
पोंचो…
वो दोनों इण्डिया चले गए, अपने अपनों के पास ! समय उनके लिए पंख लगा कर उड़ रहा था, लेकिन पोंचो का वक्त काटे नहीं कट रहा था..
दरवाज़े पर हुई हर आहट में उसके कान खड़े हो जाते कि शायद वो दोनों आ गए, लेकिन हर बार मायूसी उसके हाथ लगती..।
उसका न खाने का मन करता न पीने का..
उसने शुरू के चार पांच दिन खाने की तरफ देखा तक नहीं..
दोस्त ने परेशान होकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उन दोनों का चेहरा पोंचो को दिखाया..
वहाँ से वो दोनों बड़े दुलार से पोंचो से खाना खाने की ज़िद करने लगे और तब जाकर एक दो उलटे सुलटे निवाले निगल कर पोंचो ने औपचारिकता निभा दी..।
वो दोनों भी उसे बहुत मिस कर रहे थे। जिस रिश्तेदार से मिलते पोंचो की कथा सुनाना शुरू कर देते, किसी एक ने टोक भी दिया..
पोंचो तो तुम्हारा वसीयतदार हो गया और वो दोनों हंस कर रह गए..
एक बार विडिओ कॉल में देख लेने से भी पोंचो का मन नहीं भरा। उसके लिए वो दोनों उसका जीवन हो चुके थे..।
उनके बिना उसे साँस लेने का मन नहीं कर रहा था, खाना पीना तो बहुत दूर की बात थी…।
लेकिन उसे एक बात समझ में आ गयी कि वो दोनों कहीं बहुत दूर चले गए हैं। जहाँ से आसानी से वापसी सम्भव नहीं है.. ।
क्यूंकि अगर सम्भव होती तो उसकी हालत देख वो दोनों वापस आ जाते..
अनजाने ही उसने इस गम को दिल से लगा लिया, उसका खाना पीना एकदम छूट गया..।
दोस्त कभी प्यार मनुहार करता तो वो बर्तन के इर्द गिर्द चक्कर लगा कर ऐसे दिखाता जैसे उसने खा लिया, लेकिन सच्चाई यही थी कि उससे एक निवाला भी निगला नहीं जाता..
दिन बीतते गए और अपनी छुट्टियां बिता कर वो दोनों वापस लौट आये..
वो लोग घर पहुँच कर सामान रख कर सबसे पहले पोंचो को लेने ही भागे।
इस बार जब दरवाज़े पर आहट हुई, पोंचो ने कान नहीं खड़े किये, उसे लगा दूध, अख़बार या धोबी होगा, ज्यादा हुआ तो फ़ूड डिलीवरी वाला होगा, वो और मुहं फेर कर बैठ गया..।
लेकिन तभी एक परिचित मीठी सी देह परिमल उसके नथुनों में भर गयी..।
सामने वाला उसे पुचकारता, उतनी देर में पोंचो पलटा और अपने पप्पा की तरफ उसने छलांग लगा दी।
उसने आगे बढ कर पोंचो को बाँहों में भर लिया..
वही सुकून वाली खुशबु महसूस करता पोंचो गहरी नींद में सो गया..
वो दोनों उसे गोद में लेकर चूमने लगे, लेकिन पोंचो बेहोश हो चुका था। न हिल डुल रहा था, न उनके गालों से गाल सटाये सहला रहा था.. वो तो लगा जैसे कई दिनों के बाद गहरी नींद में सोया था..।
वो दोनों उसे ले सीधा डॉक्टर के पास पहुँच गए..
पोंचो को डॉक्टर्स जाँच के लिए ले गए..
कई सारी जांचो के बाद डॉक्टर्स उसे लेकर बाहर चले आये ।
पोंचो होश में आ गया था और अपने मम्मा पप्पा की गोद में दुबक कर खुश होने लगा था। लेकिन डॉक्टर ने जो बताया उससे वो दोनों खुश नहीं हो पाए..
पोंचो की स्थिति ख़राब होने लगी थी..।
उसकी कार्डियक प्रॉब्लम ने उसके लिवर और किडनी पर भी असर दिखाना शुरू कर दिया था..
