
जीवनसाथी -3 भाग -140
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भदोरिया अपनी ही चाल में उल्टा फंस गया और उसे अकरा में पुलिस पकड़ कर ले गई।
वहां से शौर्य और विक्रम वापस लंदन लौट आए।
इधर महल में राजकुमार हर्षवर्धन और मीठी की शादी की तैयारियों के बीच बांसुरी को रह रहकर शौर्य की याद सता रही थी, और आखिर उसने अपने राजा साहब को लंदन जाने के लिए मना लिया। बांसुरी और राजा लंदन के लिए निकल गए।
दूसरी तरफ शोवन का जन्मदिन मनाने के लिए परी ने अपनी पूरी गैंग के साथ मिलकर एक प्रैंक किया। जिसमें शोवन को उन सब ने परेशान कर दिया। परी के नजर ना आने पर कुछ देर बाद ही शोवन उठकर रेस्टोरेंट से बाहर निकल गया। लेकिन लिफ्ट में घुसते ही उसका सामना परी से हो गया।
वह दोनों एक दूसरे को देखकर खुश हो रहे थे कि तभी लिफ्ट में तीन अनजान लोग दाखिल हो गया। जिनमें से एक महिला और दो पुरुष थे।
आपस में हंसी ठिठोली करते परी और शोवन का ध्यान उन तीनों पर नहीं था। वह तीनों जैसे ही रेस्टोरेंट में दाखिल हुए, परी और शोवन वहां से निकल कर एक रोमांटिक लॉन्ग ड्राइव पर चले गए।
पूरा दिन घूम फिर कर परी जब महल वापस पहुंची, तो वही तीनों अंजान मेहमान उसका इंतजार कर रहे थे। वहां पहुंचने पर परी को मालूम चला कि यह तीनों विदेश में बसी कोई रॉयल फैमिली है, जो अपने बेटे के लिए एक भारतीय लड़की की तलाश में है, और उनकी तलाश परी पर जाकर पूरी हो चुकी है।
परी को जैसे ही यह मालूम चला कि यह लोग उसके रिश्ते के लिए आए हैं, वह परेशान हो उठी। लेकिन वह अपनी मां से शोवन के बारे में कुछ बात कर पाती, उसके पहले ही उन लोगों की बातचीत परी और आभास की शादी पर जाकर अटक गई।
अब आगे…
“परी जाओ बेटा, आभास को अपना गार्डन घुमा लाओ ?”
“गार्डन ?”
आंखे फाड़े परी अपनी माँ को देखने लगी, वो जो कहना चाहती थी वो कह नहीं पा रही थी..
आभास अपनी जगह पर खड़ा हो गया..
“आइये, चले ?”
उसने हाथ एक तरफ बढ़ा दिया, बिलकुल ही बिना मन के परी आगे बढ़ गयी..
कुछ देर में ही आभास और परी महल के गार्डन में थे। अभास ने परी की तरफ देखा और उससे सवाल कर दिया
“क्या हम पहले कहीं मिल चुके हैं ?”
पहचान तो परी भी उसे गई थी, लेकिन इस वक्त वह उससे किसी भी तरह की बात करने की इच्छुक नहीं थी। उसके दिल दिमाग पर शोवन बुरी तरह से छाया हुआ था। वह कुछ जवाब देती उसके पहले ही आभास वापस बोल पड़ा…
“लिफ्ट में आपके साथ जो लड़का था, आशा करते है कि वह आपका बॉयफ्रेंड नहीं था.. ।”
परी ने आभास की तरफ देखा, वह कुछ कह नहीं पा रही थी।
आभास वापस बोल पड़ा..
“हम समझ सकते हैं, इस उम्र में ऐसी गलतियां नादानियां संभव है। हम आपसे क्या उम्मीद करें, आपसे पहले हमारी जिंदगी में भी और लड़कियां थी।
हमारा भी एक कलरफुल पास्ट रह चुका है। लेकिन हम जानते हैं, हमारी जिंदगी में कुछ भी घटित हुआ हो, लेकिन शादी तो हमें अपने रॉयल ब्लड के कायदों के अनुसार ही करनी होती है।
हमारी भी बहुत सी गर्लफ्रेंड्स थी, लेकिन हमने पहले ही सबको क्लियर कर दिया था कि शादी तो हम किसी रॉयल ब्लू ब्लड से ही करेंगे, और बस वही उम्मीद आपसे भी है.. ।”
“आपके कहने का मतलब, मैं समझी नहीं.. ?”
