
अतिथि -30
भूषण के साथ बैठी डिंकी को देख देख कर योगिता का खून जला जा रहा था, उसका पूरा ध्यान उन्ही दोनों पर था, हालाँकि डिंकी मंजरी से बातों में लगी थी.. लेकिन बैठे तो चारों ही लोग साथ साथ थे…
योगिता कुछ देर तक उन लोगो को घूरती रही फिर उसने भूषण के फ़ोन पर कॉल लगा दिया..
भूषण ने योगिता को नहीं देखा था..
भूषण ने जैसे ही मोबाइल पर योगिता का नाम देखा उसने मंजरी की तरफ हड़बड़ा कर देखा और कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया..
योगिता का खून खौल गया..
वो वापस कॉल लगाने लगी..
इस बार फिर भूषण ने कॉल काट दिया और योगिता तीसरी बार कॉल करने लगी..
“लगता है कोई बहुत ज़रूरी कारण से आपसे बात करना चाहता है.. बात कर लीजिये !” माधव ने कहा
भूषण ने बिना मन के फ़ोन उठा लिया..
‘”कहाँ हो ?”
योगिता ने सवाल दाग़ दिया..
“क्या हुआ ? ऐसा क्यों पूछ रही हो ?”
“क्यों.. नहीं पूछ सकती क्या ? अब सवाल भी तुम बताओगे ?”
“तुम बताओ कहाँ हो ?”
“पहले सवाल मैंने किया, तुम बताओ !”
“घर पर हूँ यार , कहाँ जाऊंगा ?”
“कौन से घर में ?”
“मतलब.. अपने फ़्लैट में हूँ !”
भूषण मुहं के सामने हाथ रख कर बात कर रहा था लेकिन अगल बगल बैठी मंजरी और डिंकी के कान में बात न चली जाये, ये सोच कर वो अपनी जगह से उठा और धीमे धीमे बात करते आगे बढ़ा ही था कि, दूसरी तरफ से योगिता उठ कर उसी तरफ बढ़ी और दोनों एक दूसरे के सामने आकर ठिठक गए..
योगिता की आँखों से शोले बरस रहे थे..
उसकी आग उगलती आंखे देख भूषण सकपका गया…
“तुम… ?”
“क्यों किसी और को एक्पेक्ट कर रहे थे क्या ?”
“नहीं.. मतलब.. अचानक तुम मिल जाओगी ये नहीं सोचा था !”
“मैंने सुबह तुम्हे लंच के लिए पूछा, तब तुम्हारे पास टाइम नहीं था और अभी अनुराधा के साथ यहाँ कैफे में बैठे हो !”
“कौन अनुराधा ?”
“इतने भोले मत बनो मिस्टर भूषण मालिक !”
“अरे.. अच्छा वो.. ! मैं उसके साथ नहीं आया हूँ यार.. समझा करो.. हमारे भविष्य के लिए ही कुछ कर रहा हूँ !”
भूषण का दिमाग तेज़ी से काम कर रहा था..
“वो देख रही हो उधर !”
गुस्से में योगिता उस तरफ पलट कर देखने लगी
“क्या ?”
“वो देखो.. उस लड़के को देख रही हो, जो अनुराधा के साथ बैठा है !”
“कौन है वो ?”
“माधव ! माधव नाम है उसका.. बन्दा पीडब्लूडी में इंजिनियर है.. सीनियर पोस्ट पर है.. इसके अप्रूवल के बाद ही दुकान का टेंडर पास होगा.. और एक बार टेंडर पास हो गया, तब वो दुकान हमारी होगी.. !”
“उससे फायदा ?”
“तुम बहुत बड़ी बेवकूफ हो.. तुम्हे इतना नहीं समझ में आता कि मैं क्यों चाहता हूँ कि मेरी अपनी बुटीक हो… अरे इतनी भाग दौड़ कर जो क्लाइंट्स बनाये हैं, डिजाइंस चुराए हैं, उन सब के साथ अपना काम शुरू करना चाहता हूँ…
हमारा काम.. जहाँ कोई रूबी हमारे सर पर नहीं होगी !”
