अतिथि-70

अतिथि -70

   अलग अलग गाड़ियों पर सवार सभी लोग कानपुर  के लिए निकल गए..।

डिंकी के बड़े पापा की गाड़ी बड़ी थी, उसी में डिंकी का सारा परिवार आ गया था। पीछे वैसी ही छह सात बड़ी गाड़ियां थी, जिनमे डिंकी के मामा घर का  परिवार और बाकी रिश्तेदार मौजूद थे…।

एक छोटी बस भी लगी थी, जिसमे बाकी परिजन थे, और इस प्रकार शादी के लिए सारा तामझाम समेटे वो लोग निकल गए..।

डिंकी ने पलट कर अपने घर को देखा और उसके आंसू निकल आये..।

शादी के बाद कितना भी वो इसी शहर में रह ले, लेकिन अब ये घर तो हमेशा हमेशा के लिए छूट ही गया न.. ।

सभी बड़े उत्साह में थे..।
डिंकी की दोनों सहेलियां बाकियों का लिहाज कर फ़िलहाल डिंकी से छेड़छाड़ नहीं कर रही थी, लेकिन उनके इशारे डिंकी को बार बार परेशान किये दे रहे थे..

बस में मौजूद लोगो में अलग ही उत्साह था..
डिंकी सुषमा और गरिमा भी बस में ही थी ! सभी बड़ो को गाड़ियों में विदा कर घर के ज्यादातर बच्चे ही बस में मौजूद थे..
वो सभी लोग आपस में गाते बजाते चल रहे थे…
कभी कोई गाना पहचानने की एक्टिंग करता कभी किसी मूवी की…!

उनमे से कुछ लोग अपने हिसाब से गाना बजवाते भी जा रहे थे !

उनकी गाडी में एक गाना चल रहा था, पता नहीं लेकिन उस गीत के बोल सुन डिंकी को और भी ज़ोर से रुलाई आ रही थी.. ।

नैनो के घाट ले जा नैनो की नैय्या,
पतवार तू है मेरी, तू खेवैया
जाना है पार तेरे, तू ही भंवर है
पहुँचेगी पार कैसे नाज़ुक सी नैय्या…।

उसने आंखें मूंद ली और खिड़की से सर टेके बाहर देखती हुई खो सी गयी… कुछ देर में उसकी आँख लग गयी..

उसकी आँख खुली तब तक में वो लोग विवाह भवन में पहुँच गए !

बाहर के मुख्य द्वार पर पर ही माधव के पिता अपने साले साहब और कुछ एक करीबी मित्रों के साथ खड़े थे..!

वो लोग डिंकी के परिवार का ही इंतज़ार कर रहे थे..
एक एक कर गाडी से लोग उतरते गए और उन लोगो के मुख्य द्वार पहुँचने तक में लड़के वालों की तरफ जमावड़ा सा लग गया..

वहाँ के पुरुष वधु पक्ष से आये पुरुषों के स्वागत में लग गए तो औरतें औरतों के..।
सभी को फूल मालाएं पहना कर, माथे पर तिलक लगा कर ऊपर गुलाब जल छिड़क कर अंदर बुलाया जा रहा था..।

डिंकी को ये सब देख बड़ी शर्म सी लग रही थी..।
लेकिन साथ ही उसकी ऑंखें माधव को भी ढूंढ रही थी। तभी एक नवयुवक उसके सामने एक बड़ा सा गुलाबों का गुलदस्ता थामे चला आया..।
एकदम से अपने सामने गुलदस्ता देख डिंकी जरा घबरा सी गयी..

“अरे डरिये मत.. आपका स्वागत करने के लिए दूल्हे राजा ने भेजा है हमें.. !”

डिंकी हल्के से मुस्कुरा उठी..

“दूल्हे राजा खुद नहीं आये ?”

डिंकी ने ये सवाल पूछा ही था कि ज़ोर से ढोल नगाड़ो की आवाज आने लगी..

“तेनु लेके मैं जावंगा दिल दे के मैं जावंगा..”

गाने की धुन पर सामने से सधे कदमों से चलता हुआ माधव, डिंकी और उसके परिवार की तरफ बढ़ा चला आया…।
उसने आगे बढ़ कर सभी बड़ों का आशीर्वाद लिया और डिंकी की तरफ देख भर के एक तरफ खड़ा हो गया….

माधव को देख डिंकी के चेहरे पर राहत नजर आने लगी..

माधव और उसके दोस्त उन लोगो को साथ लिए उस  तरफ निकल गए जिधर लड़की वालो के रुकने का इंतज़ाम किया गया था..।

एक ऊंची बिल्डिंग के दूसरे माले पर लड़की वालो के रुकने का इंतज़ाम था.. ।
उसी के तीसरे माले पर तिलक का कार्यकर्म होना था।

नीचे बड़े से गार्डन में शादी और रिसेप्शन का कार्यक्रम होना था, और उसी बिल्डिंग के सामने मौजूद बिल्डिंग के तीनो फ्लोर पर लड़के वाले रुके हुए थे..।
सभी लोगो के लिए अलग अलग कमरों की व्यवस्था थी..
सभी अपने अपने कमरों में पहुँच कर खुश थे..।
डिंकी की माँ को डिंकी के गहने जेवर और साथ लाये कैश को कहाँ रखूं की समस्या सता रही थी..।

