
अतिथि -35
अपने बिस्तर पर करवटे बदलती योगिता के दिल दिमाग पर भूषण का पुलिस के साथ जाना छाया हुआ था।
उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो कैसे उसे बचा सकती है?
बहुत देर सोचने के बाद उसे एक नाम सूझ गया.. उसकी एक सहेली के पति वकील थे, योगिता को लगा उनसे बात कर के कोई हल निकाला जा सकता है..।
अगली सुबह अपने पति के ऑफिस जाते ही उसने अपनी सहेली का नंबर मिला लिया…।
इधर-उधर की बातें करने का इस वक्त ना उसका मन था और ना उसके पास वक्त था। उसने साफ-साफ शब्दों में अपनी सहेली से भूषण के बारे में सब कुछ कह दिया, अपने और भूषण के संबंधों को जरूर छिपा गई।
उसकी सहेली ने अपने पति को फोन थमा दिया..।
“ललित जी, भूषण मेरे ऑफिस में मेरे साथ ही काम करते हैं। काफी अच्छे स्वभाव के हैं, और काम में भी बहुत निपुण है। मुझे ऐसा लग रहा है कि उन्हें जबरदस्ती फंसाया जा रहा है। उन्हें पुलिस, ऑफिस से पकड़ कर ले गई है, क्या उनकी जमानत संभव है..?”
“मैं कोशिश कर सकता हूँ, लेकिन जमानत के लिए काफी रूपये लग जायेंगे.. !”
“लगभग कितने ?”
“दो से ढाई लाख !”
इतनी रकम सुन कर भी योगिता हारी नहीं..
“जी हो जायेगा, मैं पैसे लेकर आपके ऑफिस आती हूँ !”
योगिता ने फटाफट अपने बचा कर रखे रुपए ढूंढ़ने शुरू किये। कुछ रुपए उसके पास थे, कुछ गहने, वह सब लेकर वह सीधे ललित के ऑफिस पहुंच गई। वहां से ललित ने उसे साथ लिया और पुलिस थाने में पहुंच गया, जहां एक दिन पहले भूषण को ले जाया गया था..।
अपनी तरफ से तैयार कागजातों को ललित ने थाना इंचार्ज के सामने पेश कर दिया, उसने कुछ इस तरीके से कागज बनाए थे कि थाना इंचार्ज भी सोच में पड़ गया…।
अब तक मामला कोर्ट में दाखिल नहीं हुआ था, ललित अपने संबंधो का उपयोग कर मजिस्ट्रेट से परचा लिखवा लाया था जिसके अनुसार भूषण कई बिमारियों से जूझ रहा था, इसलिए जब तक कोर्ट उसे दोषी न करार दे तब तक उसे थाने में न रखा जाये..।
थाना इंचार्ज ने कागज़ देखे और भूषण को छोड़ दिया..।
हालाँकि भूषण को शहर छोड़ कर जाने की अनुमति नहीं थी..।
भूषण के बाहर आते ही योगिता उसके पास चली आई, वह तो उससे लिपट जाना चाहती थी लेकिन लोगों की मौजूदगी में वह ऐसा नहीं कर सकी..
ललित उन दोनों के पास चला आया।
” आप दोनों चाहे तो घर चल सकते हैं। वैसे भी आपकी सहेली ने कहा था कि यहां से मैं आपको लेकर घर ही आऊं।”
ललित की बात सुनकर योगिता ने भूषण की तरफ देखा और हामी भर दी।
भूषण और योगिता को साथ लेकर ललित अपने घर चला गया…।
भूषण गुस्से में था, उसे इस वक्त योगिता से भी बात करने का मन नहीं था, लेकिन योगिता उससे बात करने के लिए तड़प रही थी..
भूषण योगिता आसपास बैठे थे.. ललित एक तरफ बैठा कुछ लीगल कागज़ देख रहा था, और योगिता कि सहेली लता चाय बनाने रसोई में चली गयी थी.. सबको खुद में व्यस्त देख योगिता भूषण की तरफ सरक आई…
” भूषण, सबसे पहले ये बताओ कि क्या सच में तुमने ये सब किया है ?”
