
जीवनसाथी -3 भाग -127
अब तक आपने पढ़ा..
शौर्य का स्वभाव ज़रा बदला बदला सा महसूस किया विक्रम ने, उसके पहले वाले चुलबुलेपन को वर्तमान के उद्दंड और उत्श्रृंखल शौर्य से मिला कर देखने पर वो कहीं भी एक सा नहीं पाता, लेकिन इसके बावजूद शौर्य का कली के प्रति उदासीन न हो पाना विक्रम की समझ से भी बाहर है..
शौर्य भदौरिया के साथ हुई किसी डील पर सिर्फ इसलिए सहमति की मुहर लगा चुका है, क्यूंकि भदौरिया उसके बदले उसे ढेरों रूपये दे रहा है..
वो शौर्य जिसने रुपयों को हमेशा अपनी ठोकर पर रखा आज अचानक कुछ रुपयों के लिए एक गलत इंसान का साथ दे रहा ये बात विक्रम को पच नहीं पा रही..।
दूसरी तरफ राजमहल में फूफू साहब मीठी से जबरदस्त तरीके से चिढ़ती है, और उसे बिलकुल पसंद नहीं करती.. पहले तो वो एड़ी चोटी का जोर लगा देती हैं कि मीठी की शादी हर्ष से न हो पाए, लेकिन जब उनकी लाख कोशिशों के बाद भी उनका प्रयास निरर्थक होता दिखता है तो वो मीठी को समय समय पर ताने मार कर ही उसे हतोत्साहित करना शुरू कर देती हैं..।
मीठी को महल में लंच के लिए बुलाया जाता है जहाँ फू साहब बार बार उसके साथ गलत बातें कर उसे नीचा दिखाने की कोशिश करती हैं लेकिन मीठी भी बराबरी की टक्कर लेती खड़ी हैं…
भोजन के बाद हर्ष मीठी को अपना कमरा दिखाने ले जाता है…
अब आगे….
मीठी ने पलट कर एक नजर फू साहब को देखा और हर्ष की बाहँ थामे आगे बढ़ गयी..
हर्ष मीठी और फू साहब के बीच चल रही आँख मिचौली से अपरिचित था.. वो पूरे उत्साह के साथ मीठी को अपने कमरे में ले आया..
कमरे के अंदर प्रवेश करते ही उसने मीठी को अपनी बांहों में भर लिया…
“ये क्या कर रहे हो.. कोई आ गया तो ?”
“यहाँ अब कौन आएगा ! सब जानते हैं घर के युवराज अपनी युवरानी को अपना कमरा दिखा रहे हैं !”
“कमरा तो अब तक दिखाया ही नहीं !”
“दिखा देंगे, पहले मुझे तो देख लेने दो !”
“क्या !”
“ये सलोना मुखड़ा जो आगे जाकर मेरी जिंदगी का हिस्सा हो जायेगा.. जरा जी भर के निहार तो लूँ !”
“अच्छा जी, निहारते रहिएगा। फ़िलहाल मुझे मेरा अपना कमरा तो देख लेने दीजिये.. !”
हंस कर मीठी ने हर्ष को धक्का सा दिया और अंदर की तरफ भाग गयी..।
उस बड़े से हिस्से को पार कर एक भव्य दरवाज़े को खोल वो अंदर दाखिल हुई और देखती रह गयी..
ये उस बैडरूम का बहरी हिस्सा था, जहाँ कई सारे सोफे और काउच रखे थे..।
एक बार में लगभग तीस चालीस लोग बड़े आराम से वहाँ बैठ सकते थे..
कमरा राजसी था, पहले ज़रूर इसकी साजसज्जा महल के प्रोटोकॉल के हिसाब से इंटीरियर डिज़ाइनर से करवाई गयी होगी, लेकिन अब हर्ष ने इसे अपने तरीके से सजवा लिया था..
महंगे पर्शियन कालीन में पैर धंसे जा रहे थे।
छत से जगमगाते लट्टू से टंगे थे…
परंपरागत झाड़फानूस की जगह यूरोपियन स्टाइल का शैंडेलियर टंगा था…
यूरोपीयन शैली के फर्नीचर से लेकर तिर्यक स्मित देती वीनस की खंडित प्रतिमा तक में हर्ष की कलात्मक अभिरुचि स्पष्ट हो रही थी।
कुछ देर के लिए मीठी उस कमरे को देखते रह गई।
और वही एक किनारे हाथ बांधे खड़ा हर्ष मीठी को देख रहा था।
” मानना पड़ेगा आपकी पसंद लाजवाब है।”
“मेरी पसंद लाजवाब नहीं बेमिसाल है। अपनी पसंद की सबसे खूबसूरत चीज तुम्हें दिखाऊं?”
हर्ष ने मीठी से पूछा, मीठी उसका इशारा समझ नहीं पाई ।
आंखें चौड़ी कर वो उसे देखने लगी।
” इस कमरे से भी ज्यादा खूबसूरत कुछ और भी है?”
