अतिथि-52

अतिथि -52

  माधव नीचे ही डिंकी का इंतज़ार कर रहा था…
डिंकी के आते ही उसने गाड़ी तेज़ी से बढ़ा दी.. न डिंकी ने पूछा कि वो लोग कहाँ जा रहे, और न माधव ने कुछ बताया..।

फ़िलहाल तो दोनों थाने की तरफ जा रहे थे, लेकिन डिंकी के मन में रह रह कर अपनी होने वाली सास का दुर्व्यवहार घूम रहा था। क्या उसे इस बारे में माधव से बात कर लेनी चाहिए ? लेकिन पता नहीं माधव क्या सोचेगा ?
माधव के मन में भी ऐसा ही कुछ चल रहा था! वो खुल कर डिंकी से बात कर लेना चाहता था, लेकिन कहाँ से शुरू करे, इसी कश्मकश में वो भी चुप था.. कुछ देर में ही वो लोग थाने के सामने थे..

“यहाँ ? यहाँ कौन है ?” डिंकी ने पूछ लिया और माधव ने दीपक से हुई सारी बातचीत डिंकी को बता दी..।
वो दोनों अंदर पहुंचे तब तक में दीपक रूबी को भी हाथ पैर जोड़ कर वहाँ ले आया था… उन सबकी गवाही के बाद पुलिस ने योगिता पर कोई केस लगाए बिना ही उसे छोड़ दिया..।

   योगिता बाहर आ गयी थी, लेकिन अब किससे क्या कहे उसकी समझ के बाहर था, वो सबसे पहले रूबी के पास पहुँच गयी। 
योगिता और रूबी किसी ज़माने में क्लासमेट रह चुके थे, बस इसी बात का फायदा आज तक योगिता उठाती चली आ रही थी, लेकिन आज रूबी से रहा नहीं गया..

“देखो योगिता, तुम्हारे पति के कहने पर मैंने तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया, लेकिन अब मैं तुम्हें अपने यहाँ काम पर तो नहीं रख पाऊँगी !”

योगिता चुपचाप सुन रही थी, उसके पास और कोई उपाय भी नहीं था..

“योगिता तुम्हे अपना सच्चा दोस्त माना था मैंने, और उसी लिहाज से तुम्हे कई बार भूषण के बारे में अलर्ट करने की कोशिश भी की थी। लेकिन तुम्हारी आँखों पर उसकी मुहब्बत का चश्मा चढ़ा था, इसलिए तुम्हें हम सब की बातें फिजूल लगा करती थी..।
सौ बार तुम्हे कहा था वो आदमी किसी का सगा नहीं है, वो अपने स्वार्थ के लिए किसी हद तक भी गिर सकता है। लेकिन तुम मानती नहीं थी..।
    तुम्हें लगता था वो सिर्फ तुमसे प्यार करता है.. उसके चक्कर में तुमने अपनी हंसती खेलती जिंदगी उजाड़ दी..।
इतना अच्छा समझदार और सुलझा हुआ साथ देने वाला पति, इतनी प्यारी सी बेटी, सब तबाह कर लिया तुमने.. सिर्फ अपनी बेवकूफी में !
योगिता, तुमसे ये बेवकूफी हुई कैसे ? मैंने कभी नहीं सोचा था तुम ऐसी निकलोगी..?”

इसके बाद भी रूबी बहुत कुछ कहती रही, लेकिन उसके कहने का सार यही था कि योगिता ने अपने विवाहेत्तर संबंधो के कारण अपनी सुखी गृहस्थी चौपट कर ली..
दीपक जो योगिता के बदले स्वभाव को बहुत दिन से जान कर अनदेखा कर रहा था, का सारा संदेह आज समाप्त हो गया..।

हालाँकि उसने योगिता की भूषण से होती बातचीत तो पहले ही सुन ली थी, लेकिन तब भी उसने खुद को दिलासा देने की एक नाकाम सी कोशिश की थी, कि उसे शायद ग़लतफ़हमी हो गयी है। लेकिन आज रूबी के मुहं से सारा सच सच सुन वो सकते में आ गया था..