डॉक्टर ने उसका खाना, उसकी दवाई उसकी पानी की मात्रा हर किसी का चार्ट तैयार कर उन्हें दे दिया। और साथ ही ये भी बता दिया कि वो अब ज्यादा दिन का मेहमान नहीं है..।
दोनों इस बात को अरसे से भूले बैठे थे कि पोंचो एक बीमार कैट था..
वो भारी मन से उसे वापस ले आये.. एक बार फिर ज़िंदगी की ज़द्दोज़हद शुरू हो गयी।
पोंचो का रूटीन उन दोनों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो गया..
पानी की मात्रा बहुत कम कर दी गयी थी, वो लोग बिलकुल नाप कर उसे हर चीज देने लगे.. उसका बाहर वाॅक पर जाना बंद कर दिया..
वो दोनों पोंचो को कोई कष्ट नहीं देना चाहते थे..।
दिन बीतने लगे और पोंचो एक बार फिर पहले वाला स्वस्थ सुंदर और रॉयल पोंचो बन गया।
वो वापस फुदक फुदक कर खेलने लगा.. इधर से उधर शरारते करते हुए उछलने कूदने लगा, और इन दोनों को ये समझ में आ गया कि उन दोनों का दो हफ्ते उससे दूर रहना ही उसे इतना बीमार कर गया था..
एक बार फिर खुशहाली में दिन बीतने लगे, लेकिन अब ये लोग ज़रा चौकन्ने हो गए थे.. अब हर दो महीने में पोंचो का चेकअप होता और डॉक्टर की बताई दवाये उसके बताये वक्त पर दी जाती..
कुछ लोगो ने हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह भी दी। इन दोनों ने इंटरनेट पर सब ढूंढ़ लिया, लेकिन जापान के अलावा कहीं पर भी कैट्स के हार्ट ट्रांसप्लांट की सर्जरी के बारे में मालूम न चल सका..।
जापान में बात करने पर मालूम हुआ कि आज तक वहाँ सिर्फ सात ऐसी सर्जरीस हुई हैं जिनमे मरीज़ को अंततः बचाया नहीं जा सका।
इसके बाद उन दोनों की हिम्मत चूक गयी..।
पोंचो की हालत में काफी सुधार आ गया था, इसलिए वो दोनों अब उसे लेकर एक बार फिर आसपास की जगहों पर घूमने जाने लगे..
यूँ लगा मानो ज़िंदगी वापस पटरी पर चली आई हो..
इसी बीच मैडम को एक ट्रेनिंग में जाने का आदेश मिला.. वो ज्यादा दिन के लिए पोंचो को छोड़ कर जाना नहीं चाहती थी, लेकिन मज़बूरी थी उसे जाना पड़ा..
दो दिन आराम से गुज़र गए … लेकिन एक शाम पोंचो ज़रा थकान का अनुभव करने लगा..।
उसने ध्यान दिया, पोंचो ने सुबह से यूरिनेट नहीं किया था, उसे खटका सा हुआ.. उसने पोंचो को गोद में उठाया और तुरंत अस्पताल की तरफ भागा..।
डॉक्टर ने पोंचो की हालत देख उसे तुरंत भरती कर लिया..
पोंचो को कुछ इंजेक्शंस दिए गए, कुछ दवाओं की खुराक बढ़ा दी गयी और फिर रात भर उसे वहाँ रखने के बाद सुबह अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी..
पोंचो को लिए वो घर चला आया…
पोंचो अब भी थका सा था, वो जहाँ बैठा था वहाँ से उठने की उसकी हिम्मत नहीं थी..
न उसने खाने की तरफ देखा न पानी की एक घूंट भरी थी..
डॉक्टर ने अस्पताल से निकलते समय उसके पास आकर जिस ढंग से उससे माफ़ी मांगी थी उससे वो किसी हद तक ये बात समझ चुका था कि अब पोंचो अपने आप को और नहीं खींच पायेगा..
