
जीवनसाथी -3 भाग -142
आभास और शोवन के जाने के बाद परी बहुत देर तक चुप बैठी रह गयी.. उसे नहीं लगा था कि अचानक ऐसा कुछ हो जायेगा…
उसका जीवन आज तक बहुत शांत और सरल बीता था..
जीवन में कठिनाई या परेशानी क्या होती है, यह परी ने कभी नहीं जाना था।
बचपन से अपनी शर्तों पर जीती आयी थी, बल्कि सही शब्दों में कहें तो उसे कभी कोई शर्त रखने की भी जरूरत नहीं पड़ी थी।
उसके मन में जो बात आती, उसके माता-पिता पहले ही पूरी कर देते थे। अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी वह, और महल की सबसे प्यारी और अकेली राजकुमारी, इसीलिए वह सब की लाडली थी…।
रानी रूपा का बहुत मन था कि उनकी एक बेटी हो जाए, लेकिन हर्ष के बाद उनकी तबीयत जरा नासाज रहने लगी थी, जिसके कारण युवराज सा ने दूसरी प्रेगनेंसी के लिए साफ मना कर दिया था।
बांसुरी ने भी शौर्य के बाद दूसरे बच्चे के लिए कभी सोचा ही नहीं…।
रेखा- विराज अपनी उलझनों में लगे रहे, उनसे तो यश के होने की भी उम्मीद नहीं थी..।
लेकिन जया के समय रूपा ने बहुत मन्नतें की थीं कि अब एक कन्या उनके घर आंगन उतर आये..।
जया की प्रेग्नेंसी भी आसान नहीं थी। उसके ब्याह के छह सात साल बाद उसे गर्भ ठहरा था..।
तरह तरह के इलाज, झाड़फूंक के बाद जब वो हर तरफ से नाउम्मीद हो चुकी थी, तब अचानक ही उसका गर्भ ठहर गया..।
उस वक्त पिया ने उसे कहा भी था कि ये बड़ी प्रीशियस पेग्नेंसी है, एक तरह से चमत्कार हुआ है, और उसके बाद परी का जन्म हुआ था..।
बड़े लाड़ से रूपा ने ही उसका नाम पर्णिका रखा था…
परियों सी सुंदर उस बच्ची को सबने परी कह क़र पुकारना शुरू कर दिया था…।
सबकी हथेलियों पर पलती परी उस महल की सोन चिरैया थी, उसकी इच्छाएं आकांक्षाये उसके मन में आने के पहले पूरी होती थी..।
बस इसीलिए उसे कभी लगा ही नहीं कि शोवन की बात पर उसे अपनी इच्छा प्रकट करने की ज़रूरत पड़ेगी..।
बस इसलिए आज तक वो खुद और शोवन में गुम थी.. लेकिन आज अचानक उसकी ज़िंदगी ने मोड ले लिया था।
और वो एक ऐसे रास्ते पर आ खड़ी हुई थी, जिधर से उसे किस तरफ मुड़ना है, ये ही समझ नहीं आ रहा था..
देर तक सोचते सोचते उसे नींद आ गयी..।
अगली सुबह वो अपने दोस्तों से मिलने निकल गयी..
वो सारे लोग एक साथ बैठे थे।
अब तक हर्ष को भी परी की सगाई की खबर मिल चुकी थी ! वो भी स्तब्ध था !
लेकिन महल के कायदो के सामने वो भी लाचार था..।
इस वक्त वहाँ हर्ष मीठी और यश के साथ परी बैठी थी..
सभी अपनी अपनी सोच में गुम थे..
तभी धनुष वहाँ चला आया..
“क्या हुआ, आप सब ऐसे क्यों बैठे हो ?”
हर्ष ने धनुष की तरफ देखा और उसे सारी बात बता दी.. धनुष पल भर के लिए सोच में पड़ गया
“ऐसा कैसे हो सकता है ? भैया तो इतना सीधा है कि अपने हक के लिए भी नहीं बोलने वाला ! अब जो करना है परी तुम्हे ही करना होगा !”
“ऊँहुँ.. कल वाले शोवन को देखने के बाद नहीं लगता कि मैं खुद भी शोवन को पूरी तरह जान पायी हूँ !”
परी की ये बात सुन कर सब उसे देखने लगे..
