
जीवनसाथी -3 भाग -131
कुछ देर में अकरा की धरती पर भदौरिया का विमान उतर चुका था..
वो लोग उतर कर वहाँ खड़ी अपनी गाड़ियों की तरफ बढ़ रहे थे कि, सामने से आती एक जैसी काली लम्बी गाड़ियों पर भदौरिया की नजर पड़ गयी..
“अब ये कौन आ रहा ?”
“फ़िलहाल तो गाड़ियां दिख रही !”
भदौरिया के असिस्टेंट ने कहा..
“ओह्ह थैंक यू बताने के लिए !”
भदौरिया का व्यंग से मुहं टेढ़ा हो गया..
“अरे सर जी इसमें थैंक्स की क्या बात, ये तो मेरा फ़र्ज़ था ! वैसे अगर आपको धन्यवाद देना ही है तो आप मेरी सेलरी बढ़ा सकते हैं !”
असिस्टेंट काम में बड़ा तेज़ था लेकिन दिमाग का ज़रा कच्चा सा था..
वो असल में भदौरिया का चचेरा साला लगता था, वरना उसे भदौरिया कभी काम पर नहीं रखता..
लेकिन उसकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठता के कारण ही वो भदौरिया के साथ बना हुआ था !
काम के मामले में दोनों ही पक्ष चौकन्ने थे, दोनों ने रुपयों को रिश्तेदारी के बीच कील की तरह चुभने नहीं दिया था… !
रिश्ते में जीजा साला होने के बावजूद भदौरिया अपने असिस्टेंट को उसके काम का एक उचित प्रतिदान उसकी सैलरी के रूप में दिया करता था..
और समय समय पर भदौरिया का साला यानि असिस्टेंट उस से अपना वेतन बढ़ाने की मांग करता रहता था !
भदौरिया और उसका असिस्टेंट चिंटू उस दिशा में देखने लगे..
वो गाड़ियां आकर एक कतार में खड़ी हो गयी..
भदौरिया कुछ समझ पाता उसके पहले उनमे से उतर कर लड़के गाड़ी का दरवाज़ा खोल कर खड़े हो गए..!
और उन लोगो के दरवाज़ा खोलते ही, भदौरिया के पिछली तरफ से वासुकी और दर्श चल कर उन गाड़ियों तक पहुँच गए..
कोई कुछ समझ पाता तब तक में भदौरिया के बगल से गुजरते हुए वासुकी एकदम उसके सामने आकर खड़ा हो गया…
“त…. तुम यहाँ ?” भदौरिया की जबान लड़खड़ा गयी
“तुमने ही तो इन्वाइट किया था, वरना मैं बिना बुलाये कहीं पहुँच जाऊं ये मेरी फितरत नहीं !”
“मैंने… ?” भदौरिया पसोपेश में था.. वो एकदम से इस बात सें इनकार भी नहीं कर सकता था …. ।
क्यूंकि उसने अपने प्रोडक्ट्स पर लगे लांछन से बचने के लिए उन्ही उत्पादों को वापस लांच किया था। और इसके लांच के मौके पर उसने ढेर सारी ऐसी बातें कहीं थी, जो उस वक्त उसने बस कहने के किये कह दी थी, लेकिन ये भी संभव था कि उन बातों को बाकियों ने गंभीरता से लिया हो..!
वासुकी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी..
और भदौरिया सोच में था कि उसने हो सकता है टालने के उद्देश्य से वासुकी को भले ही बुला लिया होगा, लेकिन अभी अकरा आने की तारीख तो उसने तुरंत ही तय की थी, तो इस तारीख और जगह के बारे में वासुकी को आखिर किसने बताया ?
भदौरिया के लोगो ने वहाँ पूरी व्यवस्था कर रखी थी…।
लकड़ी के बङे पाटो को जोड़ उन पर रेशमी चांदनी कनात टांग कर मंच की अस्थायी व्यवस्था कर रखी थी..।
माइक पोडियम सब कुछ उन लोगो ने जुगाड़ रखा था यहाँ तक की अकरा के निवासियों को भी पकड़ लाये थे, लेकिन सबसे ज़रूरी चीज थी इन सब का प्रचार प्रसार करना.. और उसके लिए भदौरिया अपने साथ पत्रकारो की फ़ौज लेकर आया था..।
ये पत्रकार भी बिलकुल नयी नवेली दुल्हन से नखरे दिखा दिखा कर भदौरिया की टीम को तंग किये हुए थे लेकिन इस सबसे किसी को फर्क ही क्या पड़ना था..
