
मायानगरी -2 भाग -18
कॉफी हॉउस में अंदर के साथ साथ बाहर भी बैठने की व्यवस्था थी.. रोड से लग कर कॉफी हॉउस का बाहरी किनारा था, जहाँ दो दो कुर्सियों के साथ टेबल सजी थी.. कुछ लोग बाहर रोड पर बैठ कर भी कॉफी का मज़ा ले रहे थे..
भुवन वहीँ एक कुर्सी की टेक लगाए खड़ा शंकर का इंतज़ार कर रहा था, कि तभी शंकर अपनी बाइक से वहाँ पहुँच गया..
एक तरफ बाइक खड़ी कर शंकर भुवन की तरफ बढ़ गया.. वो भुवन तक पहुंचा ही था कि उसके ठीक बगल से होकर एक बाइक सवार गुज़रा और अपने हाथ में पकड़ रखे धारदार हथियार से उसने शंकर पर वार कर दिया..
लेकिन भुवन की नजर शंकर पर बराबर बनी हुई थी, जैसे ही बाइक सवार शंकर के पास से गुजरा, भुवन ने शंकर को अपनी तरफ खीँच लिया और बाइक सवार का हथियार बिना वार के खाली चला गया..
“आप पर हमले की कोशिश की गयी है.. आइये यहाँ से बाहर चलते है !”
भुवन ने शंकर को साथ लिया और वहाँ से निकल गया..
“ये कौन था शंकर भाई.. आप जानते हैं क्या ?”
“नहीं भुवन.. लेकिन ये सब क्या हो रहा है ?”
“आप चलिए, हम बताते हैं !”
भुवन शंकर को अपने साथ लिए सीधे लीना के पास पहुँच गया..
लीना के पास पहुँच कर भुवन ने सारी बात लीना को बता दी..
“इसका मतलब कोई ऐसा है जो नहीं चाहता कि इस केस की तहकीकात हो और हम सच्चाई की जड़ तक पहुंचे.. भुवन इन्हे आपने बुलाया किस लिए था ?”
“लीना जी ये शंकर है, सज्जन राणा जी के काफी करीबी। उनके दफ्तर की हर एक खबर इन्हे मालूम होती है.. इनसे हमारे भी अच्छे संबंध है इसलिए सोचा उस रात के बारे में इन्हीं से जानकारी ली जाए.. !”
भुवन की बात सुनकर लीना शंकर की तरफ देखने लगी..
“सज्जन राणा के ऑफिस में कब से काम कर रहे हैं आप ?”
“लगभग बीस साल हो गए !”
“सज्जन राणा के ड्राइवर को क्या हुआ था ?”
“मैडम जी उनके ड्राइवर का कुछ दिन पहले एक्सीडेंट हो गया था, उसके बाद से वो भी अस्पताल में भर्ती था, उसका सारा खर्चा राणा साब ही उठा रहे थे !”
“हम्म ऑब्वियस्ली, सज्जन राणा का ड्राइवर था तो खर्चा भी वही उठाएंगे न?”
“नहीं, बड़े साब नहीं बल्कि उनके बेटे छोटे राणा साब !”
लीना ने आश्चर्य से शंकर की तरफ देखा
“चरित्र राणा ?”
“जी मैडम !”
“हम्म वैसे ठीक भी है.. पिता के ड्राइवर का खर्चा बेटे ने दे दिया तो कौन सा बड़ा काम कर दिया !”
“मैडम उस ड्राइवर झूलन से छोटे साब की कभी नहीं जमी.. पता नहीं ऐसा क्या कारण था कि इसे देखते ही छोटे साब चिढ जाते थे..।
असल में राणा साब अपने उस ड्राइवर पर हद से ज़्यादा भरोसा करते थे, कई बार उसी के सामने वो घर वालो को बुरी तरह से झिड़क भी चुके थे.. झूलन इस बात का पर बहुत अकड़बाजी दिखाता था मैडम..।
वो घर भर में सब पर ऐसे रौब गांठता था जैसे वो ही खुद मंत्री हो..
