
मायानगरी -2 भाग -16
भुवन तेजी से अस्पताल की सीढियाँ चढ़ रहा था कि उसके अधिकतर कार्यकर्ता उसके पास चले आये.. लेकिन इनमें से किसी के चेहरे पर कोई दुःख नहीं झलक रहा था, जैसे सबके अंदर यही भाव था कि सज्जन जैसे आदमी के साथ ऐसा ही होना था..
इस सब के बावजूद भुवन के मन में य़े बात रह रह कर खटक रही थी..
वो अपने लोगो के साथ अंदर पहुँच गया..
सामने ही सज्जन का बड़ा बेटा और उसकी पत्नी दिख गए..
भुवन सीधे सरोज के पास पहुँच गया..।
उसने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए..
उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या काहे, लेकिन सरोज सब समझ रही थी, उसने भुवन के दोनों हाथ थाम लिए..
“बेटा होनी को शायद यही मंजूर था ! अब कोई क्या कर सकता है !”
सरोज को इतना स्थिर और शांत देख भुवन को धक्का सा लगा, लेकिन वो सरोज की हालत से वाकिफ था..।
थोड़ी अफरातफरी सी मची और अपने बूट्स खटकाती और भीड़ को वहाँ से बाहर जाने का हुकुम सुनाती लीना वहाँ चली आई..
सरोज के सामने आकर उसने भी अपने हाथ जोड़ दिए..
“आपकी हालत समझ सकती हूँ मैम, आई एम रियली सॉरी फॉर योर लॉस, लेकिन औपचारिकता है इसलिए कुछ सवाल तो मुझे आपसे करने ही होंगे !”
सरोज ने चुपचाप हामी भर दी..
“सर घर से कब निकले थे ?”
“शाम के वक्त, कह कर गए थे पार्टी कार्यालय जा रहे हैं कुछ देर में लौट आएंगे, लेकिन फिर वहीँ से फ़ोन कर दिया की वहीँ से फॉर्म हॉउस जा रहे हैं !”
“ये फॉर्म हॉउस क्या है, कहाँ है ?”
लीना के सवाल पर मंत्री जी का बेटा उस तक चला आया..
“देखिये अभी अम्मा की ऐसी हालत नहीं कि आपके फिजूल सवालों के जवाब दे सके.. आप बाद में आइये !”
“जी आप कौन ?” लीना ने नाराज़गी से उसे देख कर पूछा..
“ये मंत्री जी के बड़े बेटे हैं !” वहीँ खड़े एक आदमी ने जवाब दिया..
“अच्छा और आपका परिचय ?”
“मैं उनका साला, सरोज जिज्जी का भाई जागेश हूँ !”
“अच्छा, मंत्री जी के साथ जिस जग्गी का नाम अक्सर सुनने में आता है, क्या आप वही है ?”
“हां जी हां जी.. वहीँ हूँ मैं ! ” जागेश के चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान चली आई, लेकिन स्थिति की गंभीरता सोच कर उसने तुरंत खुद को काबू कर लिया..
लीना उसे ध्यान से देखने के बाद सरोज के पास वापस चली आई..
“मैडम.. जिन परिस्थितियों में मंत्री जी की गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ है उसके बाद हमें इस केस को इन्वेस्टीगेट करना ही होगा..।
अमूमन मंत्री जी के साथ पूरा काफिला होता है, लेकिन आज एक ड्राइवर तक नहीं था..।
मान लिया उनका खास ड्राइवर छुट्टी पर गया भी होगा, तो कोई और उनकी गाडी क्यों नहीं चला रहा था ? यहाँ तक की एक भी बॉडीगार्ड उनके साथ नहीं था?
ये सारी बातें शंका में डाल रही है.. इसलिए मैडम हमें.. “
लीना अभी बात पूरी कर पाती उसके पहले ही सज्जन राणा का बेटा वहाँ चला आया..
“देखिये हम किसी तरह की कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं करवाना चाहते। आप हमें हमारे हाल पर छोड़ दीजिए। जो हुआ वह सब भगवान की मर्जी थी, और अब हम बाबूजी को यहां से लेकर जाना चाहते हैं।”
“मैं आपकी बात समझ सकती हूं, और मैं बहुत माफी चाहती हूं। लेकिन अगर आप जैसे पढ़े लिखे लोग पुलिस की मदद नहीं करेंगे तो क्राइम को रोकना हमारे लिए बहुत कठिन होगा। आप कैसे कह सकते हैं कि….”
