अतिथि-37

अतिथि -37

और अब भी मंजरी माधव की बाँहों में थी..

डिंकी की आँखों से मोटा सा आंसू गिरा और वो पैदल ही भागती आगे बढ़ गयी..

डिंकी तेज़ी से चलती हुई अपनी बाइक तक आई और अपने घर चली गयी..
उसकी समझ से बाहर था कि ये उसके साथ अचानक क्या हो गया? वो तो अब तक यही सोच रही थी कि माधव को भी उससे मुहब्बत है, इसलिए वो उसकी मदद कर रहा था लेकिन अब डिंकी की सोच एकदम से पलट गयी..

एक बार जब हम किसी निराशा के गहन अंधकार में डूबने लगते हैं, तब हमारी सोच हमारे विचार ऐसे ही बनते चले जाते हैं कि वो अंधकार गहन से गहनतम होता चला जाता है… ..

डिंकी के साथ भी यही हुआ, अब उसे लगने लगा कि माधव उसकी इतनी मदद इसलिए कर रहा था क्यूंकि वो मंजरी की बहन है..।

ये ख्याल आते ही उसका दिल डूबने लगा, उसे बहुत ज़ोर की रुलाई फूटने लगी..।
वो गाडी में सीधे अपनी सहेली सुषमा के घर चली गयी। इस वक्त उसकी अपने घर जाने की हिम्मत नहीं थी।
इस वक्त वो किसी के सवालों को झेलने की स्थिति में नहीं थी..। अपनी माँ के सवाल तो बिलकुल नहीं !

सुषमा के घर इत्तेफाक से इस वक्त कोई नहीं था! दरवाज़ा सुषमा ने ही खोला। वो डिंकी का लाल चेहरा  और उड़ा उड़ा सा रंग, आंसू बहाती आँखे देख विचलित हो गयी..।

डिंकी सीधे सुषमा के कमरे की तरफ बढ़ गयी..
सुषमा भी उसके पीछे दौड़ी..
उस कमरे में पहुँच डिंकी कटे पेड़ सी पलंग पर ढह गयी..।
सुषमा समझ गयी, बात ज़रूर बेहद गंभीर है, वरना डिंकी ऐसे अपना धैर्य नहीं खो सकती।

वो उसके सरहाने बैठ धीरे धीरे उसका सर सहलाने लगी। उसके बालो पर हाथ फेरते हुए भी वो चुप ही बैठी थी।
जब खूब मन भर कर रो धोकर डिंकी ने फुरसत पायी तब वो उठ कर बैठी..।
सुषमा भाग कर उसके लिए पानी का गिलास ले आई..
डिंकी ने एक घूंट में सारा पानी निगल लिया..

“अब बता डिंकी, हुआ क्या है ?”

रोने से दिल में जो भारीपन था वो आंसुओ के ज़रिए बह गया था और अब फ़िलहाल उसे हल्का लगने लगा था।अब ऐसा था कि वो अपनी पीड़ा सुषमा से बयां कर सकती थी..
उसने सुषमा को सब बता दिया..

“पर ये भी तो हो सकता है कि तुझे कुछ ग़लतफ़हमी हुई हो !”

“नहीं सुष.. मुझे कोई ग़लतफ़हमी नहीं हुई.. परसों मंजू दी की सगाई है माधव के साथ, और आज दोनों अपना क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे थे.. मैं उसी बीच पहुँच गयी.. !”

“उन दोनों ने तुझे देखा तो नहीं न ?”

“नहीं.. मैं बाहर थी और फिर, उनका ध्यान भी तो नहीं था.. !”

“हम्म.. मैं ये कह रही कि तुझे ग़लतफ़हमी भी तो हो सकती है.. हो सकता है माधव मंजरी से तेरे बारे में बात कर रहा हो..।
और उसे भी सिर्फ दोस्त समझ कर गले लगाया हो, सिम्पथी देने के लिए !”

सुषमा की बात पर डिंकी ने ज़ोर से न में गर्दन हिला दी..

“नहीं, ऐसा कुछ होता तो क्या वो लोग दस मिनट तक एक दूसरे से चिपके रहते.. नहीं न !
मुझे कोई ग़लतफ़हमी नहीं हुई.. वैसे भी माधव जैसे मोस्ट टेलेंटेड एंड हैंडसम लड़के को मैं शायद डिज़र्व भी नहीं करती !”

“अच्छा तू डिज़र्व नहीं करती, लेकिन मंजरी जो पहले ही दस बॉयफ्रेंड बना कर उन्हें छोड़ चुकी है वो डिज़र्व करती है.. आर यू मैड ?”

” लेकिन अब माधव के बाद मंजरी दी की ज़िंदगी में कोई नहीं आने वाला !”