परी ने आश्चर्य से आभास की तरफ देखा और उसने मुस्कुराकर कंधे उचका दिए..
“इसमें ना समझने वाली कौन सी बात है? हमने एक सिंपल सी बात कही है कि हमारी लाइफ में तुमसे पहले भी और लड़कियां थी। लेकिन उनमें से कोई भी रॉयल ब्लड नहीं थी, तो हमने उन लोगों से क्लियर कर दिया था कि हम उन से शादी नहीं कर सकते।
हमारी रिलेशनशिप जो भी होगी वह बस…इतनी ही रहेगी कि हम एक दूसरे को किसी बात के लिए ब्लेम ये फ्रेम नहीं करेंगे !”
” रिलेशनशिप कहां है? यह तो सौदा हुआ ना ?”
परी ने आभास से सवाल किया और आभास वापस कंधे उचका कर उसकी बात का जवाब देने लगा..।
“तो तुम्हें क्या लगता है हमने जिन लड़कियों से दोस्ती की, उन सब से शादी कर लेते?
जानते हैं, कोई भी पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता और एक ही लड़की में हर एक गुण मिल जाए यह भी तो जरूरी नहीं है..।”
“मतलब ?”
“क्या यार, इतनी भोली तो नहीं लग रही हो कि बार-बार एक ही बात का मतलब पूछ रही हो।
हम भी समझते हैं कि जो लिफ्ट में मिला था, वह तुम्हारा बॉयफ्रेंड ही था।
तुम दोनों को किस करते हुए देख लिया था हमने, पर हम किसी तरह का बवाल नहीं कर रहे हैं ! हम समझते हूं इतनी फ्रीडम तो हर एक रिश्ते में होनी चाहिए। पर देखो हम यह क्लियर कर देना चाहते हैं, हमारी शादी से पहले तुम जिस किसी के भी साथ रिलेशन में रही हो, जितनी भी लिमिट्स क्रॉस की हो, वह सब माफ़ है। लेकिन हमसे शादी के बाद तुम्हें बस हमारी होकर रहना होगा, बोलो मंजूर है..?”
एक ठंडी सी साँस भर कर परी कुछ कहने ही जा रही थी कि एक सहायिका उन लोगो तक भागती चली आयी..
“आप लोगो को अंदर बुलाया जा रहा है !”
“इतनी जल्दी ?” आभास पूछ बैठा
“जी हुकुम !”
सहायिका विनम्रता से झुक कर एक तरफ खड़ी हो गयी.
परी आभास के और कुछ कहने के पहले महल की तरफ बढ़ गयी..
“अरे रुको तो मैं भी साथ चल रहा हूँ.. ।”
वह दोनों तेज़ कदमो से महल में दाखिल हो गये..
महल मैं मौजूद हर किसी के चेहरे पर उल्लास नजर आ रहा था। सबसे ज्यादा खुश जया ही दिख रही थी। आज अपनी प्राणों से प्रिय बेटी के लिए बिल्कुल वैसा ही घर और वर मिल गया था जिसकी उसे चाह थी..।
“क्या हुआ मां साहब, ऐसे अचानक अपने बुला लिया?”
आभास ने अपनी मां से सवाल कर लिया और उसकी मां ने उसके पिता के फोन की स्क्रीन उसकी तरफ घुमा दे..
” तुम्हारी दादी साहब तुम दोनों को आशीर्वाद देना चाहती हैं। वह परी को देखना चाहती है, इसलिए तुम दोनों को हम लोगों ने वापस बुला लिया था।
परी इधर आओ, अपनी दादी साहब से भी आशीर्वाद ले लो..।”
परी को यह सब बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। लेकिन वह महल के कायदों को जानती थी। महल से बाहर के लोगों के सामने वह कोई भी ऐसी बात नहीं कर सकती थी, जिसके कारण महल के लोगों की नाक नीचे हो जाए ।
और बस इसीलिए चुपचाप वह सब कुछ सहन कर रही थी। अभी भी उसने आभास की माँ की बात मन ली और फ़ोन की स्क्रीन के सामने आकर उन्हें प्रणाम कर दिया..