किसी भी पुरुष के लिए उसका पौरुषत्व सबसे अहम होता है। वो अपनी पत्नी के लिए जूझ कर हर काम इसलिए करता है। अपनी सारी ज़िन्दगी वो अपने हर काम से अपनी पत्नी पर अपने पौरुषत्व की ही छाप छोड़ना चाहता है, और इसीलिये कहीं न कहीं वो आदेशात्मक और शासक प्रवृत्ति का हो बैठता है..।

      पुरुष के अहम को संतुष्टि ऐसे ही मिलती है.. लेकिन उसके अहम की संतुष्टि का सबसे बड़ा हिस्सा उसके अपने कमरे के निजी पल ही होते हैं, और अगर किसी कोने से छिप कर कोई दस्यु वहाँ दाखिल हो जाये, तो पुरुष का अहम कांच के टुकड़े सा गिर कर चूर चूर हो जाता है। और वापस उसे किसी सूरत में नहीं जोड़ा जा सकता..।

ऐसा ही कुछ दीपक के साथ हुआ था !!

उसे खुद में या अपने कार्यों में ऐसी कोई कमी नजर नहीं आ रही थी, जिसके कारण योगिता ने उसे जीवन का सबसे बड़ा धोखा दिया था..
क्या अब वो इस औरत के साथ एक छत के नीचे रह पायेगा..?
दीपक उठा और चुपचाप बाहर निकल गया। उसने पुलिस थाने की सारी औपचारिकताएं पूरी कर दी थी, और अब उसके वहाँ ठहरने का कोई औचित्य नहीं था !

  रूबी और करुणा भी अपना काम निपटा कर वहाँ से निकल गए.. बाहर जाते वक्त रूबी पल भर को रुकी और पलट कर योगिता तक चली आयी..

“तुम्हे घर छोड़ दूँ ?”

योगिता ने न में गर्दन हिला दी..

“मैं  चली जाउंगी !” जितनी फजीहत उसकी हो चुकी थी, अब उसके बाद रूबी से घर जाने तक की लिफ़्ट का एहसान भी वो नहीं लेना चाहती थी..।

माधव और डिंकी वहाँ थे.. डिंकी के मन में अब भी योगिता के लिए सहानुभूति थी। क्यूंकि वह खुद कुछ समय पहले इस दर्द को झेल चुकी थी..।
थाने में बैठ कर खुद का सम्मान जाते देखना कैसा लगता है, ये वो जानती थी इसलिए न चाहते हुए भी उसे योगिता के लिए बुरा लग रहा था..।
वो उसके पास चली आयी..

“चलिए हम लोग आपको छोड़ देते हैं !”

योगिता ने नजर भर कर डिंकी की तरफ देखा..

“तुम दोनों एक साथ कैसे ?” योगिता खुद को रोक नहीं पायी, और पूछ बैठी..

“हमारी शादी होने वाली है, ये माधव हैं !”

योगिता के चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान चली आयी, तो इसका मतलब वो भूषण और अनुराधा के बारे में जो सोचती थी वो गलत था..।

अनुराधा तो माधव के साथ शादी करने जा रही है। इसका मतलब भूषण ने उसे इसके बारे में जो जो कहा वो सब भी झूठा और गलत ही था..।

हे भगवान वो कितनी मूर्ख थी, भूषण के चक्कर में बावली हुई वो कठपुतली की तरह नाच रही थी।
आज उसे खुद पर सबसे ज़्यादा गुस्सा आ रहा था..

योगिता ने धीरे से डिंकी के माथे पर हाथ रख दिया।

“खूब खुश रहो !” धीमे कदमो से वो बाहर निकल गयी..

वो वहाँ से निकल तो गयी थी, लेकिन अब जाना कहाँ था ये उसे मालूम नहीं था..।

दीपक उसे वहाँ अकेले छोड़ कर घर चला गया था। मतलब वो इसे साथ नहीं ले जाना चाहता था..।
पुलिस थाने आकर उसने, उसे बचा कर अपने पतिधर्म का पालन कर दिया था। लेकिन अब घर वापस ले जाने की उसकी कोई खास मंशा नहीं थी, ये उसने जाहिर कर दिया..।
और वैसे भी अब उसकी खुद भी उस घर में लौटने की हिम्मत नहीं थी..।

थके थके उदास कदमों से वो चल पड़ी।

माधव और डिंकी भी वहाँ से निकल गए..।

“डिंकी.. कहीं चल कर कॉफी पी ले ?”