‘”मतलब ? कहना क्या चाहती हो तुम ?” हर्ष ने पूछा..
परी मुस्कुरा कर कुछ कहती, उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगा..।
फ़ोन महल से उसकी माँ का था.. परी ने फ़ोन उठा लिया..
“क्या हुआ मॉम ?”
“तुम कहाँ हो परी ?”
” क्यों क्या हुआ मॉम ?”
” हम बस यह जानना चाहते हैं कि तुम इस वक्त कहां हो?”
” हम अपने दोस्तों से मिलने आए हुए थे, हर्ष भाई और यश भी साथ ही हैं। बताइए क्या हुआ?”
” परी आज सुबह आभास अपने होटल के रूम से निकलकर जॉगिंग के लिए जा रहे थे। तब उनका एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया है।
उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। हम सब वहीं जा रहे हैं। तुम भी हॉस्पिटल आ जाओ।”
” क्या ? अब आप मुझे भी अस्पताल ले जाएंगी मॉम? लेकिन…?”
” लेकिन वेकिन कुछ नहीं परी। अगर तुम साथ नहीं चलोगी तो आभास और उसके मॉम डैड को अच्छा नहीं लगेगा। वैसे भी तुम उनके घर की होने वाली बहू हो। अगर उन लोगों ने तुम्हारे बारे में पूछ लिया तो हम कोई जवाब भी नहीं दे पाएंगे।
आखिर उनसे क्या बहाना करेंगे कि परी हमारे साथ क्यों नहीं आई है। क्योंकि वह अपने दोस्तों के साथ घूम रही थी।”
” मॉम! क्या सच में हमारा आना जरूरी है?”
” हां बेटा, बहुत जरूरी है! वरना हम खुद तुम्हें नहीं बोलते ।”
“इट्स ओके ।” बोल कर परी ने फोन रखा और अपने दोस्तों की तरफ देखने लगी।
उसकी फोन की बातचीत सुनकर सबको आधी बात तो समझ में आ ही गई थी, बाकी आधी बात परी ने बता दी।
हर्ष भी अपनी जगह से खड़ा हो गया।
” चलो मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूं।”
” अरे नहीं हर्ष भाई, आप रहने दीजिए ना। हम चले जाएंगे।”
हर्ष ने परी की तरफ देखा
“आर यू श्योर परी?”
” आप परेशान मत होइए, हम चले जाएंगे।”
परी निकलने को थी कि धनुष भी उसके साथ खड़ा हो गया।
” आप बैठिए हर्ष, मैं परी के साथ हूं..।”
धनुष और परी वहाँ से हॉस्पिटल के लिए निकल गये। उनके अस्पताल पहुंचने तक में महल से परी के माता-पिता के साथ महारानी रूपा भी अस्पताल पहुंच चुकी थी। वह सब एक साथ ही अंदर की तरफ बढ़ गये।
इमरजेंसी केयर यूनिट के ठीक सामने आभास के माता-पिता उन्हें दिख गए। आभास के पिता इधर से उधर टहल रहे थे, जबकि उसकी मां एक कुर्सी पर बैठी अपनी हथेलियां आपस में रगड़ कर अपनी चिंता को कम करने की कोशिश कर रही थी। परी की मां को देखते ही उनके चेहरे पर और भी ज्यादा चिंता उमड़ आयी..
“देखिये न जया सा ये क्या हो गया ?”
“बाई सा अभी अभी हमे मालूम चला और हम सब यहाँ दौड़े चले आये.. क्या हुआ है कुंवर सा को.. ?
क्या बहुत चोट लग गयी ? किससे टकरा गए ? हुआ क्या आखिर ?”
