अतिथि -63

अतिथि -63

  “कुछ देर और रुक जाओ !” माधव के मुँह से अनायास निकल गया..

“अब तो अगले हफ्ते से यही रहना है !” मुस्कुरा कर डिंकी ने कहा और माधव ने उसे अपनी बाँहों से आज़ाद कर दिया

“चलो तुम्हे छोड़ आऊँ !”

“चलिए ! वैसे भी मैं पैदल ही आई थी, मेरी गाडी पंक्चर हो गयी थी !”

माधव ने दरवाज़े पर ताला डाला और डिंकी के साथ नीचे उतर गया..!

बाहर अभी अभी बारिश होकर थमी थी, रास्ते साफ़  धुले धुले से थे!
बिजली के खम्बो की रौशनी में रास्ते और भी खूबसूरत लग रहे थे..
दोनों चुपचाप आगे बढ़ रहे थे..।
कभी कभी किसी के साथ होने का एहसास ही इतना खूबसूरत होता है कि उन पलों की ख़ामोशी भी बोलने लगती है।
रास्ते से गुजर रहे थे कि किसी चाय की टपरी पर चलता गाना उन दोनों के कानो में पड़ा और दोनों खुद में मुस्कुरा उठे…

चुप तुम रहो, चुप हम रहे
ख़ामोशी को ख़ामोशी से
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से
बात करने दो..
आँखों में खो जाये आँखें
बोले हाथ से हाथ
बाहों में छुप कर
साँसों से जैसे डोले रात
उँगलियों को उँगलियों से
मौसमों को शोखियों से
बात करने दो
चुप तुम रहो…

इस वक्त दोनों के मन में जो शहनाई बज रही थी,उसे  कुछ बोल कर, उस ख़ामोशी की गरिमा को ख़त्म करने  का दोनों का मन नही था ..
ऐसा ही कुछ माधव के साथ था..!

उसने अब खुद को किस्मत के भरोसे छोड़ दिया था..
वैसे भी अगर उसकी जगह डिंकी बीमार पड़ी होती तो क्या शादी के पहले वो डिंकी को छोड़कर शादी तोड़ देता?
नहीं ना!
वह पूरी तरह से डिंकी का ख्याल रखता और शादी करके उसका साथ निभाता। इस बार डिंकी की परीक्षा की बारी रहेगी।
वैसे उसे डिंकी पर पूरा भरोसा था।

जितने दिनों से उसे देख रहा था, वह समझ चुका था कि डिंकी धोखा देने वालों में से नहीं थी। उसने खुद को मना लिया था और फिर डॉक्टर ने भी तो कहा था की गोलियों के सेवन के बाद उसकी गांठ अपने आप थोड़ी कम हो जाएगी।
   इसके बाद सर्जरी करके उसे निकाला जा सकता है। ऐसा भी नहीं है कि उसके पास पैसों की कमी है। वह बड़े से बड़े डॉक्टर को दिखाएगा, जरूरत पड़ी तो अमेरिका भी चला जाएगा, लेकिन अपना इलाज जरूर करवाएगा।
उसे जिंदा रहना है, डिंकी के लिए।

डिंकी के साथ जीना है।
जिंदगी बहुत खूबसूरत है, उसे इस खूबसूरती को पीना है। वह अपने आप को तिल तिल मरते नहीं देखना चाहता। उसने साथ चल रही डिंकी की तरफ देखा, ठंडी-ठंडी हवाओं से उसके बाल इधर-उधर उङ रहे थे।

वह बीच-बीच में अपनी उंगलियों से बालों को संवार लिया करती थी। उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी। उसने आगे बढ़कर डिंकी का हाथ अपनी हथेली में थाम लिया। जैसे खुद को आश्वासन दे रहा हो कि जब तक यह हाथ मेरे हाथ में है, मुझे कुछ नहीं हो सकता…।


एक बीमार व्यक्ति को उससे मिलने आए लोगों से जो आश्वासन मिलता है, उससे उसके अंदर जीजिविषा कभी जिंदा नहीं रहती, बल्कि बहुत बार उसे लोगों से मिलने वाली सांत्वना कुरेदने लगती है। उसे खुद पर लोगों का तरस खाना पसंद नहीं आता, और कहीं ना कहीं वह इंसान इन शब्दों से टूटने लगता है…।

लेकिन जब कोई बीमार इंसान खुद को सांत्वना देने लगता है, खुद को आश्वासन देने लगता है, कि उस में  इस बीमारी से लड़ने की हिम्मत है, तब वह जरूर निराशा के बादलों से निकलकर आशा के सूरज को पा ही लेता है!
     बीमारी के वक्त उसे अपने करीबियों का अपने आसपास रहना पसंद आता है, जो उसके सबसे करीब हो!
     उनके ऊर्जावान शब्दों से उसके अंदर उर्जा जरूर भरती है, लेकिन हर आने जाने वाले की आंखों में दिखती सांत्वना उसे बार-बार अपनी कमजोरी की याद दिला कर गहरे दर्द में धकेलने का ही काम करती है…।

सामान्य लोग भले इस सोच के ना हो, लेकिन माधव इसी सोच का था।
उसे अपनी बीमारी के कारण खुद पर किसी का तरस खाना बिल्कुल नागवार था।
       और इसीलिए वह अपने घर वालों और डिंकी को अपनी बीमारी के बारे में अब तक नहीं बता पाया था। लेकिन आज उसके अंदर एक नई ऊर्जा भर गई थी। डिंकी के साथ ने उसे एक आस दे दी थी, जीवन का एक नया रास्ता दिखा दिया था..।

“क्या बात है अभी से हाथों में हाथ डाले चले जा रहे हैं !”