वैसे राणा साब को छोड़ कर हर कोई उससे नाराज़ ही रहता था। पर इस बार जब उसका एक्सीडेंट हुआ तो सबसे पहले अस्पताल चरित्र साब ही पहुंचे..।
उसके लिए खूब फल मिठाई ले गए थे.. उसके हाथ में रूपये भी पकड़ाए।
हम वहीँ मौजूद थे इसलिए ये सब देख कर हमे अपनी आँखों पर भरोसा नहीं हुआ !”
“उसके बाद नए ड्राइवर को कौन लेकर आया ?”
“चरित्र का छोटा भाई सुमित्र!”
“ओह्ह.. एक बात बताओ शंकर, ये दोनों भाइयों का आपसी रिश्ता कैसा है ?”
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“ठीक ही है बस मैडम.. वैसे तो इनके यहाँ कोई कमी नहीं है.. सब अच्छे पदों पर काम कर रहे हैं, बावजूद घर में सुख शांति नहीं है..।
दोनों भाई एक दूसरे से सीधे मुहं बात नहीं करते.. दोनों की बीवियाँ तो एक दूसरे को देखती तक नहीं…।
कहने के लिए त्यौहार एक साथ मनाने का रिवाज है, पर बारी बारी से हर त्यौहार में दोनों मे से एक लड़का अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने बाहर चला जाता है…। इतनी धन दौलत है, पिता मंत्री, दोनों बेटा बहु प्रशासनिक पदों पर है लेकिन घर में ज़रा भी सुख चैन नहीं..
मालकिन इन्ही सब बातो से तंग आकर अक्सर आश्रम चली जाया करती है !”
“अच्छा.. दोनों लड़की की बनती नहीं है, लेकिन ड्राइवर के एक्सीडेंट के बाद दोनों उसकी तीमारदारी में लग गए थे.. है न ?”
“जी मैडम जी.. छोटा भाई सुमित्र भी कम नहीं है.. दुनिया भर के व्यसन उसे घेरे बैठे हैं।
जब उसका मन करता है किसी से भी लड़ लेता है.. अपने आप को दुनिया का बादशाह समझता है।
महंगी से महंगी गाड़ियों का शौक है उसे.. जो नयी गाडी मार्किट में आती है उसे ले आता है.. !”
“इन दोनों की एक बहन भी है न ? उसका क्या मसला है ?”
“मैडम जी बेबी साब बहुत सरल स्वभाव की है, वो बिलकुल अपनी माँ पर गयी है..
अपने आप में रहने वाली, सबसे हंसने बोलने वाली.. पूरे घर में एक उन्ही के संबंध सबसे अच्छे थे, लेकिन पता नहीं किसकी नजर लगी, उन्होंने अचानक बाहर रह कर पढ़ने का फैसला कर लिया !”
“ऐसा क्यों ?”
शंकर ने गले में अटक रही बात को निगला और खुद को अगली बात बताने के लिए तैयार करने लगा..
भुवन भी साथ बैठा सारी बातें ध्यान से सुन रहा था !
उसे खुद इतनी बारीक बातें मालूम नहीं थी..
श्रद्धा के बारे में वो बस इतना ही जानता था कि उसकी माँ श्रद्धा से उसकी शादी करवाना चाहती है..
लेकिन आज तक उसने कभी श्रद्धा को ध्यान से देखा तक नहीं था।
“मैडम जी अंदर की बात ये है कि मंत्री जी के पीए जो अब फ़िलहाल अवर सचिव के पद पर मंत्रालय में पदस्थ है से बेबी साहब की खूब दोस्ती थी.. !”
“मतलब.. पूरी बात बताइये शंकर !”
“मंत्री जी के पीए के पद पर अमर कुमार काम किया करते थे.. ये अनुसूचित हैं।
लेकिन बहुत होशियार है। पहले इन्होने जिस शहर की कलक्ट्री संभाली, वहाँ बहुत बढ़िया काम किया था..जब इनसे मंत्री जी की भेंट हुई, तब मंत्री जी ने प्रोटोकॉल से अलग जाकर इनकी पदोन्नति करते हुए इन्हे खुद के साथ जोड़ लिया और अमर कुमार जी मंत्री जी के पर्सनल काम संभालने लगे…।
वही बार बार घर और दफ्तर में होने वाली मुलाकातों के दौरान बेबी साहब और इनकी दोस्ती बढ़ती चली गयी..
