पोंचो… 2 

   दोनों उस शॉप पर पहुँच गए.. वो पेट् शॉप थी, जहाँ तरह तरह के सामानों के साथ ज़रूरतमंद छोटे पपीस और किटेन भी रखी होती थी..
   अब वो शॉप ऑनर इन दोनों को पहचानने लगा था. . इन्हे आते देख वो दुकान से उतर कर चला आया..

“तो आप लोग पोंचो को लेने आये हैँ ?”

उन दोनों ने माथा हाँ में हिला दिया

“उसे ले जाने के पहले मैं उसके बारे में कुछ बातें स्पष्ट कर दूँ..इसके पिछले पालकों ने इसकी बीमारी के बारे में जानने के बाद एक रात इसे यूँ ही गली के बाहर छोड़ दिया..।
उन्हें लगा एक बीमार पशु की देखभाल करना मुश्किल होगा..।
मेरी टीम में एक लड़की है कैथरीन ! वो उसी इलाके में कहीं रहती है, वो रोज़ रात ऑफिस से आने के बाद अपनी गली के डॉग्स और कैट्स के लिए खाना डालने जाती हैँ, वहीँ कैथ ने इसे देखा..।
पोंचो वहाँ नया कैट था, इसलिए बाक़ी कैट्स इसे खाने नहीं दे रहे थे.. कैथरीन समझ गयी कि ये नया कैट है..
उसने मुझे वहीँ से फ़ोन किया कि एक रेस्क्यू कैट है, जिसके लिए हमें फोस्टर देखना होगा। क्यूंकि स्ट्रीट कैट्स इसे यहाँ रहने नहीं देंगे।
मैं अक्सर उन्ही कैट्स और डॉग्स को फोस्टर या अडॉप्शन में डालता हूँ जो स्ट्रीट में रहते हुए अपना जीवन नहीं पाल सकते..।
वरना देखा जाये तो पशु पक्षी प्रकृति में प्राकृतिक रूप से रहने के लिए ही बने हैँ, उन्हें घर की ज़रूरत नहीं। इसलिए हमारी संस्था अलग अलग स्ट्रीट में खाना पानी की व्यवस्था भी करती है। पर कुछ ऐसे पेट्स जो घर से किसी कारणवश निकाल दिए जाते हैँ, या बेघर हो जाते हैँ। उनके लिए हमें घर ढूंढने पड़ते हैँ !”

“आप को इसकी बीमारी का पता कैसे चला ?”

“कैथरीन के फ़ोन के बाद मैं पोंचो को लेने पहुँच गया और मैं इसे देखते ही पहचान गया। इसके पालक को मैं जानता था..।
मुझे एकबारगी लगा पोंचो रास्ता भटक कर गली में पहुँच गया है, और इसलिए मैंने उसके पालकों को फ़ोन लगा दिया.. तब उन लोगों ने इसकी बीमारी के बारे में बताया !
पहले उन्हें भी नहीं मालूम था, पिछले हफ्ते ये खूब बीमार पड़ गया और तब वो इसे डॉक्टर के पास ले गए, जहाँ डॉक्टर ने चेकअप के बाद बताया कि ये ज्यादा से ज्यादा तीन महीने जियेगा, बस इसलिए उन लोगो ने इसे रास्ते पर ही छोड़ दिया !

वो दोनों पोंचो की कहानी सुन कर सकते में आ गए!
लड़की ने आगे बढ़ कर तुरंत पोंचो को गोद में उठा लिया..
वो दोनों उसे अपने साथ घर ले आये।

पिछली दोनों बिल्लिओं को फोस्टर करने के बाद अब इन दोनों के पास थोड़ा सा अनुभव था। अनुभव भले ही कच्चा था, लेकिन इनका जज्बा पक्का था !
पोंचो बीमार था, और उसके पास सिर्फ तीन महीने शेष थे..

इन दोनों को लगा कि इनके जीवन को अगले तीन महीनो के लिए एक लक्ष्य मिल गया है। उस छोटी सी बिल्ली के जीवन को सुखद और आनंदमय बनाने का लक्ष्य !

   जब हम कोई काम अपनी ख़ुशी के लिए करते हैँ, तो हमें अद्भुत आनंद मिलता है। लेकिन जब हम कोई काम किसी और को ख़ुशी देने के लिए करते हैँ, तब हमारा आनंद परमानन्द में बदल जाता है..
ऐसा ही कुछ इन दोनों के साथ हुआ !!

