
जीवनसाथी -3 भाग -125
भदौरिया की बुलाई मीटिंग में शौर्य और विक्रम पहुँच चुके थे..
किसी ने भदौरिया का हाथ थाम कर पूछ ही लिया..
“कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में तुम अपना प्रोडक्ट लांच नहीं रख दे रहे हो ?”
“जब सब काम निपट चुका तो फिर इंतज़ार किसका करना ?”
“वो बात भी सही है लेकिन, इस वक्त कई महत्वपूर्ण लोग यहाँ मौजूद नहीं है !”
“अब मैं हर किसी का इंतज़ार करता तो नहीं बैठ सकता न !” भदौरिया तिलमिला गया.. असल बात यही थी कि उसके अमानक उत्पाद ढेरो मात्रा में तैयार हो चुके थे। और अब उनका मार्केट में नहीं उतरना उसके लिए संकट की स्थिति बना रहा था..।
शौर्य के टोक देने के बाद वासुकी भी उसे चेतावनी दे चुका था कि या तो वो अपने उत्पाद में ज़रूरी फेरबदल कर ले, इसमें खर्चा भी ज्यादा नहीं आएगा और लोगो का नुकसान भी नहीं होगा।
और या फिर अपने इन उत्पादों को वो बाजार में उतारे ही नहीं..।
वासुकी को अपनी गोल मोल बातो में घुमा कर भदौरिया ने अपना पूरा ध्यान शौर्य पर केंद्रित कर दिया था..
आज की इस कॉन्फ्रेंस में भी वासुकी और दर्श मौजूद नहीं थे और इसीलिए उस दूसरे व्यापारी ने भदौरिया को टोका था ….
हालाँकि भदौरिया खुद यही चाहता था कि वासुकी और दर्श के बिना ही ये मीट सम्पन्न हो जाये..।
वासुकी खतरनाक था तो दर्श सवाया ही था..
हर एक उत्पाद की ज्यामिति उसकी उंगलियों पर अंकित होती थी। चलता फिरता कम्प्यूटर ही था कमबख्त, उसे नकली बातों में घुमाना और कठिन था !!
“जो भी हो भदौरिया जी, लेकिन आपको दर्श कणाद और अनिरुद्ध वासुकी का इंतज़ार करना चाहिए था !”
“हम जानते हैं, हमे क्या करना चाहिए और क्या नहीं ! सलाह देने के लिए शुक्रिया !”
एक एक कर सभी गणमान्य लोग वहाँ जुटने लगे थे.. सभी के सामने देशी विदेशी अलभ्य व्यंजनों को प्रस्तुत किया जाने लगा था..।
यूँ लग रहा था भदौरिया अपने बेटे की सगाई का उत्सव मना रहा है..
कई सफल उद्योगपति गंभीरता से बैठे भदौरिया के प्रस्ताव का इंतज़ार कर रहे थे तो कई ऐसे भी थे जो विदेशी आडम्बर में सजे खालिस देशी पकवानो का आनंद लेने में डूबने लगे थे..।
भदौरिया ने अपने सारे अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग कर के सभी को परास्त करने की ठान ली थी..
सबके चेहरों पर एक नजर डाल वो स्क्रीन के सामने चला आया और उसने अपने उत्पादों में से एक बेबी पाउडर और महिलाओं के काम आने वाले फेस पाउडर और लिपस्टिक के बारे में बताना शुरू किया..
“जैसा की पिछली मीट में कुछ लोगों ने इन उत्पादों पर आपत्ति जताई थी, उसके बाद मैंने इनमें वांछित बदलाव कर दिए है और वापस इन्हे आप लोगो के अवलोकनार्थ लेकर आया हूँ….।
मैं आप सब को गारंटी देता हूँ कि मेरे उत्पाद न तो ग्राहकों की त्वचा पर भारी पड़ेंगे न उनकी जेब पर..। मैंने इस बात की पूरी कोशिश की है कि ये उत्पाद अपनी सौ प्रतिशत सुरक्षा के साथ लोगों को संतुष्टि भी दे सके…। और मेरे इस काम में बुंदेला ग्रुप के डेप्युटी सीईओ मिस्टर शौर्य प्रताप बुंदेला भी साथ हैं !”
भदौरिया ने शौर्य की तरफ हाथ बढ़ा दिया..
एक गोल प्रकाश का घेरा वहीँ एक तरफ बैठे शौर्य पर केंद्रित हो गया और सभी ताली बजाकर उसका स्वागत करने लगे..
शौर्य अपनी टाई की गांठ तीखी करता हुआ खड़ा हो गया.. उसके ठीक पीछे लगी कुर्सी में बैठे विक्रम का जी जाने कैसा तो हो गया..!!
वो लड़का जो अपने निर्णयों के लिए पूरी निर्भीकता से किसी से भी लड़ जाता था, आज महज रुपयों के लिए अपने ज़मीर का सर्वनाश कर उस लीचड़ इंसान से हाथ मिलाने जा रहा था, जिसे न उसके पिता पसंद करते थे और न भाई..।
शौर्य मुस्कुरा कर खड़ा हो गया..
