
अतिथि -44
माधव का दिमाग इस वक्त तेजी से काम कर रहा था, उसे डिंकी पर खुद से भी ज्यादा भरोसा था। वह जानता था कि डिंकी इस तरह का कोई काम नहीं कर सकती।
इसके साथ ही वह यह भी जानता था कि डिंकी हद से ज्यादा मासूम है। उसे समझ में आ गया था कि डिंकी को इस तरह फंसाने के पीछे भूषण का ही हाथ है।
लेकिन भूषण ने यह काम किसी प्रोफेशनल की मदद के बिना किया कैसे, बस इसी सोच में माधव का दिमाग घूम रहा था। उसने रूबी को वहां आने के लिए मना लिया था। वह फोन जेब में डालकर अंदर की तरफ जाने वाला था कि उसका फोन घरघराने लगा।
उसने देखा मंजरी का फोन आ रहा था।
उसने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया और अंदर की तरफ बढ़ने लगा, लेकिन मंजरी ने तुरंत दोबारा कॉल करना शुरू कर दिया। खीझ कर माधव में फोन उठा लिया।
” हां बोलो मंजरी।”
माधव की खासियत थी कि वह कितना भी परेशान हो लेकिन उसकी वाणी हमेशा संयमित रहती थी। उसकी धीर गंभीर और शांत आवाज सुनकर मंजरी उधर से तेजी से बोल पड़ी।
” तुम कहां चले गए हो? तुम्हें पता है ना आज हमारी सगाई है।”
माधव वैसे ही शांत बना रहा।
“हमारी सगाई नहीं हो रही मंजरी।”
” क्या बात कर रहे हो? पागल हो गए हो क्या? यहां मेहमान आने शुरू हो गए हैं।”
” तुम्हें इस वक्त मेहमानों की पड़ी है, तुम जानती हो तुम्हारी बहन को पुलिस वाले थाने उठा कर ले आए हैं?”
” हां, मैं जानती हूं और मैं खुद वहां आने की सोच रही थी। लेकिन मेरा यह कहना था कि पहले हमारी सगाई हो जाती, उसके बाद हम डिंकी की पूरी देखभाल कर लेंगे।”
” तब तक शाम हो जाएगी और अगर शाम तक डिंकी को थाने में रुकना पड़ा तो हम उसे छुड़ा नहीं पाएंगे।”
” तुम कहना क्या चाहते हो?”
” मुझे समझ में नहीं आ रहा मंजरी कि तुम वाकई डिंकी को अपनी बहन मानती भी हो या नहीं? तुम्हें जरा सा भी नहीं लग रहा कि डिंकी जैसी मासूम लड़की को पुलिस वाले थाने में बैठाए हुए हैं।
तुम जानती हो अगर मामला कोर्ट तक चला गया और कोर्ट में डिंकी की बेगुनाही आज साबित नहीं हो पाई, तो डिंकी को न्यायिक हिरासत में ले लिया जाएगा। यानी कि उसे जेल में रहना पड़ेगा और फिर कल शनिवार और उसके बाद रविवार यानी दो दिन की छुट्टी हो जाएगी।
सोमवार से पहले हम डिंकी की जमानत की अर्जी भी नहीं तैयार कर पाएंगे। तुम्हें समझ में आ भी रहा है कि मामला कितना गंभीर है?”
मंजरी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई।
” माधव तुमसे एक सवाल करना चाहती हूं, जवाब दोगे?”
” पूछो क्या पूछना चाहती हो?”
“तुम मुझसे सगाई करना चाहते हो या नहीं ?”
