पोंचो

पोंचो…

    एक दोस्त है न्यू जर्सी रहते हैँ… आजकल की पीढ़ी के हैँ, पति पत्नी दोनों सॉफ्टवेयर वाले हैँ, हफ्ते के पांच दिन जम के काम और दो दिन तन मन भर कर आराम !!
  
   वो दोस्त सोशल मिडिया पर भी एक्टिव हैँ.. उनसे मुलाकात किसी एनीमल वेलफेयर ग्रुप में ही हुई.. वहाँ वो अकसर गली मुहल्ले में आवारा घूमते पशुओं के पालन के लिए आवाज़ बुलंद किया करते थे..!
  लेकिन कभी किसी को पालने के हक में नहीं रहे !
अमेरिका में इन पशुओं के लिए बहुत सी संस्थाएं काम करती हैँ..
  ये संस्थाएं बेघर बार पशुओ के लिए फोस्टर और एडॉप्टर दोनों ही ढूंढा करती हैँ..।
  
  ऐसे ही किसी ग्रुप में एक दिन एक बिल्ली की तस्वीर आयी, जिसे उसके मालिक ने अपनी जगह बदली के कारण छोड़ दिया था..।
वो संस्था असल में एक शॉप ओनर के द्वारा अपने कुछ मित्रों के सहयोग से चलायी जाती थी..।
उस शॉप ओनर ने उस बिल्ली को अपने पास रख कर उसके लिए फॉस्टर/ अडॉप्टर की ज़रूरत है ये विज्ञापन दे दिया..।

मेरे मित्र ने आज तक कभी बिल्ली या कुत्ता नहीं पाला था, बेशक उन्हें इनसे प्रेम बहुत था। लेकिन अपनी व्यवसायिक व्यस्तता ने उन्हें कभी इस बात की मुहलत ही नहीं दी..
  पति पत्नी दोनों इस कदर व्यस्त थे कि अब तक उनकी अपनी गोद भी खाली ही थी।

  इसके पीछे का एक कारण बच्चे की ज़िम्मेदारी उठा पाएंगे या नहीं का सतहविहीन कारण भी था..।
    उनके इस विचार पर मैं कभी जजमेंटल नहीं हुई.. ये उनका अपना मत है, और अगर वो दोनों इस बात से संतुष्ट हैँ, तो समाज के उन चार लोगों को जिनका काम ही लड़कियों की शादी करवाना और जनरेशन को आगे बढ़ाने के लिए बच्चे कर लेने पर दबाव बनाना है, चुप बैठना चाहिए.. !
   उसी ज़िम्मेदारी का डर था कि ये दोनों कभी किसी पेट् को अडॉप्ट नहीं कर पाते थे..

लेकिन उस दिन उस बिल्ली की तस्वीर को देख कर मित्र महोदय पिघल गए..।
दोनों ने आपसी सलाह मशविरा किया, और बिल्ली को फोस्टर करने का निर्णय लिया।

फोस्टर करने के लिए आपको सिर्फ बिल्ली को कुछ दिनों के लिए अपने पास रख कर उसका पालन पोषण करना होता है, और जैसे ही उसे गोद लेने वाला पालक मिल जाए, आप उस पालक को उसे सौंप देते हैँ… ये अपेक्षाकृत सुविधाजनक इसलिए है कि आपको बिल्ली की जीवन भर की ज़िम्मेदारी नहीं लेनी होती !

   वो दोनों उस बिल्ली को घर ले आये…
ये उनका पहला अनुभव था, बिल्ली थोड़ी दुबली सी थी लेकिन चतुर चंट थी.. तुरंत ही घर में हिल मिल गयी।
बिल्ली के साथ ही उसे कब क्या खिलाना पिलाना है, कैसे रखना है, ये लिस्ट भी शॉप वाले ने इन्हे थमा दी थी..।
शुरुवाती पांच दिन कुछ कठिन गुज़रे, लेकिन फिर धीरे से ये दोनों उस बिल्ली के साथ ढल गए..।
लेकिन सांतवे ही दिन शॉप वाले का फ़ोन आ गया बिल्ली के लिए उन्हें पालक ( अडॉप्टर ) मिल गया था !
  ये दोनों हंसी ख़ुशी बिल्ली को वापस सौंप आये, लेकिन इस अनुभव से उन्हें एक अलग सा आनंद मिला..।
बिलकुल जैसे बचपन में गुड्डे गुड़िया से खेलने वाले बच्चो को मिलता है, कुछ कुछ वैसा ही..।