उसने सब की तरफ देख कर हल्के से गर्दन एक तरफ झुका कर अपने मौलिक अंदाज़ में सबका अभिवादन किया और माइक पकड़ कर बोलना शुरू कर दिया…
“हेलो जेंटलमेन, मिस्टर भदौरिया ने अपना प्रोजेक्ट सबको अच्छे से समझा दिया है… इनके इस प्रोडक्ट के लिए मेरी रज़ामंदी है।
आप सब भी अगर इनके उत्पाद पर सहमति दे देते हैं तब ये अपना उत्पाद ग्लोबल मार्किट में लांच कर देंगे !”
शौर्य की बात सुन वहाँ मौजूद कई लोग आश्चर्यचकित रह गए, लेकिन किसी ने भी उसकी बात काटने का दुस्साहस नहीं किया..
उसके बाद एक एक कर लोग खड़े होते गए और अपनी सहमति देते चले गए..
भदौरिया के उत्साह का ठिकाना न था..!
सभी की सहमति मिलने के बाद उत्साह और उत्तेजना में गर्वित बैठे भदौरिया ने एक और नयी घोषणा कर डाली..
वो अपने इस नए प्रोडक्ट को घाना की राजधानी अकरा के पास के इलाको में रहने वाले लोगों पर प्रयोग करना चाह रहा था..
वैसे तो उसे किसी तरह के प्रयोग की आवश्यकता नहीं लग रही थी, लेकिन सबकी सहमति मिलने के बाद अतिउत्साही भदौरिया ने बेवकूफी भरा कदम उठा ही लिया..।
“साथियों मैं इस उत्पाद के फ्री सैम्पल अकरा के लोगों में बाँट कर चैरिटी करना चाहता हूँ…
मैं जानता हूँ इस उत्पाद से मैं बहुत पैसे कमाने वाला हूँ, तो क्यों न मैं इस उत्पाद से कुछ पुण्य भी कमा लूँ..।”
उसकी ऐसी बिना सर पैर की बात सुन शौर्य की भवों में बल पड़ गए..
लेकिन फिलहाल उसने कुछ नहीं कहा। उसके कुछ न कहने से वहाँ मौजूद किसी को भी भदौरिया की बात काटने का फिर साहस नहीं हुआ..।
एक तरह से भदौरिया की एकतरफा रणनीतियों के साथ ये मीट समाप्त हो गया..
इसी सब में शाम हो गयी.. शौर्य और विक्रम दोनों ही बहुत थक गए थे..।
लेकिन शौर्य ने गाड़ी घर की जगह झील की तरफ घुमाने को बोल दिया।
उसे जाने क्यों ये लग रहा था कि हो न हो इस उदास सी शाम में कली ज़रूर झील के किनारे बैठी होगी….
शौर्य का सोचना सही साबित हुआ..।
हर जगह विक्रम को साथ लिए फिरने वाले लड़के ने गाडी से उतरते वक्त विक्रम को खास तौर पर ग़ाङी में बैठे रहने का आदेश दिया और आगे बढ़ गया….
दूर झील के पास सीढ़ियों पर बैठी कली अपने पास पङे छोटे छोटे पत्थर उठा कर झील में फेंजती जा रही थी…
उससे महज कुछ सीढ़ियॉं की दुरी पर ऊपर खड़ा शौर्य मुग्ध दृष्टी से कली को देख रहा था..
कली के साथ उसके दोस्त भी मौजूद थे..
किसी ने कुछ कहा और कली ज़ोर से हंस पड़ी..
उस दाड़िमदशना की दंतकांति विद्युत् की आभा से शौर्य को जगमगा गयी..।
उससे ठीक लग कर एक भारतीय जोड़ा खड़ा था…
अपने पहले पहले हनीमून पर आया नवेला दूल्हा अपनी प्रेयसी को प्रभावित करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाह रहा था। इसलिए झील को निहारती खड़ी अपनी पत्नी को निहारते हुए वो गुनगुना उठा… और गीत के बोल शौर्य के दिल में जा लगे..
“घनक घटा कलियाँ और तारे सब हैं तेरा रूप,
गज़लें हों या गीत हों मेरे सब में तेरा रूप,
यूँ ही चमकती रहे हमेशा तेरे हुस्न की धूप,
तुझे नज़र ना लगे किसी की,
तुझे नज़र ना लगे किसी की
जिये हज़ारों साल,
इक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल…..”
शौर्य कली को देखता हुआ खोया सा खड़ा था कि विक्रम चला आया..
“चले प्रिंस ?”
शौर्य का ध्यान नहीं टुटा और विक्रम ने उसका हाथ पकड़ कर हिला दिया..
“प्रिंस.. घर चले ?”
शौर्य चौंक कर सजग हो गया, उसने अपने पास खड़े विक्रम को देखा और चीख पड़ा..
“तुमसे मैंने कहा था, कि मुझे बुलाने आना ?”
