अतिथि-22

अतिथि- 22

  उसका हाथ थामे माधव डिंकी को साथ लिए वहाँ से निकल गया.. वो दोनों सीढ़ियों पर पहुंचे तब, अब तक सुध बुध खोयी सी चलती डिंकी को होश आया कि कुछ देर में उसकी मीटिंग है..

“हम कहाँ जा रहे ?”

“यहीं, निचले फ्लोर पर भी तो टी स्टाल है, वहाँ चाय पिएंगे ! फिर वापस लौट आना !”

“हम्म, मीटिंग है मेरी !”

वो दोनों चाय के स्टाॅल पर जा बैठे, चाय का कप पकड़ कर माधव ने डिंकी की तरफ देखा..

“वो दोनों तुम्हे डाँट क्यों रहे थे ?”

“मैं कॉन्ट्रेक्चुअल हूँ, वो रेगुलर एम्पलॉईस है.. ये अंतर तो हमेशा हमारे बीच रहेगा ही न !”

“ये सिर्फ तुम्हारे नियोजन का प्रकार है, लेकिन इससे तुम्हारी क़ाबिलियत को कमतर नहीं आंका जा सकता ! वो सिर्फ इसीलिए तुम पर साहिबाना हक नहीं पा जाते कि वो तुमसे सीनियर है, आखिर वो भी वहाँ काम करते हैं और तुम भी !”

माधव के माथे पर गुस्से में बल पड़ गए थे, डिंकी लगातार उसे देख रही थी..
उस सलोने चेहरे की एक एक रेखा में कहीं भी तो पागलपन का लवलेश भी नहीं था..
जिस विश्वास से, जिस दृढ़ता से, वो उसे वहाँ से उठा लाया था ये आत्मविश्वास क्या किसी मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति के स्वभाव का हिस्सा हो सकता था.. ?

“क्या घूर रही हो मुझे ?” अपनी चाय में बिस्किट का टुकड़ा डुबाते हुए माधव ने डिंकी को टोका और वो झेंप गयी..

“नहीं कुछ नहीं !”

डिंकी ने मुस्कुरा कर अपना कप मुहं से लगा लिया और माधव का फ़ोन बजने लगा.. थोड़ी बहुत बातचीत कर माधव ने फ़ोन रख दिया..
डिंकी सवालिया नज़रों से उसे ही देख रही थी..
माधव ने उसका सवाल समझ लिया..

“वो… एक दोस्त का फ़ोन था !”

डिंकी ने हाँ में गर्दन तो हिला दी लेकिन उसने अपने हावभाव से ये भी ज़ाहिर कर दिया कि इस आधे अधूरे जवाब से वो संतुष्ट नहीं है..
पता नहीं लेकिन जब से उसे माधव से जुडी सच्चाई मालूम चली था उसका सारा भय और संकोच कहीं बह गया था..
अब माधव को लेकर उसके अंदर एक अलग सा आत्मविश्वास पैदा हो गया था…
उसका बस चलता तो वो माधव का हाथ पकड़ कर अभी अपने मन के भाव कह देती, लेकिन इतनी जल्दबाजी में वो कोई निर्णय नहीं लेना चाहती थी..।

माधव ने गले को साफ़ कर कहना शुरू किया..

“मम्मी की एक फ्रेंड हैं, उनकी बेटी मुझसे मिलना चाहती है !”

डिंकी का एंटीना खड़ा हो गया, वो समझ गयी जिस लड़की का ज़िक्र माधव की मम्मी ने किया था, ये ज़रूर वही थी..

“कब मिलना चाहती है, शाम में ? डिनर पे ?”

“हम्म.. !” बस एक छोटे से हम्म से माधव की मंशा ज़ाहिर हो गयी कि वो इस संभावित मिलन के लिए उतना उत्सुक नहीं है।

“आपने क्या कहा ?”

“फ़िलहाल कुछ नहीं कहा !”

“लेकिन ये तो बैड मैनर्स है न.. अगर कोई लड़की सामने से होकर पूछ रही तो आपको हाँ बोलना चाहिए !”

“और अगर मेरा मन ही न हो तो ?”..

“तब भी.. एक बार मिल लेने में कोई बुराई तो नहीं, हो सकता है आपको वो पसंद आ जाये !”

“पसंद तो अब कोई और आ ही नहीं सकती !” होंठो ही होंठो में बुदबुदाते हुए माधव ने धीरे से कह दिया

“क्या.. क्या बोला आपने ?”

“नहीं, कुछ भी तो नहीं !”

माधव ने अपने कप से अपनी नजर उठायी और डिंकी को देखने लगा..

“सुनो.. तुम..
वो कहते कहते रुक गया..

“कहिये !”

