अतिथि-60

अतिथि -60

   माधव डॉक्टर के सामने बैठा था, और डॉक्टर के माथे पर चिंता की लकीरे खींची थी..!

“डॉक्टर साहब, क्या कोई उपाय नहीं है ?”

“मैं उन्ही उपायों पर विचार कर रहा हूँ माधव !”

“सर्जरी तो हो सकती है न ?”

“असल में तुम्हारे ब्रेन के जिस हिस्से में वो गांठ दिख रही है, वहाँ पर सर्जरी सम्भव नही है !”

“लेकिन क्यों ?”

“क्यूंकि वो हिस्सा तुम्हारे तंत्रिका तंत्र से जुड़ा हुआ है, अगर सर्जरी कर के हमने उस गांठ को निकालने की कोशिश की तो इसमे तुम्हारी जान भी जा सकती है!”

“तो मतलब ? अब क्या कुछ नहीं हो सकता ?अरे कुछ तो उपाय होगा सर.. मैं ऐसे कैसे मर सकता हूँ ?”

“नहीं, ऐसा भी नहीं कि कुछ नहीं हो सकता..। दरअसल वो गांठ एक तंत्रीय जाल के भीतर बुरी तरह फँसी पड़ी है !अगर हम उसे निकालने के लिए जरा सा भी कट लगाते हैं,  तो आसपास का सारा तंतु जाल सक्रिय हो जायेगा और उसमे से रक्तस्त्राव शुरू हो जायेगा..।
और अगर ब्रेन का वो हिस्सा रप्चर हो गया तो  या तो तुम हमेशा के लिए पैरालाइज हो जाओगे या फिर ?”

“समझ गया, मतलब कोई ऑप्शन नहीं है !”

“एक ऑप्शन तो है, लेकिन वो पूरी तरह सफल होगा या नहीं, वो नहीं मालूम ! मैं तुम्हे कुछ दवाएं दूंगा,उन दवाओं को लेते रहो.. उन दवाओं से गांठ धीरे धीरे छोटी होती जाएगी, और ये भी सम्भव है कि अभी जहाँ फँसी है, वहाँ से हट कर बाहर निकल आये, और तब हम इसे निकाल सके !”

“इस सब मे कितना वक्त लगेगा !”

“कुछ कहा नहीं जा सकता.. महीना भी लग सकता है, और पूरा साल भी..।
ये भी हो सकता है कि, ये तुम पर काम ही न करे !”

“ओह्ह !! मतलब उम्मीद तो मुझे रखनी ही नहीं है !”

“उम्मीद पे दुनिया कायम है ! अगर पॉजिटिव सोचोगे तो सभी कुछ पॉजिटिव होगा !”

माधव परेशान सा खड़ा हो गया..।
उसके दिल दिमाग पर अब कहीं कोई आस नहीं बाकी थी..।
इतनी देर में कई बार डिंकी का फ़ोन बज बज कर बंद हो गया..।
लेकिन माधव ने नहीं उठाया..।

वो भारी कदमो से अपने कमरे की तरफ बढ़ गया..। उसके माता पिता कानपुर वापस लौट चुके थे, अब अपने फ़्लैट पर वो अकेला ही था..।
पांच दिन बाद उसकी शादी थी, और उसके अभिभावक उसी शादी की तैयारियों के लिए घर जा चुके थे.. दो दिन बाद उसे भी घर जाना था !
अपने फ़्लैट पर पहुँच कर वो पलंग पर निढाल पड़ गया..।

क्या जैसी तबियत उसकी है ऐसे में उसे शादी करनी चाहिए ?
उसके जीवन का अब कोई भरोसा नहीं है ! ऐसे में क्या डिंकी के साथ शादी करना डिंकी के साथ ज्यादती नहीं होगी ?
लेकिन डिंकी को अपनी तबियत के बारे मे बताने का कोई फायदा भी तो नहीं है ! वो समझने की जगह और उल्टा उसकी परेशानी बढ़ा जाएगी..।

अभी ही जब उसने अपने दोस्त के बहाने उससे बात रखी, तब भी वो व्यवहारिकता की जगह कोरी भावुकता मे बह कर जवाब दे गयी!

वो भयंकर मूर्ख लड़की है..।
उससे भावुकता से अधिक किसी बात की उम्मीद नहीं की जा सकती।
अगर उसे अपनी स्थिति से परिचित करवा भी दिया तो वो अपना सर्वस्व निछावर कर के भी उसका साथ नहीं छोड़ेगी..।
लेकिन ऐसा करना उसके खुद के भविष्य के लिए उचित नहीं होगा..।

अब उसे ही कोई कठोर निर्णय लेना होगा !!