आभास की दादी परी को देख कर बहुत खुश हो गयी..
“ये तो सच की परी है, हमें पर्णिका बहुत पसंद आयी..। अगर आभास को भी युवरानी पर्णिका पसंद है तो पर्णिका की ओली भर दीजियेगा !”
दादी साहब ने मुस्कुरा कर आभास की माँ को आदेश सा दिया और उन्होंने जैसी आपकी इच्छा कह कर परी की माँ को उनका आदेश सुना दिया..
आनन फानन में ही सारी तैयारियां की गई और महल की औरतों के सम्मुख परी की ओली डालने की रस्म की पूरी तैयारी कर दी गई।
रूपा तुरंत ही एक रेशमी चुनरी ले आई और परी को सर से ओढा कर एक तरफ बैठा दिया गया।
परी अपनी मां से कहना चाहती थी कि वह इतनी जल्दी इन सबके लिए तैयार नहीं है, लेकिन उसके कहने सुनने के लिए जया उसके पास मौजूद ही नहीं थी।
वह अपनी प्रसन्नता में इतनी मग्न थी कि उत्साह से इधर से उधर भागती जया ने एक बार भी पूरी निगाह से अपनी बेटी को नहीं देखा, वरना परी की आंखें ही उसे सब कुछ कह जाती…।
परी को महल में छोड़कर हर्ष और मीठी बाहर चले गए थे, इसलिए इस वक्त हर्ष भी वहां मौजूद नहीं था..।
कुल मिलाकर परी के आसपास ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था, जिससे कहकर वह इस वक्त के इस आयोजन को रोक सकती..
गुलाबी कुर्ते के ऊपर गुलाबी झिलमिल चुनरी में परी का चेहरा बिना किसी आभूषण के भी दमक रहा था, और उसका वह त्रुटिहीन सौंदर्य, परिहार परिवार को उसकी तरफ और भी ज्यादा खींच रहा था।
आभास की मां ने अपने साथ रखें कंगन निकाले और परी के आंचल में नारियल के साथ डाल दिए..।
कुछ फल मिठाइयां परी के आंचल में डालने के बाद उन्होंने इक्कीस लाख रुपए का चेक काट कर परी के आंचल में डाल दिया…
“कंगन से ओली करेंगे आप बाईसा?”
रूपा ने आभास की माँ से कहा और उन्होंने मुस्कुरा कर अपने गले में पहन रखी हीरो की दुलड़ी निकाल कर परी के आंचल में डाल दी..
“रानी सा, अब तो खुश है आप.. आपकी परी को सूखे कंगन बस नहीं डाले !”
“बाई सा हुकुम आपने गलत समझ लिया.. हम तो कहना चाह रहे थे आंचल में डालने की जगह कंगन आप अपनी होने वाली बहू को पहना दीजिए ,जिससे इसे हथकड़ी लग जाए ।
वरना यह हमारे घर की तितली है। दिन रात उड़ती फिरती है। हाथों में हथकड़ी डालेगी, तो थोड़ा महल में इसके कदम ठहरेंगे। वरना तो अभी सगाई हुई और यह पीछे से निकल पड़ी अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने।”
रूपा ने हंसते हुए कहा और खुद ही परी के आंचल से कंगन उठाकर आभास की मां के हाथ में पकड़ा दिया और उन्होंने मुस्कुरा कर उन चौड़े पांच पांच तोले के कंगनों को परी की नाजुक कलाई में ठोस दिया..।
पारी की आँखों में आंसू छलक आये..