“आई होप सो.. वैसे मुझे तेरी मंजरी दी बहुत ज़्यादा मौकापरस्त लगती है।
     आज उन्हें माधव के रूप में जीवनसाथी इसलिए नजर आ रहा, क्यूंकि उसके पहले उनके जितने बॉयफ्रेंड थे वो या तो इतने स्मार्ट नहीं थे, या नौकरी में नहीं थे..।
इसमें इन सारी खूबियों के अलावा एक और गुण है वो है सेम कास्ट का होना।
बुरा मत मानना डिंकू, लेकिन तेरी मंजरी दी को तुझसे ज़्यादा मैं जानती हूँ..।
अगर आज माधव से अच्छा लड़का उसके सामने आकर खड़ा हो गया न, वो तुरन्त माधव को डिच कर निकल जाएगी.. !”

सुषमा की बात पर डिंकी कुछ नहीं बोल पायी.. उसकी बात का विरोध नहीं कर पायी क्यूंकि कहीं न कही सुषमा की बात सच थी।

“मेरी बुआ की बेटी नित्या मंजरी के साथ ही तो कॉलेज में हैं, उनसे मुझे मंजरी की सारी इन्फॉर्मेशन मिलती रहती है..।
सच बोलूं तो कभी कभी यक़ीन नहीं होता कि तू मंजरी की बहन है..

“जाने दे यार.. वो उनकी लाइफ है ! लेकिन अब वो माधव के लिए कमिटेड है !”

“वो तो ठीक है डिंकी, लेकिन क्या एक दोस्त के नाते तेरा इतना फ़र्ज़ नहीं बनता कि तू माधव को सारी सच्चाई बता दे.. मंजरी असल में क्या है ये माधव को पता होना चाहिए।
उसके बाद अगर वो मंजरी से शादी करता है तो फिर ये उसकी मर्जी..।
देख, आजकल लड़के भी काफी लिबरल हो गए हैं। अब उन्हें भी मालूम होता है जिस लड़की से उनकी शादी हो रही उसके भी उनकी तरह रिलेशंस रहे होंगे।
लेकिन पता नहीं क्यों ये तेरा माधव मुझे आज के लड़को सा नहीं लगता, ये अलग है यार..
और अगर ये खुद फ्लर्ट नहीं है, तो क्या उसे मंजरी का पास्ट पसंद आएगा !”

“लेकिन अगर मैं मंजरी दी की सच्चाई माधव को बताउंगी,और माधव ने मंजरी दी को बता दिया तो दी मेरे बारे में क्या सोचेंगी.. ?”

“और यही सोच कर तूने नहीं बताया और माधव को बाद में पता चला तो वो क्या सोचेगा.. ?
उसे ये नहीं लगेगा कि ये दोनों बहने एक सी होंगी, तभी पहले से जान पहचान होने के बावजूद तूने माधव को कुछ बताया नहीं !”

डिंकी का मन सुषमा की इधर उधर की बातो से बहलने लगा था।
उसी वक्त उनकी तीसरी सहेली गरिमा भी चली आई..
उन दोनों की गंभीर बातचीत को सुन वो भी उसका हिस्सा बन गयी..

“सुष ठीक कह रही है डिंकू… तू माधव को सब बता दे.. !” गरिमा बोल पड़ी..

“नहीं यार ऐसे नहीं बता सकती.. पता नहीं वो क्या सोचेंगे ?”

“ओहो सोचेंगे..?” गरिमा ने डिंकी को छेड़ते हुए कहा और आगे कहने लगी..

“सुन एक आईडिया है, तू ऐसा कर एक खत में सब कुछ लिख दे और माधव तक पहुंचा दे..।
उस में अपना या किसी का भी नाम मत लिखना.. मंजरी ने जो जो किया है वो सब लिख दे, बस माधव को मंजरी की सारी सच्चाई पता चल जाएगी.. !”

“हम्म.. सच में ऐसा करूँ क्या ?”

“अब तू नहीं करेगी तो हमे ही करना पड़ेगा.. अब सोच ले !”

“नहीं नहीं, तुम दोनों पता नहीं क्या अनाप शनाप लिख जाओगी.. मैं ही लिखती हूँ रुको.. !”

गरिमा और सुषमा ने डिंकी से एक पत्र तैयार करवा लिया…
अपनी सहेलियों से मिल कर, बातें कर के अब डिंकी का मन जरा हल्का हो गया था..
वो उन दोनों के गले लग कर वहाँ से अपने घर के लिए निकल गयी..
सुषमा ने उसे घर जाते वक्त ही माधव के फ़्लैट पर चिट्ठी छोड़ने कहा था, लेकिन डिंकी ने ऐसा नहीं किया..
अपनी जींस की जेब में चिट्ठी लिए ही वो अपने घर पहुँच गयी।

अब तक उसके मन में काफी ठहराव आ गया था। उसने अपनी सहेलियों की बात सुन कर ख़त लिख तो लिया था, लेकिन मन ही मन ये भी तय कर लिया था कि ये खत वो किसी सूरत में माधव को नहीं देगी..।

मंजरी का अतीत जो भी रहा हो, उसने पूरे भरोसे के साथ डिंकी को सब बताया था। वो डिंकी पर पूरा भरोसा करती थी, फिर आखिर मंजरी उसकी बड़ी बहन थी।
    अपनी ही बड़ी बहन के बसते संसार में वो कभी आग नहीं लगाएगी, बल्कि कोशिश करेगी कि माधव की तरफ से उसका मन हट जाये।
और अब अपनी पढाई के साथ वो अपने काम में भी पूरा मन लगाएगी..।

यही सब सोचती वो घर पहुंची तो घर में बैठी मंजरी  उसी का इंतज़ार कर रही थी ..

