अतिथि -36

अतिथि -36

नीचे उतर कर अपनी स्कूटी निकालते हुए उसने माधव के नंबर पर कॉल मिला दिया, लेकिन माधव का नंबर बंद आ रहा था।

वो माधव का घर भी जानती थी, लेकिन ऐसे उसके घर पर पहुँच जाना सही होगा या नहीं इसी उलझन में बाइक चलाती वो माधव के घर के सामने तक पहुँच गयी..

****

  मंजरी की माँ और माधव की माँ के बीच बातचीत हो चुकी थी, और सगाई की तारीख तय हो गई थी। मंजरी की मां ने जैसे ही मंजरी को यह बताया उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने तुरंत माधव का नंबर लगा दिया माधव ने जैसे ही फोन उठाया उसके कुछ कहने से पहले ही मंजरी बोलने लगी।

” माधव तुम नहीं जानते आज मैं कितनी खुश हूं।”

” अच्छा ऐसा क्या हो गया?”

” हमारी सगाई की तारीख तय हो गई है, परसों हम दोनों एक दूसरे को अंगूठी पहना देंगे..।”

“मंजरी उसके बारे में तुमसे कुछ कहना चाहता हूं।”

” हां हां क्यों नहीं, मैं भी तुमसे कुछ कहना चाहती हूं। लेकिन हम मिलकर ही बात करेंगे। मैं तुम्हारे फ्लैट पर आ जाऊं।”

” नहीं, नहीं, रुको। मैं जो कहना चाहता हूं, वह ध्यान से सुनो। बात यह है कि,…. मैं नहीं जानता तुम्हारी जिंदगी में मुझसे पहले कोई था या नहीं, लेकिन…।”

माधव अभी अपनी बात कह ही रहा था कि मंजरी के दूसरे मोबाइल पर उसकी किसी सहेली के मैसेज आने लगे थे। और वह मैसेज को पढ़ने में व्यस्त हो गई, इसलिए उसका ध्यान माधव की बात पर नहीं रहा।

“एक मिनट,एक मिनट क्या कह रहे थे तुम? माधव मैं दस मिनट में तुमसे मिलना चाहती हूं, प्लीज।”

” ओके तुम बताओ कहां मिलना है?”

” मैं तुम्हारे फ्लैट पर आ रही हूं, अभी।”

” ठीक है आ जाओ।”

माधव ने हताशा से फोन रख दिया। वह मंजरी से कह देना चाहता था कि वह मंजरी से नहीं बल्कि डिंकी से प्यार करता है, और डिंकी से ही शादी करना चाहता है।
असल में अब तक उसे इस रिश्ते के बारे में कुछ पूछा ही नहीं गया था। उसकी मां ने हमेशा की तरह एक निर्णय ले लिया था, और वह एकदम से उस निर्णय की रौ में बहता चला गया था। लेकिन उसे बहुत पहले ही समझ में आ चुका था कि वह डिंकी से प्यार करता है। लेकिन वह इस बात का इंतजार कर रहा था कि जो  उसके मन में भाव चल रहे हैं, वही भाव डिंकी के मन में भी आ जाए, और पिछली शाम उसने डिंकी की आंखों में खुद के लिए वही अनुराग देख लिया था जो खुद उसकी आंखों में डिंकी के लिए था।
    और बस इसीलिए वह आज मंजरी से सब कुछ कह देना चाहता था। वह चुपचाप खिड़की पर खड़ा डिंकी की यादों में खोया हुआ था।
कुछ देर बाद ही फ्लैट की डोर बेल बजने लगी।
   वह अपने कमरे में खड़ा था, उसका ध्यान दरवाजे की घंटी पर नहीं गया लेकिन उसके रूम पार्टनर ने दरवाज़ा खोल दिया..।

” माधव घर पर है?”

” जी!”

रूम पार्टनर ने ठीक सामने खुले दरवाजे की तरफ इशारा कर दिया, माधव खिड़की पर खड़ा नजर आ रहा था..!