बेबी साहब ने घर पर इन्ही से शादी करने का फरमान सुना दिया..
ये बात जैसे ही घर में मालूम चली सब के सब भड़क गए।
मैडम जी, मंत्री जी ने तो अमर बाबू को सीधे तमाचा ही रसीद कर दिया था..।
अमर बाबू गुस्से में पलट कर वापस चले गए थे..
पर इसके बाद मंत्री जी खामोश नहीं बैठे वो अमर बाबू के पीछे ही पड़ गए…।
उन्हें उनके पद से नीचे गिरा कर उनकी पदोन्नति की जगह पद अवनति करवा दी गयी..
उनकी पोस्टिंग कहीं किसी बियाबान नक्सल प्रभावी क्षेत्र में कर दी गयी…
और सुनने में तो ये तक आया कि मंत्री जी ने उन्हें जान से मरवाने की भी कोशिश की..।
बस इसी सब के बाद बेबी साहब घर छोड़ कर चली गयी.. !”
“मैंने तो सुना था वो पढ़ने के लिए बाहर चली गयी थी !”
“हाँ अब दिल्ली रह कर यूपीएससी की तैयारी कर रही है.. ।
उनसे उनके पिता ने कहा भी कि वो उनका सेलेक्शन करवा देंगे लेकिन वो नाराज़ होकर चली गयी..
उन्हें अपने भाइयों और भाभियो जैसा सेलेक्शन नहीं चाहिए था..
वो पूरी ईमानदारी से पढाई कर के सलेक्ट होकर इस पद पर आना चाहती है, और जाने से पहले उन्होंने घर वालो को धमकी भी दी थी कि वो सेलेक्ट होकर अमर बाबू से ही शादी करेंगी और उसी के बाद घर वापस लौटेंगी.. !”
“ओह्ह तो ये बात है.. और ये अमर बाबू का क्या सीन है.. कैसे स्वभाव के हैं वो ?”
“ठीक ही है मैडम बल्कि बहुत अच्छे हैं !”
“क्या मंत्री जी के साथ हुई दुर्घटना के पीछे इनका भी हाथ हो सकता है ? क्यूंकि मैंने सुना है राणा साहब अपनी बेटी की शादी किसी बहुत बड़े घर के लड़के से करवाने को प्रयासरत थे.. !”
लीना ने ये बात कहते हुए धीरे से भुवन की तरफ देखा.. भुवन एकदम से झेंप गया..
वो अपनी झेंप मिटाने ज़बरदस्ती अपने मोबाइल को खुरचने लगा..
लीना को अचानक शरारत सूझी..
“अच्छा शंकर, क्या तुम ये बता सकते हो कि मंत्री जी अपनी बेटी का ब्याह किस शहजादे से करवाने को आतुर थे..? हम भी तो जाने वो कौन सी हीरे की डली मिल गयी थी मंत्री जी को, जिसके कारण उन्होंने एक आईएएस दामाद को लात मार दी.. !”
शंकर भुवन के बारे में जानता था, लेकिन बाजू में बैठे भुवन का नाम लेने में वो भी सकुचा गया, और एकदम से उसे अपनी बात संभालने में उसे खांसी आने लगी..
“अरे अरे.. पानी पीजिये, और आगे की बात बताइये !”
भुवन लीना के सवाल से हैरान हो गया.. उसका चेहरा शरम से गुलाबी पड़ गया.. वो उठ कर बाहर जाने को था कि एक कॉन्स्टेबल लीना के केबिन में उन तीनो के लिए चाय लेकर चला आया..
“बैठिये भुवन.. चाय लीजिए !”
भुवन के पास वहां बैठने के अलावा कोई चारा नहीं था..
