ईश्वर इच्छा बलवती..

ईश्वर इच्छा बलवती..

    वो अक्सर मेरी क्लीनिक पर आया करती थी… .. उसकी समस्याओ का कोई अंत नहीं था ! उसकी किसी एक समस्या का समाधान बताऊँ तो अगली समस्या वो मुझ कर पटक कर मारती… ..

उसे देखते हुए लगभग तीन साल बीत चुके..
सबसे पहले जब वो आयी तब उसने बताया कि उसके गॉल ब्लेडर में समस्या थी, और जब इलाजपानी से राहत नहीं हुई तो डॉक्टर ने उसे निकाल दिया..।

उस वक्त उसने अपनी जो भी समस्याएं बताई उन्हें पूरी तरह से ना समझ पाने के कारण मैंने उससे कहा कि वह अपने ट्रीटमेंट की पर्ची और सारे टेस्ट रिपोर्ट साथ लेकर आए।

कुछ महीनों बाद वो वापस चली आयी। इस बार वह इलाज की सारी पोथी साथ लेकर आई और तब सारे रिपोर्ट्स ध्यान से देखने और पढ़ने के बाद मुझे पता चला कि उसे स्टमक में ट्यूमर भी हुआ था।
     हालांकि उसके ट्यूमर को निकाल दिया गया था, और कुछ समय तक बकायदे रेडिएशन थेरेपी भी उसे दी गई थी। लेकिन अब उसका स्वस्थ चमकीला चेहरा देखकर कहीं से भी नहीं लगता था कि उसे कभी टयूमर हुआ था।
  
      मैंने अपनी तरफ से कुछ सपोर्टिव दवाएं देकर उसे भेज दिया। उसके बाद से उसका आना-जाना लगा ही रहता।
   गॉलब्लैडर ना होने के कारण वह हाइपर एसिडिटी से परेशान रहती थी। जिसके लिए वह अक्सर मेरे पास से दवाई लेकर जाती थी। धीरे-धीरे वह इतना क्लोज होने लगी कि अपनी पारिवारिक समस्याएं भी मुझे बताने लगी..

मुझे लगा था वह अपने स्वास्थ्य से ही सबसे ज्यादा परेशान होगी, लेकिन उसकी इससे भी बड़ी एक समस्या थी।
   और वह थी कि उसके बच्चे नहीं थे।

उसकी शादी को लगभग 10-11 साल बीत चुके थे, और अब तक वह माँ नहीं बन पाई थी। उसका मेरे पास आने का एक सबसे बड़ा कारण यह भी था।
    वह मुझसे इनफर्टिलिटी की दवाईयां लेना चाहती थी।
    मैंने उसके गिरते स्वास्थ्य की तरफ देखकर पहले तो उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन बाद में कुछ जरूरी जांचों के बाद उसे दवा देना शुरू कर दिया। लेकिन उसके शरीर की जैसी स्थिति थी, वह किसी भी तरह का हैवी ट्रीटमेंट झेलने की हालत में नहीं थी।

     इन्हीं सब चक्करों में दो-तीन साल निकल गए।

    आज अचानक वह फिर क्लीनिक पर आई, लेकिन आज उसके साथ एक लगभग उसी के कद की लड़की थी…
लड़की का चेहरा उससे हद से ज्यादा मेल खा रहा था..।

अगर मुझे उसकी हिस्ट्री मालूम नहीं होती, तो मैं यह धोखा जरूर खा जाती कि यह इसी की बेटी है।

वह आज उस लड़की को दिखाने लेकर आई थी। मैंने नाम पूछा उसकी तकलीफ पूछी और उसे दवा दे दी। उसके बाद मैं उससे मुखातिब हुई।
   मैंने पूछा कि लड़की कौन है।

और तब उसने जो बताया, वो सुन कर मैं कुछ पलों के लिए उसे आश्चर्य से देखती ही रह गई।

   उसने बताया कि यह उसकी बड़ी बहन की बेटी है..
बड़ी बहन की बेटी थी, लेकिन चेहरा हूबहू उसी की तरह का था।

मैंने दवायें देने के साथ ही कुछ ज़रूरी परहेज भी बताया और वो तपाक से बोल पड़ी..

“हाँ मैडम इसकी तबियत ख़राब थी, इसलिए इसे आज कॉलेज नहीं भेजा, अभी खा पीकर सो रहेगी..!”

मैंने आश्चर्य से उसे देखा… मुझसे रहा नहीं गया और मैंने पूछ ही लिया..

“ये रहती कहाँ है ? यही पढ़ती है क्या ?”

“नहीं पढ़ती तो शहर में है, यहाँ से कॉलेज दूर पड़ता है इसलिए वहीँ हॉस्टल में रहती है! हर शनिवार मेरे पास आ जाती है !”

