
जीवनसाथी -3 भाग -122
बाहर खड़ी मीठी की आँखों के आगे तारे घूमने लगे.. उसके पांव कांपने लगे, आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा…
उसने दरवाज़े को पकड़ कर खुद को संभाला और अपनी आँखों में घुमड़ते आंसू रोकने का प्रयत्न करती हुई वहाँ से निकल गयी..
मीठी को समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे ? उसे लगा उसे हर एक बात हर्ष को बता देनी चाहिए, क्यूंकि अगर हर्ष को सब पता रहेगा तो वो भी सुरक्षित हो जाएगी..
वो अपनी धुन में आगे बढ़ती हुई रसोई में पहुँच गयी.. उसके वहाँ पहुँचते ही रसोई में हलचल सी मच गयी.. एक सहायक उस तक भाग कर चला आया..
“आप क्या लेंगी? आपके लिए कुछ लाये ?”
“हम्म.. नहीं.. मैं चाय बनाने आयी थी !” अनमने मन से मीठी ने कहा और वो सहायक विनम्रता से दुहरा हो गया
“आप चाय क्यों बनाएंगी बेबी साहब ! हम हैँ न, बताइये कैसी वाली पीनी है ?”
इस वक्त मीठी का दिमाग काम नहीं कर रहा था, उसे कुछ रिफ्रेशिंग सा चाहिए था..
“आप सबसे अच्छी कौन सी चाय बनाते हैँ ?”
“हम सभी बना लेते हैँ, ज़ाफ़रानी चाय, कश्मीरी नून चाय, कहवा, ऑरेंज टी.. हमारे पास बहुत से फ्लेवर हैँ.. आप बताइये बेबी साहब, आप क्या लेंगी ?”
“ऑरेंज टी पिला दीजिये !”
“जी अच्छी बात, आप चल कर बैठिये, हम लेकर आते हैँ !”
अनमनी सी मीठी बाहर चली गयी..
“क्या हुआ तुम तो चाय लेकर आने वाली थी ?”
“हाँ वो.. मन नहीं किया बनाने का !”
मीठी ने हर्ष की तरफ देखा और आगे बढ़ कर उसकी बाहँ थाम ली.. वो कुछ पलों के लिए उसकी तरफ देखती रह गयी..
हर्ष भी उसे ही देख रहा था..
मीठी ने अपने आप को तैयार किया और वो हर्ष को सब कुछ बताने ही जा रही थी कि दूर से किसी ने हर्ष का नाम लेकर पुकारा..
मीठी और हर्ष दोनों पलट गए, सामने बुआ जी और उनकी बहु खड़ी थी..
हर्ष उन्हें देख मुस्कुरा कर उनका अभिवादन कर उठा.. मीठी ने भी हाथ जोड़ दिए..
“हर्ष, कैसे हो बेटा? तुमसे तो मुलाकात ही नहीं हो पाती है.. अब हमारी भी तो उमर हो चली है..!
सोचा था दो चार दिन रूपा के पास रहकर वापस लौट जाएंगे, लेकिन यहां आकर तबीयत ऐसी बिगड़ी कि अभी इतना लंबा सफर करने की हिम्मत ही नहीं बची, इसीलिए यहां रुक गए हैं। कभी-कभी लगता भी है कि बेटी के मायके में इतने दिन रह जाएंगे तो कहीं बातें ना बनने लगे..।”
“कैसी बातें कर रही हैं आप फू साहब, आपके रहने से महल पूरा-पूरा सा लगता है। वैसे भी हमारी दादी साहब के जाने के बाद मॉम अपने आप को सबसे बड़े पद पर एक्सेप्ट नहीं कर पा रही..।
ऐसे में आपका यहाँ रहना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं..।
आप ज्यादा कुछ सोचे बिना बड़े आराम से यहाँ रहिये !”
“नहीं बेटा तुम भले ही न सोचो, लेकिन महल में और लोग भी तो हैँ.. सब के विचार तुम्हारे जैसे हो ये ज़रूरी तो नहीं है न !”
