहाँ पहुँचने लगे थे।
कली को बुलाने के लिये भी एक सहायिका आ गयी . कली उसके साथ वहाँ चली आई।
कली से सभी परिचित थे,सभी उसकी अगुआई के लिए चले आये।
परी ने उसका हाथ थाम लिया।
“बड़े दिनों बाद मुलाकात हुई.. कैसी हो कली ?”
कली मुस्कुरा उठी।
” तुम सब कैसे हो?”
” हम भी ठीक हैं, बहुत अच्छा हुआ जो तुम हर्ष भाई की शादी के लिए चली आई। हम भी सोच रहे थे कि तुम भी आ जाती, बहुत अच्छा होता।”
कली इधर-उधर देख रही थी। उसकी आंखें देखकर परी ने अपना सवाल पूछ लिया।
” मीठी को ढूंढ रही हो? वह उस तरफ है।”
कली क्या कहती कि वह शौर्य को ढूंढ रही है। कली ने धीरे से हामी ही भरी और मीठी को बधाई देने उस तरफ बढ़ गई। एक बड़ी सी टेबल पर मीठी हर्ष और उनके कुछ दोस्त बैठे हुए थे।
इस वक्त राजपरिवार के बाकी लोग कहीं और व्यस्त थे।
यहाँ मीठी के कुछ कॉलेज की सहेलियां थी, हर्ष के दोस्त थे… इनमें से किसी को भी कली नहीं जानती थी..।
वो सकुचाते हुए पहुंची और उसे देखते ही मीठी ने आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लिया..
मीठी उसका परिचय अपने दोस्तों से करवाने लगी। लेकिन कली का ध्यान ही नहीं था। वो सबकी तरफ देख कर मुस्कुरा तो रही थी, लेकिन मीठी के बताये कोई नाम उसके जहन में चढ़ नहीं रहे थे।
उसका ध्यान अब भी शौर्य को ढूंढने में लगा था
तभी दूर परदे के पास खड़े एक लड़के की तरफ कली की नजर पड़ गयी।
उसे लगा शौर्य खड़ा है।
कली ने मीठी और हर्ष को बधाई दी और अभी वापस आती हूँ कह कर उस और बढ़ गयी।
लम्बा चौड़ा सा बगीचा ढेर सारे रंगीन पर्दो से सजाया गया था..
शामियाने में रंग बिरंगे सितारे झूम रहे थे, किनारे कुछ कुछ दूरी पर गैस के बबल्स छोड़ने वाली मशीने लगी थी, जो थोड़ी थोड़ी देर में खुशबूदार बबल्स छोड़ रही थी।
एक तरफ रंगीन धुँए छोड़ने वाली मशीने लगी थी…
बहुत खूबसूरत माहौल हो रहा था, पूरा ही वातावरण खुशबु से लिपटी परी कथा सा लग रहा था..
इधर उधर लोगो की भीड़ बढ़ने लगी थी..
वो बचते बचाते जिस तरफ शौर्य खड़ा था उधर बढ़ती चली गयी..
वो परदे तक पहुंची कि वो लड़का पलटा और कली को देख मुस्कुरा कर दूसरी तरफ बढ़ गया।
वो शौर्य नहीं था…
कली अपनी झेंप मिटाने परदे के पास तक कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गयी.. वो और एक कदम बढाती तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ कर उसे खीँच लिया..
“कहाँ चली जा रही हो.. परदे के पीछे पॉन्ड है.. गिर जाओगी !”
शौर्य ने उसे एक झटके से खीँच लिया..
कली एकदम से ठिठक कर खड़ी रह गयी..
“ओह्ह सॉरी ।”
“मुझे सॉरी बोलने की क्या ज़रूरत.. तुम ऐसे बिना देखे आगे बढ़ क्यों रही थी..?
तुम्हे दिखा नहीं आगे पानी है..।
इतना झीना सा तो पर्दा है।”
कली एकदम से कुछ नहीं कह पायी..
क्रमशः

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
बहुत खूबसूरत भाग 😊👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻❤️❤️❤️💞💞💞
Nice part
आनन्ददायक थोड़ा जल्दी पोस्ट किया कीजिये
Very beautiful
लेखिका महोदया, कहते हैं कि ओस चाटे प्यास नहीं बुझती, सो प्यास बुझी नहीं, पिछला 154 वां भाग 8 अगस्त को डाला था और 27 एक्तूबर को अब 155 वां भाग डाला है। पूरे 80 दिनों बाद और वो भी छोटा सा। 😏😒
Beautiful ❤️❤️❤️❤️ ek arse baad ye vanvaas pura hua hai…..pta nhi kyo jldi parts nhi aa rhe he……kitni hi baar dekh kar nirash hokr lorna pdta he ki na jane kb part aayega
एक बार फिर राजा और बाँसुरी की शादी की यादे ताजी हो गई
कितनी मुश्किल है ना अपर्णा
कहानी अगली पीढ़ी की आ गई
पर हर जगह झलक राजा और बाँसुरी की दिखती है
अब जब बहुरिया महल पहुँच गई तो क्या नेहा से मिल पाएगी
Kitne time baad pari shourya se milwaya dii aap kaha ho kaisi ho . Very nice part
Wow superb episode