जीवनसाथी -3 भाग -154

जीवनसाथी -3 भाग -154

   कली और शौर्य एक दूसरे से कुछ भी नहीं कह पाए, चुपचाप एक दूसरे को देखते रहे।

      शौर्य की नजर कली पर से हट नहीं पा रही थी। वह चाहता तो नहीं था लेकिन वह अपने आपको संभाल भी नहीं पा रहा था। इतने दिनों बाद कली उसके सामने थी, तभी पास खड़े विक्रम ने शौर्य को धीरे से कोहनी मारी।

” होश में आ जाओ, खुद को प्रिंस समझने की भूल न करो।”

शौर्य ने विक्रम को घूर कर देखा।

” विक्रम जाओ, सामान गाड़ी में रखना शुरू करो। हम एयरपोर्ट के लिए लेट हो जाएंगे ।”

शौर्य ने विक्रम से कहा, और विक्रम ने उसे एक नजर देखकर बांसुरी की तरफ चेहरा घुमा लिया।

“रानी हुकुम आपने खाना नहीं खाया है, आप डिनर कर लेती, उसके बाद हम सब एयरपोर्ट के लिए निकल जाते।”

“नहीं विक्रम, मैं कली के घर से खाना खाकर आई हूं। कली और सारिका भी हमारे साथ चलेंगे। इसलिए उनकी टिकट्स का भी इंतजाम कर दो।”

“जी हो जाएगा।”

विक्रम ने कहा और तुरंत अपना फोन संभाले बाहर की तरफ निकल गया। बांसुरी ने कली को बड़े प्यार से हाथ पकड़ कर अपने साथ बैठा लिया।

” कली तुम इंडिया जाने के नाम पर परेशान तो नहीं हो ना ? कहीं ऐसा तो नहीं है कि मैं जबर्दस्ती तुम्हें साथ ले जा रही हूं।”

कली मुस्कुरा कर रह गई।

” नहीं मुझे तो आप और आपका महल बहुत पसंद है।”

बांसुरी हल्के से मुस्कुरा कर रह गई।

“पिछली बार भी तो अचानक ही वापस लौट गई थी तुम। इस बार खुशी का मौका है, इसलिए सोचा तुम्हें भी अपने साथ लिए चलते हैं। वैसे भी जब से मुझे पता चला है कि तुम वही कली हो, जिसे मैंने साल भर तक अपने पास रखा था, तब से एक अलग ही अनुभूति हो रही है। तुमसे ढेर सारी बातें करनी है बेटा।
   तुम्हें बहुत सी बातें बतानी है, तुम्हारी मां के बारे में, तुम्हारे पिता के बारे में, और उसके लिए मुझे समय चाहिए था। और वह समय यहां मिलना कठिन था। क्योंकि हर्ष की शादी के लिए हम सबको आज ही वापस लौटना था। अगर तुम्हें साथ नहीं ले जाती, तो तुमसे बातें करने का मौका, तुम्हारे साथ रहने का मौका गंवा देती। बस तुम्हारे पास रहने का, तुमसे बातें करने का लालच ही था, जो मैं तुम्हारे डैड की मर्जी के खिलाफ तुम्हें अपने साथ ले जा रही हूं।”

” आप ऐसे क्यों बोल रही हैं, आपसे ज्यादा तो मेरा मन था आपसे बातें करने का। आपको पता है, मुझे हमेशा ऐसा महसूस होता था जैसे कोई मेरे पास, कोई मेरे बहुत करीब था।
       जबकि मुझे यह पता था कि मेरे जन्म के साथ ही मैंने अपनी मां को खो दिया था। मैं अक्सर पूछा भी करती थी, लेकिन मुझे कभी मेरे सवालों के सही जवाब नहीं मिलते थे। लेकिन अब मिल गए ।”

बांसुरी और कली को बातें करता छोड़ शौर्य वहां से अपने रूम की तरफ जाने लगा।

” तुम कहां चल दिए शौर्य? आओ बैठो।”

बांसुरी ने उसे आवाज लगा दी।

“माँ, वह मैं कुछ काम कर रहा था। बस अपना लैपटॉप भी बंद करके रख लूं, अब सामान गाड़ियों में शिफ्ट करवा देता हूं।”

” ठीक है!”