माधव हताश हो गया।
” मंजरी मैंने तुमसे पहले भी कहा था कि मैं तुमसे सगाई नहीं करना चाहता। मैं किसी और लड़की को पसंद करता हूं, और वह लड़की डिंकी है, यह तो अब तक तुम भी समझ गई होगी।”
मंजरी के ऊपर जैसे किसी ने बिजली गिरा दी। उसने आंखें बंद की और अपने आप को सयंत करने की कोशिश करने लगी। उसने कुछ कहने के लिए मुंह खोला ही था कि देखा माधव ने फोन काट दिया था।
मंजरी फोन एक तरफ रख इधर से उधर टहलने लगी। इस वक्त उसका दिमाग तेजी से काम कर रहा था। अब उसे समझ में आने लगा था कि डिंकी ने माधव के लिए ऐसा खत क्यों लिखा था। तो यह चल रहा था उसकी पीठ के पीछे।
एक तरफ तो उसकी सगाई तय हो गई थी, और उसकी सगाई तय होने के बावजूद उसकी पीठ पीछे उसका होने वाला दूल्हा और उसकी खुद की बहन अफेयर चलाए हुए थे। तो यह थी असली सच्चाई? इसलिए डिंकी नहीं चाहती थी कि उसकी और माधव की सगाई हो।
यह खेल खेला था उन दोनों ने।
तो ठीक है, अब वह भी इस खेल को इसी तरह आगे बढ़ाएगी।
आखिर है तो वह डिंकी की बड़ी बहन ही। अब वह देखेगी, कैसे माधव उससे सगाई नहीं करेगा।
भूषण ने भी उससे मिलकर अपना काम ही निकाला, उसकी तो कोई मदद नहीं की। उसने तुरंत माधव को वापस फोन लगा लिया। वह इस वक्त पुलिस के अधिकारी के सामने बैठा हुआ था, मंजरी का फोन देख उसने अपना फोन साइलेंट कर दिया। लेकिन तब तक पुलिस वाले ने देख लिया था कि उसका फोन बज रहा है।
पुलिस वाले ने उसे बाहर जाकर फोन उठाने का इशारा कर दिया।
माधव फोन लेकर बाहर चला आया।
” क्या है मंजरी? क्यों परेशान कर रही हो? तुम जानती हो ना इस वक्त मैं बहुत परेशान हूं।
मेरे लिए इस वक्त डिंकी का थाने से बाहर निकलना सबसे ज्यादा जरूरी है, और तुम्हें सगाई की पड़ी हुई है।”
“माधव एक मिनट मेरी बात सुनो, तुम्हारी डिंकी को बाहर निकालने में मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं।”
माधव फोन रखने ही वाला था, लेकिन मंजरी की इस बात को सुनकर वह रुक गया।
” कैसे? तुम क्या मदद कर सकती हो?”
” माधव मैं जानती हूं कि डिंकी को किसने फंसाया है? अगर मैं पुलिस थाने में आकर सारा सच बयां कर दूं तो डिंकी वहां से छूट जाएगी।”
” तो तुम किसका इंतजार कर रही हो? आओ और यहां सारी सच्चाई बताओ।”
” बिल्कुल बता दूंगी मेरी जान, लेकिन उसके लिए मेरी एक शर्त है।”
“शर्त?अपनी खुद की बहन को छुड़ाने के लिए तुम शर्त रख रही हो?”
“वह सब मैं नहीं जानती। माधव तुम बताओ कि तुम मेरी शर्त पूरी करोगे या नहीं?”
” बोलो क्या चाहती हो?”
” तुम इसी वक्त वापस आओ। मेरे साथ सगाई करो, और जैसे ही तुम मुझे अंगूठी पहना दोगे मैं वहां जाकर सब कुछ कबूल कर लूंगी।”
” सब कुछ कबूल कर लूंगी? मतलब डिंकी को फंसाने में तुम्हारा हाथ है?”
