अतिथि-64

अतिथि -64

   डिंकी ने माधव कि तरफ देखा, जैसे उसका मन न कर रहा हो माधव को छोड़ कर जाने का, लेकिन जाना तो था..

“मैं जाऊं ?” उसने पूछा और माधव ने धीमे से हाँ में सर हिला दिया..

“डिंकी कल सुबह मैं मेरी दादी से मिलने जा रहा हूँ, हो सकता है वहाँ मेरा कॉल न लगे !”..

“अचानक कैसे प्लान बन गया दादी के पास जाने का ?”

“वो बहुत समय से बुला भी रही है, और मैंने पापा से कहा था दादी को मैं साथ लेकर आऊंगा, बस इसीलिए उन्हें लेने जा रहा हूँ.. !”

“मैं भी चलूँ ?” डिंकी ने पूछ लिया, माधव की आंखे चमक उठी..

“तुम्हारे घर पर सब मान जायेंगे ? क्यूंकि कल का पूरा दिन लग जायेगा दादी को लेकर आने में !”

“मैं मम्मी से पूछ कर आपको बता दूंगी !”

“ठीक है !”

माधव मुड़ने को था कि एक ऑटो उनके पास आकर रुकी, उसमे से डिंकी की माँ ढेर सारा सामान हाथ में थामे उतर गयी..

माधव ने उनके पैर छू लिए

“खुश रहिये, आइये अंदर चलिए न !”

“नहीं आंटी मैं अब घर जाउंगा, कल सुबह दादी से मिलने निकलना है थोड़ा जल्दी है !”

माधव ने बिना किसी लागलपेट के प्रस्तावना बुन दी.. डिंकी ने भी मौके पर चौका लगा दिया..

“मम्मी मैं भी जा सकती हूँ क्या?”

मौका ऐसा था कि एकदम से सुलोचना से मना करते नहीं बना उसने हाँ में गर्दन हिला दी..

“चलिए एक कप चाय तो पी लीजिये !”

“नहीं, फिर कभी.. अभी इजाजत दीजिये !”

माधव ने झुक कर सुलोचना को नमस्ते कहा और अपने घर के लिए मुड़ गया. 
सुलोचना भी थोड़ा सामान डिंकी को थमा कर ऊपर चली गयी… डिंकी वहाँ थम कर खड़ी रह गयी ।

 

  जब तक माधव नजर आता रहा वो उसे जाते देखती रही, फिर दिन भर की खुमारी में लिपटी डिंकी सीढ़ियां चढ़कर ऊपर अपने कमरे में चली गई !

        डिंकी की मां कपड़े बदल कर रसोई में कूद चुकी थी। उन्हें आभास हो गया कि डिंकी लौट कर अपने कमरे में घुस गयी है…
   वह सीधा उसके कमरे में पहुंच गई!

“माधव के माता-पिता वापस लौट गए ना?”

उन्होंने डिंकी से पूछा..
डिंकी चौंक कर पलटी, उसकी मां कैसे सब जान जाती है?

” माधव जी की तबीयत ठीक नहीं थी बस उन्हें देखने चली गई थी!”

” मुझे पता है, लेकिन सुन परसों से हल्दी वगैरह का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा, और तब तेरा घर से बाहर निकलना सब बंद!
    कल चलकर तेरे ब्लाउज सूट सब उठा लाना जो दरजी के यहां पड़े हुए हैं!”

  डिंकी ने मुस्कुराकर हां में गर्दन हिला दी ….

   दो दिन बाद उन सभी को कानपुर निकलना था! शादी वहीं से होनी थी, और इसलिए सुलोचना ने सारी तैयारियां शुरू कर दी थी। उनका लगभग समान बंध चुका था। अब जो भी सामान पैक होना था, वह डिंकी का ही था।

   अगला दिन उनका बहुत व्यस्तता में बीतने वाला था। फटाफट सबको खाना खिलाकर वह एक बार फिर सामान की लिस्ट मिलाने में लग गई थी। घर में ऐसा लग रहा था त्यौहार का माहौल हो गया था। कहीं शगन की मिठाइयां रखी थी, कहीं लिफाफे बनाये जा रहे थे.।
तिलक में चढ़ाए जाने वाले चांदी के नारियल सुपारी और पान के पत्तों को एक अलग-अलग बक्से में बंद करके सुलोचना ने पहले ही अलमारी में डाल दिया था।

वह लोग सवा लाख रुपये चढ़ाना चाहते थे। माधव की मां ने भी कोई एतराज नहीं किया था। लेकिन माधव के पिता जानते थे कि माधव इस बात पर नाराज हो जाएगा, इसलिए वह मना कर रहे थे ।

लेकिन उनकी बात को सुलोचना समझ नहीं पाई। उसे लगा कि शायद उन लोगों के अनुसार यह धनराशि कम थी और इसीलिए अपने पति के पीछे पङ पङ कर उसने धनराशि सवा लाख से सवा पांच लाख करवा दी थी।

           हालांकि इसके लिए उसके पति को कितनी मशक्कत करनी पड़ी थी, यह वह खुद ही जानता था। इस सब के बारे में डिंकी को भी कुछ भी नहीं मालूम था। तिलक की सारी तैयारी करके दोनों पति-पत्नी ने अलमारी में सब कुछ सहेज दिया था। घर का सबसे छोटा बेटा, सबका लाड़ला चिंटू भी जैसे अचानक बड़ा समझदार हो गया था।

दौड़ दौड़ कर वह भी अपने माता-पिता की हर आज्ञा पूरी करता हुआ अपनी दीदी के शादी के दिन को सबसे यादगार दिन बनाने पर तुला हुआ था।

सुलोचना अपने पति से कुछ चर्चाओं में लगी थी कि डिंकी जाकर कमरे के दरवाजे पर खड़ी हो गई।

“मम्मी क्या मैं अंदर आ जाऊं?”

