अतिथि-57

अतिथि -57

कितना सुकून था इस मिलन में..
ऐसे जैसे सदियों से तपती धरती पर किसी ने बारिश की बुँदे गिरायी हो!
जैसे जन्मों से प्यासे चातक को स्वाति नक्षत्र की बून्द मिल गयी हो, जैसे किसी गरीब के हाथ खजाना लग गया हो..।
सारे संसार का सुख एक तरफ और प्रेयसी का सामीप्य एक तरफ !

माधव को यों लग रहा था जैसे वह अपनी सारी तकलीफ इस आलिंगन में बंधने के बाद भूल गया हो। कुछ देर तक दोनों ऐसे ही खड़े रहे, जैसे एक दूसरे की धड़कनें सुन रहे हो, कुछ देर बाद डिंकी ही माधव से अलग हो गई..।

“ऊपर चलिए ना, मम्मी पापा जाने क्या सोच रहे होंगे..?”

“अब तो हमें परमिट मिल गया है, अब हम पर कोई चालान नहीं कटेगा।”

मुस्कुरा कर माधव ने डिंकी की आंखों में देखा, डिंकी की मासूम आंखें माधव पर ही टिकी हुई थी। कितना मासूम चेहरा था उसका।
   जैसे दुनिया के अनदेखी अनजानी राहों से वह बिल्कुल अनजान है..।

क्या डिंकी का साथ उसे उसकी मुसीबत से बाहर निकाल सकेगा? लेकिन डिंकी उसका साथ देना भी चाहती है, या नहीं? यह भी तो जानना होगा। वरना वह कैसे उस पर खुद को थोप दे..?
कहीं ऐसा ना हो कि इतनी छोटी सी उम्र में डिंकी उसकी जिम्मेदारी उठाकर अपनी कमर ही तोड़ बैठे..
क्या वो वाकई उसकी जिम्मेदारी उठाने लायक है..?

” डिंकी तुमसे बातें करने का मन था, ढेर सारी बातें। क्या हम कहीं बाहर चल सकते हैं कॉफी पीने..?”

डिंकी कोई जवाब दे पाती उसके पहले ही उसकी बालकनी से सुलोचना उन दोनों को बुला बैठी।

“माधव ऊपर चले आइए ना, चाय चढ़ा रही हूं..।”

” नहीं आंटी, अभी नहीं आ पाऊंगा। अगर आप इजाजत दें, तो क्या डिंकी को कुछ देर के लिए अपने साथ बाहर लेकर जा सकता हूं। जल्दी वापस लाकर छोड़ दूंगा..।”

सुलोचना इजाजत देना तो नहीं चाहती थी, लेकिन उसके हाथ में अब कुछ नहीं था। उसने धीरे से गर्दन हिला दी..।

माधव तुरंत डिंकी को साथ लिए कॉफी शॉप की तरफ निकल गया..।
कुछ देर बाद दोनों एक दूसरे के सामने बैठे थे…।

“कहिये, आप क्या कहना चाहते थे ?”

“पहले तुम बताओ, आज का दिन कैसा रहा ?”

“ठीक था, आप बताइये न.. क्या कहना चाहते थे ?”

“ऐसा कुछ खास नहीं, एक दोस्त हैं उसके बारे में कुछ बताना था !”

“कौन दोस्त ? अमित ?”

“नहीं नहीं.. अमित नहीं, एक दूसरा दोस्त है..। उसी के साथ था आज।
इसलिए तुमसे बात नहीं हो पायी, वरना तुम्हारे साथ शॉपिंग के लिए भी जाता !”

“हम्म.. आपको बहुत मिस कर रही थी !”

“जानता हूँ माँ का स्वभाव थोड़ा तीखा सा है, लेकिन एक बात कहूं डिंकी, जैसे जैसे उन्हें जानती जाओगी तुम्हारा डर और संकोच खुद ब खुद दूर होता जायेगा.. वो स्वभाव की बहुत सरल है..।
वो बिलकुल नारियल की तरह है, उपर से कठोर और अंदर से मुलायम, एकदम मक्खन मलाई..।”

“हम्म.. यही बताना चाहते थे क्या ?” डिंकी ने खीझ कर पूछा। उसकी नाराजगी उसके चेहरे पर दिखने लगी थी, लेकिन फ़िलहाल माधव का ध्यान नहीं था..।

“नहीं… कल जिस दोस्त के साथ था, उसके बारे में कुछ बताना था..।”

“बताइये न.. इतना सोचना क्या उसमें ?”

“हम्म.. मेरा एक दोस्त है..।”

“क्या नाम है उसका ?”

“हम्म.. कुणाल.. !”

“ओके.. क्या हुआ उसे ?”

“कुणाल एक लड़की को बहुत पसंद करता है, उस लड़की का नाम है रौशनी ! लेकिन वो आज तक उससे कह नहीं पाया..
असल में दोनों साथ ही काम करते हैं..। कुणाल बहुत समय से सोच रहा था कि रौशनी को अपने दिल की बात बता दे। लेकिन कभी उसे मौका ही नहीं मिल पाया और फिर अचानक एक दिन उसे पता चला कि उसे जानलेवा गंभीर बीमारी हो गयी है।
उसके बाद वो एकदम टूट सा गया, हर तरफ से निराश लाचार सा कुणाल अब ये नहीं समझ पा रहा कि उसे क्या करना चाहिए ?