“तुम्हारे सर पर बैठ कर भी रूबी ने ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया.. अगर वो तुमसे काम लेती है तो बदले में मोटे पैसे भी देती है भूषण !”
“दिखा दी न छोटी सोच। कर दी न दो पैसे की बात.. मैंने कब कहा कि रूबी कुछ गलत करती है। लेकिन ये भी तो सच है कि हम सदा सर्वदा रूबी के गुलाम बने नहीं रह सकते न..
तुम समझ रही हो या नहीं..!”
योगिता ने बिन कुछ कहे मुहं घुमा लिया और एक तरफ बढ़ गयी.. उसके पीछे मरता क्या न करता की तर्ज पर भूषण भी चल पड़ा..
भूषण के दिमाग में उस समय बस यही चल रहा था कि किसी तरह योगिता को यहाँ से चलता किया जाए..।
मंजरी और योगिता के बीच किसी तरह की भेंट न हो बस यही उसकी तमन्ना थी..
मंजरी मेलोड्रामा तो थी, लेकिन योगिता छिछोरी थी। कहीं उसने यही चीख चिल्ला कर अपनी सस्ती नौटंकी शुरू कर दी तो सबके सामने उसकी नाक काट जएगी, और वो अपने नाम के लिए अति सचेत था !
योगिता अपनी टेबल पर जा बैठी.. उसकी बेटी जो अब तक अपने आसपास से अनभिज्ञ अपने मोबाइल में पूरी तरह डूबी बैठी थी, अचानक सर उठा कर टेबल पर माँ के साथ पहुंचे अतिथि को देखने लगी..
“ये भूषण अंकल है जेमी !”
जेमी ने एक नजर सामने खड़े उन अंकल को देखा लेकिन इस मेलमिलाप से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मेसेज बीप फ़ोन पर बजी और वो वापस अपने मोबाइल के महाकुंड में डुबकी लगा गयी..
उसकी तरफ एक उपेक्षित नजर डाल योगिता वापस भूषण की तरफ देखने लगी.. भूषण ने इशारे से पूछा की क्या इसी के सामने बातचीत करनी है और मुहं फुलाये बैठी योगिता ने कोई वाजिब जवाब नहीं दिया..
भैंस की तरह जुगाली करती योगिता की लड़की का बाह्य कलेवर और भी भयानक था..
योगिता को इस तरह अड़ा देख भूषण भी नाराजगी में खड़ा हो गया..
“भाड़ में जाओ !” धीमे से अपने मन का जहर उगल कर वो अपनी टेबल की तरफ पलट गया..
दोनों के बीच एक ऐसा रिश्ता था जिसका भवन दोनों के स्वार्थ की नींव पर टिका था…और ऐसा जर्जर भवन कब अपनी समस्त दरो दिवार के साथ भरभरा के गिर पड़ेगा, कोई नहीं जानता था !
भूषण चला गया लेकिन योगिता का मन ख़राब हो गया..
भूषण ने मंजरी पर से योगिता का ध्यान हटाने के लिए जाते ही साथ माधव से बातचीत शुरू कर दी। लेकिन दूर बैठी योगिता को यह आभास हो रहा था जैसे माधव के बगल में बैठी डिंकी से भूषण बात कर रहा है.. ..
उसका रोम रोम कांटा बन उसी को चुभ रहा था !
दूर बैठे माधव को सारी बातें समझ में आ रही थी.. उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई थी.. भूषण यहाँ से निकल जाने के लिए प्रयासरत था..
“अब चले यहाँ से ?”
“हाँ चलिए !” मंजरी ने कहा और खड़ी हो गयी.. वो खुद किसी तरह भूषण से छुटकारा चाहती थी..
बड़े अजीब से हालात हो रखे थे..
