
अतिथि -45
माधव भवन में आ चुका था, लेकिन उसका मन अब भी डिंकी कि तरफ लगा हुआ था..
उसके पिता उसे समझाने के प्रयास में थे, लेकिन वो अभी किसी को कुछ भी बताने की हालत में नहीं था..
“माधव ये क्या हो गया बेटा.. ?हमने तो कभी नहीं सोचा था कि डिंकी ऐसा कुछ कर सकती है !”
“नहीं पापा डिंकी ने कुछ गलत नहीं किया है.. उसे फंसाया गया है !”
“लेकिन ये तुम कैसे कह सकते हो ? तुम जानते ही कितना हो उस लड़की को ! वैसे भी आजकल की लड़कियाँ पैसे कमाने के चक्कर में कुछ भी कर जाती है..।
आजकल की लाइफस्टाइल ही ऐसी है..।
अगर माता पिता के पास रूपये नहीं है, तो ये कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ बहुत बार खुद को बेच कर अपने शौक पूरे करने से भी पीछे नहीं हटती !”
अपनी माँ की ये बात सुन कर भी माधव ने अपने चेहरे को सौम्य बनाये रखा..
“आप मंजरी की माँ से कहिये की सगाई के लिये उसे लेकर बाहर आ जाये..
मुझे थोड़ा जल्दी है !”
सुलक्षणा ने एक नजर माधव को देखा और बाहर निकल गयी..।
वो तेज़ी से चल कर मंजरी के कमरे की तरफ बढ़ गयी, वहाँ मंजरी की सहेलियों का जमघट लगा हुआ था..
सुलक्षणा के आते ही सबकी हंसी ठिठोली एकदम से बंद हो गयी..
“तुम्हारी माँ कहाँ है मंजरी ?”
“वो… यहीं कहीं होंगी आंटी !”
मंजरी के हड़बड़ाए हुए से जवाब को सुन कर सुलक्षणा का पारा चढ़ गया।
कहाँ तो वो जल्द से जल्द इन दोनों की सगाई कर देना चाहती थी और कहाँ बेपरवाह सी विमला जाने कहाँ तफरीह कर रही थी..।
“आजकल तो माहौल ही बदल गया है, लड़की वाले ज़्यादा आराम से घूमते हैं, ज़्यादा परेशान लड़के वाले रहते हैं !”
खुद में बड़बड़ाती वो बाहर निकल ही रही थी कि अपनी सिल्क की साड़ी की सलवटे संभालती गर्मी से बेहाल हुई जाती विम्मो उनसे टकराते बची..
“ये लो, आप यहां कहाँ तफरीह काट रही, बेटी की सगाई नहीं करना है क्या ?”
“बस बस उन्ही तैयारियों में लगी हूँ !”
“जल्दी लेकर आइये मंजरी को.. बाहर सब इंतज़ार कर रहे !”
वो पलट कर जाने ही वाली थी कि सामने खड़े माधव से टकराते टकराते बची..
“माधव तुम यहाँ ?”
“आपको पापा बुला रहे हैं !”
माधव ने अपनी माँ की बात का जवाब दिया और कमरे में चला गया…।
मंजरी की सहेलियां और खुद मंजरी भी उसे देख हड़बड़ा गए.
मंजरी की एक सहेली ने उसे कुहनी मारी और धीरे से उसके कान के पास अपना मुहं ले आयी..
“दूल्हा बाबू को दुल्हन को देखने की कितनी जल्दी है !”
मंजरी ने उसे लाड़ भरी नजर से हंसने से रोका और माधव की तरफ देखने लगी..
“क्या आप सब बाहर जा सकते हैं, मुझे मंजरी से अकेले में कुछ बात करनी है !”
माधव की शांत गहरी सी आवाज़ सुन कर सब चुपचाप बाहर निकल गए !
सबके बाहर निकलते ही माधव ने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया..
कमरे के बाहर मौजूद सभी आश्चर्य से एक दूसरे को देखने लगे, उन सब की समझ से परे था कि आखिर सगाई के कुछ मिनट पहले दूल्हे को कौन सा ज़रूरी काम चला आया !
