अतिथि-20

अतिथि -20

    माधव के माता पिता कुछ देर और बैठने के बाद वापस चले गए, लेकिन जाते जाते उस घर की हवा को भारी कर गए..
उनके जाते ही सुलोचना धप से सोफे पर गिर पड़ी..! उसे लगा उसके पैरो तले की ज़मीन किसी ने खींच दी हो..।
उसके माथे पर पसीना छलक आया..।

डिंकी खुद अपने कमरे में स्तब्ध बैठी थी ! उसकी समझ से परे था कि उसे कैसा महसूस हो रहा है..
उसका फ़ूट फ़ूट कर रोने का जी कर रहा था, लेकिन वो इस वक्त घर पर रो भी नहीं सकती थी.. उसने कपड़े बदले, जींस के साथ एक टॉप डाली और कमरे से बाहर निकल आयी..

सुलोचना ने बस डिंकी की तरफ देखा, उसकी कुछ बोलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी.. सुलोचना के चेहरे का उड़ा रंग देख कर डिंकी हैरान रह गयी..।

“मम्मी क्या हुआ ? तबियत तो ठीक है न ?”

‘हम्म.. तू कहाँ चल दी ?”

“गरिमा के घर से आती हूँ !” ज्यादा कुछ बोले बिना वो तीर की तरह बाहर निकल गयी… कहीं न कहीं डिंकी के दिल में बहती पीर को उसकी माँ ने समझ लिया था..

“खाना वाना खिलाओगी या… !” विनोद ने मजाकिया अंदाज़ में अपनी पत्नी के गहन दुःख को जाने बिना उसे छेड़ दिया और वो फ़ूट पड़ी..

“खाना खाना खाना, और कुछ दिमाग में चलता भी है या नहीं? रात दिन एक ही काम.. बस खाना और सोफा तोड़ते हुए टीवी को ताड़ना..।
कभी ज़रा अपने अगल बगल भी झांक लीजिये..।
लड़की ताड़ के पेड़ सी बढ़ती जा रही, ये नहीं कि उसके लिए ढंग का रिश्ता ही ढूंढ़ ले..।
   बस इनका अख़बार और इनका दफ्तर।
दो ही जगह ये दिमाग लगा सकते हैं, बाकी जगह तो ऐसे बौड़म बन जायेंगे कि बस पूछो मत..।”

विनोद सुलोचना का रणचंडी रूप देख हतप्रभ था.. अचानक इसे हुआ क्या, ऐसी क्यूँ बिगड़ने लगी..?
उसे समझ में नहीं आया..

“क्या हुआ सुलो… किस बात का धक्का लगाए बैठी हो.. ?”

विनोद ने बड़े लाड़ से उसके कंधे पर हाथ धर दिया..

एक प्रेमी का पंचशर चला और सुलोचना को बिलकुल ही निहत्था कर दिया…
वो उसकी बाँहों में सिसक उठी..
उसे यूँ रोते देख वो घबरा गया..

“क्या हुआ, रोने क्यों लगी?”

पति का स्नेहविगलित स्वर सुलोचना की देह कंपा गया, उसका रोना और तेज़ हो गया..
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था, जिस अवलम्ब को पाने के बाद उसका क्रंदन थम जाना था, उसे पाने के बाद वो दुगुने वेग से क्यों रोने लगी थी….

विनोद ने फिर कुछ नहीं पूछा, बस अपनी पत्नी को अपनी बाँहों में समेट लिया.. !!

डिंकी गरिमा के घर पहुँच तो चुकी थी, लेकिन मन उसका यहाँ भी नहीं लग रहा था..।
वो डिंकी के कमरे की बालकनी में खड़ी खाली खाली नजर से रास्ते की तरफ देख रही थी।

यूँ ही रास्ते को देखते हुए उसकी नजर उस गली की तरफ मुड़ गयी, जहाँ माधव का घर था..।
दिल में एक आस सी जगी कि शायद माधव नजर आ जाये.. लेकिन दूसरे ही पल माधव की माँ की कही बात भी दिमाग में कौंधने लगी..।

“हमारा माधव भी सामान्य कहाँ है बहनजी? “
डिंकी अपने ख्यालों में खोयी थी कि गरिमा ने उसके सामने कॉफी का प्याला रख दिया..

“किसके ख्यालों में खोयी है, मैडम जी ?”

“हम्म.. कुछ नहीं !”

“आय हाय… मैं समझ गयी जानेमन। ये ज़रूर तेरे अंकल जी के बेटे की यादें हैं, जो तुझे इस कदर अपने आसपास से बेरुखी हो रही है !”

“चुप कर.. ऐसा कुछ नहीं !”