शौर्य वैसे भी बांसुरी और कली से दूर ही भागना चाह रहा था।
वहां से उठकर अंदर चला गया। कुछ देर बाद ही उन सभी के सामान गाड़ियों में लद गए और गाड़ियों का वह काफिला एयरपोर्ट की तरफ निकल गया…।

एयरपोर्ट और उसके बाद फ्लाइट में भी शौर्य हर जगह कली से दूरी बनाये हुए था।
लेकिन इस सब के बावजूद वो उसे देखते रहने का मोह नहीं त्याग पा रहा था..
वो और विक्रम साथ बैठे थे !

उनके सामने की तिरछी वाली सीट पर सारिका के साथ कली थी..
बिज़नेस क्लास में सबसे सामने की सीट पर राजा साहब थे और उनके साथ उनकी रानी साहेब बैठी थी..।

बांसुरी इस बात का पूरा ध्यान रखें हुए थी कि सबकी यात्रा आरामदायक हो.. 
शौर्य जहां बैठा था, वहां से उसे कली का चेहरा उतना साफ नजर नहीं आ रहा था।
उसने थोड़ा इधर-उधर अपने आप को हिला डुला कर कोशिश की, कि उसे कली साफ-साफ नजर आने लगे, लेकिन इतने प्रयासों के बाद भी ऐसा नहीं हुआ और वह चुपचाप बैठकर अपना मोबाइल खोल कर कुछ देखने लगा।

सभी अपने-अपने जगह बैठ चुके थे, और फ्लाइट उड़ने की घोषणा हो चुकी थी। विक्रम ने शौर्य के कंधे पर हाथ रखा।

” अब क्या हुआ?”

शौर्य ने चिढ़कर पूछा,

” आप यहां मेरी जगह पर आ जाइए लिटिल मास्टर !”

शौर्य ने सवालिया नजरों से विक्रम की तरफ देखा।

” ऐसा क्यों?”

” पहले आप बैठिए, फिर आपको समझ में आ जाएगा।”

अपनी सीट बेल्ट खोलकर विक्रम खड़ा हो गया। शौर्य ने बिना नानुकुर किये उसकी सीट हथिया ली। विक्रम की सीट पर बैठते ही उसे कली साफ-साफ नजर आने लगी। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आते आते रह गई। विक्रम ने बैठकर अपनी सीट बेल्ट एडजस्ट करते हुए शौर्य की तरफ देखा।

” अब ठीक है ना लिटिल मास्टर?”

” ठीक है, इतना ज्यादा क्रेडिट लेने की जरूरत नहीं है। वैसे भी मेरी पहले वाली सीट ज्यादा कंफर्टेबल थी।”

” तो वापस आ जाइए।”

विक्रम ने फौरन कहा।
उसके ऐसा कहते ही शौर्य ने उसे घूरा और अपने मोबाइल में कोई गाना चला कर उसने अपने इयरफोन लगा लिए..

शौर्य को पुराने फिल्मी गाने बेहद पसंद थे .

“ये आंखे देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं ,
इन्हे पाने की धुन में हर तमन्ना भूल जाते, भूल जाते हैं….
तुम अपनी महकी महकी ज़ुल्फ़ के पेंचो को कम कर दो, मुसाफिर इनमें घिर कर अपना रस्ता भूल जाते हैं..।”

गाना सुनते सुनते उसकी आँख लग गयी..

और आखिर वो लोग अपनी धरती पर लैंड कर गए..

एक थकान भरी यात्रा के बाद अपनी धरती पर उनका स्वागत करने के लिए राजा साहब के लोग पहले से ही उपस्थित थे..
एक के पीछे एक शानदार गाड़ियों का काफिला विजयराघवगढ़ की तरफ बढ़ गया..

