
अतिथि -68
इतनी ढेर सारी बातों के बाद डिंकी को समझ में आ गया था कि माधव को किसी तरह की कोई मानसिक बीमारी नहीं है..।
भले ही डिंकी की उम्र कम थी, लेकिन इतना तो वह भी समझ गई थी कि माधव ने जहां अपनी मां की प्रशंसा में झूठी कहानी बोलना शुरू किया, वहीं इस भय में कि कहीं माधव उसकी सारी सच्चाई लोगों को ना बयां कर दे, उसकी मां ने भी माधव के बारे में झूठी कहानी बनाना शुरू कर दिया।
लेकिन दोनों की कहानियों में कितना अंतर था।
एक तरफ सुलक्षणा गलत तरीके से माधव को बदनाम कर रही थी, और दूसरी तरफ माधव सुलक्षणा को अपनी मां समझकर उसकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहा था।
डिंकी की आंखों में आंसू झिलमिलाने लगे। दादी ने उसके सर पर अपना हाथ रख दिया।
” तू बिल्कुल मत घबरा बेटी, माधव बहुत अच्छा लड़का है। उसके मन में प्यार का कोना अब भी खाली है। उसके जीवन में जो भी लड़की आएगी, वह उसे बहुत खुश रखेगा। मेरा पूरा आशीर्वाद है कि तुम दोनों हमेशा हमेशा खुश रहो।”
डिंकी ने धीरे से झुक कर दादी के पांव छू लिए..
दादी ने डिंकी की तरफ देखा और अपने मन में उठ रहा सवाल पूछ लिया।
” एक बात पूछूं, तुम्हारी उम्र तो बहुत कम है अभी। आजकल तुम्हारी उम्र में लड़कियां शादी कहां करती हैं? फिर तुम क्यों इतनी जल्दी शादी के लिए तैयार हो गई?”
डिंकी चुपचाप जमीन की तरफ देखने लगी।
” सच कहूं दादी, तो मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि मैं इतनी जल्दी शादी कर लूंगी। मुझे तो अभी पढ़ना था। बहुत पढ़ना था। लेकिन जब माधव से मिली तो लगा जैसा हमसफ़र मेरे दिल और दिमाग में था, वैसा मिल गया है। और इसलिए अब मुझे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना चाहिए।
मैं जानती हूं, वह मेरी पढ़ाई लिखाई को कभी नहीं रोकेंगे।”
दादी ने मुस्कुरा कर हामी भर दी।
“एक बार जरा उसे फोन लगा कर तो देख, इतनी देर से खेत गया, अभी तक वापस नहीं लौटा।”
” जी दादी।”
डिंकी ने दादी का कहा मान कर माधव का नंबर मिला दिया…
पूरी पूरी रिंग जाने के बाद भी माधव की तरफ से फोन नहीं उठाया गया।
“दादी वह फोन नहीं उठा रहे। हो सकता है दोस्तों के साथ खेत घूमने में व्यस्त हों।”
दादी ने धीरे से हामी भरी और अपने हाथ के सूपे को वहां खड़ी कामवाली बाई के हाथ में पकड़ा दिया।
” ले फगुनिया, जा आज मेथी की भाजी छौंक दे, माधव को बहुत पसंद है..।”
उधर खेत में माधव अपने दो दोस्तों के साथ टहल रहा था। उसके सिर में हल्का-हल्का सा दर्द होने लगा था। और असल में इसीलिए वह घर से निकल कर खेत में चला आया था।
उसे लगा था खुली हवा में खुलकर सांस लेने पर सर का दर्द कम हो जाएगा। लेकिन यह दर्द कम होने की जगह बढ़ता चला गया। वह तीनों नहर के किनारे चलते हुए खेतों को देखते हुए बातें कर रहे थे। उसके दोनों दोस्तों का ध्यान पूरी तरह से खेतों के गुणगान करने पर था, लेकिन माधव उस वक्त जिस पीड़ा से गुजर रहा था, वह किसी से कुछ कहने के योग्य नहीं रह गया था।
धीरे-धीरे उसका सर का दर्द बढ़ता चला गया। और आखिर एक पेड़ की छांव किनारे पहुंच कर उसने उन लोगों से रुकने को कहा।
वह जब तक उसकी हालत को समझ पाते, तब तक में माधव बेहोश हो गया। उसके साथ आए दोनों दोस्तों ने पेड़ की छांव में उसे आराम से लेटा दिया, और साथ रखे पानी के छींटे मार कर उसे होश में लाने की कोशिश करने लगे। कुछ देर बाद ही माधव होश में आ गया…।
पास ही मौजूद चापाकल से पानी निकाल कर माधव का दोस्त उसके पीने के लिए पानी ले आया। पानी पीकर और ढेर सारा ठंडा पानी चेहरे पर मारने के बाद माधव को थोड़ा सा आराम होने लगा। वह पेड़ के तने से अपनी पीठ लगाकर बैठ गया।
ठंडी ठंडी हवा उसके चेहरे को सुकून दे रही थी। उसने कुछ देर के लिए आंखें बंद कर ली। लेकिन उसके दोनों दोस्त घबराए हुए से उसका चेहरा देख रहे थे।
“क्या माधव, सुबह से बिना कुछ खाए पिए निकले हो क्या? ऐसे कैसे लड़कियों जैसे बेहोश होकर गिर गए?”