“बता न फिर हुआ क्या है ?”

“एक फिल्म देख रही थी, बस उसी ने हलचल मचा रखी है दिमाग में !”

“कौन सी फिल्म देख ली तूने? ऐसा क्या है उस फिल्म में !”

“एक कहानी है, जिसमें हीरो हीरोइन एक दूसरे से प्यार करते हैं। और आगे जाकर एक मोड पर हीरोइन को पता चलता है कि हीरो का दिमागी संतुलन ठीक नहीं है.. वो पागल है !”

“क्या ?” गरिमा का मुहं खुला रह गया -” ये कैसी बकवास स्टोरी है !”

“हम्म इसलिए तो दिल में खलबली सी मची है… आधी ही देख पायी हूँ, आगे का देख नहीं पायी कि होता क्या है !”

“होगा क्या ? अगर सत्य घटना पर आधारित होगी तो हीरोइन को हीरो को छोड़ देना चाहिए.. एक पागल के साथ जिंदगी गुज़ारना आसान थोड़े न है !”

“हम्म.. लेकिन मुझे तो कुछ और ही अंत पसंद आ रहा!”

“क्या ? कौन सा अंत ?”

“मुझे लगता है नायिका को नायक का साथ देना चाहिए.. प्यार सिर्फ अच्छाई और खुशहाली में साथ देने भर का नाम तो नहीं है न ?”

“हाँ लेकिन पागलपन करने का भी नाम नहीं है !”

“प्यार में पागलपन न हो तो फिर मज़ा कैसा ?”

डिंकी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई..

“तू मुस्कुरा क्यों रही है ?”

“क्यूंकि मुझे कहानी का अंत समझ में आ गया है… शुक्रिया गरिमा !”, डिंकी ने गरिमा को गले से लगा लिया, लेकिन गरिमा को डिंकी के इस बिन बादल बरसात वाले प्यार का कारण नहीं समझ आया..

“आ अब तो कॉफ़ी पी ले !”

“हाँ अब तो पी ही लूंगी.. !” डिंकी ने कॉफी का प्याला मुँह से लगा लिया…
उसके चेहरे और मन में छायी शिकन अब जा चुकी थी….
उसने तय कर लिया था, उसे क्या करना है.. उदासी के बादल छंट चुके थे !

उसे घर आने में देर हो गयी, दरवाज़ा चिंटू ने ही खोला… देर से घर आने के लिए उसे आँखों ही आँखों में भस्म करता वो अपने हाथ के रुबिक्स क्यूब को संवारता वहाँ से चला गया..
डिंकी अपने कमरे की तरफ मुड़ रही थी कि सुलोचना की तीखी आवाज़ इसके कानो में पड़ गयी..

“अब बोल भी दो, पूरी शाम रोती क्यों रही !”

“सुनिए जी, मेरे हाथों एक बहुत बड़ा अनर्थ होते होते रह गया ! भगवान वाकई रक्षा करते हैं !”

“अब क्या हो गया, कहाँ रक्षा कर दी भगवान ने ?”

“आपसे एक आध बार आधी अधूरी बात कही तो थी मैंने.. जब से केदार भाई साहब के लड़के को देखा था, मन में ये इच्छा जाग गयी थी कि ऐसा सुदर्शन जंवाई मिल जाए तो डिंकी के भाग खुल जायेंगे। लेकिन अच्छा हुआ मैं उन लोगो से कोई चर्चा छेड़ती उसके पहले ही पता चला गया कि लड़का पागल है.. !”

“छि कैसी बातें कर रही हो सुलोचना… माधव पागल नहीं है।
  बस उसे एक मानसिक व्याधि है, उसका इलाज भी चल रहा, उबर जायेगा !”

“न बाबा मैं अपनी फूल सी लड़की का हाथ किसी पागल के हाथ में कभी नहीं दे सकती.. देखने सुनने में कितना सुंदर लड़का है। आज तक देख कर कभी लगा नहीं कि वो पागल है !”

“अजीब बात करती हो तुम भी.. खुद ही कह रही कि देख कर लगा नहीं कि पागल है, उसके बावजूद बार बार उसे पागल बोल रही हो..!”

“पागल ही तो है.. पता नहीं लड़की वालों की क्या  मज़बूरी रही होगी जो वो लोग तैयार हो गए.. जाते जाते केदार भाई साहब की पत्नी कह गयी है, कि दो चार दिन में वापस आएँगी, ओली डालने !
कह रही थी ज़रा खरीदारी में मदद करवा देना..”

“तुमने क्या कहा ?”

“मैंने भी हाँ कह दी, देखा हमारी डिंकी से कैसे हिलमिल कर बात कर रही थी.. !”