****

भोर का वक्त था, सूरज पूरी तरह निकला भी नहीं था, लेकिन विजयराघवगढ़ की जनता तो आज भी वही पच्चीस साल पहले वाली ही थी.. ।

आज भी बिलकुल वैसे ही शांतिपूर्ण ढंग से पूरा गांव और आसपास के कस्बे के लोग अपने राजा रानी के साथ राजकुमार के लौटने की प्रतीक्षा कर रहे थे। बिल्कुल पलक पांवडे बिछाए उनकी आंखें उस रास्ते पर लगी थी, जहां से राजा साहब की गाड़ी गुजरने वाली थी।

बिल्कुल वही नजारा था, जैसा बांसुरी पहली बार इस गांव में आई थी तब का था। बांसुरी आज भी उन यादों से खुद को मुक्त नहीं कर पाती थी। उसके पहली बार आने के समय जो भीड़ थी, वही भीड़ जब वह शादी के लिए महल आ रही थी, तब थी।

    उस समय भी राजा युवराज सा ने रुक कर समर की मदद से बांसुरी के हाथों हर एक व्यक्ति को तोहफे दिलवाए थे। बांसुरी अपने आप में संकुचित हुई जा रही थी। इतना सम्मान, इतना प्यार उसे उस जनता से मिला था, और इसके पीछे का कारण सिर्फ और सिर्फ उसके राजा साहब थे।

    राजा साहब के लिए लोगों के मन में प्यार का कोई दिखावा नहीं था। यह वह सच्चा और अद्भुत प्यार था, जो राजा साहब ने अपने नेक कामों से कमाया था। और आज वही प्यार दुगुना चौगुना होकर उन लोगों को वापस मिल रहा था।

आज भी जब वह लोग उन रास्तों से गुजरने लगे तो, वापस गांव के लोग उन पर पुष्प वर्षा करके करतल ध्वनि के साथ अपने राजा और रानी का स्वागत करने के लिए खड़े थे। यह लगभग हर बार की बात हो गई थी। जब जब राजा साहब बाहर से अपनी रियासत में वापस लौटते, इसी तरह पूरे राज्य की जनता उनका स्वागत किया करती थी।

वह खुद कई बार कह चुके थे, “क्या आप लोग थकते नहीं है?” और उन लोगों का जवाब आता “भक्त अपने भगवान से कभी थके हैं भला? क्या आप हमारे लोगों के लिए अच्छाइयां करके थक जाते हैं? हमें तो सिर्फ आपके दर्शन करने होते हैं, और जब आपके दर्शन इतने सुलभ है तो हम क्यों ना इसका लाभ उठाएं ?”
   एक बार फिर लोगों की उस भीड़ के बीच गाड़ियों का काफिला कुछ दूरी तक जाकर रुक गया।

राजा साहब और बांसुरी अपनी गाड़ियों से उतरकर नीचे आ गए। समर और प्रेम कई बार उन्हें सुरक्षा कारणों से रोक चुके थे, लेकिन वह दोनों ही निराले थे। उनका कहना था अपने लोगों के बीच कैसी सुरक्षा?

इस बार भी लंदन जाते समय शादी की तैयारी के कारण और कुछ महल के कामों में व्यस्तता के कारण समर और प्रेम उनके साथ नहीं जा पाए थे। प्रेम तो तब भी जाने को तैयार था, लेकिन राजा साहब ने मना कर दिया था। लेकिन अपने देश की भूमि में उतरते ही समर और प्रेम अपने लोगों के साथ अपने बचपन के सखा को लेने पहुंच गए थे। एक बार फिर काफिला रास्ते के ठीक बीचों बीच ठहर गया, और उसके बाद समर शौर्य को बुलाने चला गया।

शौर्य एकदम इन चीजों से उतना भी करीबी नहीं था, लेकिन अपने महल के प्रोटोकॉल एकदम से ठुकरा नहीं  सकता था।

वह समर का कहा मान कर उसके साथ उतर गया। विक्रम भी साथ हो लिया। इस बार शौर्य के हाथों से गांव भर के लोगों को तोहफे दिलवाए जा रहे थे…
शौर्य कितना भी अकड़बाज हो, लेकिन उसके अंदर खून तो राजमहल का ही था।

एक-एक लोगों को तोहफे देते हुए वह धीरे से आगे बढ़ता जा रहा था। लोग उसके सामने हाथ जोड़कर अपना सिर झुकाते जा रहे थे, और धीरे से यह हुआ कि उसके भी हाथ स्वतः ही जुड़ने लगे। लोगों को तोहफे देकर वह भी अपने हाथ जोड़कर, सर झुकाने लगा। गाड़ी में बैठी कली एकटक उस राजकुमार को देख रही थी।