“यहाँ रहने वाला हर इंसान एक जैसा ही है फू साहब, आप चिंता न करे ! आपके रहने से सभी को सुविधा ही है ! आप बिना वजह परेशान हो रही हैँ !”
बुआ जी ने मीठी की तरफ देखा.. मीठी भी उन्हें ही देख रही थी..
उसे कुछ देर पहले की कही उनकी सारी बातें याद आ रही थी..।
कितना ज़हर भरा था इनके अंदर, बावजूद वो हर्ष के सामने कितनी मीठी बन रही थी!
उसी वक्त हर्ष का फ़ोन आया और अपना फ़ोन उठाये वो बात करता हुआ एक तरफ निकल गया..
बुआ जी अपनी जगह से उठी और मीठी के पास आ बैठी.. उन्होंने आगे बढ़ कर मीठी का हाथ थाम लिया..
“सुन लिया न सब कुछ ?” उन्होंने सवाल किया और मीठी चौंक कर उन्हें देखने लगी..
उससे एकदम से कुछ कहते नहीं बना..
” जानते हैँ हम..।
तुमने कमरे के बाहर से सब सुन लिया है.. हम चाह्ते तो नहीं थे कि तुम्हे सब पता चल जाये, लेकिन अब पता चल ही गया है तो क्या किया जा सकता है !”
“क्यों कर रही हैं, आप ये सब ?”, मीठी पूछ बैठी
“क्यूंकि हमें तुम पसंद नहीं हो !”
मीठी तड़प कर रह गयी
“माना कि मैं पसंद नहीं हूँ, लेकिन हर्ष तो आपका अपना है, क्या उनकी ख़ुशी कोई मायने नहीं रखती ?”
“महल के रहवासी ऐसी छोटी और ओछी बातों पर विचार नहीं करते !”
“अगर ये इतनी ही छोटी और ओछी बात है तो छिप कर वार क्यों कर रही हैँ आप ?
अगर आपको मुझसे इतनी ही नफरत है, तो आप सीधे सीधे हर्ष से बात क्यों नहीं करती ?”
“तुम्हे क्या लगता है हर्ष से हमने बात नहीं की होगी ?”
मीठी आंखे फाड़े बुआ जी की तरफ देखने लगी। उसे यकीन नहीं हुआ।
” क्या आपने सच में हर्ष से मेरे खिलाफ बात की है?”
” हां, बिल्कुल! हम भी रॉयल ब्लड है, कोई काम चोरी छुपे नहीं करते। हमें तुम नहीं पसंद हो तो नहीं पसंद हो। और हमने यह बात हर्ष से कह भी दी। लेकिन उसने हमें समझा दिया कि वह तुमसे प्यार करता है..।
अब तुम यह जानना चाहोगी कि तुम हमें पसंद क्यों नहीं हो? तो हम तुम्हें बता दें कि पहली बात तुम रॉयल ब्लड नहीं हो। तुम एक आम इंसान हो, हमारी प्रजा का एक हिस्सा हो। और राजा और प्रजा के बीच कभी संबंध नहीं बन सकते।
राजा प्रजा को अपने उपभोग में ला सकता है, लेकिन अपने बराबर की गद्दी पर बैठा नहीं सकता।
तुमसे पहले भी बांसुरी इसी तरह राजगद्दी पर बैठी थी, और तब भी हमें यह सब पसंद नहीं आया था। लेकिन उस वक्त हमें लगा कि इसके बाद यह प्रथा समाप्त हो जाएगी। आने वाली पीढ़ी राज परिवारों में शादी ब्याह करेंगे। लेकिन एक बार फिर हर्ष तुम्हारे नाम की जिद पकड़ बैठा।
तुम क्या सोचती हो, हर्ष की मां को तुम पसंद हो ?
रूपा को भी तुम पसंद नहीं हो। लेकिन अपने बेटे की इच्छा को वह सिरे से नकार भी तो नहीं सकती। आखिर एक ही इकलौता लड़का है उसका। वैसे एक बात बताओ, क्या हर्ष ने तुम्हें नहीं बताया कि हमने और रूपा ने उसे तुमसे ब्याह करने के लिए कितनी बार मना किया था…।?”