उसने शंकर की तरफ देखा और उसे भी चाय लेने का इशारा कर दिया..
उसके बाद वापस लीना ने पूछताछ शुरू कर दी..
“हाँ तो शंकर, नए ड्राइवर के बारे में क्या क्या जानते हो.. सब बताओ !”
“मैडम जी नए ड्राइवर को सुमित्र राणा लेकर आये थे.. ये ड्राइवर असल में पहले अमर बाबू के साथ काम कर चुका है.. इसी से भरोसेमंद है, ये सोच कर उसे काम पर लगाया गया था.. !”
“अमर बाबू के साथ ? तो क्या अमर बाबू और सुमित्र राणा की आपस में बात होती थी ?”
“यही तो समझ नहीं आ रहा मैडम जी, क्यूंकि मंत्री जी के साथ साथ उनके दोनों लड़के भी अमर बाबू से श्रद्धा की शादी के ख़िलाफ़ थे..
एक बार तो घर पर इन सब के बीच खूब ज़ोरदार बहस हुई थी.. उस वक्त तो चरित्र और अमर की आपस में झूमाझटकी तक हो गयी थी…।
उस वक्त मंत्री जी ने खूब गाली गलौच करते हुए अमर बाबू को एक तरह से धक्के दे देकर घर से निकाला था.. !
और उस वक्त घर से जाते हुए अमर बाबू भी धमकी देकर गए थे कि इस घर की ईंट से ईंट बजा देंगे..
वैसे मैडम जी अमर बाबू शांत और सुलझे व्यक्ति है, लेकिन जब बात उनके परिवार या जाति पर आती है तो उनका खून खौल जाता है।
मंत्री जी ने उन्हें उनके परिवार और जाति बिरादरी की गाली दी थी..।
सुनने में भी बहुत अशोभनीय लगा था.. अमर बाबू की जगह कोई भी होता तो उसका खून खौल जाता !”
“हम्म.. अमर बाबू ने मंत्री जी को मारने की भी धमकी दी थी.. है न ?”
लीना के इस सवाल पर भुवन और शंकर उसे देखने लगे…
“जी मैडम.. मारने की भी धमकी दी थी !”
लीना ने भुवन की आँखों में सवाल देख कर अपने सामने खोल रखा लैपटॉप भुवन की ओर मोड दिया..
जिसमे कुछ महीनो पहले की एक खबर दिखाई दे रही थी.. जिसमे अमर और मंत्री जी के बीच के विवाद पर साफ़ शब्दों में लम्बा चौड़ा लेख लिखा था….
ये एक ऑनलाइन पोर्टल की खबर थी, जिसके छपने के चौबीस घंटे के भीतर ही हटाया जा चुका था, लेकिन लीना अपने लैपटॉप में मौजूद किसी स्पेशल सॉफ्टवेयर की सहायता से उस गायब हुई खबर को वापस रिकवर किया था, और वही खबर उन लोगो को दिखा रही थी..।
भुवन और शंकर एक दूसरे की तरफ देखने लगे..
“जी मैडम ऐसा हुआ था, लेकिन इस खबर को किसी अख़बार में छपने नहीं दिया गया था.. ! ऑनलाइन पोर्टल से भी हटा लिया गया था !”
“हम्म.. किसने हटाया था इस खबर को ?”
शंकर ज़रा थमा और फिर नाम बोल गया
“अमर बाबू ने !”
लीना के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..
क्रमशः

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Aapki stories acchi hain paratilipi se yahan tak aa gaye padhte hue lekin bahut intzaar kerna padta hai jeevan saathi, sthiti and maya nagri sabhi ke parts bahut gap ke baad aate hai padhne ke liye
18 March se koi story nahi aayi…aapne bola tha daily ek part dogi..but yaha to sabki jindagi ruk gayi
Very nice but some Critical n suspence conditions in this part.
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏
Fantastic beautiful lovely part
👌👌❤️
Waah leena marjeena toj bhuvan ki tang khich Rahi thi upar se humare bhole bhale bhuvan babu Sharma gye 😂😂😂😂
Very beautiful