“मैं कैसे मान लूँ कि सगाई के बाद तुम मेरे साथ पुलिस थाने चलोगी ?”
“तुम्हारे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं है !”
“है, मैं हमेशा के लिए ये शहर और तुम्हे सब कुछ छोड़ कर कहाँ चला जाऊंगा ये कोई नहीं जान पायेगा !”
“अरे माधव मेरी जबान पर भरोसा रखो न.. मैं तुम्हे धोखा नहीं दूंगी !”
“मुझ जैसे लड़के पर जब तुम्हे भरोसा नहीं, तो मैं कैसे तुम पर भरोसा कर लूँ ?
“अच्छा बाबा मैं कसम खा कर कहती हूँ कि सगाई के तुरंत बाद मैं तुम्हारे साथ पुलिस स्टेशन चलूंगी और वहाँ पुलिस के सामने सारी सच्चाई बता दूंगी कि इस सब के पीछे किसका हाथ है..।
डिंकी बेकसूर है, उसे इस सब झमेलों में जानबूझ कर फंसाया गया है, ये वहाँ सबको बता दूंगी..।
अब खुश ! पक्का प्रॉमिस कर रही हूँ बाबा !”
“हम्म.. ! मेरा भरोसा तोड़ना मत !”
माधव ने दरवाज़ा खोला और बाहर निकल गया…
मंजरी हलके से मुस्कुरा कर रह गयी..
ये लड़का क्या मुझे इतनी झल्ली समझता है? एक बार सगाई हो जाये, उसके बाद डिंकी जाए भाड़ में..।
मुझे फंसाना चाहती थी न, अब पता लगा होगा उसे.. ।
अगर तुम किसी और के लिए गड्ढा खोदते हो तो खुद उसी में जाकर गिरते हो..। माधव को सब बता कर अपनी तरफ करना चाहती थी न, अब बैठी रह पुलिस स्टेशन में !
न मैं अभी आने वाली और न बाद में !
अच्छा किया जो भूषण ने इस लड़की को फंसा दिया..
मन ही मन सोचती डिंकी ने वहीँ रखा जूस का गिलास उठा कर मुहं से लगा लिया और धीरे धीरे सिप करने लगी…
वो इंतज़ार करने लगी कि कब उसे बाहर से पुकारा जायेगा, लेकिन एक एक कर घड़ियाँ बीतती जा रही थीं, पर उसके नाम की कोई पुकार नहीं हुई थी..।
वो अपना भारी भरकम लहंगा संभाले बाहर निकल आयी..।
बाहर न उसकी सहेलियां दिख रही थी न उसके घर वाले.. सब अचानक चले कहाँ गए, यही सोचती वो लिफ़्ट में घुस गयी..।
लिफ़्ट नीचे वाले माले पे आ रुकी..।
लिफ़्ट ठीक सगाई वाले हॉल के सामने खुलती थी.. वो बाहर निकली और आश्चर्य से इधर उधर देखती अंदर दाखिल हो गयी..।
पहले तय तो ये हुआ था कि दूल्हे और उसके परिवार के वहाँ आने के बाद जब दुल्हन को पुकारा जायेगा, तब वह बड़े नाजो अंदाज के साथ अपनी चार सहेलियों के साथ भवन में प्रवेश करेगी, उसकी चार सहेलियों जो उसके सिर पर एक गहरी सुनहरी बूटीदार चुनरी ताने हुए आगे आगे चलेंगी, लेकिन उसकी सोची इतनी फिल्मी एंट्री हो नहीं पाई, और वह इंतजार करती रह गई।
और इसलिए अधीर होकर वह खुद ही दोनों हाथों से अपना लहंगा संभाले वहां चली आई। लेकिन वहां कोई नजर ही नहीं आ रहा था।
सब से बड़ा आश्चर्य हुआ कि हाॅल में सिर्फ मेहमान नजर आ रहे थे।
मेजबान सारे के सारे कहां चले गए, वह अपनी सहेलियों को आवाज देती अंदर की तरफ बढ़ने लगी। लेकिन जैसे-जैसे वह अंदर बढ़ रही थी लोगों की नजरे उसे अजीब तरीके से घूर रही थी।
उसे समझ में नहीं आ रहा था कि मेहमान इस तरह क्यों उसे देख रहे हैं? वह आगे बढ़कर सबसे सामने की कुर्सियों तक पहुंच गई और आखिर उसे उसकी कुछ सहेलियां नजर आ गई।
वह तेजी से उनकी तरफ बढ़ चली।
“तुम सब यहां क्या कर रही हो मम्मी कहां है..?”