” नहीं डिंकी को फंसाने में मेरा कोई हाथ नहीं। लेकिन मैं यह भी नहीं कह सकती कि मैं बिल्कुल बेगुनाह हूं। अनजाने में ही सही लेकिन डिंकी के फंसने में कुछ ना कुछ मेरा भी हाथ था। मैं पुलिस के सामने सब कुछ बयां कर दूंगी। और डिंकी को फंसाने के पीछे जिसका हाथ है, वह सामने आ जाएगा, और डिंकी की बेगुनाही साबित हो जाएगी।
लेकिन इसके लिए तुम्हें यहाँ आकर मुझसे सगाई करनी होगी।”
” मंजरी तुम यहां आकर सच्चाई बता दो। डिंकी जैसे ही छूट जाएगी, मैं तुमसे सगाई कर लूंगा। “
“खुद को बहुत होशियार समझते हो? लेकिन मैं जानती हूं मिस्टर माधव तुम कोई छोटे-मोटे इंसान नहीं हो। बहुत तगड़ा और शानदार दिमाग पाया है तुमने। इसलिए जब तक तुम्हारी और मेरी सगाई नहीं हो जाती, मैं सच्चाई को किसी के सामने नहीं बोलने वाली।
यहां तक की तुम्हारे सामने भी नहीं। तुम्हारा क्या भरोसा कहीं तुम इस कॉल को रिकॉर्ड करके पुलिस वालों को सुना दो तो?
अभी तो मैंने बस यह बताया है कि मैं सब जानती हूं, लेकिन सच्चाई क्या है यह तब तक नहीं जान पाओगे मिस्टर माधव जब तक मेरे हाथ में अपने नाम की अंगूठी नहीं पहना दोगे। ऐसा करो शाम होने के पहले पहले यहां पहुंच मुझसे सगाई करो, और मुझे साथ लेकर पुलिस थाने चलो। “
“मंजरी तुम बात को समझने की कोशिश करो। मुझ पर विश्वास करो, मैं …मैं, कसम खा कर कहता हूं कि डिंकी के छूटते ही मैं तुमसे सगाई कर लूंगा।”
” नहीं, मुझे बिल्कुल भरोसा नहीं है। पहले आकर मुझसे सगाई करो, वरना तुम्हारी डिंकी सच में जेल में रात बिताने मजबूर हो जाएगी।
और यह ऐसा केस हैं कि इसमें तुम जमानत एक दिन में ले भी नहीं पाओगे। जानती हूं इस केस में उसे कोई लंबी सजा नहीं होगी, और तुम जमानत करके उसे निकलवा भी लोगे, लेकिन यह जो तीन-चार दिन उसे जेल में रहने का कष्ट भोगना पड़ेगा ना, वह बहुत ही कष्टकारी होगा। माधव! इसीलिए कह रही हूं, वक्त मत गंवाओ, अपनी डिंकी को सही सलामत थाने से बाहर निकलवाना चाहते हो, तो उल्टे पैर वापस लौट आओ।”
” मंजरी, मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम इस तरीके से…।”
” नहीं सोचा था ना? मैंने भी कहां सोचा था माधव कि मैं ऐसा भी कुछ कर सकती हूं। मैं तो वाकई बहुत सीधी सादी सच्ची सी लड़की थी। एक ऐसी लड़की जो सिर्फ एक अच्छे लड़के से शादी करके अपना घर बसाना चाहती है। लेकिन जब मैंने देखा कि वह अच्छा लड़का मेरे पीठ पीछे मेरी ही छोटी बहन के साथ क्या गुल खिला रहा है, तो मुझ पर क्या बीती…”
“तुम्हें जरूर कुछ गलतफहमी हुई है मंजरी! “
“चलो मान लिया मुझे गलतफहमी हुई है, लेकिन बातें खींचकर तुम वक्त बर्बाद क्यों कर रहे हो? शाम पांच के पहले अगर तुम डिंकी को बाहर नहीं निकाल सके तो उसे आज रात थाने में ही बितानी होगी। यह तुम्हीं ने कहा था ना? तो बस तुरंत वापस आ जाओ। क्योंकि सगाई होने में भी लगभग एक डेढ़ घंटे का समय तो लगेगा ही ना? तुम्हारा इंतजार कर रही हूं ।अब मैं तुम्हें फोन नहीं करूंगी, अब तुम मुझे फोन करोगे।”
इतना कहकर मुस्कुराते हुए मंजरी ने फोन काट दिया। उसकी आंखों में बदले की आग भड़क रही थी।
उसने वहीं पास पड़ा अपना गुलाबी बैग उठाया और उसे खोलकर उसके अंदर से वह खत निकाल लिया। जिसे पढ़ने के बाद उसके दिल दिमाग में डिंकी के प्रति नफरत पैदा हुई थी, और अजीब सी बात यह हुई थी कि जब जब वह इस खत को पढ़ती डिंकी के प्रति उसकी नफ़रत और बढ़ती ही चली जा रही थी। उसने वापस उसे खत पर एक बार अपनी उंगलियां चलाई और उसे मोड़कर वापस अपने पर्स में डाल दिया। उसकी आंख से दो बूंद आंसू ढुलक पङे।
उसी वक्त उसकी कुछ सहेलियां उसके कमरे में चली आई।
” मंजरी क्या चल रहा है? दूल्हे का कोई अता पता नहीं है। सारे रिश्तेदार भी इधर-उधर हो रहे हैं। तेरी सगाई होने भी वाली है या नहीं?”
