अतिथि-15

अतिथि 15

डिंकी ने चेहरे पर कुछ ऐसे भाव लाकर कहा कि माधव को हंसी आ गयी…
उसकी हंसी सुनते ही डिंकी चौंक कर उसकी तरफ देखने लगी..

“डिंकी वैसा कुछ नहीं है जैसा तुम सोच रही.. मम्मी पापा की सेकंड वाइफ जरूर है लेकिन मेरी सौतेली मां वह कभी नहीं बन पाई!
     बल्कि सच कहूं तो आज मैं जो कुछ हूं, उन्हीं की वजह से हूं। मैं बहुत छोटा था, जब माँ चली गई।   उनके जाने के बाद दादी के जोर देने पर पापा ने दूसरी शादी कर ली। मैं बमुश्किल सात आठ साल का रहा हूंगा।
     मेरी एक बुआ थी, जो अक्सर घर आती थी। माँ के न रहने पर वह काफी समय तक हमारे घर पर रुक गई थी, और मुझे संभाला भी था उन्होंने।

    इस दौरान पापा की दूसरी शादी हुई। मैं सही और गलत समझने के लिए बहुत छोटा था, लेकिन मेरी बुआ बहुत बड़ी होने के बावजूद बिल्कुल नासमझ थी। उन्होंने सौतेली मां के लिए अपने मन में एक जो तस्वीर बना रखी थी, इस तस्वीर के रंग मुझ पर भी उङेलने शुरू कर दिए। उन्होंने शुरू से ही मुझे सौतेली मां के खिलाफ भड़का कर मेरे मन को उनके प्रति इतना कड़वा कर दिया कि मैं मम्मी को अपना दुश्मन समझने लगा।

    मुझे लगा पापा से मुझे अलग करने के लिए ही वह  हमारे घर में आई हैं। मैं जानबूझकर उन्हें तंग करने के बहाने खोजने लगा था।
    कभी उनकी आयरन की हुई साड़ी को बुरी तरीके से पैरों से रौंद कर गंदा करके भाग जाता। कभी उनके धुले साफ कपड़ों को नाली में फेंक कर गायब हो जाता। कभी उनके पर्स को छुपा देता, तो कभी उनकी सैंडल छुपा देता। मेरी बदमाशियां धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी।
      कभी-कभी तो जब मैं और पापा खाना खा चुके होते और मम्मी खाना खाने वाली होती, उस वक्त पर मैं सब की नजर बचाकर रसोई में जाता और उनके पूरे खाने को डस्टबिन में पलट देता।”

डिंकी आंखे फाडे सारी बातें सुन रही थी…

“उन्होंने आपको डांटा नहीं,अंकल जी से शिकायत नहीं की ?”, डिंकी उत्सुकता में पूछ बैठी

  “वह सब कुछ समझती थी, सब कुछ जानती थी! लेकिन उन्होंने कभी पापा से कोई शिकायत नहीं की। लेकिन बुआ ने मेरे अंदर जो कड़वाहट भर दी थी, वह धीरे-धीरे जहर बनने लगी थी। और एक दिन मैंने नासमझी में इतनी बड़ी गलती कर दी।
       अगर वह गलती सही समय पर रोक नहीं ली जाती तो पता नहीं क्या हो जाता।”

“क्या कर दिया था?”

       “पापा सुबह ऑफिस चले जाया करते थे, और मैं स्कूल।
    स्कूल से दो ढाई बजे तक वापस लौटता था मैं। मुझे खाना खिलाने के बाद ही मम्मी खाना खाया करती थी। मैंने खाना खाया और पढ़ाई का बहाना करके अपने कमरे में चला गया। मम्मी खाना खाकर टीवी देखने लगी। मैं चुपके से निकल कर रसोई में गया, और मैंने गैस स्टोव खोल दिया।
    मैं बस इतना चाहता था कि पापा के आने पर गैस के खुले रह जाने की वजह से पापा मम्मी को उनकी लापरवाही के लिए ज़ोर से डाँट लगाएं…।

मुझे पता ही नहीं चला मैं कब अपने कमरे में खेलते खेलते सो भी गया। जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा मम्मी मेरे सिरहाने बैठी है। और मेरे बालों को धीरे-धीरे सहला रही है। मुझे लगा कि आज मैं पकड़ा गया, और मम्मी पक्का मुझे डांटने आई है।