अगर डिंकी अपनी भावुकता में उसे नहीं छोड़ सकती तो वो अपनी भावुकता में उससे अलग तो हो सकता है !

यही सब सोचते सोचते उसकी आंखे बंद हो गयी और वो गहरी नींद में सो गया..।
कुछ देर बाद दरवाजे पर आवाज़ होने से उसकी नींद खुली, उसने दरवाजा खोला सामने हैरान परेशान डिंकी खड़ी थी..।

माधव उसे देखता खड़ा था और वो भरी भरी आँखों से माधव को देख रही थी..

“कहाँ थे आप..? कब से आपको फ़ोन लगा रही थी !”

माधव को एक तरफ ठेलती वो निसंकोच भीतर चली आयी..।
माधव की सारी सोच डिंकी की देख कर धराशायी हो गयी..
उसने सोचा था डिंकी से शादी तोड़ने की बात करेगा, लेकिन नहीं कर पाया।
उल्टा चुपचाप आकर उसके पास बैठ गया…।
डिंकी ने लपक कर अपनी हथेली माधव के माथे पर रख दी..।

“तबियत तो ठीक है न आपकी ? आप सो रहे थे क्या ?”

“हाँ जरा नींद सी लग गयी थी !”

“अरे आपको तो सच में बुखार है !” वो उठ कर इधर उधर कुछ ढूंढने लगी

“क्या ढूंढ रही हो ?”

“थर्मामीटर.. कहाँ  रखा है ?”

डिंकी ने ऐसी स्वभाविकता से पूछा, जैसे माधव अपनी सारी गृहस्थी वहाँ जमाये बैठा हो..

“नहीं है !”

“नहीं है ? लेकिन क्यों ? अच्छा रुकिए, मैं पड़ोस से मांग लाती हूँ !”

“अरे नहीं.. रुको.. मैं किसी पडोसी को जानता तक नहीं..। “

माधव की बात अनसुनी सी करती डिंकी कमरे का दरवाज़ा खोल बाहर निकल गयी, और कुछ ही देर में वो थर्मामीटर लिए हाज़िर हो गयी।

“आपके बगल वाले फ़्लैट में मिसेस चंद्रा रहती है.. उनके दो बच्चे हैं छोटे छोटे, इसलिए उनके घर पर ये सब कुछ मौजूद है.. उन्होंने मुझे थर्मामीटर ही नहीं,बुखार की दवा भी दे दी..।”

उत्साह से डिंकी ने अपनी गुलाबी सी हथेली माधव के सामने फैला दी…।

माधव को ये सब कुछ इतना अच्छा लग रहा था कि कुछ समय पहले का उसका दुःख अब उड़न छू हो चुका था..।

अगर आपके आसपास प्रेम हो तो तो हर फ़िक्र भी बेफिक्र होकर उड़ जाती है। हर गम की धूप पर मुहब्बत का साया मौजूद हो जाता है, और प्यार करने वाला अपनी परेशानियों से लड़ने का जोखिम उठा पाता है..।

ऐसा ही कुछ माधव को लग रहा था !

डिंकी ने आकर माधव का मुहं खुलवाया और थर्मोमीटर इसके मुहं में ठूंस कर जाने क्या क्या समेट कर रसोई में चली गयी..

वो मुहं में थर्मामीटर दबाये कसमसाता बैठा था कि उसकी बीप की आवाज़ के साथ वो वापस चमत्कार सी प्रकट हो गयी।

किसी पुरखिन की तरह उसने थर्मामीटर हाथ में लिया और उसमे आयी रिकॉर्डिंग देखने लगी..

“ये देखिये, बुखार है आपको.. हमने तो हाथ लगाते ही जान लिया था! कुछ खाया है सुबह से ?”

माधव ने न में गर्दन हिला दी..

“बस यही आदत अच्छी नहीं लगती.. क्या ज़रूरत है इतनी मेहनत करने की, कि खाने का वक्त न मिले.. !अब चुपचाप यहाँ बैठना, मैं अभी आयी.. !”