मंजरी जो कुछ दिनों पहले तक भूषण से दिल लगाए बैठी थी,कभी जिसका साथ फूलो का साथ होता था, आज पल पल ऐसे चुभ रहा था जैसे कांटा..
वही हाल भूषण का योगिता के लिए था..
जिस औरत ने उसके लिए अपने सीधे सरल पति से प्रवंचना करने में तिल मात्र भी नहीं सोचा, जिसने भूषण की ज़रूरत के वक्त अपने पति से बिना बताये अपनी सोने की मोटी ठुस्सी रहन रख कर उसके हाथ में नोटों के बंडल के बंडल पकड़ा दिए…
आज वही योगिता उसके लिए आँख की किरकिरी हो गयी थी..
भूषण को न उसका कुटिल भ्रूविलास भा रहा था, न उसके भींचे हुए अधरों की मुस्कान…
जिस चेहरे को वो कभी घंटो मोबाइल पर विडिओ कॉल में देखता रह जाता था, आज उसी चेहरे से नफरत सी हो रही थी..
और ऐसा ही कुछ हाल योगिता का था..
भूषण से उसकी नाराजगी थी, लेकिन गुस्सा फूटने वाला था डिंकी पर क्यूंकि कहीं न कहीं योगिता के दिमाग में ये बात बैठ गयी थी कि भूषण का झुकाव हो न हो डिंकी की तरफ है। और इसी आग में झुलसती योगिता ने रूबी को कॉल लगा दिया..
“बोलो योगिता ! घकुछ काम था क्या ?”
“रूबी, तुम्हे डाउट था न की कोई तुम्हारे डिज़ाइन्स चुरा कर किसी और डिज़ाइनर्स को तो नहीं बेच रहा है, या कहीं अपना बुटीक तो नहीं डालने वाला है ?”
“हाँ लग तो रहा था.. क्या हुआ ?”
“मुझे पता चल गया है वो कौन है ?”
“कौन है वो ?”
योगिता ने एक नजर भूषण पर डालकर वापस अपने फ़ोन की तरफ देखा और बोल पड़ी..
“मैं ऑफिस में ही बताउंगी…. !”
इतना कह कर योगिता ने फ़ोन रख दिया..
क्रमशः

अनैतिक संबंध कभी भी नहीं फलते कभी न कभी वो जहर बनकर जीवन में घुल ही जाते हैं जिससे निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी हो जाता हैं कभी कभी। मंजिरी, भूषण और योगिता तीनों का जीवन बस ऐसे ही बर्बाद हो रहा।
सही बात है कि ऐसे अनैतिक संबंधों का जीवन कुछ ज्यादालंबा नहीं रहता और इनका अंत भी बहुत बड़ा निकलता है मन की समय के साथ सारा आकर्षण खत्म हो जाता है और यही आकर्षण जब खत्म होता है तो एक बेहद कड़वा सा व्यवहार इंसान के मन में बस जाता है और उसे इंसान से एक अलग से ही नफरत हो जाती है और इसी नफरत 😡😡😡👏🏻👏🏻के वशीभूत होकर योग्यता कुछ ऐसा करने वाली है जो शायद उसे नहीं करना चाहिए ।🥺🥺🥺
कहीं ऐसा तो नहीं कि वह भूषण से गुस्सा निकालने के चक्कर में बेचारी मासूम डिंकी को फंसा दे अगर डिकी के बारे में उसने कुछ भी उल्टा सीधा कहा तो माधव उसे फिर छोड़ेगा नहीं और ना ही भूषण को छोड़ेगा फिर😡😡😡😡
very nice part of the story
Bhushan ki toh bahut buri lag gyi
Bahoot khoob
वाह एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी।ये योगिता की बच्ची ज़रूर डिंकी का ही नाम फसाएगी।मस्त भाग👍🏻👌🏻👌🏻
Ye sare nire corrupt hai par sare sidhi Si dinky ko phasa rahe hain. Stupid fellow.
👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏
😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳
Ab Sara siyappa dinky per fataga🫢🫢🫢😴😴😴😴😱😱😱😱