
जीवनसाथी -3 भाग -132
भदौरिया अपने अति आत्मविश्वास में कहीं न कहीं चूक कर बैठा था..
वासुकी और दर्श को जानते समझते हुए भी उसने एक गहरा दांव खेल दिया था..
हालाँकि उसे अपने दांव पर पूरा भरोसा था..
उसने जो सोचा था औऱ किया था, उसके पीछे उसकी कुटिल बुद्धि काम कर रही थी..
वो इस बात को अच्छे से जानता था कि अगर राजा साहब का बेटा उसके साथ खड़ा हो गया तो वासुकी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता.. ।
वो जानता था कि वासुकी कितना भी गरज लें लेकिन , राजा साहब के सामने वो अपने हंटर पकडे स्वामी को देखते ही अनुशासित औऱ कर्तव्यनिष्ठ शेर सा ही हो उठता..।
औऱ इसी बात का फायदा उठाने के लिए ही भदौरिया ने ये सारा स्वांग रचा था..
अपने उत्पादों के शुभारम्भ के अवसर पर जब शौर्य ने उसके उत्पादों की धज्जियां उड़ा दी, तब उसने उसी रात शौर्य से सम्पर्क किया था…
लेकिन शौर्य ने उसके लड़के को उसके दामी उयहार के साथ वैसे ही वापस लौटा दिया था…. ।
अगले दिन वापस भदौरिया ने शौर्य के पास अपना लुभावना प्रस्ताव भेज दिया था, लेकिन इस बार भी राजा साहब के बेटे ने उस छिछोरे आदमी को अपने कंधे पर हाथ न धरने दिया था ..
इसके बाद भदौरिया के शातिर दिमाग ने जो चक्रव्यूह रचा उसमे उसके अनुसार शौर्य को फंसना ही था..
किराये के ट्रक ड्राइवर को ऊंची रकम देकर उसने शौर्य की गाडी को ठोकर मारने का आदेश दे दिया.. ।
भदौरिया के कमीनेपन की हद ये थी कि उसने इस आदेश को भी अपने नियमो की आचारसंहिता में बांध कर लागू किया था..
इस आदेश की प्रस्तावना से लेकर उपसंहार तक उसका स्वयं का रचा गया था….
शौर्य की गाड़ी को ठोकर ब्रिज के ऊपर ही मारना है वो भी जब उसकी गाड़ी ब्रिज के बायीं तरफ हो..।
शौर्य की गाडी को इस तरह ठोकर मारनी है कि शौर्य जिन्दा न बचे..।
उसके साथ साथ उसकी गाड़ी के परखच्चे उड़ जाये..
महल वासियों को अंतिम संस्कार के लिए उनका राजकुमार नसीब न हो..।
“ज्यादा ही होशियार बन रहा था, अब देखता हूँ क्या करेगा !” भदौरिआ के मन में ये चल रहा था।
जाने कितने ही मंसूबे बांध कर भदौरिया ने शौर्य की गाड़ी भिड़वा दी, लेकिन उसके अरमानो पर तब पानी फिर गया जब ट्रक ड्राइवर ने फ़ोन पर इस बात का खुलासा किया कि शौर्य के परखच्चे उड़ पाते, उसके पहले ही उसका शरीर हवा में ऊंचाई तक उछल गया औऱ उसके सामने ही उसके देखते देखते कई फ़ीट गहरी नदी में गिर कर बह गया.. ।
हालाँकि ये बताते हुए वो अनाड़ी यमदूत अपनी मूंछो को अनजाने ही ऐंठ रहा था, उसके अनुसार शौर्य का इतनी ऊंचाई से पानी में गिरने के बाद मरना तय था….
लेकिन भदौरिया सबूत जांचे परखें बिना किसी पर विश्वास नहीं कर सकता था..
अपनी आँखों से देखने के बाद भी वो उसकी पसलियां बजा कर पूरी तरह ठोंक पीट कर ही उस पर भरोसा कर सकता था, इसलिए उसने शौर्य की बॉडी का संधान शुरू करवा दिया..
जैसी उसकी सेना थी, दो ही दिन में उसे शौर्य का शरीर नीम बेहोशी की हालत में मिल गया।
लेकिन इसके साथ ही चार दिन बाद उसी अस्पताल के बाहर डॉक्टर से मुलाकात कर के निकलते एक युवक से भदौरिया की टक्कर हुई औऱ उसे देख भदौरिया की आँखों के आगे तारे घूम गए…
हूबहू वही शक्ल, वही रंग रूप, वही लम्बाई कद काठी..