  इंटरनेट पर ढूंढ़ ढूंढ़ कर ये लोग पोंचो की सुविधा का सामान जमा करने लगे। उसे अच्छे से अच्छा भोजन देना, पानी देना, उसकी नींद का ख्याल रखना, उसकी साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखना, ये सब अब इनकी रोजमर्रा की आदतों में शुमार होने लगा !

   ये दोनों कट्टर वेजिटेरियन थे। घर पर केक भी बिना अंडे का बनता, यहाँ तक की दोस्तों के साथ की विशुद्ध सामिष पार्टियों में भी ये अक्सर अपनी सागभाजी में ही खुश रहा करते थे..।
   लेकिन किसी ने बताया कि कैट्स को मीट खिलाना उनके लिए लाभदायी है..
    अब पोंचो के लिए उसके विशेष खाने के पाउच भी मंगवाए जाने लगे, जिन्हे बड़े प्रेम और पूरे एहतियात के साथ मैडम बना कर पोंचो को खिलाने लगी..

   आज तक पोंचो इस प्रेम की भावना से अनजान था।
उसके लिए ये सब कुछ बहुत नया था, एक तरह से ये उसका एक अलग ही अनुभव था…
             … क्यूंकि उसके पिछले मालिकों ने तो उसे काम पर रखा हुआ था..!
उसके पिछले घर में उसका काम था घर के गैराज में मौजूद चूहों को पकड़ पकड़ कर मारना..।
कहीं वो अपने काम में कोताही न बरत दे, इसलिए कई बार उसे भूखा भी रखा जाता था..।

क्यूंकि उसके पिछले मालिकों का मानना था कि अगर उसका पेट भरा रहा तो वो सोया पड़ा रहेगा, और चूहे पूरे घर में तबाही मचाएंगे !
    कभी उसे दो दिन में तो कभी तीन दिन में पुरानी  ब्रेड का टुकड़ा दे दिया जाता था, जिसे वो बड़े चाव से खा लेता था..।
कभी जब वो दो चार चूहे भगा लेता तब उसकी मनपसंद बिस्किट भी उसे दे दी जाती थी और वो दिन उसका सबसे ख़ुशी भरा दिन होता था !

पोंचो की नजर में उसका जीवन मजेदार था, उसके पास रात दिन चूहे पकड़ने का खेल मौजूद था.. हालाँकि उस काम में वो बुरी तरह थक जाया करता था !
बस कभी कभी उसे बुरा लगता था, जब कोई चूहा उसकी नजर बचा कर मालिक की महंगी गाड़ी में कोई नुकसान कर जाता और मालिक बदले में उसकी पिटाई कर देते थे..।
    पर गलती तो उसी की होती थी न, अगर वो चूहे को मौका ही नहीं देता तो मालिक उसे पीटते ही क्यों भला ?
जो भी था वो अपने जीवन में संतुष्ट था !
      लेकिन फिर एक दिन सुबह से उसकी तबियत उखड़ने सी लगी थी..।
बार बार उसे घबराहट हो रही थी, जी मिचला रहा था.. उसका सर घूम रहा था !
आज उसके सामने दो चूहे उधर से उधर मंडरा रहे थे, लेकिन वो चाह कर भी उन पर झपट्टा नहीं मार पा रहा था.. उसकी आँखों में अजीब सा सब धुंधला सा होने लगा था..
उसने खुद को बहुत रोकने की कोशिश की, लेकिन उसे उलटी हो गयी..।

उसे पता था उसके मालिक सफाई पसंद है। उसने कोशिश की थी कि वो बाहर गार्डन के रेतीले हिस्से में निकल जाये, लेकिन हिम्मत जवाब दे गयी थी..।

सिर्फ एक उलटी के होने से ही वो पस्त हो गया था.. उसकी ऑंखें मूंदने लगी थी, और उसकी चेतना चली गयी थी..।
उसे हल्का सा महसूस हो रहा था कि वही बदमाश चूहे उसके नाखूनों पर धीमे धीमे वार कर रहे हैँ, लेकिन वो चाह कर भी आंखे नहीं खोल पा रहा था…
  उसे हल्की सी एक चुभन महसूस हुई और उसकी चेतना लौटने लगी..।
हल्की सी आंखे खोलने पर एक अनजान सी जगह में उसने खुद को पाया। आँखों पर चश्मा चढ़ाये हाथों में ग्लव्स लपेटे कोई अनजान लड़का उसके बारे में उसके मालिकों को ढेर सारी हिदायतें दे रहा था।