योगिता की बात पर भूषण ने आँखे तरेर कर उसकी तरफ देखा, लेकिन फिर अगले ही पल उसे ये भी समझ आ गया कि आखिर उसे ज़मानत दिलवा कर तो योगिता ही लायी है..
और वो शांत रह गया।
‘”बोलो न भूषण, ये भी तो हो सकता है कि किसी और का किया काम तुम्हारे मत्थे मढ़ दिया गया हो !”
भूषण सर झुकाये चुप चाप बैठा था, तभी ललित बोल पड़ा..
“इन्होने ये काम किया है या नहीं इससे अब फर्क नहीं पड़ता, क्यूंकि हर सूरत में हमे ये इल्जाम किसी और के सर डालना होगा, तभी भूषण के लिए रास्ता निकलेगा..।
अब ये सोचना है कि ये इल्जाम किस के सर मढ़ा जाये !”
ललिता की बात पर भूषण से पहले योगिता बोल पड़ी..
“अनुराधा… ! हमारे ऑफिस कि कान्ट्रेक्चुअल एम्पलाई है, और उसके ऊपर आजकल रूबी का कुछ ज़्यादा ही प्रेम उमड़ रहा है !”
गुस्से से तमतमाती योगिता ने अपने मन का जहर उगल दिया, उसे वैसे भी डिंकी से अंदरूनी खुन्नस थी..
ललित ने हामी भर दी.. लेकिन इसके साथ ही ललित को ये भी समझ आ गया था कि योगिता भूषण को जैसे सिर्फ अपने साथ काम करने वाला कलीग बता रही थी वैसा ही बस नहीं है, इन दोनों का रिश्ता उससे ज़रा ऊपर है..।
वो किचन में क्या चल रहा देखने के बहाने से उठ कर अंदर चला गया और उसके अंदर जाते ही योगिता भूषण के गले से लग गयी..
“तुम नहीं जानते भूषण, कल रात तो मेरी जान ही निकल गयी थी.. जब तक दिमाग में लता और उसके पति का नाम नहीं आया तब तक मैं परेशान हाल करवटे बदलती रही !”..
भूषण ने भी योगिता को बाँहों में कस लिया..
“थैंक्स योगिता, तुमने जो किया है उसका एहसान मैं जिंदगी भर याद रखूँगा !”
“अच्छा जी, अब मेरा किया सब एहसान हो गया? मैं इतनी परायी कब हो गयी ?”
“एक तुम ही तो अपनी हो। ये बताओ इतने रुपयों का प्रबंध कहाँ से किया ?”
“कुछ रुपये मैंने बचा रखे थे, और कुछ गहने काम आ गए !”
ये सुनते ही भूषण ने उसे और ज़ोर से खुद में भींच लिया..
“उन दोनों को तो अब मैं छोडूंगा नहीं.. पता नहीं खुद को क्या समझता है….
अब इसकी कुंडली निकलवाता हूँ !”
“बिलकुल नहीं छोड़ना, ये दोनों छोड़ने लायक है भी नहीं !”..
ललित और लता के बाहर आते ही दोनों एक दूसरे से छिटक कर सलीक़े से बैठ गए..
चाय पीते हुए ललित उन दोनों से बाकी जानकारियां लेता रहा !
*****
डिंकी कि नींद खुल चुकी थी, लेकिन अब भी वो अपने पलंग पर पड़े पड़े बीती शाम के बारे में सोच रही थी..