जया के सवालों को सुन आभास की मां और भी ज्यादा परेशान नजर आने लगी। रूपा ने आगे बढ़कर उनके कंधों पर हाथ रख दिया।
” आप परेशान मत होइए, यह बहुत बड़ा अस्पताल है और यहां हमारी बहुत खास डॉक्टर पिया काम करती है। उनके रहते हुए कभी किसी को भी कुछ नहीं हो सकता। आभास को भी शायद वही देख रही होंगी। हम अभी उनसे मिलकर आते हैं।”
उसी वक्त शोवन उधर से गुजरा, उसने महल के लोगों को देखा और झुक कर उनका अभिवादन करने के बाद उस कमरे में भीतर चला गया, जहां आभास को रखा गया था।
शोवन को देखकर परी को भी जरा सी हिम्मत आ गए..।
वह बाकियों की नजर बचाते हुए उस कमरे की तरफ बढ़ने लगी। इसी बीच रूपा ने भी आभास की मां से आभास का हाल-चाल पूछते हुए पूरी दुर्घटना की जानकारी लेनी चाही। आभास की माँ ने अपने सुनहरे जरी के बेल बूटे वाले पर्स से एक रेशमी रुमाल निकला और अपने रूखे सूखे आंसुओं को पोंछने का उपक्रम करने लगी।
” क्या बताएं महारानी सा , आभास रोज की तरह सुबह-सुबह जॉगिंग के लिए निकला था, लेकिन हमें क्या पता था कि ऐसा अनर्थ हो जाएगा।”
” लेकिन हुआ क्या है, वह तो बताइए?”
” वह जॉगिंग के लिए जा रहा था कि कोई गली का कुत्ता पीछे पड़ गया और आभास को काट लिया।”
यह सुनकर कुछ देर के लिए जया और रूपा दोनों सन्न रह गए ।
जिस ढंग से यह बात महल में पहुंचाई गई थी, उन दोनों को लगा था कि किसी बड़ी गाड़ी से आभास टकरा गया होगा ।
लेकिन कुत्ते के काटने की बात उन दोनों को जरा और सहज कर गई।
“आपने पता किया, कुत्ता पालतू था या स्ट्रीट डॉग था?”
रूपा ने उन से सवाल कर दिया।
” डॉक्टर, हमें कुछ नहीं पता ।
आभास की मां ने अपना जवाब दे दिया, अब तक परी दरवाज़े पर ठिठकी उनकी बातचीत सुन रही थी..।
कुत्ते ने काट दिया ये सुन कर उसे हंसी आ गयी..
वह बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी छुपाती हुई कमरे के अंदर चली गई।
एक पलंग पर लेटा आभास अपने हाव-भाव और मुद्रा से बड़ा परेशान और बीमार सा दिखने की कोशिश कर रहा था।
” क्या हुआ आभास जी, हमने सुना आपको कुत्ते ने काट दिया है ।”
अबकी बार अपनी बात कह कर परी हल्के से मुस्कुरा उठी।
” इस बात पर आप हंस रही है प्रिंसेस। आपको पता है अगर कुत्ता पागल हो तो हमें रेबीज भी हो सकता है। चौदह इंजेक्शन लगते हैं..।”
वहीं खड़ा शोवन जो नर्स को इस वक्त इंजेक्शन के बारे में ही जानकारी दे रहा था बोल पड़ा
“अब 14 इंजेक्शन की जरूरत नही है, सिर्फ पांच लगते हैं..।”
“अच्छा कम हो गए क्या? लगते तो पेट में ही है ना।
और यह बहुत खतरनाक होता है। अगर रेबीज के इंजेक्शन नहीं लगाओ ना, तो इंसान पागल हो सकता है उसकी मौत भी हो सकती है..।”
“और अगर कुत्ता पागल न हो तो.. ?”
परी पूछ बैठी.. ।
“अरे हमे क्या मालूम कि वो पागल था या नहीं ? हमे तो लगा कोई पागल कुत्ता ही है जो जबरदस्ती हमे काट खाने को आया है..।”
शोवन को घूरते हुए आभास ने कहा और उसकी निगाहों का तीर पकड़ कर परी शोवन तक पहुँच गयी..।
अच्छा तो इशारों इशारों में आभास, शोवन को जलील करने के लिए उसे पागल कुत्ता कह रहा था।
परी की नजरे शोवन पर टिक गई थ। लेकिन शोवन के चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं थे। परी धीमे से चलते हुए शोवन के बगल में जाकर खड़ी हो गई।
” क्या नर्स को इंजेक्शन लगाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं?”
परी ने धीरे से पूछा ।
शोवन ने नीचे देखते हुए ना में गर्दन हिला दी।
“सिस्टर जी आप मेडिकल वार्ड के पेशेंट नंबर 2 की मेडिसिन प्रिपेयर कीजिए, मैं आकर देखता हूं।
यहां का सब कुछ मैं देख लूंगा। आप जाइए।”
सिस्टर ने “ओके डॉक्टर” कहा और शोभन की आज्ञा का पालन करते हुए उस कमरे से बाहर निकल गई।
” तो क्या आप इस इंजेक्शन लगाएंगे?”