उसने बड़ी मुश्किल से सर घुमा कर अपने मालिकों को देखना चाहा, लेकिन उनके चेहरों पर वो पहले वाला भाव नहीं था। बल्कि यूँ लगा रहा था जैसे वो किसी घोर चिंता में मग्न हों..।
वहाँ से वो दोनों उसे उठा कर ले गए। आज शायद दूसरी बार मैडम ने उसे गोद में उठाया था, एक अद्भुत अनुभूति से वो किलक उठा था..।

लेकिन ये क्या, वो लोग उसे घर तक तो लेकर ही नहीं गए.. रास्ते में ही कहीं उतार दिया?
  क्या वो लोग उसे भूल गए थे? या अब उन्हें अपने गैराज के उन भयंकर चूहों के उत्पात का डर नहीं रह गया था? ये लोग कहीं उसे बूढ़ा और अकर्मण्य तो नहीं मानने लगे थे..?
पोंचो उनको बताना चाहता था कि वो अब भी उतनी ही तत्परता से उन चूहों की फ़ौज को घर से खदेड़ सकता है ! वो अब भी उनके लिए मुस्तैदी से काम कर सकता है। सिर्फ एक बार उलटी हो जाने से वो कमजोर नहीं हुआ है..।
लेकिन वो कुछ नहीं बोल पाया..!!

   उसे रोड के एक किनारे उतार कर मैडम ने ब्रेड के चार टुकड़े, एक छोटा बिस्किट का पैकेट उसके पास रखा, उसके माथे को एक आखिरी बार सहलाया और गाड़ी में बैठ कर वो दोनों धूल उड़ाते वहाँ से चले गए।
पोंचो पनीली आँखों से अपनी प्यारी सी ग्रे गाडी और अजीज मालिकों को उसे अकेला छोड़ कर जाते देखता रह गया…

अगला हिस्सा कल…

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Jyoti
Jyoti
1 year ago

Nyc part 👌

Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Very nice story. Kaise log hai jo bejubaan janwar ko bhi dukh pahucha dete hai yadi aap unko rakh nhi sakte toh unko lekar mat aao.pets bahut pyare hote hai jab yeh apni khushi humare sath share kartey hai toh in par bahut pyar aata hai apne baccho se bhi jyada pyar ho jata hai inse aur jab yeh humein chod kar chale jate hai woh waqt ruk sa jaate hai. Bahut yaad aate hai

Jayshree
Jayshree
1 year ago

कैसे निर्मम लोग होते हैं इसीलिए जानवर पालने की इच्छा नहीं होती वह भी आपके बच्चों की तरह होते हैं अगर आप उन्हें प्यार नहीं दे सकते तो उन्हें अपने घर ना लाएं।
किसी के अंतिम दिनों में कोई कैसे उसे इस हाल में छोड़ सकता है सिर्फ अपनी सुविधा ही सब कुछ होती है क्या इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं होती।

Sofiya shaikh
Sofiya shaikh
1 year ago

Very nice part 👌👌👌

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Bahut hi Khubsurat or Mast kahani Biliyo ki,nice n good part

Shelly
Shelly
1 year ago

Life m bhut tension hai stress hai story pad kar kuch time k liye wo kaam hota hai .plz aise story or writter de to samajh aata hai .aap y bar bar n de is ko jaldi khatam karo or humme humari purani story k part do

Shelly
Shelly
1 year ago

Y story nahi padni .plz pahle wali story k part do.

JASPREET OBHRAI
JASPREET OBHRAI
1 year ago

So disheartening. How can someone keep a pet like this😢

Preeti Gupta
Preeti Gupta
1 year ago

Beautiful 😍😍😍

इंदु कपूर
इंदु कपूर
1 year ago

आज की स्वार्थी दुनिया में जहां रक्त संबंध मतलब तक सीमित रह गए हैं , घर के बुजुर्गों तक को फालतू समझ लिया जाता है ,ऐसे में जानवरों के लिए प्रेम भी कुछ लोगों तक सीमित रह गया है ।
पांचो की तकदीर में क्या है आगे ,देखते हैं । वैसे जानवरों का बेजुबान प्रेम सब को समझ भी नहीं आता।
सक्षम लेखन।