“हम्म.. !” डिंकी का मन अब भी उदास था, भले ही योगिता ने उसके साथ बहुत गलत किया था, बावजूद उसे इतने दुःख और परेशानी में देख कर डिंकी खुश नहीं हो पा रही थी..।

कुछ देर में ही वो दोनों गोमती के तट पर बने एक पार्क में पहुँच गए, वहाँ नदी किनारे छोटा सा एक कैफे था..
दोनों वहीँ जा बैठे !
माधव ने दोनों के लिए कॉफी मंगवा ली..

“क्या हुआ, कुछ परेशान लग रही हो ?”

“नहीं.. ऐसा तो कुछ नहीं.. अच्छा माधव सुनिए… “

“हाँ बोलो !”

एकदम से उससे पूछते पूछते रह गयी डिंकी..
डिंकी के मन में माधव की माँ की बताई हुई बात घूमने लगी…
उसे लगा यही समय है जब वो माधव से सब पूछ ले ? क्यों उसकी माँ ने उसके लिए ऐसा बोला.. ?
वो पूछने ही वाली थी कि उसका फ़ोन बजने लगा..
उसकी माँ का फ़ोन था !
अपने मन की बात मन में ही रख उसने फ़ोन उठा लिया !

क्रमशः

 




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Umita kushwaha
Umita kushwaha
9 months ago

दीपक के मन की व्यथा बहुत अच्छे से समझ सकती हूं क्योंकि भले ही वह एक उदार और नेक पुरुष हो पर अपने ऊपर इतने बड़े धोखे को कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता😔😔😔
अपनी पत्नी का किसी और पर आए मर्द के साथ विवाह हेटर संबंध कोई भी इंसान बर्दाश्त क्यों करना चाहेगा इसलिए वह योग्यता को छोड़कर चला गया योगिता ने न सिर्फ रूबी अपने पति बल्कि अपनी बेटी के साथ भी बहुत बड़ा धोखा किया है और उसे धोखे के परिणाम स्वरूप आज वह अकेली होकर😕😕😕 रह गई है अनुराधा एक बेहद समझदार और suljhi हुई लड़की है और इसीलिए उसे योग्यता की इस दशा पर दया भी आ रही है पर योग्यता के कर्मों की सजा तो उसे मिलनी ही है और जब तक पूरी भरपाई नहीं हो जाती वह इसी आत्मग्लानि में जलती रहेगी😟😟😟😔😔😔😣😣😣😢😢😢
अब आगे देखना है की योग्यता का क्या होता है वह कहां जाएगी और केसे अपने कर्मों की माफी मांगेगी
भाग बेहद रोमांचित करने वाला है और इतनी रोचक भाग लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया🙏🙏🙏🙏

Kanchan Choudhary
Kanchan Choudhary
9 months ago

Yogita ke kiye ka bhugtan ho gaya sab ki nazro se gir kar

Poonam Aggarwal
Poonam Aggarwal
9 months ago

☹️☹️☹️☹️☹️

Geeta Prasad
Geeta Prasad
9 months ago

Yogita ko syd ab Deepak apnae,ya fr apni beti k liye sb bhool bhi jae,or Yogita ko maaf kr de…
Dinki ,Madhav ko sab bta bhi paegi ya nahi…syd Madhav apni Ma ka nature janta ho or jaanbujh kar anjaan bnta ho..dekhte h age kya hota h ..
Nice part

Pallavi Saxena
Pallavi Saxena
9 months ago

सबकी बातें मन में ही रह जाती है और कन्फ्यूजन हो जाता है फिर। । 🤪

Veena
Veena
9 months ago

Excellent outstanding and fantastic part

विनोद यादव
विनोद यादव
9 months ago

Nice part 👌👌👌👌

Jagruti
Jagruti
9 months ago

Nice part, yogita Dipak se mafi mag le to sayad vo mafi dede …

Mukesh Duhan
Mukesh Duhan
9 months ago

Nice ji

Hetal shah
Hetal shah
9 months ago

🤗👍nice part.