माधव ने भले ही जवाब घुमा फिरा कर दिए थे, लेकिन उसके वह इशारे जो उसने कभी डिंकी को किये ही नहीं, वह भी डिंकी का दिल समझ गया था। डिंकी समझ गई थी कि भूषण से इतनी नफरत माधव को सिर्फ और सिर्फ भूषण के डिंकी के प्रति बुरे बर्ताव के कारण ही थी।
डिंकी के चेहरे पर एक मुस्कान चली आई, उसका ध्यान ही नहीं था कि दरवाजे पर उसकी चाय लिए खड़ी उसकी मां उसे ही देख रही थी, लेकिन जाने क्यों सुलोचना के चेहरे पर मुस्कान नहीं आ पाई।
वह समझ गई डिंकी की इस मुस्कान के पीछे माधव ही है।
” ले उठ चाय पी ले। बड़ी देर हो गई है।”
डिंकी एक मीठी सी अंगड़ाई लेकर उठ बैठी।
उसने अपनी मां के गले में बाहें डाल दी और धीरे-धीरे कुछ गुनगुनाने लगी। उसकी बाहों पर अपना हाथ रखकर सुलोचना ने धीरे से एक जहर बुझा तीर छोड़ दिया।
” जीज्जी का सुबह-सुबह कॉल आया था, परसों सगाई की रस्म है।
वह लोग यहीं से सगाई करने वाले हैं।”
डिंकी के दिल पर जैसे बिजली टूट कर गिरी। वह अब तक इस सच्चाई को जैसे भूल बैठी थी, कि माधव और मंजरी की सगाई होने वाली है। एकदम से उसे जैसे कुछ समझ ही नहीं आया, उजला निकला सूरज जो अब तक उसकी खिड़की पर चमक रहा था, अब अचानक जैसे घने बादलों के पीछे छुप गया था..।
कुहासे वाली हवा जैसे अब सिहरन सी पैदा करने लगी थी। उसने चुपचाप चाय का प्याला उठाकर अपने होठों से लगा लिया। लेकिन आज चाय की मिठास भी उसके अंदर की कड़वाहट को मिटा नहीं पाई।
तीर सही जगह लगा है यह देखकर सुलोचना के मन में एक ठंडक सी पहुंच गई।
वह उठी और जाने लगी, जाते-जाते उसने पलट कर अपनी बेटी का मुरझाया सा चेहरा देखा और जाने क्यों पल भर पहले की उसकी खुशी एक दर्द में बदल गई।
अपनी बेटी की खुशी को उससे छीन कर भला कौन सा सुकून पा जाएगी वह?
अगर डिंकी को सच में माधव अच्छा लगने लगा है तो क्या माधव से ही उसका विवाह नहीं कर देना चाहिए?
लेकिन डिंकी भी समझती नहीं, एक पागल लड़के के हाथ में कैसे कोई मां अपनी बेटी का हाथ दे देगी? लेकिन सोचने वाली बात यह है कि लड़का कहीं से भी पागल लगता ही नहीं। कितना तो सामान्य है वह, नौकरी कर रहा है, पैसे कमा रहा है, यहां तक की उसकी खुद की बड़ी बहन जो एक बहुत अच्छे घर से जुड़ी है जिसका पति लाखों का पैकेज खुद कमाता है, अपनी इकलौती बेटी की शादी माधव से करने को तैयार है।
तो फिर क्या सच्चाई है माधव के इस पागलपन के पीछे।
अपनी उधेङबुन में खोई सुलोचना वापस रसोई के रण में लौट गई।
आज इतवार था इसलिए घर-भर की फरमाइशों का झंडा बुलंद था। आज उसके छुटके ने पहले ही फरमाइश कर रखी थी कि उसे कचौड़ियां खानी है। और बस वह मटर की कचौड़ियों की तैयारी में लग गई। लेकिन अपने कमरे में गुमसुम सी बैठी डिंकी का मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
उसे अचानक फिर एक दिन पहले का माधव याद आने लगा। माधव के साथ गुजारे दिन याद आने लगे। वह शाम याद आने लगी और वह सब कुछ याद आते ही उसका दिल जोर-जोर से चीख कर उसे बताने लगा कि माधव मंजरी से नहीं उसी से प्यार करता है। वह अपनी जगह पर खड़ी हो गई।
कोई बात नहीं वह आज की लड़की है, जरूरी थोड़ी है ना कि वह माधव के प्रस्ताव का ही इंतजार करती रहे। वह भी तो अपनी तरफ से माधव से अपनी मोहब्बत का इजहार कर सकती है।