डॉक्टर ने स्पष्ट कह दिया था.. -” देखिये एक कैट की एवरेज लाइफ बारह तेरह साल की होती है.. आप जब पोंचो को लेकर आये उस समय ही ये तीन साढ़े तीन साल का हो चुका था, तब ही मैंने कहा था कि ये ज्यादा से ज्यादा तीन चार महीने ही जी पायेगा। लेकिन आप के पास रह कर इसके अंदर जीने की ऐसी इच्छा जागी कि इसने अपना सब कुछ झोंक कर अपने जीवन को चार साल तक खींच लिया..।
ये एक्चुली एक मिरेकल ही है.. अगर ये आपके पास नहीं होता तो ये अब तक ज़िंदा भी नहीं होता।
सच तो ये है कि इस बीमारी में सात साढ़े सात साल तक सर्वाइव कर जाना अपने आप में बहुत बड़ी बात है…।
पोंचो का लाइफ स्टाइल और उसके शरीर को तो प्रयोगशाला में रख कर परिक्षण करना चाहिए कि बिना किसी सर्जरी के भी उसने इतना सर्वाइव कैसे किया..?
आप किसी तरह का अफ़सोस मन में मत आने दीजियेगा.. असल में तो आप दोनों ने यमराज से उसकी ज़िंदगी छीन कर उसे इतनी ख़ुशियाँ दी है, जितनी अपनी पूरी लाइफ जी कर भी बहुत से लोग पा नहीं पाते..।
बस अब उसके इस आखिरी वक्त को उसका खास बना दीजिये.. उसे खुद से अलग मत कीजियेगा.. !”
डॉक्टर की भी आंखे भर आई थी, और उसकी भी.. ! घर के रास्ते में वो पूरा वक्त पोंचो को खुद से चिपकाए रोता रहा…
पहले उसने सोचा कि उसे खबर करे या नहीं.. वो ट्रेनिंग में है और उसकी तबियत भी सही नहीं है..।
वो कह रही थी जब से ट्रेनिंग में गयी है उसे बहुत थकान सी लग रही है..।
इधर वो ट्रेनिंग के बाद रोज़ पोंचो से विडिओ कॉल में बात करती, उसे पुचकारती, लेकिन दो दिन से वो विडिओ कॉल पर आकर भी सुस्त सा पड़ा रहता.. वो भी घबरा गयी थी..
आज़ उसकी खुद की तबियत सुबह से घबरा रही थी इसलिए वो डॉक्टर के पास चली गयी..
डॉक्टर ने उसकी जाँच की और कुछ ज़रूरी हिदायते देकर उसे घर भेज दिया..
वो चाहती थी जल्दी से जल्दी पोंचो और उसके पापा के पास पहुँच कर उन्हें भी डॉक्टर की कही बात बता दे..
वो उन लोगो से बस कुछ घंटो के फ़ासले पर थी, आज उसकी ट्रेनिंग का अंतिम दिन था, आज बस सबकी विदाई पार्टी थी पर इसका मन पोंचो और उसके पप्पा के बिना नहीं लग रहा था…।
आखिर उसने अपने गाइड से बात की और सुबह की गाडी लेकर घर लौट गयी..
इधर वो रात भर पोंचो को गोद में लिए सिसकता रहा, उसकी उसे फ़ोन कर के बताने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी.. कई बार उसने फ़ोन हाथ में लिया और फिर वापस रख दिया।
सुबह सुबह का वक्त था..
पोंचो ने उसकी तरफ देखा, उसके गालों पर अपने गालों को सहलाने लगा, वो सुबक उठा..
वो अब तक समझ चुका था कि पोंचो बहुत ज्यादा तकलीफ में है..
उसने धीरे से पोंचो के कान के पास अपना मुहं लगाया और बोल पड़ा -” जाओ पोंचो, मैं तुम्हे मुक्त करता हूँ ! “
उसकी आँखों से आंसू की बड़ी बड़ी बूँदे पोंचो के गालो पर बिखरने लगी..।
पोंचो ने उन आंखों को, उन आंसुओं को महसूस किया। वो लगातार उसे देख रहा था, जैसे दिलासा दे रहा हो, कह रहा हो कि मैं चला भी गया तो फिर वापस आऊंगा.. बहुत जल्द आऊंगा..।
वो चुपचाप पोंचो को गोद में लिए बैठा रहा, और उसी गोद में अपनी उसी सुकून वाली खुशबु में पोंचो ने अपनी आखिरी साँस भरी…
और पोंचो चला गया….
आखिरी हिस्सा कल..

Very nyc part 👌
very emotional part 😔
Very emotional part
Very interesting & heart touching story, mana ki ye Cats ke baraya me likhi gyi hai but very Imotional story, there is no ward to explain, man ko Bhatia n chuti story
Bahut badhiya 👌👌👌👌👌👌👌
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