उनमें से एक ने स्टेज के जरा पीछे की तरफ इशारा कर दिया। वह खुद को संभालती तेजी से उस तरफ बढ़ चली।
वहां उसने जो देखा उसके होश फाख्ता हो गए।
उसकी मां सुलक्षणा आंटी के हाथों को पकड़ कर अपने माथे से लगाए रो रही थी।
” मम्मी क्या हुआ? तुम इस तरह रो क्यों रही हो?”
उसकी मम्मी ने उसे देखा और अपना माथा पीट लिया।
” मैं इस लड़की का क्या करूं? तूने क्या बोला ऐसा माधव को, जो माधव तमतमाते हुए तेरे कमरे से निकला और यहां से चला गया।”
” मैंने क्या बोला? मैंने तो ऐसा कुछ नहीं बोला? क्यों क्या हुआ? कहां गया माधव?”
एक साथ वह ढेर सारे सवाल कर बैठी।
“मुझे क्या पूछ रही है? खुद से पूछ। तेरे ही तो कमरे में गया था। तुम दोनों ने अकेले में क्या बात की, जो वह तेरे कमरे से निकलने के बाद सीधा इस हाल से निकल कर चला गया।”
मंजरी ने घबराकर अपनी होने वाली सास की तरफ देखा। वह अपने दोनों हाथ बांधे उसे भस्म कर देने वाली नजरों से देख रही थी।
” आंटी मैं कुछ नहीं जानती। हुआ क्या है, माधव कहां गया?”
” यही तो हम तुमसे जानना चाहते हैं कि तुम दोनों के बीच ऐसी कौन सी बात हुई, जो माधव बाहर आने के बाद सीधे यहां से बाहर चला गया।”
” ओह्ह, ओके, मुझे सोचने दीजिए।”
अपने आप को संभालने की कोशिश करती मंजरी अपने एक हाथ को सीने पर रखकर अपने आप को जैसे तसल्ली दे रही थी।
नहीं उसने मेरी बातों को रिकॉर्ड नहीं किया है। नहीं नहीं ये हो ही नहीं सकता। माधव इतनी दूर की नहीं सोच सकता। नहीं।
स्वगत भाषण करती मंजरी को यह भी ध्यान नहीं था कि उसके ठीक सामने उसकी और माधव की मां खड़ी थी।
” क्या रिकॉर्ड नहीं कर सकता? क्या कह दिया तूने? कुछ बताएगी भी?”
” मम्मी मुझे इसी वक्त पुलिस स्टेशन जाना होगा। डिंकी कहां है?”
विमला आश्चर्य से अपनी बेटी को देखने लगी। वह जानती थी की मंजरी डिंकी से प्यार करती है, लेकिन वह यह भी जानती थी की मंजरी डिंकी से कितना भी प्यार कर ले वह उससे कहीं ज्यादा अपने आप से प्यार करती है।
और आज भी उसने सुबह से अभी तक यह साबित कर ही दिया था कि उसे डिंकी के थाने में बैठने से भी ऐसा कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि वह अपनी सगाई रोक दे।
फिर अचानक उसे क्या हो गया?
” क्यों, तू थाने क्यों जाना चाहती है ?”