ये कैसा चमत्कार था..
क्या वाकई किसी का हमशक्ल होना संभव है.. ?
भदौरिया अपलक उस लड़के को देखता रह गया..
वो लड़का किसी से बात कर रहा था, उसका धयान एकदम से भदौरिया पर गया औऱ वो चौंक गया..
लड़का अपनी मस्त चाल में चलता हुआ भदौरिया तक चला आया..
“क्या हुआ अंकल, ऐसे क्या घूर रहे हो ?”
उस लड़के के सवाल का जवाब दिया भदौरया के, असिस्टेंट ने
“तुम कौन हो ?”
“इससे तुम्हे क्या मतलब ?” उस लड़के ने पलट कर जवाब दिया, औऱ मुस्कुरा कर निकल गया, लेकिन असिस्टेंट खुद स्तब्ध था उसने दूसरा सवाल उछाल दिया..
“नाम क्या है तुम्हारा ?”
वो लड़का ठिठका, लेकिन बिना वापस मुड़े ही जवाब दे गया..
“क्यों, मेरा राशन कार्ड बनवाना है क्या ? “
असिस्टेंट ने भदौरिया की तरफ देखा, भदौरिया का इशारा पाकर वो अगली बात बोल गया..
“कुछ ज्यादा ही बद्तमीज नहीं हो ?”
“अपनी तारीफ मैं कैसे करूँ ?”
भदौरिया के असिस्टेंट के उलटे सवालों के उससे भी उलटे जवाब देकर वो निकल गया, लेकिन भदौरिया अपलक उस लुभावने चेहरे को देखता रह गया..
“मान लिया की दो इंसानो की शक्ल एक सी हो सकती है लेकिन इतना साम्य.. ? एकदम हूबहू, एक सा रंग, एक से बाल, एक सी कदकाठी… ! बस ये लड़का अपने बोलने चलने से जरा बेढंगा था, शौर्य के रॉयल एटिट्यूड की कमी है इसमें ?”..
भदौरिया स्वगत भाषण करता खड़ा था, उसके असिस्टेंट ने भदौरिया की तरफ देखा..
“आपने कुछ कहा ?”
“भाग कर जाओ औऱ उस लड़के को रोक लो.. जितनी रकम के लिए मुहं खोले मान लेना.. !”
असिटेंट, भदौरिया के काले कलुषित हृदय की प्रलयंकारी चालो को समझता था.. वो तेज़ी से उस लड़के तक पहुँच गया..
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कुछ देर तक वो लड़का औऱ असिस्टेंट बात करते रहे, कुछ हजारो से शुरू हुआ व्यापार कुछ लाख की सीमा रेखा पार करता, कुछ करोड़ पर जाकर सिमट गया..
असिस्टेंट विजयी मुस्कान के साथ वापस लौटा…
“हो गया सर.. !”
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“हमारे साथ काम करने तैयार है ?”
“जी सर.. !”
“कितने में माना ?”
“सर सौ करोड़!”
भदौरिया का मुहं खुला रह गया…
“सौ करोड़ ?”
“जी सर इसके आगे बढ़ने पर मैंने खुद ने रोक दिया कि इससे ज्यादा साहब देंगे नहीं, !”
भदौरिया ने घूर कर अपने मूढ़ मगज असिस्टेंट को देखा..
“ठीक है उसे कल ऑफिस आने बोल दो !”
भदौरिया ने असिस्टेंट को आदेश दिया..
“सर मैंने पहले ही उसे आपका कार्ड देकर ऑफिस बुलवा लिया है.. कल सुबह वो पहुँच जायेगा !”
भदौरिया ने माथा पीट लिया..
“तुम अगर मेरे साले नहीं होते न… कसम से तुम्हे थेम्स में डूबा कर मार देता..
उसे कार्ड देने की क्या ज़रूरत थी, अब वो जान जायेगा की किस के लिए काम कर रहा है.. ?”
“तो क्या होगा, वैसे भी अगर आपके साथ रहेगा तो समझ ही जायेगा कि आपके लिए काम कर रहा है !”