” हां! देखना चाहोगी?”
” बिल्कुल लेकिन पहले मैं इस वीनस की स्टेचू को तो देख लूं। इसे देखने के बाद लगता है कि भगवान ने इससे खूबसूरत कुछ भी नहीं बनाया ।”
“नहीं, ऐसा नहीं है। इस चेहरे से मिलती-जुलती एक प्रतिकृति और है मेरे पास।”
” दिखाओ।”
मीठी को पीछे से कंधों से पकड़ कर धकेलते हुए उस कमरे के परे अपने शयनकक्ष में हर्ष ले गया..।
शयन कक्षा क्या था ऐसा लग रहा था, एक विशाल जहाज समंदर के किनारे पाल बांधे खड़ा है…।
दीवारे और दरवाजे इतने ऊंचे थे कि लगता था जैसे ऊपर आकाश छू लेंगे…।
वहाँ लगी प्रकाश व्यवस्था का रंग संयोजन कुछ ऐसा था की पल पल उन रंगो के साथ दीवार और छत भी रंग बदलते से लगते थे..।
कभी छत पर बादल तैरते नजर आते, तो कभी अचानक सूर्योदय नजर आने लगता। अद्भुत कलाकारी को देखते मीठी खोई हुई थी कि उसे धकेल कर थोड़ा और आगे हर्ष ले गया।
एक जगह पहुंच कर उसने उसे एक दीवार के सामने खड़ा कर दिया।
उस खाली दीवार को देखते वह सोच ही रही थी कि जाने कहां पर लगे अदृश्य से किसी पुश बटन को हर्ष ने दबाया और वह दीवार सरसराते हुए एक तरफ को खिसक कर खुल गई।
अंदर हर्ष का ड्रेसिंग रूम था।
हर्ष ने मीठी का हाथ पकड़ा और उस कमरे के अंदर दाखिल हो गया। एक के अंदर एक ऐसा लग रहा था तहे खुलती चली जा रही है…।
क्या यह युवराज हर्ष का कमरा था..?
किसी महानगर के रईस व्यापारियों, फ़िल्मी तारिकाओं के पेण्ट हॉउस की मुहं मांगी प्रतिलिपि सा था..
खैर हर्ष कोई साधारण व्यक्ति भी तो नहीं था..।
उस ड्रेसिंग रूम की दो दीवारों पर पूरी लम्बाई में वॉक इन क्लोसेट था..।
जहां पूरी लंबाई में कतार भर हर्ष के सूट ब्लेजर टक्सीडो टंगे हुए थे। इन कपड़ों की संख्या इतनी थी कि मीठी उन्हें गिनने का परिश्रम नहीं करना चाहती थी। वह अभी आंखें फाड़े सब कुछ देख रही थी कि हर्ष की उंगलियों ने उसकी आंखें मूंद ली, उसे एक तरफ को लेकर आगे बढ़ा और धीरे से उसकी आंखों पर से उंगली हटा दी। मीठी आदमकद आईने के सामने खड़ी थी…
आईना बेहद खूबसूरत था। वह उसे देख रही थी और हर्ष ने धीमे से उसके कंधे पर अपनी ठुड्डी टिका दी।
” बोलो, मेरी यह पसंद मेरी बाकी की हर एक पसंद से ज्यादा खूबसूरत है ना?”
मीठी उस दर्पण में खुद को और हर्ष को निहार रही थी। उसे लग रहा था बस पल यहीं थम जाए।
ईश्वर उनकी खुशियों को किसी की नजर ना लगने दे। जाने क्यों उसकी आंखें भर आई।
हर्ष ने देखा और वह हड़बड़ा कर सीधा खड़ा हो गया।
” मीठी क्या हुआ? तुम रो क्यों रही हो?”