“बाबूजी नशे में थे और उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। यह बहुत सामान्य सी घटना है।”
लीना आश्चर्य से सज्जन राणा के बेटे चित्रक राणा को देखने लगी। उस आदमी के चेहरे पर कहीं से यह भाव नहीं थी कि उसने अभी-अभी अपने पिता को खो दिया है। लीना उसके चेहरे पर अपनी नज़रें गडाये हुए ही बोलने लगी।
“बड़े आश्चर्य की बात है कि आप स्वयं जिलाधीश होते हुए भी ऐसा निर्णय ले रहे हैं सर! आपके पिता एक जाने माने मंत्री थे, मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुके थे और अभी भी आगामी चुनाव में लड़ने के लिए उन्हें टिकट मिला हुआ था।
इसके बावजूद उनके साथ कोई सुरक्षा घेरा नहीं था? उनके साथ ड्राइवर भी नहीं था, और आप इसे महज एक दुर्घटना का नाम दे रहे है?
मुझे तो लगता है कि यह किसी सोची समझी साजिश के तहत किया गया है।”
“लीना जी, आप अपने काम से काम रखें। अगर परिवार की अनुमति न हो तो पुलिस को किसी भी ऐसे केस में दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए। इतना तो आप जानती होंगी, या आपके लिए मुझे ऑफिशियल नोटिस इशू करवाना होगा।”
” नो सर! आपको इतनी ज़हमत उठाने की जरूरत नहीं है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और इस पूरे परिवार को दुख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति दे।”
लीना ने सज्जन राणा की पत्नी सरोज की तरफ देखकर हाथ जोड़े और वहां से बाहर निकलने को थी कि तभी एक आवाज हवा में गूंज गई..
” हम चाहते हैं कि आप ये केस इन्वेस्टिगेट करें..।”
इस मीठी सी आवाज को सुनकर वहां मौजूद हर कोई पीछे घूम गया। लीना के ठीक सामने एक दुबली लंबी सी लड़की खड़ी थी। उसके गोरे गुलाबी चेहरे पर तनाव की रेखाएं उभर आई थी।
उसके रेशमी बाल हवा में इधर-उधर उड़ रहे थे। उसकी आंखें आंसुओं से धुंधली हो गई थी उसने अपनी मां को देखा और उनके गले से लग गई..
“श्रद्धा तुम कब आई बेटा..?”
सरोज ने अपनी लाडली को गले से लगा लिया। उसके बालों को सहलाते हुए वह खुद भी उसके रुदन को सुनकर रो पड़ी..।
“जग्गी अंकल का फोन आया था अम्मा, उन्होंने ही हमें बताया। ऐसा कैसे हो गया? क्यों हुआ?
और मुझे तो इस बात पर आश्चर्य है कि आप लोग यह सब मालूम क्यों नहीं करना चाहते..?”
श्रद्धा अपनी मां को छोड़कर अपने भाई के सामने तन कर खड़ी हो गई।
” क्यों भैया आखिर क्या बात है जो आप इन्वेस्टिगेशन को रोक रहे हैं..?”
“तुम इन सब बातों से दूर ही रहो तो अच्छा है। तुम अम्मा को लेकर घर चलो, हम सब यहां की फॉर्मेलिटी पूरी करके आते हैं !”
इतनी देर में लीना को समझ में आ गया था कि सज्जन राणा की वह बेटी जो बाहर रहकर प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी कर रही थी, यह वही है। उसने वहां मौजूद लोगों पर एक नजर डाली और इसी सब में उसकी नजर भुवन पर आकर अटक गई।
भुवन भी एक तरफ हाथ बंधे खड़ा था और सब की बातें बड़े गौर से सुन रहा था। उसने भुवन को कुछ देर देखा, और उसी वक्त भुवन की नजर लीना पर पड़ गई।
भवन ने उसे इशारे से बाहर आने को कहा और वहां से मुड़कर बाहर निकल गई। भुवन ।भी उसके पीछे-पीछे बाहर निकल गया
“बड़ी अजीब बात है, आपसे अक्सर किसी न किसी क्राइम सीन पर ही मिलना होता है।”
भुवन पहले भी लीना से जरा बचता ही था, आज भी वो चुप ही खड़ा था..
“सज्जन राणा के बारे में आप कोई जानकारी दे सकते हैं? मिस्टर भवुन सबरवाल..?”