“मम्मी मुझे डिंकी से मिलना होगा। मैं जानती हूं माधव वही गया है। आंटी आप चलिए मेरे साथ, आप सब मेरा साथ देंगे, तभी माधव वापस आएंगे।”
” मुझे तो लगता है मेरा बेटा मेरे हाथ से निकल गया है।”
एक ठंडी सी आह भर कर माधव की मां ने कहा, लेकिन तब तक मंजरी अपनी मां का हाथ लगभग खींचते हुए मैरिज हॉल से बाहर की तरफ निकलने लगी।
उसने अपने ड्राइवर को आवाज़ लगाई और वह उनकी लंबी चौड़ी गाड़ी लिए हाजिर हो गया। डिंकी अपनी मां और माधव की मां को साथ लिए वहां से पुलिस स्टेशन की ओर निकल गई ।
उनके पीछे ही दूसरी गाड़ी में उन दोनों के पिता भी पुलिस स्टेशन के लिए निकल गये..।।
क्रमशः

माधव के कहने पर अगर रूबी मैडम कैसे वापस लेने को तैयार हो गई थी तो फिर बाद में को छुड़ाने की बजाय मंजरी के पास क्यों आया था सगाई के लिए हमें क्या हुआ कि वह उल्टे पाव लौट गया और वह आखिर गया कहां है।🤔🤔🤔🤔
चलो यह सब में अच्छा हुआ की सगाई टल गई और अब सगाई होगी भी नहीं की माधव कभी इस घटिया लड़की से सगाई करेगा ही नहीं पर माधव की मां का किरदार मुझे शुरू से ही थोड़ा अजीब लगा है ।😏😏😏
लड़की के बारे में वह ऐसा कैसे बोल सकते हैं जैसा उन्होंने पिंकी के बारे में माधव के सामने कहा मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और कहीं ऐसा तो नहीं कि यह प्यार दिखाने वाली सौतेली मां शायद सौतेली व्यवहार करने वाली ही है 😒😒😒😒😞😞😞😞
Ab ye sagayi hone se rahi.dinki bekasur hai toh madhav use chhuda hi lega.
मंजरी खुद को बहुत चंट समझ रही पर वो माधव को जानती नहीं क्या पता माधव ने अपना पासा फेंक दिया हो या फिर डिंकी की बॉस पुलिस स्टेशन पहुंच गई हो, या फिर मंजरी ने जो भी उसे कमरे में कहा वो उसने रिकॉड कर लिया हो। अब मंजरी ने जो कुआँ डिंकी के लिए खोदा था उसमे खुद ही गिर जायगी।
देखते है आगे क्या होता है 😊बहुत बेहतरीन भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻।
Lovely part 👍😍👌
ये बुद्धू सा दिखने वाला माधव बुद्धू तो बिल्कुल नहीं है। मंजरी जैसी लड़कियां जहां तक सोचती हैं ये उनसे कई गुना आगे की सोचता है। अब देखना ये है कि मंजरी थाने जाकर क्या करने वाली है।
Very beautiful part…. Isi ka to intzaar tha😄😄
Bahtareen n Lajabab, Madhav ne aise kya chal chali ki Majari khud hi police station pahuch gyi.
मुझे भी लगा आवाज रिकार्ड कर लेनी चाहिये
Very very nice part 👌👌
👌👌👌👌👌🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹
बहुत बहुत आभार आपका अपराजिता जी…
इस पार्ट के लिए
जल्दी पार्ट देने का शुक्रिया
गुत्थी सुलझी तो नहीं पर ये भाग पढ़ कर अच्छा लगा..
मुझे तो माधव की मम्मी का व्यवहार समझ नहीं आया
उन्होंने माधव को पागल घोषित कर रखा है और मंजरी से शादी भी करवाना चाहती हैं..
कहीं ऐसा तो नहीं कि उनको डिंकी का परिवार कम पैसे वाला लगता है और मंजरी का ज्यादा पैसे वाला इसलिए वे माधव की शादी मंजरी से करवाना चाहती हैं..
बहुत चालाक महिला हैं वे
अपनी डिंकी तो मासूम है बहुत
ये बात माधव भी जानता है… जरूर माधव ने मंजरी की बात रिकॉर्ड कर ली होगी…
रूबी को भी समझ आ जाएगी भूषण की चालाकी
इस दुनिया में कितनी तरह के लोग होते हैं
अब और ज्यादा उत्सुकता बढ़ गई है कि आगे क्या होगा
पुलिस स्टेशन में डिंकी कैसी होगी..कब छूटेगी
वैसे आपने सब कुछ अच्छा ही सोचा होगा