मैंने एक सामान्य रिदम में उसके माता पिता के बारे में पूछ लिया, और फिर उसने जो जवाब दिया मैं पल भर को उसे और उसकी बहन की बेटी को देखती रह गयी..।

“मैडम इसकी माँ दस साल पहले ब्लड कैंसर होने से नहीं रही ! तभी इसको अपने पास लाना चाहती थी, लेकिन इसके पापा नहीं भेजे..।
  अभी पिछले साल इसके पापा को ब्रेन हेमरेज हो गया !
  उसके बाद मैं इसको अकेले इसके चाचा और दादी  के भरोसे नहीं छोड़ पायी..।
उन लोगों ने भी कह दिया ले जाओ, बस अपनी बेटी मान कर पालना !
मैडम आप तो जानती है, मेरा कोई बच्चा नहीं है, और अब होने की उम्मीद भी नहीं, तो बस यही है अब, जो है !”

मैं उन दोनों की जोड़ी को सुखद आश्चर्य से देखती रह गयी..।
एक अगर अपने अतृप्त मातृत्व को उसमे पा गयी थी तो दूजी ने अपनी माँ को मौसी के रूप में वापस पा लिया था ! दोनों की आपसी केमेस्ट्री देख उन्हें न जानने वाला उन्हें माँ बेटी ही समझता !

सच उस परमात्मा के रंग निराले हैँ, कब कैसे किसकी उधड़ी पे तुरपाई करना है ये वो बखूबी जानता है..!

“चलो जैसी भगवान की मर्जी !” मैं बस इतना ही कह पायी, और वो मेरी बात के समर्थन में गरदन हिला गयी..
मेरे मुहं से कोई शब्द ही नहीं निकला, वो भी निशब्द खड़ी थी, लेकिन मुझे इतना समझ आ गया था कि उसके दिल में और घर में जो एक सूनापन था वो मिट चुका था..
  हमेशा हमेशा के लिए !!
  ईश्वर इच्छा बलवती !!

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Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice story 👌👌

Siddharth Singh
Siddharth Singh
1 year ago

Beautiful story

Ashok Garg
Ashok Garg
1 year ago

Very very very very nice story very nice story very interesting and very good

Meenakshi Sharma
Meenakshi Sharma
1 year ago

nice story 👌🏻🤩👍

Ritu
Ritu
1 year ago

Atithi padhne ka man ho raha he…

Ritu
Ritu
1 year ago

Nice story …

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

कहते हैं जो होता है अच्छे के लिए होता है और इस कहानी में यह बात बिल्कुल सही सिद्ध हो रही है ।
भगवान ने कहीं ना कहीं दोनों अतृप्त आत्माओं को दूसरे से मिलकर पूर्ण कर दिया बेहद खूबसूरत है और यह भी एक सच्चाई है कि हां माता-पिता ना होते हुए भी कई बार हमारे भाई बहनों के बच्चों की शक्ल भी हु ब हू हमसे मिल जाती है।
मेरी भतीजी है और वो बचपन से मुझसे ज्यादा घुली मिली है एक तरह से पाला ही है उसे बिलकुल एक मां की तरह और वो भी मुझे उतना ही स्नेह रखती है।
शुरु से ही अगर उसके साथ कहीं जाऊ तो हमेशा यही पूछते हैं सब की क्या आपकी बेटी है तब बताने पर की भाई की बेटी है बोलते हैं कि शक्ल बिल्कुल आप जैसी है तो गलतफहमी हो गई
यहां तक की एक बार उसके पीटीएम में उसकी मां के साथ ही गई थी क्यू कि सारे बच्चे एक ही स्कूल में हैं तो भतीजी की हाई स्कूल की टीचर मुझसे उसके बारे में डिस्कस करने लगीं और बोली कि बाकी पड़ने में तो आपकी लड़की ब्रिलियंट है पर बाते बहुत करती है और साथ में खड़ी भाभी हंसने लगी तब टीचर ने कहा क्या हुआ तब वो बोली मैं में उसकी मां हूं ये तो बुआजी हैं
टीजर अविश्वास से बोली,यकीन नही होता की आप उसकी bua hain
मुझे लगा ही नहीं की साथ खड़ी लेडी उसकी मां है😁😁😁😁
उसकी सारी फ्रेंड्स मुझे ही उसकी मम्मी समझ रही थी और नमस्ते भी की फिर मेने ही कहा बेटा ये हैं आपकी फ्रेंड की मां।😊😊😊😊
पर उसकी मां कहलाने में भी एक अलग ही खुशी मिलती है।
खूबसूरत रचना देने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Jyoti
Jyoti
1 year ago

Superb 👌👌👌

Algorithm
Algorithm
1 year ago

💯💯💯💯💯👌👌👌👌👌

Raniya Memon
Raniya Memon
1 year ago

👌👌👌👌🥹🥹🥹