“ताऊ जी की पार्टी में एक प्रमुख मंत्री के तौर पर यह जाने जाते हैं। काफी पहले से यह ताऊजी से जुड़े हुए हैं। पिछली बार भी यह चुनाव जीते थे और इस बार भी इसलिए इन्हें टिकट दिया गया।”
” हां लेकिन सुनने में आ रहा था कि उस टिकट पर आपका नाम था। आपसे छीनकर आपके ताऊ जी ने उस टिकट को इन्हें दिया है, तो कहीं ऐसा तो नहीं कि इन्हें मरवा कर आप उस वैकेंसी पर खुद बैठ जाना चाहते हैं?”
भुवन ये बात सुनकर चौंक गया।
” नहीं ऐसी कोई बात नहीं। हमें राजनीति पसंद है, लेकिन शुद्ध और ईमानदार राजनीति।
हम अपने नियमों पर चलने और लड़ने वाले इंसान हैं। अपनी जीत के लिए या अपने पद के लिए किसी को मार कर आगे बढ़ जाएँ, इतनी ओछी राजनीति हमें नहीं खेलनी।”
” तब तो फिर आपको राजनीति से दूर ही रहना चाहिए। ऐसा है तो आप राजनीतिज्ञ कहां हुए?”
“हम्म, शायद इसीलिए अब तक कोई लाभ का पद नहीं पा सके। क्योंकि ताऊ जी भी जानते हैं कि हम राजनीतिज्ञ नहीं हैं। “
भुवन की आंखों में उतर आई उदासी लीना से छुपी नहीं रही।
“भुवन इस केस के इन्वेस्टिगेशन में मुझे आपकी जरूरत पड़ सकती है। क्या आप मेरी मदद करेंगे?”
” हां बिल्कुल जितना कर सकेंगे जरूर करेंगे।”
लीना ने अपनी आंखों पर धूप का चश्मा चढ़ाया और अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गई। लेकिन उसके दिमाग में उस वक्त वहां मौजूद हर एक चेहरा घूमता रहा। उसके लिए यह सब बहुत आश्चर्य की बात थी। एक इतने बड़े नेता का यूं मर जाना उसे कुछ ठीक नहीं लग रहा था।
उसने अपने लेवल पर तहकीकात शुरू कर दी थी।
भुवन पूरी तरह से उसकी मदद में लग गया..
उस रात सज्जन राणा जिस फार्म हाउस में था, वहां के मुख्य दरवाजे से लेकर गार्डन और गेट की सीसीटीवी फुटेज के अलावा जिस रास्ते पर सज्जन राणा की गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ था उन सबके सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद कई बड़े चौंकाने वाले खुलासे लीना के सामने आए थे।
वह अपने ऑफिस में बैठी इन्हीं सब बातों को एक दूसरे से जोड़ने के प्रयास में थी कि तभी भुवन उसके ऑफिस में चला आया।
उससे इजाजत लेकर वह अंदर पहुंचा और कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठ गया।
” कहिए भुवन, कैसे आना हुआ?”
” मैडम एक खबर आपको बतानी थी।”
” हां बताइए।”
” पता नहीं इस खबर का मंत्री जी की मौत से कोई कनेक्शन है या नहीं, लेकिन हमें लगता है कि इस खबर के बारे में हमें आपको बता देना चाहिए।”
” आप खबर बताइए, उसके बाद मैं निर्णय ले लूंगी कि इस खबर का मंत्री जी की मौत से कोई कनेक्शन है या नहीं?”
” मंत्री जी के बड़े बेटे चरित्र राणा ने अपने पद से रिजाइन कर दिया है, और पार्टी दफ्तर की अंदरूनी हलचल यह बता रही है कि सज्जन राणा की सीट उनके बेटे चरित्र राणा को दी जाने वाली है। चरित्र राणा चुनाव लड़ने खड़ा हो रहा है।”
“व्हाट? आर यू श्योर?”
“मैडम हम इस दफ्तर का एक हिस्सा है। हमें कोई गलतफहमी नहीं हुई। और चर्चा तो यह भी है कि….
क्रमशः

Toh kya ek bete ne pad ke lalach me apne hi pita ko marwa diya 😥😥
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌
Very beautiful
👌👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Oh,isbar bhi Bhuvan ko ticket nahi mila.. nice part….
Super se bhi upar wali story ❤️ awesome part 💓 bahut bahut bahut hi khubsurat story ❤️ eagerly waiting for new part 💓
बहुत उम्दा पार्ट 👌❤️👌
Very very nice part 👌👌
लगा था कि किया धरा बेटे का न हो राजनीति है कुछ भी संभव है