जाने क्या हो गया था इसे, कुछ समय पहले तक तो एकदम ठीक था। और जब वह दोनों एक दूसरे को अपने प्रेम के बारे में बताने वाले थे कि अचानक बिना उससे कुछ बोले गायब हो गया, और लौटने के बाद से ही ऐसा अंजाना सा बन गया है, जैसे कली को जानता ही नहीं।

कोई बात नहीं अब वह भी अपनी नाराजगी छोड़कर उससे पूछ कर रहेगी कि आखिर वह उसके साथ इतना बेगानों सा बर्ताव क्यों कर रहा है?  कली को इतना तो समझ में आ गया था कि उसके मन में शौर्य के लिए बहुत ही कोमल सी भावनाएं हैं, और उन भावनाओं को वह जबरदस्ती उखाड़ कर नहीं फेक सकती। कली की वह भावनाएं शौर्य के उसकी तरफ ध्यान न देने से बिल्कुल किसी अमर बेल की तरह और भी ज्यादा फलती फूलती जा रही थी।

इससे तो ज्यादा अच्छा होता कि वह उससे बात कर लेता। तब शायद कली भी खुद को समझा कर उसकी तरफ से अपना मुंह मोड़ पाती, लेकिन उसका कली को इस कदर इग्नोर करना, कली के मन के प्यार को और भी ज्यादा बढ़ाने लगा था, और बस इसीलिए कली एक बार उससे साफ-साफ सारी बातें जान लेना चाहती थी..।

कली को अब इंतजार था कि कब वह लोग महल पहुंचे और उसे एक बार शौर्य से अकेले में बात करने का मौका मिल जाए…

क्रमशः

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Archana Singh
Archana Singh
1 month ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Varsha
Varsha
7 months ago

जीवन साथी को बार बार रोका क्यूं जा रहा है

Jyoti rana
Jyoti rana
7 months ago

Next part upload kiye hue bda jyada time ho gya…na hi mayanagari ke parts a rh hn na jeevansathi 3 ke…please koi btaye ki jeevansathi k 154 part k baad koi part aya ki nahi air mayanagari k 20 episode k baad koi part aya ki nhi…kahin vo sur to nhi shift ho gye hn

Alpa Singhal
Alpa Singhal
7 months ago

Aap to jeewan sathi ka new part upload karna hi bhul gaye , now it’s more than one month u have not updated any new part

It’s really irritating pls understand our feelings mam

Jyoti rana
Jyoti rana
7 months ago

Ma’am please btayein to sahi ki next parts kb tak aynge…pkka ap kahin bahut bsy hn ya koi pareshaniyan chl rhi hn jiski vjah se ap time nhi nikal pa rhi hn…

Jyoti rana
Jyoti rana
7 months ago

Bahut hi afsos ha ki jeevansathi 3 ka next part upload hue one month hone wala ha…is trh se lahani kayi aspects bhi hmare dimag mei dhundhle ho jatae hn jisse next parts ko pdhne ka mza nhi ata…please ma’am kucch to information 2 ki aisa kyu ho rh ha…kya aap theek hn ya apke air bhi lekh hn kahani k chl rhe ushe bhi apko kisi target tak pahunchana hota hoga..

Alpa Singhal
Alpa Singhal
7 months ago

Pls upload next parts as it’s too long period of gap between two episodes
It’s really too long time hope you understand our feelings and upload new parts at earliest

Varsha
Varsha
8 months ago

Kya hua 22 din se part daalne ki bhool gye kya bdi mushkil se to lay mein bndhne lga tha pls do early

Jyoti rana
Jyoti rana
8 months ago

Ma’am bahut curiosity ha next ki ke ab kya hoga…ye nya shaurya ka kya chakkr ha …hme Purina wala shaurya chahiye…please jldi jldi parts upload krein

Manu Verma
Manu Verma
8 months ago

बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻, आज फिर आपने पुरानी यादें ताज़ा कर दी कैसे बांसुरी एक साधारण परिवार की लड़की और महलों की रानी बन गई उसके लिए ये सब नया ही था। उस समय भी मुझे जैसे राम जी सीता माँ को व्याहकर लाए थे और उनका भव्य स्वागत हुआ था ऐसी वाली फीलिंग आई थी और आज भी वैसा ही लगा पढ़कर 😊👌🏻।
क्या बात कही गाँव वालों ने 👌🏻👌🏻
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

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Last edited 8 months ago by Manu Verma