अकरा के स्थानीय लोगो की खासी भीड़ जमा हो चुकी थी.. इन सभी को निशुल्क मिलने वाले उन उत्पादों के बारे में बढ़ा चढ़ा कर बताया गया था !
इन सब के बीच भदौरिया मंच पर चला आया..
अपने गणमान्य अतिथियों का स्वागत करने के बाद उसने अपने उत्पादों के कसीदे पढ़ने शुरू किये, और एक के बाद एक लंबलेट बातों के बाद वो अपने प्रोडक्ट लांच पर चला आया…!
उसने एक एक कर जनसामान्य में उपस्थित महिलाओं के पास जाकर अपना किट बाँटना शुरू कर दिया..
हर एक उपहार के साथ लाखों कैमेरा खटक रहे थे, तेज़ रौशनी में लोगो की ऑंखें चुंधिया रही थी और भदौरिया के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी..!
भदौरिया बार बार हाथ बढ़ा कर शौर्य को अपने पास खींचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन शौर्य भी बड़ी चतुराई से उसके साथ खड़े होने के बावजूद फोटोग्राफर्स के कैमेरा की खटखट से खुद को बचाये रखे था..
किसी भी तस्वीर में भदौरिया के साथ शौर्य नजर नहीं आ रहा था..
इन सारी चकाचौंध के बीच मुस्कुराता भदौरिया स्वयं में इठलाया सा मगन था कि तभी अचानक वहाँ का शोरगुल एक तेज़ चीख में बदल गया..
लोग मुड़ कर आवाज़ की दिशा में देखने लगे..
एक स्थानीय महिला ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर मदद की गुहार लगा रही थी..
दरअसल उसके साथ बैठी उसकी बेटी ने भदौरिया के दिए पैकेट को खोल कर एक क्रीम निकाली और उसे बैठे बैठे अपने चेहरे पर मल लिया…
गोरेपन का दावा करने वाली भदौरिया की ये क्रीम लगाकर पांच ही मिनट में उस बच्ची के चेहरे पर प्रतिक्रिया स्वरूप फफोले से पड़ने लगे थे..
बच्ची जलन से परेशान होकर रोने लगी थी और उसकी माँ ने चिल्ला किल्ला कर मंच को हिला दिया था..
भदौरिया भाग कर वहाँ पहुँच गया और क्या कैसे हुआ की पूछताछ में लग गया..
एकदम से उन पत्रकारों और कैमरामेन का फोकस पलट गया था..
पल भर पहले भदौरिया की प्रशंसा में उसका स्तुतिगान लिखने की तैयारी करते ये नन्हे नंदकिशोर अब उसके राजपाट की धज्जियां उड़ाने के लिए शब्दों का चयन करते नजर आने लगे…।
भदौरिया अपने अभिमान में चूर इस सरे कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण करवा रहा था… ।
विभिन्न चैनलो पर भदौरिया के जिस कार्य की थोड़ी देर पहले भूरी भूरी प्रशंसा की जा रही थी, अब अचानक ही उस पर आरोपों प्रत्यारोपो का दौर शुरू हो गया था..
चलचित्र की तारिकाओं से होड़ लेती महिला समाचार वाचिकाये जिनके मुहं से कुछ देर पहले तक भदौरिया जी कितने हंबल है, भदौरिया जी से ज्यादा डाउन तू अर्थ कोई नहीं जैसे मक्खन मलाई वाक्य झर रहे थे, अब भदौरिया के ‘जी’ को तिलाजंलि देकर उन भयंकर उत्पादों के दुष्प्रभावों पर गला फाड़ फाड़ कर प्रकाश डाल रही थी..