यह बात दिमाग में आते ही वह नहा कर तैयार हो गई।
रसोई के बाहर से ही अपनी मां को आवाज देकर निकलने लगी, तो सुलोचना ने उसे टोक दिया।
” अरे कुछ खाकर जा, खाली पेट पूरा दिन घूमती रहती है।”
” आज कुछ बहुत जरूरी काम है, माँ…।”
नीचे उतर कर अपनी स्कूटी निकलते हुए उसने माधव के नंबर पर कॉल मिला दिया, लेकिन माधव का नंबर बंद आ रहा था।
क्रमशः

योगिता का भूषण को जेल से निकालने का फैसला उसके लिए गलत साबित ना हो जाएं। वैसे भी अनैतिक रिश्ते फलते नहीं है।
माधव के लिए प्रेम अब dinki से छुपाएं नहीं छुप रहा। अब शायद वो इज़हार कर दे माधव से अपने प्यार का।
शानदार भाग 👌👌👌👌
योगिता तो सच मे पागल औरत है जिसने अपनी जमापूंजी और गहने तक बेच दिए उस भूषण के लिए 🤦♀️। इतना तो समझ आ ही गया अब भूषण चुप नहीं बैठेगा वो कुछ भी करके डिंकी और माधव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा अब देखते है आगे क्या होता है।
माँ सब समझती है, सुलोचना समझ रही है माधव के लिए डिंकी का झुकाव पर वो भी क्या करे पता नहीं कितना सच है माधव की बीमारी का, फिर भी वो आँखों देखा जहर तो नहीं पी सकती ना,.. वो जानबूझकर तो अपनी बेटी किसी पागल के पल्ले नहीं बाँध सकती ना..पर डिंकी ने ठान ही लिया है वो माधव से अपने मन की बात कह ही देगी 🤷♀️।
इंतज़ार.. इंतजार… इंतज़ार है उस पल का 😊।
बेहद खूबसूरत भाग 👌👌👌👌
Kahin Madhav ke sath uska ye judav use kisi sazish me fasne ko na dhakel de 😥😥
Superb
Very nice 👌👌👌👌
Superb part
Bahot badhiya 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
Please 🙏🏻 badi besabri se intezar reheta h, baki kahaniyan na sahi atithi hi dete rahiye ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻 please…🤞🏻🤞🏻🤞🏻🤞🏻
आज काफी दिनों बाद मिलना हो पाया दिन की और माधव से।
लगा था की योग्यता और उसे भूषण का साथ छूट गया पर योगिता भी बड़ी चतुर निकली अपनी जमा पूंजी उसे बेगैरत भूषण पर खर्च करने में उसे एक बार भी शर्म नहीं आई अपने पति को धोखा देकर ऐसे कितने दिनों तक वह रह सकती है कभी ना कभी उसका भंडा फूटेगा और सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।😡😡😡😡😡
लेकिन इन सब में एक बात यह जरूर हुई कि उसे घटिया भूषण ने अब ठान लिया है कि वह डिकी और माधव का पीछा नहीं छोड़ेगा उन्हें परेशान करेगा लेकिन इतना भी कमजोर नहीं है माधव की कोई ऐरा गेरा जाकर उसे परेशान कर पाए और उसकी डिकी की तरफ आज उठाकर देख भी पाए।😏😏😏😏
मन तो मां होती है एक पल में अपनी बच्चों को किसी भी मुसीबत से दूर रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और दूसरे ही पल उनको उदास देखकर खुद भी उदासी की छाया में डूब जाती है पर एक बात समझ नहीं आ रही है कि डिकी जो गई है माधव से अपने मन की बात कहने तो क्या माधव उसे बात को समझ पाएगा और मंजरी और माधव की सगाई क्या टल पाएगी।
इतनी खूबसूरत भाग के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया डॉक्टर साहिबा 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
बहुत अच्छा पार्ट है। पर अतिथि बहुत दिनों में आते है। हम लोग इंतजार कर कर के थक जाते है। 🤪
Very very nice part 👌👌