विक्रम ने न में गर्दन हिला दी
“फिर क्यों आये ?”
“देर हो रही थी, आपने सुबह से ढंग से कुछ खाया नहीं.. और फिर दिन भर में आप थक भी तो गए हैं !”
“वो मैं खुद मैनेज कर लूंगा.. तुम बॉडीगार्ड हो, मेरी माँ बनने का प्रयास मत करो, समझे.. !”
उस पर चीख चिल्ला कर शौर्य गाडी की तरफ बढ़ गया, और उसके वहाँ से जाते ही कली की तरफ देख कर विक्रम हलके से मुस्कुरा उठा..
“अब वहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो.. गाडी मुझे चलानी है क्या ?” शौर्य वापस चीख उठा और विक्रम अपनी हंसी रोकने का प्रयास करता तेज़ी से भागते हुए गाड़ी की तरफ बढ़ गया..
शौर्य गाडी में बैठ चुका था, विक्रम ने गाडी आगे बढ़ा दी..
उसी वक्त शौर्य का फ़ोन बजने लगा.. बेरुखी से शौर्य ने फ़ोन उठा लिया..
“तुमसे कहा था न शांति से अपनी सहमति दे देना, ज्यादा चू चपड किये बिना !”
“हाँ फिर ? शांति से ही तो अपनी सहमति दी है.. अब अगर इतना भी न बोलूं तो मतलब ही क्या मेरे वहाँ मौजूद रहने का !”
“अच्छा.. अब हर बात में मतलब निकाला जा रहा है.. !”
“देखिये सर.. मैं जो कर रहा हूँ… और जैसे कर रहा हूँ, वही सही तरीका है !”
“मेरे हाथो पैदा होकर मुझे सिखाओगे की कौन सा तरीका सही है कौन सा गलत. ?”
भदौरिया चीख पड़ा और शौर्य ने फोन कान से दूर कर दिया.. सामने बैठे विक्रम के कान भी उधर ही लगे थे.. वो और ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगा और इस बात पर शौर्य का ध्यान चला गया..
“ए.. तुम… सीधे गाड़ी चलाने पर ध्यान दो.. पीछे हमारी बातें क्या सुन रहे हो ?”
“नहीं प्रिंस मैंने कुछ नहीं सुना !”
“हम्म.. सुनाना भी मत.. “
उसे झिड़क कर वापस शौर्य फ़ोन पर बात करने लगा..
“हम्म ठीक है मैं घर पहुँच कर बात करता हूँ.. वैसे आपका बहुत बड़ा काम हो गया है, उसकी बधाई नहीं लेंगे !”
उधर से खीझ कर भदौरिया ने फ़ोन रख दिया और शौर्य फ़ोन को सीट पर पटक कर बाहर देखने लगा…
विक्रम ने बैक व्यू मिरर में शौर्य का बुझा सा चेहरा देखा और गाड़ी में लगे सिस्टम पर फ़िल्मी गानो की सीडी बजा दी..
जिस रस्ते से तू गुजरे वो फूलों से भर जाये
तेरे पैर की कोमल आहट सोते भाग जगाये
जो पत्थर छू ले गोरी तू, वो हीरा बन जाये
तू जिसको मिल जाये वो
तू जिसको मिल जाये वो हो जाये मालामाल
इक तू ही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल…
क्रमशः

वह तो इस बार यह सब राजा साहब ने नहीं किया है बल्कि यह सारा जल भदोरिया का बिछाया हुआ है पर यह कैसे हो सकता है वह बिल्कुल होगा वह शोर की तरह दिखने वाला लड़का कैसे पेश कर सकता है सबके सामने जबकि वासुकी कि उसे पर पूरी निगाह बनी हुई है।
आखिर इतना बड़ा कांड करने से पहले उसने एक बार भी यह नहीं सोचा कि अगर असली शौर्य सबके सामने आएगा तो फिर उसकी कितनी फजीहत होने वाली है।
और अब समझ में आया क्यों यह लड़का भदोरिया के कहने पर सारे काम किया जा रहा है इस काम को करने के लिए कभी भी शौर्य का जमीर उसे गवाही नहीं देता इस काम को यह लड़का बड़े मजे से किया जा रहा है
Kya shaurya ko bhadauriya blackmail kar raha hai kisi baat ko lekar par ye baat dhanush tak pahunchi nahi hai kya?
Chal kya raha koi hame bhi batayega . Akhir shaurya ko hua kya Hai. Kyun wo aise awkward behave kar raha hai.
Very nyc part 👌
Ye to samjh hi nahi aa raha hai ki Shaurya ki hakikat kya hai?
Ye shourya kucch rahasyamaib hota ja raha hai
मेरा तो दिमाग खराब हो गया है ये शौर्य हो ही नहीं सकता।😩😩😩
🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐
Very nice part 👌👌👌
Very interesting…kya bhadoriya ne asli sharya ko kidnap kiya he..ya yahi asli shrya heki bhadoriya use blackmail kar raha he…