अतिथि-73

अतिथि -73

    संगीत सम्पन्न हो चुका था ! सभी लोग खाने पीने में लगे थे ! माधव और डिंकी के ऑफिस के लोग भी शादी में बुलाये गए थे !

  डिंकी के साथ काम करने वाले तो बड़े आश्चर्य में थे कि इतनी छोटी सी लड़की शादी करने के लिए कैसे तैयार हो गयी..?
आज से कुछ महीने पहले अगर डिंकी से शादी के लिए कहा जाता तो वो भी तमक कर मना ही कर देती लेकिन मुहब्बत वाकई अंधी होती है !

    अब तो डिंकी माधव के साथ रहते हुए ही अपने सपने पूरे करना चाहती थी !
अपनी बची हुई पढाई, अपना कैरियर, सब कुछ उसने माधव के ही नाम कर दिया था !

   स्टेज के ठीक सामने लगे सोफे पर डिंकी और माधव बैठे थे! डिंकी की सहेलियां भी साथ थी !
   उसी समय डिंकी की बॉस रूबी मैडम उससे मिलने चली आई !
   रूबी मैडम ने पूरे ऑफिस को कह रखा था कि जितने भी लोग पहुँच सके वो बिना कोई बहाना किये डिंकी को अपना आशीर्वाद देने ज़रूर पहुंचे !

   रूबी स्वयं अपनी बहन के साथ आई थी ! डिंकी से मिल कर उन्होंने उसे और माधव को ढेर सारी बधाइयाँ दी और उन्हीं के साथ वहाँ बैठ गयी !

    योगिता ने रूबी से मिल कर पहले ही माफ़ी मांग ली थी, और अब वो वापस ऑफिस जाने लगी थी.. रूबी ने उसे भी विशेष रूप से डिंकी की शादी में आने के लिए कहा था..
  योगिता रूबी का कहा टाल नहीं सकती थी, इसलिए उसे डिंकी की शादी में आना ही था। लेकिन इसके लिए दीपक से बात करने में उसकी जान हलक में फंस रही थी..।

दीपक ने योगिता और रूबी की फोन पर की बातचीत सुन ली थी, और इसलिए उसने खुद ही योगिता से कह दिया था कि वो शाम को तैयार रहे वो उसे शादी में ले चलेगा !

दीपक ने बेटी को उसकी सहेली के घर छोड़ा और योगिता को साथ लिए कानपुर के लिए निकल गया था। कार दीपक ही चला रहा था।

पहले उसे कार चलाने में ज़रा दिक्कत का अनुभव होता था..।
लखनऊ में वैसे भी एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध थे !
   वो दुकान अपनी बाइक पर जाया करता था, कभी बाइक ख़राब होने पर बस या कैब ले लिया करता था.. लेकिन आज कानपुर जाना था।
  
  योगिता ने सोचा था दीपक कैब बुक करेगा, लेकिन दीपक ने गैराज से अपनी गाडी निकाल ली थी।
  
   योगिता से हुई भूल के बाद से दीपक के स्वभाव में बहुत ज्यादा परिवर्तन हो गया था..।
जो आदमी पहले हर बात पर हँसता मुस्कुरता रहता था, अब उसके होंठो पर एक चुप सी लग गयी थी।
पहले जो बात बेबात योगिता को छेड़ता रहता था, अब काम की बातें भी बोलने में कतराने लगा था..।

पहले कोई रविवार आये दीपक को क्या खाना है कि फरमाइश चली आती थी। अब योगिता जो बना के धर दे उसे बाप बेटी बिना कुछ बोले खा लेते थे।
    कई बार बेटी कुछ ऑर्डर कर के मंगवा लेती थी, और वो दोनों योगिता का हिस्सा अलग कर खुद खा लेते थे।

योगिता अब इन बातो से खीझने लगी थी, लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं बचा था।

आज उसे लगा इतनी लॉन्ग ड्राइव पर उसे दीपक से बात करने का मौका मिल जायेगा, इसलिए वो खुश थी..
दीपक ने गाड़ी चलाना शुरू किया और साथ ही गाने बजा लिए। कुछ देर उन गानो को सुनने के बाद योगिता ने गाने बंद कर दिए, वो दीपक से बात करना चाहती थी।

“क्या हुआ ? गाने क्यों बंद कर दिए ?”