“तुम्हे किसी से भी डरने की ज़रूरत नहीं है.. तुम्हारे उस सीनियर से तो बिलकुल भी नहीं..।
मेरा ये मानना है कि जिस इंसान को अपने से छोटे लोगों से बात करने की तमीज नहीं, उसे किसी आदर सम्मान की ज़रूरत नहीं.. !”

“हम्म… मैं अब चलती हूँ, मैम आती ही होंगी !”

गर्दन हाँ में हिला कर माधव खड़ा हो गया… डिंकी उसे वहाँ से जाते हुए देखती रही..।
सलीके से आयरन की हुई कमीज की लम्बी बाँहों को उसने कुहनी तक मोड रखा था ! दायीं कलाई पर कलावा बंधा था और बायीं में उसने हरले डेविडसन की महंगी सी घड़ी पहन रखी थी !

कितना लुभावना था वो, उसका हर एक मोहक अवयव डिंकी को गहरे रसातल में डुबोता चला जा रहा था..
    हर एक बात ऐसे सलीके से बोलता था कि सुनने वाले को लगता ये सिर्फ बोलने के लिए ही पैदा हुआ है…
    सामने वाला खुद ही उसे सुनने में खो जाये!
अब अगर उसे कहानियां सुनाने का पागलपन है भी, तो उससे कहानियां सुनने का जूनून उसमे भी तो जाग गया है…. !
  क्या अब कोई औषधि, तंत्र मंत्र उसे इस पागलपन से मुक्ति दिलवा सकता है ?
और क्या वो स्वयं मुक्ति चाहती भी है ?

वो मुस्कुरा कर अपने ऑफिस की तरफ चली गयी…

अब तक रूबी नहीं आई थी, लेकिन भूषण और योगिता अंदर रूबी के कमरे में मौजूद थे !
उन्हें वहाँ देख उसके चेहरे पर राहत के भाव चले आये।
उसी वक्त अपनी ऊंची एड़ी की हील्स चटकाती रूबी वहाँ चली आई..
अपने केबिन की तरफ बढ़ते हुए उसने डिंकी को सभी को बुलाने का इशारा कर दिया..
कुछ मिनटों में सभी रूबी के कमरे से लगे मीटिंग रूम में बैठे थे..
डिंकी डिज़ाइन्स दिखाने आगे बढ़ने लगी कि योगिता ने उसे इशारे से रोक दिया..।

योगिता रूबी के सामने अपने सुंदर काम की भूमिका बांधते हुए बाक़ी लोगों के तैयार किये डिज़ाइन्स दिखाने लगी..।
रूबी सभी के तैयार किये चित्रों को बड़े गौर से देख रही थी..
पीछे लगे प्रोजेक्टर पर ये सारे डिज़ाइन्स नजर आ रहे थे..
सभी का काम अच्छा था ! रूबी को ठीक भी लग रहा था..।

उसके बाद बड़ी चतुराई से योगिता ने सबसे आखिर में अपनी रचनात्मकता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जो डिज़ाइन्स सामने रखे उन्हें देख डिंकी चौंक गयी..।
ये तो उसके तैयार किये हुए चित्र थे..।

वहीँ बेजोड़ रंग संयोजन, वही ज़रीदार बेलबूटे की सज्जा , वही कामदारी भारी लहंगे..
पल भर के लिए डिंकी सोच में पड़ गयी..
योगिता का झूठा आत्मविश्वास देख वो खुद कुछ पलों के लिए सोचने लगी। दो लोगों की पसंद एक सी भी तो हो सकती है न !
  लेकिन जब एक के बाद एक उसका बनाया हर एक नमूना योगिता ने अपने नाम से प्रस्तुत कर दिया, तब वो समझ गयी कि उसके साथ बहुत बड़ा खेल हो चुका है..
वो चीख कर वहाँ बैठे सभी के सामने उस दुष्टा की धृष्टता लाना चाहती थी, लेकिन इतनी सारी कलाकारी के बीच उसने एक गलती कर दी थी..
किसी भी डिज़ाइन में उसने अपना नाम अंकित नहीं किया था। अब किस आधार पर वो उन चित्रों के स्वयं द्वारा निर्मित होने की पुष्टि कर सकती थी..?

बड़ी चतुराई से ही उस कपटी ने हर एक चित्र पर अपना नाम लिख दिया था..
मन ही मन खीझती बैठी डिंकी कुछ करने की सोचती उसके पहले भूषण का स्वर इसके कानो में पड़ गया..

“अनुराधा, सब थक गए हैं, सबके लिए चाय ले आओ !”

ये आदेश जैसे उसके तप्त हृदय पर कपूर का बुरादा  छींट गया, वो तड़प कर उठ गयी और बाहर चली गयी।  

“बस चाय वाला बना कर धर दिया है इन पाखंडियों ने !” उसे एकदम से माधव से सब कुछ कह देने की तीव्र इच्छा होने लगी..

उसने माधव को फ़ोन लगा दिया..