ये आवाज़ कानो में पड़ते ही वो दोनों चौंक उठे..
डिंकी को पीछे से गरिमा ने बाँहों में कस लिया।

“अरे गम्मो तू ?”

“हाँ फिर… मेरी गली में टहलेगी तो मैं ही मिलूंगी न..? वैसे अब तो ये तेरी गली भी हो गयी है..
क्यों जीजू ?”

गरिमा ने छेड़ कर माधव की तरफ देखा, वो खुल कर मुस्कुरा उठा..

“वो कौन सा गाना था.. आज से मेरी सारी गलियां तेरी हो गई, आज से तेरा घर मेरा हो गया..।”

“अच्छा गाना वाला छोड़िए, आप यह बताइए कि जूता छुपाई में हमें अच्छा मोटा माल मिलने वाला है या नहीं?”

माधव मुस्करा उठा।

“आप लोगों ने अपनी इतनी कीमती सहेली मेरे हवाले की है, इसके सामने तो सब छोटा है..।
जो चाहे ले लेना..।”

“अरे वाह इस बात पर फिर मुझे एक गाना याद आ गया   ….
  चाहे जो मांग लो, सब तुम्हारा है। हम दिल दे चुके सनम का..।
जीजू आपने देखी है वो मूवी? आपको पता है, हम सब मेरे ही रूम में बैठकर उस मूवी को देख रहे थे, और इस झल्ली ने इतने आंसू बहाये उस मूवी को देखते हुए कि क्या बताऊं?
आप की होने वाली बीवी बड़ी रोंदू है…।”

माधव बस मुस्कुरा कर रह गया..।

उसके मन पर सुबह से छाई हुई थकान अब पूरी तरह मिटने लगी थी। यह ठंडी हवा के झोंके, यह सुहानी सी शाम, डिंकी का साथ, उसकी सहेली का यूं छेड़ना, उसे लगने लगा था, जैसे वह दुनिया का सबसे किस्मत वाला आदमी है।
उसे लगने लगा था कि उसे यह बीमारी भी उसकी परीक्षा के लिए दी गई है। जिससे वह अपनी कठिनाइयों से उबर कर वापस नये जोश के साथ खड़ा हो सके..।

“लगता है आपको बस मुस्कुराना आता है, और अच्छी बात है जिंदगी भर आप दोनों ऐसे ही मुस्कुराते रहिएगा। चल डिंकी अब मैं जाती हूं ।
  वरना मम्मी सोचेगी दुकान तक सामान लेने गई थी, वापस लौटना भूल तो नही गई।”

डिंकी को एक बार गले लगा के गरिमा अपने घर चली गई।
     डिंकी और माधव वापस घर की तरफ बढ़ गए। डिंकी को नीचे से ही छोड़ कर माधव लौटने लगा तो डिंकी ने भी उसे ऊपर चलने को नहीं कहा।

जाने क्यों अब घर परिवार के सामने उसे माधव से बात करने में एक संकोच सा होने लगा था। वो आजकल की लड़की थी, लेकिन इन मामलो में जाने कैसे लाज शर्म ने उसे घेर लिया था !
   पता नहीं यह अजीब सा बदलाव उसमें कहां से आ गया था? उसका मन हुआ माधव के गले से लग जाए !
लेकिन अपने घर के ठीक सामने के रास्ते पर खड़े होकर इतना करने की उसकी हिम्मत नहीं हुई !

माधव ने मुस्कुरा कर डिंकी की आंखों की तरफ देखा और धीरे से उसके हाथों को पकड़ कर हिला दिया!
जैसे उससे विदा ले रहा हो।

क्रमशः

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Umita kushwaha
Umita kushwaha
6 months ago

बहुत दिनों से पढने को व्याकुल हो रही थी आज समय मिल ही गया
डिंपी का साथ पाकर सब ठीक हो ही जाएगा अगर दोनों ऐसे ही हमेशा साथ रहे तो पर सुलोचना जी को जब माधव के बारे में पता चलेगा तब उन का क्या रिएक्शन होगा bus यही सोचकर थोड़ी चिंता हो रही थी

Shanu singla
Shanu singla
7 months ago

💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

Nisha
Nisha
7 months ago

Pata nahi madhav sahi kar raha hai ya nahi par dil thoda swarthi ho gya hai madhav ka toh kya galat hai

Jagriti
Jagriti
7 months ago

Good one episode 👌 प्रेम में बड़ी शक्ति होती है ऐसा माना जाता है तो शायद माधव भी रिकवर कर जाए

Poonam Aggarwal
Poonam Aggarwal
8 months ago

Love ❤️ is great medicine 💊 of life supper pert

Rekhapradeepsrivastava,
Rekhapradeepsrivastava,
8 months ago

बहुत ही खूबसूरत भाग👌👌👌👌👌
डिंकी की इतनी केयर के बाद माधव का मन बदल गया, प्यार तो वो पहले ही बहुत करता था पर अब उसको लग रहा डिकी के साथ रहते हुए उसकी तबियत जल्द ही ठीक हो जाएगी और अब वो डिंकी से दूर नहीं होना चाहता।

Rubina Begum
Rubina Begum
8 months ago

ab ads nahi aa raha hai.

Arjun Singh Chauhan
Arjun Singh Chauhan
8 months ago

Superb 👌👌

Manu Verma
Manu Verma
8 months ago

😊बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻
एक बात तो अच्छी हुई माधव अब डिंकी को खुद से दूर करने का नहीं सोचेगा.. बस यही एक बात भी उसे अपनी बीमारी से लड़ने की ताकत देगी।
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।

Priya
Priya
8 months ago

Nice part story