   मैं हैरानी से उठकर बैठ गया। वह मेरे सामने बैठी मुझे देखती रही। मैंने उनसे पूछा “क्या हो गया, आप मुझे ऐसे घूर क्यों रहीं है? उन्होंने बड़े प्यार से मेरे माथे को सहलाया और मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर अपने मन की बात कहने लगी।
    ” तुम मुझसे डरते हो ना माधव? मैंने ना में गर्दन हिला दी।
   “मैं किसी से नहीं डरता। बहुत निडर हूं मैं ।”
   “तो फिर ऐसी हरकतें क्यों कर रहे हो? सोचो अगर मैंने तुम्हारे पापा को बता दिया, तो तुम जानते हो उसके बाद क्या होगा? वह तुम्हें हम सबसे दूर, हॉस्टल में पढ़ने के लिए भेज देंगे।”
   ” हां तो मैं इस बात से डरता हूं क्या? मैं वैसे भी हॉस्टल में रहकर पढ़ना चाहता हूं।”
   ” नहीं माधव ऐसा मत बोलो। तुम चले जाओगे तो मैं क्या करूंगी ? फिर मैं तुम्हारे लिए ही तो आई हूं।”
  ” झूठ बोलती हैं आप। मैं जानता हूं आप किस लिए आई हैं। आप चाहती हैं कि मैं और पापा अलग हो जाए।”
   ” तुमसे किसने कहा?”
   ” यह सब मैं नहीं बताऊंगा।”
  ” अच्छा मत बताओ, लेकिन एक बात ध्यान से सुनो मैं जो चाहती हूं वह तो मेरे मन के अंदर है। फिर तुम्हें कैसे पता चल गया? तुम्हें ही नहीं, किसी और को भी यह बात कैसे मालूम चल गई कि मैं क्या चाहती हूं? और सुनो अगर मैं ऐसा चाहती, तो क्या मैं तुम्हारे पापा को तुम्हारे खिलाफ भङकाती नहीं? मुझे यहां इस घर में आए डेढ़ महीना बीत गया, इतने दिनों में तुमने मेरी एक साड़ी कैंची से काट दी, एक साफ सुथरी गुलाबी साड़ी को नाली में फेंक दिया, मेरे लिए जो खाना बचता है उसे तुम फेंक देते हो, या बाहर ले जाकर गाय और कुत्तों को खिला देते हो। क्या मैंने किसी भी बात की शिकायत तुम्हारे पापा से की?
        आज तक मेरी वजह से तुम्हारे पापा ने कभी तुम्हें डांटा है? लेकिन बेटा, आज तुमने जो किया वह तुम्हारी नादानी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी भूल थी। गलती थी।
    वह तो अच्छा हुआ कि जब मैं चाय बनाने के लिए रसोई में गई, तो मुझे स्टोव के खुले रहने की महक आ गई। अगर सोचो मैं हड़बड़ी में होती और माचिस जला देती तो रसोई में गैस सिलेंडर फट जाता और मेरे चीथङे उड़ जाते। और माना कि मेरे चीथङे उड़ भी जाते तो तुम खुश हो लेते, लेकिन तुम्हारा कमरा रसोई से लगा हुआ ही तो है। क्या तुम बच पाते?
     नहीं!!
    और तब तुम्हारे पापा को कैसा लगता ? वह कैसे जीते तुम्हारे बिना बेटा?
    अभी तुम बहुत छोटे हो, तुम्हारे मन में जिन बातो के बीज बो दिए जाएंगे, तुम बिना सोचे समझे उन बातों को सच मान बैठोगे !
         मैं जानती हूं, अभी तुम इतने छोटे हो कि मेरी कही बातें भी शायद तुम नहीं समझ पाओगे!”

      मम्मी अपनी बातें समझ रही थी कि तभी कमरे के बाहर खड़े पापा भीतर चले आए। हम दोनों को ही मालूम नहीं चला था कि पापा जाने कब से मेरे कमरे के दरवाजे के बाहर खड़े हमारी सारी बातें सुन रहे थे। उन्हें मुझ पर क्रोध तो था ही, लेकिन उस दिन उनका क्रोध विस्फोट बन कर मुझ पर गिरा।

   उन्होंने खींचकर मुझे पलंग से नीचे उतरा और सीधे दो तमाचे जङ दिए। पापा गुस्से में इस कदर पागल हो गए थे कि मुझे मारने के बाद भी उन्हें संतोष नहीं हुआ। उन्होंने अपनी बेल्ट निकाली और बेल्ट से मुझे मारने वाले थे कि मम्मी ने उन्हें रोक लिया। वह उन्हें पकड़ कर अपने कमरे में ले गई, और मैं रोता सिसकता अपने कमरे में पड़ा रह गया।
    मुझे उस वक्त मम्मी की समझाई कोई बात समझ में नहीं आई। मैं रोते-रोते पांव पटकते हुए पापा के पास पहुंच गया।
   “मुझे नहीं रहना यहां, मुझे दादा जी के पास छोड़ दीजिए। मुझे कोई प्यार नहीं करता।”
    मैं क्या कर रहा था, क्यों कर रहा था, इसकी तह में जाने की जगह पापा ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ा,और मुझे लेकर दादा जी के पास लेकर जाने लगे।
  मम्मी रोती हुई उन्हें रोकती रह गई, लेकिन उन्हें रोक नहीं पायी ….

    क्रमशः

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Nisha
Nisha
1 year ago

Sach me madhav se bahut badi galti ho gayi thi

Seema Srivastava
Seema Srivastava
1 year ago

Very nice

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Nice part

Kanchan Choudhary
Kanchan Choudhary
1 year ago

Sabhi Sauteli maa kharab nahi hoti ye Madav ki maa ne sabit kar diya

Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

अपनी नादानी मे इतनी बड़ी गलती कर गया माधव

कांति
कांति
1 year ago

सौतली मां शब्द शुरू से हमारे लिए नकारात्मक रहा है हम कभी इस शब्द के लिए अच्छा सोच ही नहीं पाते। पर इंसान बुरा हो जरुरी नहीं। माधव को इतनी अच्छी मां मिली है जो उसकी गलतियों के बावजूद उसे प्यार करती रही। लेकिन नासमझ बुआ ने रिश्तों में जहर घोल दिया।
आगे सब अच्छा होगा………. शानदार भाग 👏👏👏👏👏👌👌

Seema Kashyap
Seema Kashyap
1 year ago

Nice part.

Ashok Garg
Ashok Garg
1 year ago

Very nice part of the story and very interesting too waiting for the next part hope its coming soon
Balman kachhi slate he jaise bat batayi gayi ve usi ki sach samajhte he

Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Very nice part

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

माधव जैसे सीधे लड़के को देखकर लगता ही नहीं की बचपन में इस कदर उत्पाती रहा होगा। nice part

Last edited 1 year ago by Deepa verma