“कहाँ है आप ? क्या आपसे इसी वक्त मिल सकती हूँ,?” शाम ढल चुकी थी और अपनी परेशानी में घिरी डिंकी भूल गयी थी कि आज माधव शाम में किसी से मिलने के प्रस्ताव पर सहमति की मुहर लगा चुका है..
माधव ने जहाँ बैठा था वहाँ का पता उसे बता दिया..

अंदर पियोन के हाथ चाय भेज कर उसने अपना बैग उठाया और वहाँ से निकल गयी..
उसे मालूम था वहाँ उसका रहना न रहना कितना महत्पूर्ण था..?
वैसे भी वो पार्ट टाइमर थी, इसलिए उसके काम के घंटे भी कम थे, और अपने काम के घंटे पूरे कर लेने पर उसे वहाँ कोई रोके नहीं रख सकता था….

वो माधव की बताई जगह पहुँच गयी..
वो उस रेस्त्रां में अंदर दाखिल हुई और इधर उधर नजर दौड़ाने लगी.. तभी उसके कान में उसका नाम सुनाई पड़ा, वो पीछे मुड़ी,उसके ठीक सामने माधव खड़ा था..

“आओ !” माधव ने एक तरफ इशारा कर दिया..
डिंकी उसके साथ आगे बढ़ गयी..

उसे उस पल माधव की अनुगामिनी बनना बड़ा अच्छा लग रहा था, लेकिन तभी टेबल पर उसकी नजर पड़ी..
और वो पल भर के लिए चौंक गयी..

क्रमशः

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कांति
कांति
2 months ago

माधव को भी आखिर dinki पसंद आ ही गई। कितनी सरलता से वो बोल गया अब और कोई पसंद आ ही नहीं सकती।
भोली सी dinki योगिता से छली गई अगर डिजाइंस पर अपने नाम लिखे होते तो ऐसा नहीं होता पर अब वो कर भी क्या सकती हैं।

Nisha
Nisha
1 year ago

Har jagah yogita jaise log bhare pade hain jo mauke ka fayda uthane me aage rahte Hain batao toh saram nahi aayi dusre ki mehnat ko khud ka naam de diya 😡😡

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

बहुत बुरा लगा डिकी के लिए जानकर कि उसे झूठी और मक्कार लड़की ने डिकी के सारे चित्र अपने नाम बता कर रूबी मैडम को दिखा दिए पर यह बात भी पूरी तरह सच है कि आप प्रतिभा चुरा सकते हो पर उसे अपने अंदर नहीं ला सकते।
आज भले ही डिकी के डिजाइंस उस घटिया लड़की ने चुरा लिए हो पर डिंकी का आत्मविश्वास और उसकी रचनात्मकता नहीं चुरा सकती वो और जिस दिन डिंकी फिर से अपने कोई डिजाइंस बनाकर रूबी के सामने पेश करेगी उस दिन उसकी काबिलियत सबके सामने आ ही जानी है पर कहते हैं ना कि संघर्ष सबके नसीब में लिखा होता है वही संघर्ष अभी डिंकी को करना है

Jyoti
Jyoti
1 year ago

Very nyc part 👌

Kanchan Choudhary
Kanchan Choudhary
1 year ago

Jyadatar company me aise hi junior ka kaam ko senior apna bana kar dikha dete hai, en logo ki pil patti khulni hi chaiye.

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Nice part

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

ये कोई नयी बात नहीं है जो आज डिंकी के साथ ऑफिस मे हुआ,बड़ी से बड़ी या छोटी से छोटी कम्पनी मे भी अक्सर जूनियर को इन सब मे से निकलना पड़ता है,मेहनत बेचारे वर्कर्स करते है और क्रेडिट हमेशा सीनियर्स को मिलता पर डिंकी के लिए भी एक सबक है आगे से जब कोई डिज़ाइन बनाए तो अपना नाम जरूर लिखे और आगे भी मन लगाकर काम करे।
डिंकी परेशान थी और अपना मन बांटने के लिए उसे सबसे पहले माधव की ही याद आई,यही तो प्यार है पर ये कौन आने वाली है इनके बीच 🤦और ये कौन है जिसे देखकर डिंकी हैरान हैरान हो गई 🤔।

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Dinky ke sath ye to bahut galat hya,uskaya banaya design koYogita ne Bari chaturai se apna naam likh kar dikha diya,Dinky dukhi ho kar Madhav se milnaya chali gyi,Waiting for the next part eagerly

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

कितना बुरा लगता है ना जब कोई इस तरह बार बार नीचा भी दिखाता है और हमारे काम का क्रेडिट भी हमको नहीं देता।कितनी नालायक है ये योगिता😒 मुझे तो इतना तेज़ गुस्सा आने लगा कि बता नहीं सकती।

Seema Srivastava
Seema Srivastava
1 year ago

Very beautiful