मीठी एकदम से अपनी भावुकता का कोई कारण उसे बात नहीं पाई। शायद जब खुशियों से भी दिल बेहद भर जाता है, तो वह खुशियां भी आंसू बनकर आंखों के रास्ते निकल आती है।
अगर खुशी और गम आंसू बनकर न छलके तो दिल इन दोनों ही भावनाओं से ओतप्रोत होकर फट जाएगा।
यह भावुकता भी कितनी अजीब चीज होती है। आंसू तब आते हैं जब हम उन्हें दिखाना नहीं चाहते, और सामने वाला जब हमारी भावुकता पर सवाल उठाता है, तब तो ऐसा लगता है सारी भावुकता आकर एक साथ कंठ में अटक गई है।
उसे शब्दों के माध्यम से बाहर निकालना और भी कठिन हो जाता है।
ऐसा ही कुछ मीठी के साथ हो रहा था। वह अपने आप को व्यक्त नहीं कर पा रही थी। और जितना ही हर्ष परेशान हो रहा था, मीठी के आंसू बढ़ते ही जा रहे थे। मीठी धीरे से आगे बढ़ी और उसने हर्ष को गले से लगा लिया।
हर्ष अब भी उससे सवाल कर रहा था। मीठी ने धीरे से ना में गर्दन हिलाई, उसे चुप रहने का इशारा किया और उससे चिपक कर खड़ी रह गई।
हर्ष समझ गया कि इस वक्त वो कुछ नहीं कहना चाहती। वह धीरे-धीरे उसके बालों को सहलाता रहा। ठीक उसी वक्त उस क्लोजेट के खुले हुए दरवाजे से फुफु साहब अंदर चली आई।
” हर्ष हमें माफ करना। हम बाहर जाते हैं।
अभिनय करती हुई फूफू साहब धीरे से बाहर की तरफ मुड़ने लगी। लेकिन उन्हें आया हुआ देखकर ही हर्ष ने मीठी को खुद से दूर कर दिया था।
” ऐसी कोई बात नहीं, वह तो जरा मीठी भावुक हो गई थी, तो बस उसे समझा रहा था।”
” भावुकता की क्या बात इसमें? जब दूल्हा अपनी पसंद का है, ससुराल घर नहीं महल है, फिर काहे रोना आ रहा है.. ?
ऐसे ससुराल और ऐसे वर के लिए तो लोग जान लगा देते हैं। यहाँ इनकी झोली में टप से टपक पड़ा रिश्ता है, फिर काहे की भावुकता.. ?”
मीठी इस वक्त कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी..
उसे फू साहब की बात चुभी जरूर लेकिन अभी उसका पलटवार करने का बिलकुल मन नहीं था…
उसका हर्ष को इस वक्त छोड़ने का भी मन नहीं था लेकिन उससे अलग होकर खड़ा होना पड़ा.. ।
मीठी को लगा फू साहब अपनी बात कह कर निकल जाएँगी लेकिन वो वहीँ जमी खड़ी रही, आखिर मीठी ने ही उनसे और हर्ष से इजाजत ली और बाहर की तरफ बढ़ गयी..
हर्ष ने फू साहब के होने के बावजूद उसे घर तक छोड़ने जाने का प्रस्ताव रख दिया, उसकी रज़ामंदी मिलते ही फिर हर्ष मीठी को साथ लिए वहाँ से निकल गया.. !
हर्ष के कमरे में फू साहब अकेली खड़ी रह गयी..
उनके संकुचित ललाट पर और भी ज्यादा शिकन चली आई.. उनकी छोटी छोटी आँखे कुटिलता से चमकने लगीं..
क्रमशः

Jeevansathi season 3ke sbhi parts kaise padhe??
अरे हर्ष तुम समझ क्यों नहीं रहे हो जब कोई एक चीज़ अपनी पसंद की मिल जाती है तो इंसान भावनाओं कहती रहे मैं बह कर अपने आंसू छलक ही देता है मीठी के लिए तुम क्या हो यह तुम खुद नहीं समझ सकते क्योंकि तुम तो वह राजकुमार हो जो किसी चीज के मांगने से पहले ही उसे अपने कदमों में का लेते हो और एक सामान्य इंसान को पता होता है कि किसी चीज की क्या अहमियत होती है और तुम तो जीते जागते राजकुमार हो।
माना की मीठी इन सब बातों को ज्यादा नहीं मानती पैसा इज्जत शानू शौकत यह सारी बातें उसके लिए बेमानी सी हैं पर फिर भी तुम जैसा भले दिल का इंसान का लेना वह भी एक सुंदर सलोना सा राजकुमार तो किसी की भी आंखें भर आएंगे।
पर हर्ष और मीठी ने शायद एक गलती कर दी है कि वह उन बुआ जी को अंदर ही कमरे में छोड़ आए हैं अब पता नहीं उनकी आंखें जो कुटिलता से चमक रही है आखिर वह अपने घटियापन के कौन से सपना संजो रही हैं वहां पर खड़ी होकर।
बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌👌❤️❤️❤️⭐⭐⭐⭐⭐⭐
Kuch bhi kar le fu saheb mithi harsh ko hi hogi 👍👍👌👌👌👌👌
Very nyc part 👌
Wow superb
Ab kya karne ja rahi hai Phu saheb
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Awesome superrrrrrrrrr 💙💛💛💛 bbbbbbbbbbbbb part ❤️💛💛💚💚
Atti sunder or Khubsurat Harsh ke kamraya ki Kalahari,kalakriti,saaz sazza,jiska varnan karnaya me Sabad Kam par jayanga,Bahut hi monohari,dhrahayao ka varnan kiyaDr Sahiba ji ne ,Harsh ee bahut hi piyar se mithi ko apnaya aagosh me le kar piyar dashaya,Phu sahab to Harsh ke room tak chali aayi ,Waiting for the next part eagerly.
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