” कहाँ घूम रही थी डिंकी.. देख मंजरी कब से तेरा इंतज़ार कर रही थी !”

मंजरी को देख डिंकी पल भर को झिझकी फिर बिलकुल पहले वाली डिंकी बन आगे बढ़ कर मंजरी के गले से लग गयी..

मंजरी माधव से मिलने के बाद ये तय कर चुकी थी कि उसे माधव से सगाई नहीं करनी।
उसने क्या असल में ये माधव ने ही तय कर लिया था।
माधव अपने घर में बात करना चाहता था, लेकिन मंजरी ने उसे मना कर दिया..
उसने कहा वो अपनी मासी से बात क़र के अपनी माँ तक यह बात पहुंचा देगी और उसके बाद उसकी माँ माधव की माँ से बात कर लेगी इस प्रकार माधव को सीधे तौर पर अपनी माँ से नहीं कहना होगा।

मंजरी अपनी मासी से बात तो करने आई थी, लेकिन बात कैसे शुरू करे ये उसे समझ नहीं आ रहा था…

“तुम दोनों बातें करो, मैं तुम दोनों के लिए कुछ खाने के लिए लेकर आती हूँ !”

सुलोचना के रसोई में जाते ही मंजरी डिंकी के साथ उसके कमरे में चली आई..

“मंजू दी आप बैठो, मैं पांच मिनट में मुहं हाथ धोकर आई.. !”

डिंकी ने ऐसा बोला और अपनी जींस की पिछली जेब से अपना मोबाइल निकाल कर टेबल पर रखा और टॉवेल उठाये बाथरूम की तरफ बढ़ गयी…

मोबाइल निकाल कर रखने में उसी के साथ रखा वो खत निकल कर ज़मीन पर गिर गया। जिसे उसने अपनी सहेलियों के कहने पर लिख तो लिया था लेकिन अब माधव को देने का उसका कोई विचार नहीं था।
वो जल्दबाज़ी में उसे फाड़ कर फेंकना भूल गयी थी..
उसकी भूलवश वो ख़त ज़मीन पर पड़ा मंजरी को जैसे अपनी तरफ पुकार रहा था..

डिंकी के कमरे से जाते ही मंजरी बैठी इधर उधर नजर घूमाने लगी, तभी उसकी नजर उस ख़त पर पड़ी और उसने आगे बढ़ कर उसे उठा लिया…

क्रमशः





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उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
11 months ago

यह क्या हुआ बेचारी डिकी तो कुछ करने बैठी थी लेकिन उसके हाथों से कुछ का कुछ हो गया और अगर वह खत मंजरी ने उठकर पढ़ लिया तो वह डिकी के बारे में अच्छा सोचने की बजाय अब बुरा सोचने लगेगी क्योंकि उसे तो यही लगेगा कि दिन की उसकी सारी सच्चाई माधव को बताने वाली है यह तो बहुत गलत हुआ बात बनने की वजाय बिगड़ सकती है अब तो इस खत की वजह से। 😨😨😨😨😰😰😰😰

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

मोय सियापा 🤦‍♀️भगवान की तरह आप भी कलम चलाकर बेचारी डिंकी के मज़े ले रही हो डॉक्टरनी… अब क्या होगा 🤔मंजरी तो खत पढ़कर डिंकी से नफ़रत करने लग जायगी और बात बनती बनती फिर बिगड जायगी 🤦‍♀️। खत जी आप ही हवा के झोंके से इधर उधर bed के नीचे घुस जाओ plz… ☹️।
बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌👌

Sushila kumawat
Sushila kumawat
1 year ago

माधव ने मंजरी को सब कुछ बता कर सही किया
लेकिन डिंकी की चिट्ठी क्या गुल खिलायेगी 🫢🫢

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

अरे बाप रे अब तो सवा सत्यानाश हो गया।😵😵😵😵

Jagriti
Jagriti
1 year ago

बहुत अच्छा अब ये मंजरी भी गलत दिशा में ही काम करेगी हद है गलत होने की अच्छे इंसान के साथ

Geeta Prasad
Geeta Prasad
1 year ago

अनकहे किस्से के पहली वर्षगांठ की आपको तहे दिल से बधाई और शुभकामनाएं।
अभी तक तो दोस्त थी , लेटर पढ़ने के बाद तो अब मंजरी दुश्मन बन जाएगी।।।क्या लिखा है डिंकी की किस्मत में हमारी डॉक्टर साहिबा ने।।देखते है अगले भाग में।।
बहुत अच्छी कहानी👌👌

Last edited 1 year ago by Geeta Prasad
Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Very nice part.

Ankita
Ankita
1 year ago

बेड़ा गर्क
ये खत भी मंजरी के ही हाथ लगना था🤦🏻‍♀️🤦🏻‍♀️

Shanu singla
Shanu singla
1 year ago

😬😬😬😬😬😬😬😬😬😬😬😬😬