परी के पूछने पर शोवन ने परी की तरफ देखा।
” लेकिन जिंदगी बचाने वाला नहीं, जिंदगी से मुक्त करने वाला।”
शोवन की गहरी आंखें देखकर परी भी पल भर के लिए कांप कर रह गई।
उसने धीरे से शोवन का हाथ पकड़ लिया।
” क्या कर रहे हो? ये जो भी करने जा रहे हो ,यह इंजेक्शन,ये सही नही है।”
परी कुछ और कहती, उसके पहले शोवन ने अपने दूसरे हाथ की उंगली परी के होठों पर रख दी।
” तुम चुप रहो, मैं मेरे हिसाब से निपट लूंगा।”
” हम सारा मामला सुलझा लेंगे। हम घर पर कह देंगे कि हमें उससे शादी नहीं करनी।
हम तुमसे प्यार करते हैं, और तुमसे ही शादी करेंगे।”
शोवन अपनी गहरी आंखों से परी की आंखों में झांक रहा था।
” तुम में सच में इतनी हिम्मत है परी?”
” तुम हमसे ये सवाल कर रहे हो? हम तो तुमसे पूछते हैं, कि तुम में कितनी हिम्मत है क्या? तुम हमारे परिवार के सामने खड़े होकर हमारा हाथ मांग सकते हो?”
शोवन ने परी की तरफ देखा, हाथ में पकड़ रखे इंजेक्शन को उसने सामने की टेबल पर रखा और परी का हाथ पकड़ कर उसे कमरे से बाहर निकालने लगा।
आभास बड़ी देर से उन दोनों को देख रहा था। शोवन की पीठट आभास की तरफ थी, इसलिए उसे ठीक से समझ में तो नहीं आ रहा था कि यह दोनों क्या बात कर रहे हैं? लेकिन वह अंदाजा लगा सकता था शोवन और परी किस बारे में बात कर रहे।
उन्हें बाहर जाते देख वह चीख उठा।
” अरे मेरा तो इलाज करते जाइए डॉक्टर साहब। वरना कहीं मुझे हाइड्रोफोबिया ना हो जाए।”
” कुछ नहीं होगा, आपको कुत्ते का दांत तक नहीं लगा है। और इसलिए उसका जहर फैलने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
दूसरी बात जिस कुत्ते ने आपको काटने की कोशिश की थी, वह किसी भंडारी फैमिली का पालतू कुत्ता था।
और जिसका वैक्सीनेशन पूरा हो चुका है। इसलिए अब आपको रेबीज होने की कोई संभावना नहीं है।”
अपनी बात पूरी कर शोवन परी का हाथ थामे वहां से बाहर निकल गया…।
क्रमशः

👍👍👍👍👍❤️❤️❤️I love this story 😍👌👌👌👌
Hi
बहुत अच्छी स्टोरी चल रही है ऐसा लगता है पार्ट खत्म ही न हो
हम्म्म, हमारा शर्मिला डॉक्टर तो बढ़ा तेज निकला… मज़ा आ गया आज का भाग पढ़कर अब देखते है शोवन और परी प्रेम कहानी कैसे मंजिल तक पहुंचती है।
खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻
परी ने शोवन से अपना डर कहा और शोवन ने एक्शन लिया
वाह
देखा जाए तो शोवन भी रॉयल ब्लड से ताल्लुक रखता है
परवरिश तो उसकी समर पिया ने ही की है
शानदार
Bol do showan yahi mauka hai warna jane aabhash pati ke sath apna rista todega ya nahi phir pari bhi kuch nahi kar sakegi.ye pariksha toh deni hi hogi tumhe
Such a wonderful love story
jung ke mahol main apki kahani pdh k shanti mili 3 br storry siron ki vajah se complete nahi hui aaj complete hui
Excellent part 👌🏻 wah Abhas ko aabhas bhi nahi hua ki kutte ke naam par woh bewakoof ban chuka hai 😂 Pari se sach bulvane ka yah tarika sahi laga hoga Shovan ko ki family ke samne pyar ka izhaar kar de aur undono ka rishta kubul ho jaye🤗