तभी उसकी सहेलियों में से दूसरी बोल पड़ी।
” पहले तो तुम सिर्फ बॉयफ्रेंड बदला करती थी, अब तो लग रहा है सगाई के लिए लड़के भी बदलना शुरू कर दिया। वैसे भी तेरे चक्कर देखकर लगा करता था पता नहीं कौन तुझसे सगाई करेगा?”
तभी तीसरी बोल पड़ी।
” कहीं ऐसा तो नहीं कि तेरे दूल्हे को तेरे चक्करों के बारे में पता चल गया है, और वह सगाई छोड़कर चला गया।”
सारी की सारी लड़कियां जोर से हंसने लगी। यह सब मंजरी की खास सहेलियां थी और यह सब भी मंजरी के जैसी ही थी, इसलिए उन सब के लिए प्यार मोहब्बत भावनाएं यह सब सिर्फ फिल्मी बातें थी। सभी अपनी जिंदगी को जीना चाहती थी भरपूर तरीके से। उनके लिए किसी का दिल तोड़ना, किसी को धोखा देना कोई खास बड़ी बात नहीं थी। इन लड़कियों के लिए सिर्फ अपना जीवन महत्वपूर्ण था। अपनी खुशियां महत्वपूर्ण थी। सब हंसते हुए एक दूसरे पर गिरी पड़ी जा रही थी। उन सबको देखते हुए मंजरी ने एक गहरी सी सांस ली और खिड़की की तरफ देखती खड़ी रही।
मंजरी के कमरे की खिड़की से बाहर का सजा संवरा गेट नजर आ रहा था। जहां से मेहमान आते चले जा रहे थे। उसी वक्त मंजरी की मां कमरे में चली आई।
” पता नहीं क्या चल रहा है? मुझे घबराहट हो रही है। “
उन्होंने मंजरी का हाथ थाम कर कहा। मंजरी ने उनकी हथेली धीरे से दबा दी।
“डरिये मत, सब अच्छा ही होगा। जाइए सगाई की तैयारी कीजिए। आपका जंवाई चला आया है..।”
हड़बड़ा कर मंजरी की मां ने खिड़की से बाहर देखा। बड़ी सी गाड़ी अंदर दाखिल हुई और माधव उस गाड़ी से उतरकर तेज कदमों से चलता हुआ हाल की तरफ बढ़ गया।
पुलिस थाने में मंजरी के पास डिंकी के पिता और मां ही मौजूद रह गए थे, अपने पिता को साथ लेकर माधव वहां से निकल गया था…
डिंकी का फोन पुलिस वालों ने जप्त कर लिया था। वह एक तरफ कुर्सी में चुपचाप सर झुकाए बैठी थी। उससे अब भी लगातार पूछताछ हो रही थी। डिंकी की मां का रो-रो कर बुरा हाल था। उसे समझ नहीं आया कि अचानक माधव चला क्यों गया?