मीठी इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाई। लेकिन वह गहरे सोच में जरूर पड़ गई।
हर्ष ने वाकई मीठी से ऐसी कोई बात नहीं की थी। तो क्या हर्ष भी यही मानता है कि वह एक आम लड़की है? और इसीलिए उसने अपनी मां और फूफू साहब से हुई बातचीत से उसे दूर रखा…?
मीठी की आंखे डबडबाने लगी..।
ये तो बहुत गलत बात थी..।
फुफू साहब उसे पसंद नहीं करती, यह बात तो वह कैसे भी हजम कर लेती, लेकिन फुफू साहब ने अपने मन की यह सच्चाई हर्ष के सामने रखी और हर्ष ने उसे कुछ बताना भी जरूरी नहीं समझा?
हो सकता है हर्ष को यह लगा हो कि उसे बुरा लग जाएगा, लेकिन इस तरह से बातों को छुपा कर तो हर्ष ने और भी गलत कर दिया।
अब ज्यादा बुरा लग रहा है यह सोचकर कि यह सारे राजशाही के लोग एक हो गए और उस आम लड़की को अलग कर दिया।
अभी शादी नहीं हुई तब से यह सब शुरू हो गया है। अभी से हर्ष बातें छुपाने लगा है, पता नहीं आगे क्या होगा। मीठी यही सब सोचते हुए अपनी जगह पर खड़ी हो गई…।
वो वहाँ से उठ कर जाने लगी कि फूफू साहब ने उसे वापस टोक दिया..
“एक बात और सुनती जाओ मीठी, आज हर्ष की आँखों में भले ही तुम्हारे प्यार का चश्मा चढ़ा होगा, लेकिन एक न एक दिन जब इस प्यार का नशा उतरेगा न, तब तुम्हे भी सच्चाई समझ में आ जाएगी, कि ये प्यार का बुखार कितना हल्का था..।
जवानी में अक्सर ऐसा हो जाता है!
याद रखना जिस दिन तुम पूरी तरह से उसे मिल गयी उसी दिन तुम्हारा नशा उसकी आँखों से ओझल हो जायेगा !
हर्ष रॉयल ब्लड है, उसकी पसंद नापसंद पहनावा रहन सहन आदते खान पान सब कुछ राजसी है। तुम कहाँ तक उसके बराबर चल पाओगी..?
कहीं न कहीं पिछड़ ही जाओगी। इसलिए समय रहते उस बात को समझ जाओ और खुद कदम पीछे हटा लो !”
मीठी ने पलट कर फूफू साहब की तरफ देखा और वापस चली गयी..
हर्ष जब तक वापस आया मीठी वहाँ से जा चुकी थी..।
मीठी को जितना बुरा फूफू साहब की बातों का लग रहा था, उससे कहीं ज्यादा बुरा उसे हर्ष की बात का लग रहा था..
उसे लगता था हर्ष और उसके बीच ऐसी कोई बात नहीं जिसे दबाया या छुपाया गया हो..।
उसके जीवन से जुडी हर बात हर्ष जानता था, फिर इतनी जरा सी बात वो छिपा क्यों गया ?
यही सोचते सोचते उसके सर में दर्द सा होने लगा.. अपने कमरे में लेटे हुए वो यही सब सोचती नींद में चली गयी.. उसने अपने फ़ोन को साइलेंट किया हुआ था..
हर्ष ने जब मीठी को वहाँ नहीं देखा तो वो मीठी को फ़ोन लगाने लगा। लेकिन मीठी को फ़ोन सुनाई नहीं दिया। और एक के बाद एक हर्ष के कॉल मिस होते चले गए..
***
शौर्य अपने फ़्लैट के ऑफिस में बैठा था। वो लैपटॉप पर कुछ बहुत ध्यान से देख रहा था।
विक्रम भी उसके सामने बैठा था..