पल भर में ये क्या हो गया था, भदौरिया के समझ से बाहर था… ।
वो उस चीखती चिल्लाती अकरी महिला को शांत करवाए या पत्रकारों को, इसी में उलझा हुआ सा इधर उधार देख रहा था…
उसने मदद के लिए याचनापूर्ण दृष्टी वासुकी पर डाली, दूर खड़ा वासुकी उसे भस्म करने वाले नेत्रों से देखता खड़ा था..
दर्श उसके बगल में खड़ा बिना कुछ बोले भदौरिया को निहार रहा था..
भदौरिया ने उन पर से दृष्टी हटा कर शौर्य की तरफ देखा.. वो अपने बैग से कुछ निकाल कर उस बच्ची की तरफ बढ़ गया..
भदौरिया ने खुद से सवाल करते अखबारनवीसों को एकतरफ कर शौर्य पर आंखे गाड़ा दी..
शौर्य बाकियों की नजर बचा कर उस लड़की को चुपके से कोई इंजेक्शन लगा रहा था..
भदौरिया के माथे पर बल पड़ गए..
“आखिर ये कर क्या रहा है ?” भदौरिया ने अपने असिस्टेंट से पूछा..
‘कुछ लगा रहा है.. !”
“लेकिन क्या ?”
” साफ़ दिख नहीं रहा सर ! लेकिन कुछ तो है !”
भदौरिया ने घूर कर अपने असिस्टेंट को देखा..
“वो तो मुझे भी दिख रहा गधे.. लेकिन वो कर क्या रहा है ?”
“खुद ही जाकर पूछ लीजिये न !”
विक्रम ने चुटकी ली..
उसे देख कर भदौरिया को और गुस्सा चढ़ गया..
“तुमसे पूछा क्या ? अगर मदद कर सकते हो तो ठीक वरना चुप रहो !”
.
“फिर तो हम चुप ही रहेंगे !”
विक्रम कुछ गुनगुनाते हुए शौर्य तक पहुँच गया, अब तक शौर्य इंजेक्शन उस बच्ची को लगा चुका था..
भदौरिया शौर्य तक पहुँचता उसके पहले पत्रकारों ने भदौरिया को घेर कर अफने प्रश्नो की झड़ी लगा दी..
दोनों हाथो से उन्हें दूर करता भदौरिया शौर्य की तरफ बढ़ने की कोशिश करता रहा..
क्रमशः

जरूर उसे बच्ची को स्क्रीन से कोई एलर्जिक रिएक्शन हुआ होगा जिसके परिणाम स्वरुप उसके चेहरे पर वह चले हो गए और इतने में ही भदोरिया की पोल खुल गई।
पर मुझे यह समझ में नहीं आया कि शौर्य ने उसे बच्ची को इंजेक्शन क्यों लगाए हो सकता है वह कोई मेडिसिन हो जिससे उसे बच्ची को आराम मिल जाए।
वासुकी को वहां देखकर चैन की सांस आई वासुकी के रहते कुछ गलत नहीं हो सकता है इस बात का तो मुझे पूरा यकीन है पर शोर कर रहस्य जल्दी ही सुलझ जाए तो अच्छा है क्योंकि यह लड़का जो शोर या बना घूम रहा है तो फिर असली शौर्य कहां है और वह कैसा है
Vasuki ko dekhkar rahat mili warna kuch bura hone ka darr lag raha tha.is bhadauriya ko uski is badi galti ki saza milni hi chahiye
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भदौरिया का यही हाल होना चाहिए था , पर यहां दाल में कुछ काला क्यों लग रहा है जैसे कि शौरी ने फोटो नहीं खिंचवाए , ओर तो ओर उस लड़की को ये कैसा इंजेक्शन दिया शौरी ने ?? सभी कुछ गड़बड़ा रहा है , अभी के लिए , इंतेज़ार है ये भदौरिया की गुत्थी सुलझे ओर हमारे असली वाले शौरी यानी के वासुकी के जमाई राजा सामने आए।
Wow superb episode episode
Shourya Ka rahasya to badhta hi Jaa Raha hai. 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
😃😃😃👍👍👍👍
Shouraya Bhadoria ki pole kholnaya ke liya hi uska sath denaya ka natak kiya,waiting for the next part eagerly.
Humko yhi lga tha ki prince sahab bhadauriya k tote udane hi laye hai intresting part