बाहर वाले दरवाजे की गढन ऐसी थी कि उसकी सीध  में ही माधव का कमरा था, और माधव का दरवाजा खुला था।
   माधव अपनी खिड़की पर खड़ा मंजरी को साफ नजर आ रहा था। मंजरी की आंखों में तैरते लाल डोरे देखकर माधव का रूम पार्टनर समझ गया कि यह वही लड़की है जिससे माधव की शादी होने वाली है।

” मुझे कुछ काम से नीचे शॉप पर जाना है, मैं आता हूं।”

इतना कह कर वह बाहर चला गया। कमरे से बाहर निकलते ही उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई…

मंजरी धीमे कदमों से चलते हुए माधव तक पहुंच गई। उसके ठीक पीछे खड़ी मंजरी ने धीरे से माधव के कंधे पर हाथ रख दिया।
   माधव चौंक गया। उसे लगा कहीं डिंकी तो नहीं, वह मुस्कुराकर पलटा लेकिन सामने मंजरी को देखकर उसके चेहरे के भाव बदल गए।

” अरे तुम?”

” हां फिर, किसी और को एक्सपेक्ट कर रहे थे?”

” नहीं नहीं, तुमने कहा था कि तुम मिलना चाहती हो।”

“हां मिलना चाहती हूं, माधव में बहुत खुश हूं। बहुत ज्यादा खुश। मैं बता नहीं सकती कि मुझे कितना अच्छा लगता है…।”

मंजरी अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाई और माधव के सीने से लग गई। माधव जब तक कुछ समझ कर उसे खुद से अलग कर पाता, इतनी देर में मंजरी ने उसे और भी कसकर खुद में भींच लिया।
अपने आप को मंजरी की बाहों से अलग करने के लिए भी माधव को मंजरी को थामना पड़ा, लेकिन वह नहीं जानता था कि उसी वक्त डिंकी खुले हुए बाहरी दरवाजे पर आकर खड़ी हुई थी।

     डिंकी जितने उत्साह से गुनगुनाते हुए उस फ्लैट तक पहुंची थी, वह सारा उत्साह माधव की बाहों में लिपटी मंजरी को देखकर तिरोहित हो गया। वह कुछ पलों तक सन्न रह गई। उसे एकदम से अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ और अगले ही पल वह पलट कर तेज तेज कदमों से सीढ़ियां उतर गयी..।

माधव डिंकी को देख नहीं पाया। उसने किसी तरीके से मंजरी से अपने आप को आजाद किया और मंजरी की तरफ देखकर अपने मन की बात कहने लगा..।

“मंजरी मैं नहीं जानता तुम मेरी बात को समझ पाओगी या नहीं? मैं यह भी नहीं जानता कि जो मेरे साथ हो रहा है वह तुमने कभी महसूस किया है या नहीं? लेकिन मैं जो महसूस कर रहा हूं, तुमसे कहना चाहता हूं। तुम्हें बताना चाहता हूं तुम्हारी मां और मेरी मां बचपन की सहेलियां है। उन्होंने अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में बड़े प्यार से बदल दिया। लेकिन मेरी मां ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की, कि मैं इस रिश्ते के लिए तैयार हूं या नहीं। असल में इस बात के लिए मैं उन्हें कसूरवार नहीं ठहरा सकता, क्योंकि बचपन से ही वह मेरे लिए जो भी निर्णय लेती आई थी, मैं उनके हर निर्णय में सहमत रहा हूं। तब ऐसे में शादी ब्याह जैसे बड़े मामले में मैं उनकी कहीं बात को नजरअंदाज कर दूं, इस बात का सवाल ही नहीं उठता। और शायद इसीलिए उन्होंने मुझसे पूछने की जरूरत नहीं समझी। लेकिन मैं यह जानता हूं कि तुम्हारी मां ने तुमसे जरूर राय ली होगी।

    मैं नहीं जानता कि तुम अपनी मर्जी से इस रिश्ते में बंध रही हो या किसी तरह का दबाव है ।
   लेकिन तुमसे यही कहना चाहूंगा कि कभी किसी दबाव में अपनी जिंदगी का इतना बड़ा निर्णय मत लेना।”

” कैसी बातें कर रहे हो माधव? तुमसे शादी के लिए तो मैं हर जन्म में हंसते-हंसते तैयार हो जाऊंगी। मैं किसी दबाव में नहीं हूं, बल्कि मुझे लग रहा है शायद तुम किसी दबाव में हो।”

” नहीं मंजरी अब मैं भी किसी दबाव में नहीं हूं। कल के पहले तक था, क्योंकि मुझे खुद अपने निर्णय पर विश्वास नहीं था। लेकिन आज मैं पूरे आत्मविश्वास से कह सकता हूं कि मैं किसी और से प्यार करता हूं।”

मंजरी का चेहरा सफेद पड़ गया। वह माधव की आंखों में देखने लगी।

” मुझे नहीं पता, मुझसे पहले तुम्हारे जीवन में और कोई था या नहीं? लेकिन मेरी जिंदगी में मेरे इस प्यार के पहले कोई नहीं था।
    तुम मुझे आज ये सब बता रहे हो,वह भी सगाई के दो दिन पहले?
   तुम्हें पहले ही यह बात बता देनी चाहिए थी ना?”