दीपक के इस सवाल का योगिता कोई जवाब नहीं दे पायी..

“वो बस ज़रा सर में दर्द हो रहा था !”

“हम्म !”

इसके बाद न दीपक ने कुछ कहा न योगिता ने.. योगिता ने गले को ज़रा साफ़ कर बोलना चाहा ही था कि एक झटके से गाडी रुकी और दीपक उतर कर कहीं चला गया..
कुछ देर बाद वो एक दवा का पत्ता और पानी की बोतल साथ लिए लौटा..

“लो सर दर्द की दावा है खा लो, अभी लगभग ड़ेढ़ घंटे का रास्ता बाकी है। सरदर्द के साथ इतना ट्रेवल कर नहीं पाओगी !”

योगिता ने दवा ले ली, और अपनी तरफ के दरवाजे के हैंडल में डाल दिया..

“रखने के लिए नहीं, खाने के लिए दी है दवा !”

दीपक ने टोक दिया !
असल में योगिता को सर दर्द तो था नहीं, वो तो बस बात शुरू करने का बहाना ढूँढ रही थी।
लेकिन अब वापस अपनी बात के जाल में फंस गयी थी।
उसने बिना सरदर्द के भी गोली निकाली और फांक ली। इस सब में उसका ध्यान इस बात पर गया ही नहीं कि दीपक ने अपने कान में इअरपॉड्स लगा लिए थे !

योगिता को अंदर ही अंदर इस बात की बड़ी तसल्ली हो रही थी कि उसके लिए उसका पति अब भी इतना सोच विचार कर रहा।
उसकी तकलीफ से परेशान हो रहा।
उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई।
उसने धीरे से अपना हाथ दीपक के हाथ पर धर दिया..

“गाडी चला रहा हूँ, तुम हाथ पकड़ लोगी तो चलाऊंगा कैसे ?”

एकदम साफ सपाट शब्दों में दीपक ने अपना हाथ झटक कर अलग किया और गाडी चलाने लगा..

योगिता ने खुद को संयत किया और अपने किये पर अफ़सोस जताती हुई दीपक को सफाई देती रही। लेकिन दीपक तो गाडी में कुछ सुनने में व्यस्त था।

जब उसकी तरफ से किसी तरह का कोई वक्तव्य नहीं आया, तब योगिता खुद ही चुप होकर बैठ गयी..

उन्नाव में दीपक ने चाय पीने के लिए गाडी रोक दी।
गाड़ी से उतर कर उसने योगिता की तरफ देखा..

“चाय पिओगी तुम ?”

“नहीं, मुझे तो ज़रूरत नही लग रही !” उसे लगा दीपक इसरार कर के चाय ले आएगा, लेकिन दीपक ने सिर्फ गर्दन हिलायी और अपने कान में लगा रखें इअरपॉड्स निकाल कर सीट पर रख कर खुद चाय पीने चला गया..

“तो ये इतनी देर से मेरी बात नहीं सुन रहे थे, गानों मे लगे थे..?
इन्हे कब से गानों का शौक लग गया ?”
 
योगिता ने धीरे से आवाज़ बढ़ाई, लेकिन वहाँ गाने नहीं बज रहे थे, किसी लेखिका की कहानी का पॉडकास्ट चल रहा था, जिसे लेखिका खुद अपनी आवाज़ में सुना रही थी।

आवाज़ बेहद दिलकश थी, कहानी सुनाने का तरीका भी निराला खूबसूरत था।

आवाज़ सुन कर योगिता का तनबदन सुलग गया..

“अच्छा तो आजकल किस्से कहानियां सुनी जा रही हैं.. ! लेकिन ये लेखिका है कौन ?”

योगिता ने उस लेखिका का नाम तलाशा और अपने मोबाइल पर उसके बारे में जानकारी ढूंढने लगी..

