
अतिथि -65
रोज़ की तरह सुलोचना को डिंकी को उठाने की जरूरत नहीं पड़ी। सुलोचना उठकर रसोई में चाय चढ़ाने गई थी कि डिंकी खुद ही चल कर रसोई तक चली आई।
” आपको बताया था ना, आज माधव जी के गांव जाना है?”
” अरे हां, मैं तो भूल ही गई थी। तू तैयार हो जा, मैं तब तक तेरे लिए नाश्ता बना देती हूं।”
” मम्मी नाश्ता थोड़ा ज्यादा बनाकर पैक कर देना, हम रास्ते में खा लेंगे।”
” यह तुझे कहने की जरूरत नहीं है, इतना तो मुझे भी समझता है। लेकिन शाम तक आ ही जाना। कल सुबह फिर हमें कानपुर निकलना है।”
“हाँ मम्मी।”
डिंकी अपना टॉवल कंधे पर टांगे बाथरूम में घुस गई। कुछ देर बाद ही वह तैयार होकर निकल चुकी थी। आईने के सामने वह खुद को निहार रही थी कि नीचे से माधव की गाड़ी का हॉर्न सुनाई देने लगा।
सुलोचना बालकनी में झांक आई।
“जा डिंकी माधव जी आ गए। और यह रख ले टिफिन।”
अपनी मां के गले से लगकर डिंकी अपना बैग टांगे नीचे उतर गई।
माधव ने आगे बढ़कर दरवाजा खोल दिया।
डिंकी उसके साथ आगे बैठ गई और वह दोनों अपने खुशनुमा सफर में चल पङे। कुछ देर तक दोनों चुप ही बैठे रहे।
“आप अपनी दादी से बेहद प्यार करते हैं?”
डिंकी ने ही चुप्पी तोड़ी।
“कौन सा बच्चा होगा जो अपने दादा-दादी से प्यार ना करता हो।”
” मैंने तो आज तक उनकी झलक भी नहीं देखी।”
डिंकी ने जवाब दिया।
” मेरा बचपन बहुत सुंदर था, और उनसे मेरी यादों का जुड़ाव मेरे दादाजी और दादी के कारण ही है।”
” एक बात पूछूं माधव जी ?”
“हां पूछो?”
” आपकी दादी आप लोगों के साथ क्यों नहीं रहती?”
” तुम्हें बताया था ना, दादा जी की बहुत बड़ी हवेली है। इस गांव में दादाजी को भगवान की तरफ पूजा जाता है। दादी का यह कहना है कि अगर वह शहर चली आई तो जाने कितने लोगों का रोजगार हमेशा के लिए छूट जाएगा।
बात सच भी है, दादी वहां रहती हैं तो खेत खलियान देखती हैं। बहुत से किसान हमारे खेत में खेती करते हैं। बहुत से मजदूर हमारे यहां काम करते हैं। जिनका खाना पीना सब कुछ हवेली में ही बनता है। अगर दादी गांव छोड़कर आ गई तो यह सब कौन देखेगा?”
” बात तो आपकी सही है, लेकिन इस उम्र में दादी को भी तो आराम की जरूरत है ना?”
“हमने उन्हें साथ ले जाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी। अब तुम कोशिश कर लेना।”
” जी, मैं पूरी कोशिश करुंगी कि वह हमारे पास चली आएं।”
आपसी बातों के बीच उन दोनों को पता भी नहीं चला वह कब अपने गांव पहुंच गए।
माधव ने पहले से दादी को कुछ नहीं बताया था। उसका वहाँ आना दादी के लिए पूरी तरह से सरप्राइज ही था। जब वह दोनों वहां पहुंचे उस वक्त दादी अपनी बड़ी सी हवेली से बाहर वाले दालान में बैठी सुपारी कतर रही थी। उनके दीवान में ही एक तरफ पान के बीड़े रखे हुए थे।
माधव की दादी को पान खाने का बहुत शौक था। जो इस उम्र तक भी मौजूद था।
वही एक तरफ एक बड़ी सी खाट पर लाल मिर्च सूख रही थी। दूसरे में आलू के पापड़।
एक काम वाली एक तरफ मटकों को भरती जा रही थी।
इस बड़े से दालान के एक हिस्से में खुली रसोई थी, जो आजकल के शब्दों में ओपन किचन कहलाती है। जहां बड़े-बड़े चूल्हे बने हुए थे। जिन पर दोपहर का खाना तैयार किया जा रहा था।
गाड़ी जैसे ही घर के बड़े से गेट को पार करके अंदर वाले दालान में पहुंची, सबकी नजरे माधव की गाड़ी की तरफ उठ गई।
दादी ने दीवान पर रखी अपनी ऐनक उठाई और आंखों पर चढ़ा ली।
माधव गाड़ी से उतरा और मुस्कुराते हुए अपनी दादी की तरफ बढ़ गया।
थोड़ा सकुचाते हुए उसके पीछे-पीछे डिंकी भी चल पड़ी।
आंखें मिचमिचाते हुए दादी अपनी जगह पर खड़ी हो गई।
” अरे माधव तू? मेरा कन्हैया, तू यहां कैसे?”