” हां बता देनी चाहिए थी, लेकिन मैं सच कहूं तो मुझे खुद को नहीं लगा था कि मैं उसे इस कदर मोहब्बत करने लगा जाऊंगा। जब पहली बार उससे मिलना हुआ तो वह मुझे एक सीधी सादी, भोली मासूम सी लड़की लगी थी।
    ये पहली नजर वाला प्यार नहीं है, लेकिन पहली नजर में ही वह मुझे अच्छी लगने लगी थी। मुझे उसकी संगत में रहना, उससे बातें करना अच्छा लगने लगा था। वह आसपास होती तो ऐसा लगता है, खुशबु हवाओं में तैर रही है। उसकी हथेलियां से आने वाली मीठी-मीठी खुशबू मुझे आकर हमेशा गुदगुदा जाया करती है। लेकिन तब भी मुझे लगता था कि शायद वह मुझसे प्यार नहीं करती।
    या शायद वह मेरे लिए नहीं बनी। मैं बार-बार खुद को समझा लिया करता था, दिन बीतते चले गए, और इन बीते दिनों के साथ मेरे और उसके दिल का रिश्ता और मजबूत होता चला गया। और अब तो ऐसा लगने लग गया है कि उसके बिना मैं अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता…।”

“नाम जान सकती हूँ उसका.. ?

अपने आंसू पोंछते हुए मंजरी ने पूछा..

माधव जो अब तक डिंकी में खोया था, एकदम से मंजरी की आँखों के आंसू देख पिघल गया और उसके आंसू पोंछने के लिए उसने अपना रुमाल मंजरी की तरफ बढ़ा दिया..

मंजरी तुम्हे दुखी करने का कोई विचार नहीं था, लेकिन…

वो आगे कुछ कहता, उसके पहले ही माधव के बाजू में बैठी मंजरी वापस उससे लिपट गयी लेकिन इस बार उसे खुद से अलग करने की बजाय माधव उसके सर पर सांत्वना भरा हाथ फेरने लगा…

मन ही मन कुछ सोच कर डिंकी वापस पलटी और ऊपर चढ़ गयी..
उसे लगा कि माधव मंजरी को दोस्त समझ कर भी तो गले लगा सकता है, यही सोच वो वापस उसके दरवाज़े पर खड़ी हो गयी.. लेकिन इस वक्त भी वह  पलंग पर बैठे थे..
और अब भी मंजरी माधव की बाँहों में थी..

डिंकी कि आँखों से मोटा सा आंसू गिरा और वो पैदल ही भीगती आगे बढ़ गयी..

क्रमशः







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कांति
कांति
5 months ago

उफ्फ ! ये गलतफहमी जहां प्यार का इजहार करना था। वहां dinki ने गलत समय पर गलत बात को सही समझ लिया। अब क्या होगा?क्या dinki सच जान पाएगी। क्या सगाई टल पाएगी।

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

🤦‍♀️अरे.. 🤦‍♀️ क्या सियापा हो गया ☹️गलतफहमी का शिकार डिंकी अब क्या करेगी और माधव को तो कुछ पता ही नहीं क्या हो गया 🤷‍♀️अब कैसे ये गलतफहमी सुलझेगी या फिर दूरियाँ ही प्यार का अहसास दिलायेंगी 🤔।
खूबसूरत भाग 👌👌👌👌

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

अरे ये कैसी गलतफहमी हो गई।😱

Nisha
Nisha
1 year ago

Galatfahmi ho gyi dono ke bich ab kya hoga 😓😓

Jagriti
Jagriti
1 year ago

मतलब पहले नीचे गई फिर ऊपर आई कितने में सारी कहानी खत्म हो गई यार क्या गलतफहमी पैदा कर दी अब

softwarevyom
1 year ago

Nice story

Sofiya shaikh
Sofiya shaikh
1 year ago

Very nice 👌👌👌

Shanu singla
Shanu singla
1 year ago

☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️☹️

Meenakshi Sharma
Meenakshi Sharma
1 year ago

Nice part 👍😍❤️