“बेवकूफ… मैं उससे बाद में ये भी कह सकता था कि उसे वासुकी ने हायर किया है !”
“अच्छा, औऱ वो भूतनाथ चुप बैठता… उसकी तीसरी आँख कब खुल जाए हमें तो हर वक्त यही डर सताता रहता है..
एक बार बस उससे हाथ मिलाया था, आज तक नहीं भूल पाए है, वो चौड़ी मैदान सी हथेली, हमें तो लगा हमारा हाथ उस व्याघ्रहस्त के हाथ में पतंग सा फड़फड़ा रहा था…
“तुम ज़रा साहित्य पढ़ना बंद करो, उटपटांग भाषा बोलने लगे हो !”
भदौरिया ने उस लड़के की तरफ देखा, वो खुद में गुम कुछ गुनगुनाते हुए उसकी आँखों से ओझल हो गया था.. जैसा बेलौस बेपरवाह वो नजर आ रहा था,भदौरिया को लगा उसने कार्ड के टुकड़े टुकड़े कर डस्टबीन में डाल दिए होंगे, औऱ भले ही करोडो की बात हुई हो वो लड़का उसकी बात हवा में उड़ा कर चल दिया होगा।
लेकिन उसकी सोच को ठेंगा दिखाता उसका फ़ोन अगले ही दिन चला आया औऱ फिर अपनी कुटिल साज़िश को रचने में भदौरिया ने एक पल की देर नहीं लगायी..
उस लड़के को अपने ऑफिस बुला कर शौर्य की ढेर सारी तस्वीरें, उसके विडिओ आदि दिखा कर उसके बोलने चलने आदि के तौर तरीके इस ढंग से कंठस्थ करवा दिए कि लड़का सोते समय भी अपने किरदार में ही रहे….
लड़का होशियार था औऱ पैसों का लालची भी था.. उसने ज़बरदस्त तरीके से सब कुछ त्वरित गति से सीख भी लिया..
लेकिन अब भदौरिया के सामने सबसे बड़ा काम था शौर्य की जगह इस लड़के को स्थापित करना..
वो करना इतना आसान भी नहीं था…
औऱ ऐसा करने के लिए उसने वापस एक चाल चलने की सोची…
क्रमशः

तो इस तरह इस जालसाजी और फरेबी भदौरिया ने शौर्य की जगह इस लड़के को लाकर रख दिया।
पर रहते हैं कि झूठ ज्यादा दिन नहीं टिकता और यह झूठ भी ज्यादा दिन नहीं दिखेगा जिस दिन शौर्य को होश आएगा वह वापस अपनी जगह पर होगा मुझे यह भी समझ नहीं आया कि इस इस लड़के पर किसी को शक क्यों नहीं हुआ भले ही विक्रम को हो गया है और विक्रम भी ज्यादा दिन चुप नहीं बैठेगा और जिस दिन इस लड़के की पोल खुलेगी भदोरिया का अंत भी निश्चित है।
पता नहीं बेचारा शौर्य किस हाल में होगा और कहां पर होगा वह ठीक है या नहीं और वह कब वापस लौटेगी आखिर वह है तो अपने मां-बाप की इकलौती संतान।
मै जानती थी कि यह असली शौर्य हो ही नहीं सकता।
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Oh, to shaurya exchange ho chuka hai tabhi uska behaviour itna wierd hai
Very nice part
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Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
तो जो आज तक हम सोच रहे थे कि वासुकी ही जान बचाने के लिए शौरी के हमशक्ल को लाया है जैसे वर्षों पहले बांसुरी के लिए नेहा को, वैसे ही अभी शौरी के हमशक्ल को , पर हम तो यहां गलत निकले , ये चाल तो सच्चे वाले शौरी के एक्सिडेंट के बाद की निकली ओर वो भी उस भदौरिया की!! अब नहीं बचेगा साला, वो साला और जीजा तो गए , शेर के मुंह में हाथ डालने गए थे , शेर हाथ नहीं पूरा का पूरा भदौरिया निगल जाएगा एनाकोंडा की तरह 👌🏼👌🏼👌🏼👏🏼👏🏼👏🏼
राजसी चालों की शुरुआत, ज़र ,ज़रा , ज़मीन क्या नहीं करवा लेती इंसान से ।
अच्छा भाग है ।
Nice part,sab Raz khulega..