“प्रिंस आप कुछ ढूंढ़ रहे हैँ ?”
“भदौरिया के काम का लेखा जोखा देख रहा हूँ !”
नजर लैपटॉप पर गड़ाए हुए ही शौर्य ने जवाब दिया..
“विक्रम… ! भदौरिया ने रीजनल मीट कब रखा है ?”
“परसो हैँ.. चलना है क्या ?”
“बिलकुल जाना ही है… !”
“क्या सोचा है ?” विक्रम ने पूछा
शौर्य ने आंखे उठा कर विक्रम की तरफ देखा, उसकी आंखे चमक रही थी..
“भदौरिया ने फिफ्टी परसेंट प्रॉफिट पर्सेंटेज रखा है। अब ऐसे में कोई बेवकूफ बिज़नेस मैन ही होगा जो उसे मना करेगा..।
और मैं बेवकूफ नहीं हूँ !
समझे !”
शौर्य अपनी जगह से खड़ा हुआ और खिड़की पर जाकर उसने एक सिगरेट सुलगा ली….. ..
विक्रम आश्चर्य से उसे देखता रहा गया..
क्रमशः

और आखिरकर बुआ जी ने उसे मासूम लड़की के दिल में एक संशय जगा ही दिया।😠😠😠😠
पता नहीं इन लोग आखिरी सब करके क्या मिलता है मन जीवन में उतार चढ़ाव संभव है शादीशुदा व्यक्ति के जीवन में लड़ाई झगड़ा प्यार मनुहार तो लगा ही रहता है ।😍😍🥰🥰
जब तक विवाहित जीवन में लड़ाई झगड़ा नहीं होंगे वह परफेक्ट नहीं बन पाता है पर इसका मतलब यह नहीं की हर्ष और मीठी इन छोटी-छोटी बातों पर कभी अलग होने की सोच भी सकते हैं।🤔🤔🤔
मुझे नहीं लगता कि हर्ष ऐसा लड़का है जो राजसी ठाठ बाठ के चलते अपनी पत्नी और प्रेमिका को नीचे दिखाएगा और मुझे यह भी समझ नहीं आ रहा की मीठी को यह बात इतनी बुरी क्यों लग रही है की हर्ष ने उसे बुआ की बातों के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी🤔🤔🤔
हो सकता है वह मीठी को दुखी नहीं करना चाहता हूं छोटी-छोटी बातों के लिए पर अब मीठी के दिमाग में जो बात बैठ गई है तो वह पता नहीं अब क्या रंग लाएगी🥺🥺🥺
Sab bigad raha hai
ये फू साहेब को कोई फुक मार कर उड़ा दो यार!! देखो कितनी शातिर है मीठी ने सब सुन लिया है ये भी पता है उनको 😏😏
ओर देखो तो ज़हर भरने की आदत मिनिट नहीं लगा मीठी के मन में हर्ष के प्रति जहर घोलने में , पर ये मीठी को जानती नहीं है, अभी शायद मीठी , दिखावा ही कर रही होगी कि वो उनकी बातो में आ गई है।
हर्ष को भी क्या जरूरत थी उनको रोक लेने की , जाने देते भई महल में क्या लोगो की कमी है ? 🤦🏼♀️🤦🏼♀️
शौरी के बदलते रूप ने तो दंग कर के रखा है !!
👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼
Very nice.. As always
Very very nice part of the story and very interesting too waiting for the next part hope its coming soon
👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏
या तो ये शौर्य नहीं है 🤔या फिर चोट ब्रेन के ऐसे पार्ट पर लगी जो स्वभाव को चेंज कर देता है । कही न कही कुछ तो है जो संशय में डाल देता है। पर हुकम आप तो अपर्णा हो ,,, कुछ भी कहानी डाल कर रहस्यमय और रुचिकर तो बनाओगी ही। अद्भुत ।
Very nice
Ab rajmehal hai to conspiracy to hogi hi….
Lekin jane kyu ye shorya shorya nhi lg rha. Kuch to gadbad hai.
बहुत सुन्दर रचना