उस लेखिका का फ्रेन्डबुक पर अच्छा खासा फैनबेस था, लाखों लोग उसे सुना करते थे।

योगिता ने उसके बारे में और छानबीन शुरू कर दी..
उसकी कुछ तस्वीरें भी मौजूद थी, लेकिन तस्वीरों में उसका चेहरा उतना स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन ये मालूम चल रहा था कि उसकी उम्र तीस बत्तीस के आसपास की होगी।

लोगों ने भर भर कर उसकी कहानियों की तारीफ लिखी थी।
उन्हें पढ़ते वक्त उसकी निगाह दीपक के नाम पर अटक कर रह गयी..

अच्छा तो उसका पति आजकल दुकान में बैठा इस लेखिका को सुन रहा है, और उसकी भर भर कर तारीफ भी कर रहा है।

योगिता के लिए ये सर्वथा नवीन अनुभव था।

आज तलक दीपक ने योगिता के अलावा किसी को भर नजर देखा भी नहीं था, और आज ये किसी और औरत को सुन और सराह रहा था।

लोगो ने भर भर कर अपनी पसंदीदा लेखिका को प्रशंसाओ का अर्ध्य अर्पित किया था।
उन्ही किन्ही पंक्तियों के बीच योगिता की नजर उन शब्दों पर पड़ी और वो चौंक गयी..

” ईश्वर की कैसी मर्जी है कि, जो इस सुंदर संसार को अपनी आँखों से देख नहीं सकती वो इतनी सुंदर कहानियां सुना लेती है.. !”

  तो क्या ये लेखिका दृष्टिहीन है ?

ये सोच कर योगिता का दिल धक से रह गया !
  जब भी पुरुष किसी स्त्री की प्रतिभा या सुंदरता बस से प्रभावित होता है, तब वह उसका सम्मान करता है। लेकिन जब पुरुष के प्रभावित होने में उस स्त्री के प्रति सांत्वना और सहानुभूति भी घुल जाती है, तब ये  संयोजन कभी उस पुरुष को आसक्ति के गहरे कुंए में धकेल दे तो कोई अचरज की बात नहीं !

क्रमशः

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Manu Verma
Manu Verma
6 months ago

योगिता ने कैसे सोच लिया इतनी बड़ी गलती करके इतनी आसानी से सब सही हो जायगा, दीपक के प्यार और विश्वास को तोड़ा है। फिर भी क्या पता ये सफर फिर से ज़िन्दगी की अच्छी शुरुआत हो।

ये लेखिका कौन 🤔पहले तो मुझे आप ही लगी फिर दृष्टिहीन पढ़कर 🤦🏻‍♀️🙏🏻।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।

Gouri sarwa
Gouri sarwa
6 months ago

Behetarreen 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐

Geeta Prasad
Geeta Prasad
6 months ago

Oh ab Yogita ko jalan ho rhi h ki Deepak kisi or ka Fan ho rha h…kitni chhoti soch h Yogita ki ….aakhir jaise khud h waise hi to sochegi ….

Nisha
Nisha
6 months ago

Bahut hi achhi lagi 👌👌👌👌

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
6 months ago

Bahut sundar

Reena Kumari
Reena Kumari
6 months ago

Bhut Acha part tha.

Jagriti
Jagriti
6 months ago

Nice chapter waiting for next episode

Hetal shah
Hetal shah
6 months ago

👌👍good part.Madhav,Dinki ki shadi mae unke office wale bhi Invite kiye gaye hain.Rubi mam bhi aayi.dono ko dhero aashirwad diye.Yogita ko bhi shadi mae aane kaha tha Rubi mam ne.usse usaka husband Dipak gadi mae le jaa raha hai. Yogita ko baat karani thi par wo tohbkuchh sun he nahi raha.kano mae earphone laga kar kisi lekhika ki story sun raha tha.usane story par tarife bhi ki huyi thi bhar bhar ke.Yogita ko jalan huyi.kyon madam kaisa laga ?? Dipak ko kaisa feel huaa hoga aapane toh sari huden par ki thi Bhushan ke sath…..

Veena
Veena
6 months ago

Interesting part

Vandana attri
Vandana attri
6 months ago

Beautiful part 🥰🥰♥️