उसे दादी अम्मा की तरह डाँट लगा कर वो वापस रसोई में घुस गयी..
कुछ देर में एक बड़ी सी ट्रे में अलग अलग तरह की कुछ कटोरियाँ सजाये वो वापस चली आयी..
एक प्लेट में दो तीन अच्छी तरह सिन्की हुई ब्रेड थी, जिस पर उसने बटर लगा दिया था..।

एक बाउल में प्याज़ टमाटर से छौंक कर बनी मैगी रखी थी, और बड़ी सी कप में सांवली सी रंगत वाली मीठी सी खुशबु से लबरेज कड़क चाय थी..।

इतना सब देख कर ही माधव की भूख जाग गयी..

” ये सब कब बना लिया ?”

“बस अभी अभी.. इतना बनाने में वक्त थोड़े न लगता है !” डिंकी ने नूडल्स का कटोरा उठा कर माधव के हाथ में पकड़ा दिया..
पहला कौर खाते ही माधव के चेहरे पर मुस्कान चली आयी..
मैगी कभी इतनी भी स्वादिष्ट बन सकती है उसने सोचा न था..।

“क्या हुआ.. पसंद नहीं आयी ?”

“हम्म पसंद आयी, लेकिन मैगी में जीरा कौन डालता है भाई ?”

“मैं डालती हूँ.. मम्मी ने सिखाया है तेल गर्म होते ही जीरा डालना सबसे पहले..।
तो डाल दिया ! टेस्ट ख़राब लग रहा क्या ?”

“नहीं नहीं.. टेस्ट अच्छा लग रहा.. !”

माधव ने एक ब्रेड उठा कर उसका एक टुकड़ा काटा और चाय का प्याला मुहं से लगा लिया !”

डिंकी भी अपनी चाय का प्याला सुड़कते हुए माधव को बड़े प्यार से सब कुछ खाते देखती रही..
सुबह से माधव के फ़ोन न उठाने से जो बेचैनी उसे घेरे बैठी थी, अब जैसे गायब हो चुकी थी..

सुकून से उसने अपना प्याला मुहं से लगा लिया !

क्रमशः

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Ankita
Ankita
1 year ago

मेरी तो ये समझ नहीं आता कि सप्ताह भर में शादी की तैयारी कैसे हो जाती है …

कहानी बहुत रोचक लग रही है

अब गांव जा रहे हैं दोनों… जरूर कुछ होने वाला है

Jyoti
Jyoti
1 year ago

Very nyc part 👌

Jagriti
Jagriti
1 year ago

Sab kuch bta do Madhav ji jo hoga dekh lenge😊

Umita kushwaha
Umita kushwaha
1 year ago

माधव कठोर जी करके जो जो कुछ सोच कर बैठा था पिंकी से बोलने के लिए वह कुछ नहीं बोल पाया यह सब कर और लगता भी नहीं है कि वह बेरुखी दिखा पाएगा रिंकी से पता नहीं क्यों वह यह सोच रहा है कि वह उससे अलग हो सकता है देखा नहीं कैसे अचानक से ही आ गई और सारी परेशानियों का हल निकाल दिया
मुझे लगता है अन्य परेशानियों में ही परेशानी का हाल भी छुपा है बड़ी से बड़ी परेशानी होने के बावजूद अगर दोनों साथ है तो वह बड़ी आसानी से उस पार पा लेंगे

Shakunt chauhan
Shakunt chauhan
1 year ago

बेसब्री से आगे की अतिथि कहानी का इंतजार

Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Wonderful part ♥️❤️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️❤️❤️❤️❤️❤️❤️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️

Nisha
Nisha
1 year ago

Aisi sthiti me madhav ko sach bata dena chahiye baki dinki ka fasla aur uski kismat

Hetal shah
Hetal shah
1 year ago

🤗👍 good part.Madhav naam hai jo Shree Krishn ka pryay hai.prem ke bare mae unse adhik kise pata hai.toh phir apane prem par bharosa kariye.Dinki ko bimari ke bare mae bata dijiye. Prem se badi positivity aur kya ho sakati hai. Medicine khayiye aur healthy ho jayiye….

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Dinki ka prem hi madhav ki dava hogi

Ganeshi chauhan
Ganeshi chauhan
1 year ago

चाय पीते वक्त का सुकून इनकी जिंदगी में सदा बना रहे
क्या कथा नायक और नायिका को सदा परेशानियों से जूझना पड़ता है…
जैसे ही कुछ समय की खुशियां मिलती हैं फिर कोई न कोई परेशानी साथ में आ जाती है…
खैर जीवन तो संघर्ष का ही प्रयाय माना गया है… डिंकी और माधव के जीवन में भी जल्दी ही सब अच्छा हो जाए और दवाई से ही माधव के ब्रेन की गांठ गल जाए