“अब उसमें भी तुम्हे समस्या हो गयी.. अरे उनके लिए डिंकी उनके पति के प्रियमित्र की पुत्री है। इसी से थोड़ा स्नेह दिखा दिया.. तुम्हारा तो आज दिमाग ही ख़राब हो गया है !”

“सच कह रहे हो.. मेरा दिमाग ही ख़राब हो गया है, लेकिन जो भी हो, जान छूटी इन पागलो से..।”

विनोद अपनी पत्नी के टूटे हृदय पर मरहम ज़रूर रखना चाहता था, लेकिन सुलोचना का हद से ज्यादा वाचाल होना आज उसे भी बुरी तरह अखर गया..।

उसके लिए माधव जो पहले था, आज भी वही था। लेकिन अपने मन की बात वो अपनी प्रगल्भा पत्नी को समझा नहीं पा रहा था। इसलिए खीझ कर बाहर निकल गया।
   बाहर खड़ी डिंकी से जैसे ही उसका आमना सामना हुआ दोनों पल भर के लिए चौंक गए।

फिर डिंकी के सर पर हाथ रख विनोद बाहर निकल गया..

डिंकी को आज अपनी माँ की कही बातें ज़रा नहीं सुहा रही थी, लेकिन इस वक्त वो उनका विरोध भी नहीं करना चाहती थी..।
इसलिए बिना कुछ बोले अपने कमरे में चली गयी…

क्रमशः

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कांति
कांति
2 months ago

इस तरह अचानक से सुलोचना का बदल जाना dinki के प्यार के लिए सही नहीं है।
अब आगे dinki क्या फैसला लेगी। क्या सुलोचना उसे रोक पायेगी, क्या माधव और उसकी कोई कहानी होगी।

Nisha
Nisha
1 year ago

Ab dinki kya karegi aur sach ka pata kaise lagayegi

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

सुलोचना जैसी समझदार स्त्री से इस तरीके की बातचीत की उम्मीद नहीं थी एक मां के रूप में सोच रही है वह अभी क्योंकि एक मां के लिए उसके बच्चों से बढ़कर कुछ नहीं होता तो दूसरों के बच्चे पागल भी नजर आने लगते हैं भले ही चाहे वह हो या ना हो।
यह कोई छोटी बात नहीं है कि माधव कहानी गड़ता है और शायद डिकी को भी उसने एक कहानी गढ़ के ही सुनाई थी जिसमें डिकी उसकी सौतेली मां और उस काल्पनिक माधव से प्रेम कर बैठी थी जो अपनी सौतेली मां को असीम प्रेम करता था।
पर लग रहा है कि डिकी ने भी निश्चय कर लिया है कि माधव की इस कमी के बावजूद वह उसे प्रेम करें बिना नहीं रह सकेगी

Jyoti
Jyoti
1 year ago

Very nyc part 👌

Seema Srivastava
Seema Srivastava
1 year ago

Very beautiful

Upasna
Upasna
1 year ago

व्यथित मन पा न सका विश्राम कहीं
थकित तन को मिल स्का न आराम कहीं
कुछ है विकीर्ण कुछ सुरचित भी हैं
जीवन पथ के दिखते कई आयाम यहीं

अब क्या सही है क्या गलत इस बात का अपना अपना दृष्टिकोण है न सुलोचना गलत है न ही dinki लेकिन माता पिता मात्र भावनाओ में बहकर तो अपनी संतान के भविष्य से जुड़े निर्णय नहीं ले सकते वे तो जांचे परखे बिना ठोंक बजाए कहाँ ही निर्णय ले पाएंगे।
माधव का भी क्या सच है ये भी अपनी पूरी तरह स्पष्ट नहि हुआ है ,बाकी तो जो हरि इच्छा बलवती है ही
देखते हैं समय किस करवट बैठता है

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

सुलोचना तो माधव को पागल ही मान बैठी है वो भी क्या करे एक माँ दिल ये कभी स्वीकार नहीं करेगा। डिंकी को
भी लगता है मंजिल मिल गई पर उसे नहीं पता मंजिल तो पता है पर रास्ता बहुत कठिन है।देखते है डिंकी जो सोचा है उसमे सफल होती है या नहीं।

देखते है आगे क्या होता है 🙏।

seema Kawatra
seema Kawatra
1 year ago

वो प्यार ही क्या जिसमें पागलपन न हो
डिंकी के मन में छाये बादल तो छट गए पर उसकी मंजिल बहुत दूर है और रास्ता कठिन

Kanchan Choudhary
Kanchan Choudhary
1 year ago

Dinki ka decision kya rang lata hai dekhna dilchasp rahega.

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut sundar