आज तक उसे अपने राज परिवार के होने पर बहुत गर्व था, लेकिन आज वह अपने राज परिवार और वहां के कायदे कानून को लेकर दुख की गहराईयों में डूब गई।
आज उसे समझ में आ रहा था कि क्यों शौर्य महल के नियमों को अपने पैर के नीचे रखता है..।
क्यों शौर्य हर वक्त इन नियमों और कायदों की धज्जियां उड़ाता चला है…।
आज उसे अपनी लाचारगी पर तरस आ रहा था ।अगर वह महल के कायदों में बंधी नहीं होती और एक साधारण परिवार की साधारण बेटी होती, तो उठकर अपनी मां का हाथ पकड़ कर इस कमरे से बाहर निकल जाती और उन्हें शोवन के बारे में एक-एक बात बता देती।
तब हो सकता है, उसका इस तरह रोका नहीं किया जाता। लेकिन आज तो वह कुछ बोल ही नहीं पाई, और उसके सामने देखते ही देखे उसका संसार पल भर में बदल गया।
कुछ समय पहले जहां वह शोवन को अपने भीतर बाहर चारों तरफ बड़े प्यार से महसूस कर पा रही थी, वहीं अब उसके आसपास एक दूसरे ही परिवार का साया लिपट सा गया था।
उसके ना चाहने पर भी उसके कंधों पर एक अनचाहा बोझ लाद दिया गया था। उसके हाथों में परिहार परिवार की जिम्मेदारी, उनकी डोर बांध दी गई थी।
उसके सर पर उस अनजान परिवार की लाज की गठरी पटक दी गई थी, नहीं वह यह सब कुछ भी नहीं चाहती थी। लेकिन उस जैसी दिलेर और बातूनी लड़की की भी बोलती बंद हो गई थी।
और वह कुछ भी नहीं कर पाई थी… ।
उसकी ओली डलते ही वहां मौजूद सभी के चेहरे एक नए उल्लास और उत्साह में रंग गए थे। सब एक दूसरे को बधाइयां देने लगे।
रूपा ने तुरंत ही सबको खाने के कमरे में चलने का न्यौता दे दिया। कुछ देर बाद दोनों परिवार अति उत्साह के साथ एक साथ बैठे भोजन कर रहे थे।
रूपा की पार्टियों की वैसे भी धूम रहा करती थी।
आज भी उसने किसी तरह की कोई कमी नहीं रखी थी। परिहार परिवार खुशी से फूला नहीं समा रहा था और इन सब के बीच परी के ठीक बगल में बैठा आभास बीच-बीच में उसकी कलाई मसक कर उसे बार-बार इस बात का एहसास दिला रहा था कि अब वह उसकी हो चुकी है।
सभी खाने में मगन थे।
परी से एक निवाला भी खाया नहीं जा रहा था। तभी उसे अपने पैरों पर कुछ महसूस हुआ। उसने चौक कर नीचे देखा।
आभास अपने पैर के अंगूठे से उसके पैर के तलवे को धीरे-धीरे कुरेद रहा था।
परी के पूरे शरीर में सिहरन पैदा हो गई। उसने जोर से झटका दिया और अपने पांव को दूर कर लिया…
लेकिन तभी अचानक उसका सर घूम गया, और वो खुद को संभाल पाती, उसके पहले ही बेहोश होकर टेबल पर ही गिर पड़ी..
क्रमशः

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐
ये राजमहल वाले एक बार बच्चों से उनकी मर्जी क्यो नहीं पूछते है
अजनबियों को बुलाया और सीधा थोप दिया कि जी ये रिश्ता आपके लिए पसंद किया है
रूपा इतनी प्यारी और समझदार होकर भी क्यो बच्चों का मन नहीं टटोलती..
Finally itne intezar ke bad part mila… mam itna wait nahi karwaya kijie pls…ab ate h story per pari ke sath to bahut galat hua arrre kahan gay sabhi dost ao or aker bachao pari ko us tharki aabhas se
Very beautiful
😔😌😌 कोई भी राजसी बालक सहर्ष अपना जीवन साथी नहीं पाएगा क्योंकि सबके प्रेम राजसी लहू नहीं है।
☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️
Wow superb episode
Oh no ab ye kya ho gaya
Kya pari or shovan alag ho jayege
Nice part 👌👌👌👌👌👌👌👌
Excellent part 👏🏻 after so long anyways kahan ki pakad itni hi strong hai thank you 😊 again Pariki khushiy daav par lag cuki yh Rajghrane mai bachchoko puchte nahkya😐aur Hash health yeh hone ke baad dusre bachcho se to puchn chahie🤦♀️
Nyc part 👌