” हां आजा, इसमें पूछने की क्या बात है ?”

उन्होंने पलंग पर फैला रखी रेशमी साड़ियों को एक तरफ किया और उसे अंदर बुला लिया। डिंकी अपनी मां के पास आकर बैठ गई।

” माधव पूछ रहे थे, क्या कल मैं उनके साथ उनकी दादी से मिलने जा सकती हूं?”

डिकी में बिना ज्यादा लाग लपेट के सीधे सपाट शब्दों में अपनी बात रख दी। उसकी बात सुनकर सुलोचना और विनोद एक दूसरे को देखने लगे।
माधव इस बारे में सुलोचना से पूछ चुका था, लेकिन सुलोचना ने सोचा था कि वह बस यूं ही पूछ रहा है।

“लेकिन डिंकी, परसों तो हल्दी है।”

” हां मम्मी वह तो परसों है ना?  हम तो कल सुबह जाएंगे और शाम तक आ जाएंगे। आप चाहो तो चिंटू को भी साथ भेज दो।”

सुलोचना इस बात को नकार देना चाहती थी, लेकिन पता नहीं अभी कुछ दिनों से उसे अपनी लाडली पर कुछ ज्यादा ही मोह आने लगा था। बेचारी अब इस घर में दो दिन की ही तो मेहमान थी।
   फिर तो ससुराल चली जाएगी।

हालांकि इस बात का ढांढस भी था कि इसी शहर में रहेगी। क्योंकि उसकी तीखी सास के साथ अगर उसे रहना पड़ता तो शायद सुलोचना का कलेजा ही मरोड़ कर रह जाता।

उसने एक ठंडी सी सांस भरी और अपने पति की तरफ देखने लगी। विनोद ने धीरे से डिंकी के सर पर हाथ फेर दिया ।

“ठीक है चले जाओ। लेकिन जल्दी लौटना बेटा। उनका गांव यहां से दूर है।”

” हां पापा, हम शाम तक लौट आएंगे।”

वह मुस्कुरा कर अपने पापा के गले में दोनों बाहे डालकर झूल गई। कुछ देर अपने माता-पिता के साथ बैठकर फिर वह अपने कमरे में चली गई। अलमारी खोलकर उसने फटाफट अगले दिन के लिए एक सुंदर सा फालसाई रंग का कुर्ता निकाला और उस पर आयरन करके उसे हैंगर में लटका दिया।

सुबह की सारी तैयारी करके वह बिस्तर पर लेट गई। छत पर देखते हुए वह माधव के बारे में ही सोच रही थी ।

कल की सुबह कितनी खुशनुमा होने वाली थी, इन्ही सपनों को देखते हुए न जाने कब वह नींद में खो गई।

क्रमशः

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Umita kushwaha
Umita kushwaha
9 months ago

अब जब माधव को उन तिलक के पैसों के बारे में पता चलेगा वह पक्का अपने मां पिता से नाराज होने वाला है वैसे तो वह बच्चा नहीं है जो अपने बड़ों से मुंह चलाएं पर फिर भी उसे बुरा तो लगेगा ही क्योंकि वह डिकी को दिल से पसंद करता है और रूपए पैसे वाली बात जब प्यार के बीच में आती है तो हमेशा ही मुश्किल है और एक शर्म की पैदा कर देती है उन लोगों के लिए जो इसे स्वीकार नहीं पाते
पिंकी को जाने के लिए कह तो दिया करने पर उनका दिल नहीं मान रहा है शायद वह मना कर दे पर पिताजी के हमें भरने पर अब लगता है डिकी कल अपनी दादी सास से मिलने भी जा पाएगी

Shanu singla
Shanu singla
10 months ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Gouri sarwa
Gouri sarwa
10 months ago

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

Nisha
Nisha
11 months ago

Dinki ne madhav ke sath bahut khubsurat sapne sanjoye hain toh prarthna karungi ki ye sab pura ho

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
11 months ago

Bahut sundar

Arjun Singh Chauhan
Arjun Singh Chauhan
11 months ago

Superb 👌👌

Gouri sarwa
Gouri sarwa
11 months ago

Very nice part 💞 kl ka din kitna khushnuma hone wala hai, wo to kl ka din hi batayega,👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻🧿🧿🧿🧿

Ritu Jain
Ritu Jain
11 months ago

Very nice part.❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

Arun Kumar
Arun Kumar
11 months ago

👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Jagriti
Jagriti
11 months ago

सस्पेंस बना है कि अभी माधव की मां के अनुसार माधव दिमागी बीमार है और अब ये ट्यूमर। अब गांव में जाना। सब अच्छा हो। वहां और भी कोई सस्पेंस तो डिंकी का इंतजार नहीं कर रहा।