आगे के शब्द उनके कंठ में ही अटक कर रहे गए, भावुकता बढ़ कर उनके गले में आंसुओ का गोला बन कर थम गयी और वो अपनी आंसू से धुंधली आँखों पर चढ़ा चश्मा उतार निरर्थक ही चश्मे को साफ करने लगी..
माधव ने आगे बढ़ कर अपनी दादी के पैर छुए और उनका चश्मा लेकर अपनी कमीज़ में रगड़ कर पोंछा और उनकी आँखों में चढ़ा कर उनके गले से लग गया..
दादी ने अपने कलेजे के टुकड़े को गले से लगा कर आंखे मूंद ली… होंठो ही होंठो में कुछ बुदबुदाती वो अपने जिगर के टुकड़े को ढेरो ढेरों आशीर्वाद देने लगी…
दादी पोते के इस भावुक मिलन को खड़ी देखती डिंकी की भी आंखे भीग गयी..
जैसे कंगारू अपनी माँ के शरीर से चिपका रहता है वैसे ही माधव अपनी दादी के कंधे में अपना मुहं छिपाये अपना रोना रोकने की असफल कोशिश कर रहा था और उसे चुप करने के प्रयास में दुगुनी तेज़ी से रोटी दादी माहौल को और भावुक किये दे रही थी..
“ए महाराजिन इ का टसुए बहाव रही हो.. लरिका के बिहाव का बखत है और तुम रोना पीटना मचाये दे रही हो… ए बंद करो ई रोना पीटना.. ए बाबू, चुप करो बिटवा, तनी हाथ मुहं मा पानी का छींट ऊट मारो.. !”
घर की पुरानी खाना बनाने वाली कमला जो लगभग दादी की ही उम्र की थी आकर उन दोनों को ही चुप करवाने लगी..
दादी के साथ साथ ही उन्होंने भी इसी हवेली में अपने यौवन के उठान से लेकर ढलान तक को देखा था.. पहले वो खाना बनाया करती थी अब उनकी बहु बनाने लगी थी, इसी से वो माधव की दादी की ज़रा मुंहलगी थी.. !
उन्होंने माधव को खीँच कर अलग किया और पानी का लोटा उसके हाथ में थमा दिया..
चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मार कर माधव जरा सम्भल गया, अब तक में आंखे पोंछ कर दादी भी अपने तख्त पर विराज गयी..
हँसते हुए माधव आकर उनके पास ही बैठ गया.
“कैसे आये गया रे कन्हैया ?”
उनके गले में बाहें डाल झूलता हुआ माधव उनके कंधे पर सर टेके उनकी हथेलियों को खोलते बंद करते हुए बोलने लगा..
“मेरी शादी में आने का विचार नहीं था क्या दादी ?”
“क्यों नहीं था लल्ला, जे पूछो ई कमली से, हम सब तैयारी कर रखें हैं !”
” तो क्या तुम मेरी शादी में अकेली आने वाली थी?”
“अकेली कैसे आती हम ? आज शाम को सब निकलते यहां से!
तेरे बाप ने पहले ही कह दिया था, कानपुर में काम करने वाले कम मिल पाते हैं। हम तो यहां से पूरी फौज लेकर आने वाली थी।”
” ओह्ह तो मेरा आना व्यर्थ हो गया। मैं तो तुम्हें अपने साथ ले जाने आया हूं दादी।”
” अच्छा! और क्या मेरी बहू को भी साथ लाया है?”
दादी ने पीछे शरमा कर खड़ी डिंकी का हाथ पकड़ कर सामने खींच लिया।
डिकी ने झुक कर दादी के पैर छू लिए।
“खूब खुश रहो, बड़ी प्यारी है।”
दादी ने डिंकी को भी गले से लगा लिया। दोनों को अपने साथ बैठा कर वह दुलारने लगी और उन लोगों के वहां बैठते ही एक-एक कर घर के सभी नौकर आते चले गए।
और माधव और डिंकी के सामने हाथ जोड़कर एक तरफ खड़े होते गए।
दादी बड़े चाव से उन सभी का परिचय करवाने लगी।
डिंकी को बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे यह सब माधव के घर के रिश्तेदार हैं, इनमें से कोई नौकर है ऐसा कुछ तो लग भी नहीं रहा था।
दादी जितने प्यार से उन सब का परिचय दे रही थी, डिंकी को समझ में आ गया माधव के स्वभाव के पीछे उसकी दादी का ही हाथ है। वरना माधव की मां तो जरा अलग ही रवैये वाली है। माधव दादी से मिलकर खेतों को देखने जाने के लिए निकल गया।
उसने घर के ट्रैक्टर में ही अपने साथ एक सहायक और एक ड्राइवर को लिया और चला गया।
क्रमशः

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लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Very nyc part 👌
Waiting for next part
🤗👍 very good part.Madhav ke sath Dinki pahinch he gayi usake gaon dadi se milane.ye baat Madhav ne apane Mata,Pita ko batayi hogi ki Dinki bhi sath gayi hai…… ????
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏
Very nice part of the story and very interesting and very interesting and very good 👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍😊😊😊😊😊👍😊👍😊👍😊👍
Beautiful part 🥰🥰♥️🥰🥰♥️
Madhav ki dadi bahut achhi hai aur unka gaun bhi 🥰🥰🥰🥰.ye safar bahut hi khubsurat hai
Best
बहुत सुन्दर रचना 🌹🌹