माधव उन लोगों के साथ था तो उसे थोड़ी राहत थी, कि शायद यह लड़का कुछ कर लेगा। लेकिन उसका अचानक वहां से चला जाना उन्हें और भी परेशानी में डूबा गया।
डिंकी के पिता वहां बैठे अपने उन परिचितों को फोन लगाने में व्यस्त थे जो उनकी मदद कर सकते थे। लेकिन कोई फोन उठाकर अपनी असमर्थता बता रहा था, तो कोई फोन उठा ही नहीं रहा था। इन्हीं सब परेशानियों में घिरे वह अपना सिर पकड़े बैठे थे। डिंकी ने जाते हुए माधव की तरफ देखा और हताशा से अपने चेहरे को दोनों हाथों में छुपा कर सिसक उठी। उसे मंजरी और माधव के बीच हुई बातचीत का कुछ भी पता नहीं था उसे समझ ही नहीं आया कि माधव अचानक उठकर क्यों चला गया…?
****
क्या होगा आगे? क्या माधव वाकई मंजरी से शादी कर लेगा? या माधव का तिकड़मी दिमाग वापस कोई हल निकाल लेगा?
देखेंगे अगले एपिसोड में..।
आप टिप्पणी कर कर यह बताइए कि आगे क्या होने वाला है?

भाग बेहद रोमाचकारी चला जा रहा है अब तो सीधा-सीधा मंजरी ने अपना घटियापन माधव के सामने दिखा दिया और यह भी कबूल कर लिया कि डिनकी के फंसने में थोड़ा बहुत ही सही पर उसका भी हाथ है और अब यह सब जानने के बाद मंजरी को यकीन है कि माधव उसका साथ देगा और उसे सगाई कर मिलेगा ।😡😡😡😡😏😏😏😏
माना कि डिकी के लिए सगाई कर भी ले पर शादी तो वह पिंकी से ही करेगा यह बात तो तय है वह इतनी घटिया लड़की को अपने जीवनसाथी कभी नहीं बन सकता जो बंदूक के लोग पर अपना काम करना जानती हो ब्लैकमेल करके सगाई कर सकती है मंजरी और शादी के मंडप तक वह कभी नहीं पहुंच पाएगी। 😡😡😡😡
मुसीबत में फंसे हुए मां-बाप को माधव का ही सहारा था और अब जबकि माधव भी वहां से आ गया है तो फिर पिंकी के माता-पिता पर क्या बीत रही होगी ये तो बेचारे वो ही जाने 😞😞😞
कहां बेहद मजेदार था और इतने अच्छे बात के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया डॉक्टर साहिबा 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
बेचारा माधव कितना परेशान है डिंकी के लिए पर एक बात अच्छी हुई जो उसके दिमाग़ में भूषण का नाम आ गया कि ये सब भूषण ने ही किया है और दूसरा बम तो अभी फटा जब उसे पता चला कि मंजरी सब जानती थी और डिंकी के बेकसूर होने की गवाही के बदले उससे सगाई की शर्त रखी।
देखते है आगे क्या होता है.. बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐🙏🏻।
Very nice but some critical n typical condition in this part, Aagya kya hoga seeing in the next part
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫
Very nice part
माधव जरूर अपना दिमाग लगा कर डिंकी को बचा लेगा।वो शायद मंजरी से सब सच उगलवा ले और वो सच रिकॉर्ड काके पुलिस में दे दे।।
देखते है आगे हमारी लेखिका जी ने क्या दिमाग लगाया है।
नेक्स्ट पार्ट का बेसब्री से इंतजार रहेगा।।
Sagai to todi bhi ja sakti hai phir manjari jaisi ladki Jo marriage ke pehle hi blackmail Kar rahi ho uske baad ka kya bharosa
Ab to Madav hi kuch tikram laga ke Manjri se sach nikal sakta hai aur Dinki ko jail jane se bacha sakta hai.
Nice part
😳😳😳😳😳😳😳 baapre…..
Sach hi to hai 😒😒🙄 maan q nhi leti ki madhav jaise ladke ko mai deserve hi nhi krti, radha madhav ko alag krna chahti h,
Pata nahi kya hoga, jo bhi acha ho achha ho 🤞🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