किस कमरे में सामन रखा जाए, जहाँ रख कर वो निश्चिन्त होकर अपने बाकी कामो में ध्यान लगा सके..।
आज वो अपनी बड़ी बहन विम्मी को रह रह के याद कर रही थी..
पिछले कुछ दिनों में इतना सब हो गया कि अब वो क्या कहती और कैसे कहती? फिर भी उसने शादी का न्योता बड़े प्यार से विमला को दिया था, लेकिन विम्मो ने फ़ोन पर उससे ढंग से बात तक नहीं की..।

यहाँ तक कि वो और विनोद जब कार्ड लेकर उसके घर गए, तब भी उसका मुहं बना ही हुआ था.. ।
  मंजरी जरूर काफी हद तक सामान्य नजर आ रही थी..।
हालाँकि शादी में आने के नाम पर वो भी मुहं पर बहाना बना कर निकल गयी थी, लेकिन अपनी बहन की तुलना में उसका ये कड़वापन सुलोचना को उतना खला नहीं था।

वो अपनी जेठानी के साथ बैठी पूजन सामग्री की लिस्ट मिला रही थी..

“पांच नारियल, सुपारी, हल्दी की गांठ, जनेऊ, सिंगरौटा, पीला सिन्दूर, झालर..
वो अभी एक एक चीज याद कर के मिला मिला कर निकालती जा रही थी, कि तभी किसी की आवाज़ उसे पल भर के लिए स्तब्ध कर गयी..

“नया कलसा.. ? वो कौन याद से लाएगा ?”

“हाय माँ, मैं तो कलसा सच में भूल गयी..।”

“हुंह बचपन से यही तो करती आ रही हो.. कभी ये भूल गयी कभी वो भूल गयी..।”

अपनी बहन की आवाज़ पहचान कर सुलोचना आश्चर्य से पलटी, और सामने खड़ी विम्मो को देख पल भर के लिए बिना पलक झपकाए देखती ही रह गयी..

“विम्मो तू?”

“हाँ फिर.. मेरी छोटी बहन की बिटिया का ब्याह है, और मैं नहीं आउंगी ? तूने सोच भी कैसे लिया, हाँ ? बोल ?”

विम्मो थोड़ा आगे बढ़ी और सुलोचना उसके गले से जा लगी..
पलंग पर बैठी सुलोचना की जेठानी उठ कर उन दोनों के पास चली आई..।

“बहुत अच्छा हुआ विम्मो तुम चली आई वरना सुलोचना का मन कैसे लगता भला..?
आओ चलो अब अभी बहुत काम है, तुम दोनों अपना रूठना मनाना बाद में करते रहना.. मैं कुछ चाय वाय मंगवा लेती हूँ !”

सुलोचना और विमला अपने अपने आंसू पोंछ साथ में बैठ गयी.. एक बार फिर तीनो औरतें सारी तैयारियों की जाँच पड़ताल में लग गयी…

“ये पार्थ नहीं पहुंचा अब तक ?”

कमरे के बाहर से सुलोचना के जेठ ने पुकार कर पूछा और उसकी जेठानी ने कंधे उचका दिए..

“कहा तो था, पहुँच जायेगा.. लेकिन पता नहीं अब तक कैसे नहीं पहुंचा ?”

क्रमशः

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Nisha
Nisha
6 months ago

Bahut hi achhi lagi 😍😍😍🥰🥰🥰🥰

Manu Verma
Manu Verma
6 months ago

शहर चाहे एक ही हो, चाहे एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले मे ससुराल क्यों ना हो पर मायका जब छूटता है तो एक टीस तो मन मे उठती ही है। इसीलिए तो कहते है बेटी व्याह के बधाई पराई हो जाती है, मायके की देहरी छूट गई आज डिंकी पराई हो गई।
कैसी बात है ना,जब कभी किसी बेटी की शादी होती है और विदाई के समय सबको भावुक कर देता, 70 साल की औरत को भी अपनी शादी का विदाई का अपनों से बिछड़ने का समय याद आ जाता 😊।

चलो ये अच्छा हुआ सारे गिले शिकवे भूलकर विमला जीजी भी शादी मे आ गयी।
पार्थ और मंजरी की जोड़ी बनेगी क्या 🤔।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।

Jagriti
Jagriti
6 months ago

Nice

Shanu singla
Shanu singla
6 months ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Rekhapradeepsrivastava,
Rekhapradeepsrivastava,
6 months ago

आखिर माधव और डिंकी की शादी का समय भी आ ही गया बस दोनों की शादी अच्छे से हो जाए।
बेहतरीन पार्ट 👌👌👌👌👌

Kalpana
Kalpana
6 months ago

Nice part

Poonam Aggarwal
Poonam Aggarwal
6 months ago

Supper ab perth ki Barri lagti h isi liy vemo ji ki entry hoi h😇😇😇😇

Vandana attri
Vandana attri
6 months ago

Beautiful part 🥰🥰♥️🥰

Sofiya Shaikh
Sofiya Shaikh
6 months ago

Nice part 👌👌👌👌

Jyoti
Jyoti
6 months ago

Nyc part 👌