कुछ एक आध महीने बाद एक और बिल्ली फोस्टर के लिए रखी गयी, जब दो दिन तक उस बिल्ली को फोस्टर नहीं मिला, तो ये लोग उसे भी ले आये…।
वैसे भी वीकेंड था, दोनों के पास पर्याप्त समय था..
ये बिल्ली थोड़ी गोल मटोल गुदबुदी सी थी.. इसके फर रेशमी थे।
उसके बालों पर हाथ फेरना बड़ा अच्छा सा लग रहा था..
लेकिन सोमवार की सुबह ही इस बिल्ली के लिए भी अडॉप्टर मिल गया। इस बार बिल्ली को वापस करते समय मन में एक इच्छा सी जागी कि काश कुछ दिन और हम उसे फोस्टर कर पाते..।

दिन बीतते गए, दोनों एक बार फिर अपने व्यस्त रूटीन में अतिव्यस्त हो गए..।
सोमवार से शुक्रवार हाड तोड़ काम, और शनिवार रविवार मूवी डिनर आउटिंग !!
  
  कुछ महीनो बाद एक बार फिर एक बिल्ली का विज्ञापन आया…
  लेकिन इस बार विज्ञापन के साथ लिखी बातों में एक विशेष बात लिखी थी ” बिल्ली जन्मजात हृदय रोगी है, और इसकी उम्र हद से हद तीन महीने ही है, इच्छुक फोस्टर सम्पर्क करें !”
   बिल्ली की तस्वीर में एक करुणा थी, जैसे उसकी आंखे पूछ रही हो, मुझे बनाने वाले ने मुझे ये अपूर्णता क्यों दी?

  वो दोनों बिल्ली की तस्वीर देख भावुक हो गए… सोच विचार करने लगे, फिर तय किया कि उसे फोस्टर नहीं करेंगे क्यूंकि बिल्ली की उम्र पहले ही कम है। ऐसे में उसे शायद ही कोई अडॉप्ट करने आएगा.. अगर उसे फोस्टर किया तो तीन महीने के लिए फंसना हो जायेगा..
ऑफिस की ज़िम्मेदारी के साथ बिल्ली की ज़िम्मेदारी उठाना मुश्किल हो जायेगा..।
और फिर कहीं इसकी तबियत बिगड़ गयी तो अस्पताल का चक्कर, घर गन्दा करेगा तो साफ़ सफाई का चक्कर.. छोडो हटाओ.. उतना हमसे न हो सकेगा !
ढेर सी बातें हुई, ढेरों विमर्श हुए…।

लेकिन बुद्धि के आगे भावनाएं जीत गयी..
दिमाग के ऊपर दिल विजयी हुआ !!

और वो दोनों उस बिल्ली को घर पर लाने की तैयारी कर उस शॉप की तरफ बढ़ गए..
  बिल्ली का नाम था पोंचो !!

..अगला हिस्सा कल !!

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Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

😊बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌🙏

Last edited 1 year ago by Manu Verma
जागृति
जागृति
1 year ago

👍 great

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Bahut badhiya kahani

Jayshree
Jayshree
1 year ago

जानवरों के लिए कितना प्रेम है आपकी इस कहानी में ऐसा लग रहा है जैसे पोंचू को मैं खुद अपने घर ले आऊं

JASPREET OBHRAI
JASPREET OBHRAI
1 year ago

You have talked about the current generation, not only abroad, in Indian metropolitan cities too. Interesting start to the story. I wonder what is coming up next👏👏👏

Veena
Veena
1 year ago

Superb part

Preeti Gupta
Preeti Gupta
1 year ago

Bhavuk kar dene wali kahani …. 🥺🥺 Me ise facebook page par nhi pad payi thi … Last part to padhe the par pahle ke page open hi nhi ho rhe the …. Thank you…. Ki aapne ise yha bhi upload Kiya … 👍🙏🙏😍😍

Sofiya shaikh
Sofiya shaikh
1 year ago

Very nice part 👌👌👌

Komal Chauhan
Komal Chauhan
1 year ago

Very nice

Ashok garg
Ashok garg
1 year ago

सभी को शुभ दीपावली🙏🙏🙏🙏🙏