“क्यों इसमें क्या सोचना ? बीमारी है तो इलाज भी है.. तुरंत इलाज शुरू करवाना चाहिए कुणाल को !”

डिंकी की मासूमियत पर माधव मुस्कुरा कर नीचे देखने लगा.. उसने आंखे उठायी और डिंकी की तरफ देखते हुए आगे बोलना जारी रखा..

“डिंकी.. कुणाल ने आज तक रोशनी से अपने दिल की बात नहीं कही थी, और अब वह यह सोच रहा है कि रोशनी को अपने दिल की बात बतानी चाहिए भी या नहीं। क्योंकि अब कुणाल को यह लग रहा है कि उसकी जिंदगी के कुछ ही दिन बचे हैं, तो ऐसे में अगर वह रोशनी से अपने दिल की बात कहता है, और रौशनी उसे स्वीकार कर लेती है, तो रौशनी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। क्योंकि शायद कुणाल जिंदगी भर उसका साथ ना दे पाए। और इसीलिए कुणाल अब यह सोच रहा है कि उसे रौशनी से अपने दिल की बात नहीं करनी चाहिए। बल्कि उसे अपने रास्ते अलग कर लेना चाहिए, जिससे रौशनी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाए, और कुणाल को खोने का दुख उसे ना देखना पड़े।”

तुम उस बारे में क्या सोचती हो ? कुणाल को क्या करना चाहिए ?”

धड़कते दिल से ये सवाल पूछ कर माधव उसके जवाब का इंतज़ार करने लगा..

क्रमशः

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Umita kushwaha
Umita kushwaha
9 months ago

हम लड़कियां बहुत सरल स्वभाव की होती है मन कुछ मंजरी जैसी भी होती है पर डिकी जैसे स्वभाव की लड़कियां कभी भी अपने प्रेमी या होने वाले पति के लिए पैसा कभी नहीं सोच सकती जैसे लड़के लड़कियों के बारे में सोच रखते हैं कि यह नहीं तो और कोई सही एक बार जैसे मन मंदिर में बिठा लिया तो बिठा लिया फिर उसका स्थान कोई नहीं ले पता है मुझे पता है कि डिकी का क्या जवाब होगा वह यही रहेगी की सब ठीक हो जाएगा और उसे लड़के को अपने मन की बात उसे लड़की को Bata देनी चाहिए
अब आगे जो होगा सो देखा जाएगा सारी मुसीबत मिलकर निपट लेंगे पर ऐसे मन में बातें रखने से ना दिनकी खुश रहेगी और ना ही माधव

Nisha
Nisha
9 months ago

Is sawal ka jawab toh hame bhi janna hai

Aruna
Aruna
9 months ago

👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏

Jagriti
Jagriti
9 months ago

ये क्या हो रहा है माधव डिकी इतनी मुसीबत से मिले और अब बीमारी कही अलग नहीं कर दे

Deepa verma
Deepa verma
9 months ago

मुझे पूरा विश्वास है कि डिंकी का जवाब सकारात्मक ही होगा।जो कि माधव बाबू में भी सकारात्मकता का देगा।

Poonam Aggarwal
Poonam Aggarwal
9 months ago

😭😭😭😭

Savita Agarwal
Savita Agarwal
9 months ago

Madhav Dinky ke sath galaya lag gya ,bahut sukun Mila,apnaya man ki baat kisi dost kitarah kahani ki tarah bata diya Ab Dinky ka kya jabab hoga,seeing in the next part.

Manu Verma
Manu Verma
9 months ago

मेरा सारा दुःख पिगल जाता है…
इक तेरे जरा गले लगा लेने से…
बेजान शरीर फिर से ज़िंदा हो उठता है..,
इक तेरे यूँ संभाल लेने से…!!

माधव तो एक पल के लिए अपना दुःख, अपनी बीमारी सब भूल गया हाय ये सुकून की झप्पी।
सुलक्षणा का स्वभाव माधव बहुत अच्छे से जानता है हो सकता है डिंकी जैसा सुलक्षणा को समझ रही वैसी वो ना हो या फिर माधव ही डिंकी को. दिलासा दे रहा हो 🤷🏻‍♀️चलो जो भी है वो आगे चलकर पता चल ही जायगा इस समय तो माधव की टेंशन हो रही वो कैसे डिंकी को अपनी बीमारी के बारे में बताएगा ओह्ह तो तो माधव डिंकी से डायरेक्ट बात नहीं करके कहानी गढ़ रहा चलो कोई ना देखते है अब डिंकी क्या कहती है।
अगले भाग का इंतजार रहेगा 🙏🏻।

Shanu singla
Shanu singla
9 months ago

☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️

Rashmi
Rashmi
9 months ago

Ab humari nanhi si dinki kya jawab degi yahi dekhna hai