माधव मुस्कुरा कर उन दोनों की तरफ देखने लगा।
” अच्छा सुनो, तुम दोनों से हमें एक बात पूछनी थी।
“अभी कुछ मत पूछो। सीधे घर चलो।”
उनमे से एक ने कहा..
“हम घर से बहुत दूर आ गए हैं, और शायद तुम्हें भूख लग गयी होगी, इसीलिए चक्कर खाकर गिर गये। रुको अभी हम पड़ोस वाले घर से कुछ खाने का लेकर आते हैं।” दूसरे ने कहा।
गांव में रहने वाले लोग अमूमन एक दूसरे को पहचानते हैं। उस पर माधव की दादी गांव की गोंटिया थी। इसलिए उन्हें सब बहुत अच्छे से जानते थे। दूसरी बात गांव के लोगों में इतनी आत्मीयता रहती है कि अगर कोई उनके घर के बाहर के आंगन में बैठा हो, तो उसे जलपान किए बिना वहां से जाने नहीं देते।
माधव का एक दोस्त भी सामने बने घर में घुस गया, और कुछ देर बाद ही थाली में गरमा गरम रोटियों के साथ बैंगन और आलू की सूखी सब्जी, कच्चा प्याज, और मिर्च पुदीने की चटनी साथ लिए बाहर चला आया।
थाली में मौजूद ढेर सारी रोटियां देखकर माधव डर गया।
” इतनी सारी रोटियां मैं नहीं खाऊंगा।”
उसके दोस्त हंसने लगे।
” यह हम तीनों के लिए हैं। वैसे भी गांव की इतनी मोटी मोटी रोटियां तुम्हारे बस की बात नहीं।”
तीनों दोस्त बीच में थाली रख खाने लगे। इस बीच उस घर से एक औरत बड़े-बड़े गिलासों में छांछ ले आई और उन तीनों के बीच रख दिया। खाने के बीच माधव ने वापस अपने दोस्तों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया।
” मैं तुम दोनों से एक सवाल करूं?”
” हां हां पूछो?”
” शहर में मेरा एक दोस्त रहता है, जो बहुत बीमार है और उसकी शादी होने वाली है..।
पर उसे जो बीमारी है वो जानलेवा है..।
अब बताओ कि उसे उस लड़की से शादी करनी चाहिए या नहीं ?”
दोनों दोस्त उसका मुहं देखने लगे.. ।
क्रमशः

Muskil sawal hai par ek baar madhav ko dinki ko batana chahiye tha kam se kam wo aage ke liye taiyar rahti
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Nice part
Sabse पूछ-पूछ kar confused ho jaega Madhav isase to sidha diggi ke Hi saat vartalap kar le
कितना परेशान है माधव। कि शादी करे या न करे।भगवान माधव की ठीक कर दो 🙏🏻🙏🏻 मैम आप ठीक कर दीजिए माधव को।ये सब आपकी ही देन है।
Very very nice part 👌👌
Madhav ko kuchh na ho……
Very nice part
Ye to clear ho gaya ki madhav ko koi mansik bimari nhi hai , uski sauteli maa Sulakshna ne apni pol khulne ke dar se logo ko kahani banakar sunane ki bimari ka bahana bana diya hai
Madhav ka Aise achanak se behosh hokar girna अच्छे लक्षण नहीं है
🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄🙄