
खूब दारूण
वैसे तो अपनी नौकरी की व्यस्तता के कारण आस पास के घरों में मिलना बैठना मेरा कम ही हो पाता है। पर कहीं लोग मुझे एंटी सोशल ना समझ बैठे इसिलिए महीने की पचास पार्टियों और गेट टूगेदर में से चुन कर एक आध में चली ही जाती हूँ ।
पहले औरतें किटी किया करती थी, अपनी पाक कला दिखाने और अपनी सासु ननंद की बुराई गिनाने के लिये। लेकिन अब किटी का सर्वमुख्य लक्ष्य होता है अपनी नई खरीदी ड्रेस की नुमाईश और ज्यादा से ज्यादा सेल्फी खींचना।।
तीन घन्टे की पार्टी में दो से ढाई घन्टे सिर्फ फोटोसेशन होता है, और बाकी का आधा घंटा जिसमे खाने पीने की फॉर्मेलिटी पूरी की जाती है, के साथ खींची गई फोटोस भी व्हाट्सएप के थ्रू शेयर कर ली जाती हैं।
कई सुपर टैलेंटेड औरतें तो घर पहुंचने तक में अपने एफबी पेज पर अपडेट भी दे चुकी होती हैं।।
खैर,किटी किसी भी जमाने की हो, अगर उसमें गॉसिप का तड़का नहीं है, तो वह महिलाओं की किटी नहीं है।
ऐसे ही हमारी सोसाइटी में भी एक से बढ़ कर एक गॉसिप क्वीन्स हैं,,और अभी इन सभी औरतों के बीच का हॉट टॉपिक है __ इशिता सरकार!!
इशिता से मेरी पहले कभी मुलाकात नही हुई। मैं लेडीज़ क्लब में भी नहीं हूँ। लेडीज़ क्लब सोसाइटी की रॉ एजेंसी है,एक से बढ़कर जासूस।
सारे पक्के करमचंद!
और वहाँ की गोपीचंद जासूस मेरी पक्की सहेली है। उससे पूरी सोसायटी की खबर मुझे मिलती है। और मुझसे मेरे पतिदेव को।
दुर्गा पूजा के अवसर पर मैंने इशिता को पहली बार पंडाल में देखा था। बंगाली अटायर में आंखों में मोटा मोटा काजल आन्जे माथे पे बड़ी सी लाल बिन्दी और सिन्दूर सजाये अपने कमर से नीचे लम्बे बालों को खुला छोड़े, दोनो हाथों से दुनूची करती इशिता बहुत प्यारी लग रही थी।
टिपीकल बंगाली फेस।
खुले बालों के कारण नृत्य में पड़ने वाले व्यवधान को दूर करने एक लड़का आया और उसने बड़ी नर्मी से उसके काले लम्बे बालों को समेट कर खोंपा बना दिया,,मुझे बाद में मेरी जासूस ने बताया __” ये बिस्वजीत है, इसका हसबैंड !!
” ओह्ह ! तभी चारों तरफ से घूम घूम कर इसकी ही तस्वीरें खींच रहा।”
” हाँ और क्या?? उतनी खूबसूरत है नही, ये सब तो बिस्वजीत के डी एस एल आर का कमाल है। एफ बी पर देखा है? क्या एक से एक फोटोज़ पोस्ट करती हैं।”
मेरी और मधु की चटपटी बातें बाजू वाली के कानों मे भी पड़ी, और बस सामने खड़ी तीन चार जोड़ी आंखें हमारी तरफ पलट गयी और पंडाल में रस की धार बहने लगी।
” बच्चा वच्चा है नही, तो बस फोटो खींचो, पोस्ट करो।”
” अरे सपना, उस दिन की फोटो देखी इसकी? देवी पंडाल में ही खिंची थी देवी प्रतिमा के साथ… की दारूण ओह्हो।”
” की दारूण दी ? आबार मेक’प है सब।चेहरे पे कोई तेज़ नही है।”
” हां और क्या? मैंने तो बिना मेक’प के देखा है। ऐसी तो कुछ खास नही लगती,,बस बाल बहुत अच्छे हैं।।
” माछ(मछली) का कमाल है सब ,बाल तो अच्छे होंगे ही।”
इन सब चर्चाओं परिचर्चाओं को सुन कर मैं समझ गयी कि हाई टाईड आ चुका है। बातें मेरे लेवल से ऊपर की होने लगी तो मैंने इशारे से उन सब को पतिदेव बुला रहें हैं, बोल कर विदा ली और पंडाल से बाहर निकल गयी। महिला गोष्ठी की सुनी हुई रसीली बातों में अपना तड़का लगा कर पतिदेव के सामने परोसने में मुझे महारथ हासिल है। वो भी बड़े चटखारे लेकर मेरी बातें सुनतें हैं।
अगले छै सात दिनों तक मेरे दिलो दिमाग पर इशिता सरकार छायी रही, उसकी कजरारी आंखे , प्यारी बातें और काले लम्बे बाल..
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अब तो रोज़ सुबह ऑफिस के लिये तैय्यार होते समय बालों को कोरते हुए यही प्रतिज्ञा लेती कि आज रात से ही बालों में तेल डालना शुरु कर दूंगी। इस रविवार को कोई अच्छा हेयर पैक लगाउंगी और इसी महीने हेयर स्पा भी करवा लूंगी ।और अब बाकी सभी बातों के साथ अपने बालों पर भी ध्यान दूंगी।।
पर मेरी कसमें और प्रतिज्ञायें रेत के टीले सी पल में धराशाई हो जाती। और जब कभी पतिदेव मुझे मेरी कसमों को याद दिलातें तो मैं अपना चिर परिचित डायलॉग दुहरा देती __” कसम टूट गयी तो टूट गयी, मैं कोई भीष्म पितामह थोड़े ही हूँ ।”
दुर्गा पूजा के कुछ आठ दस दिनों बाद फिर किसी पार्टी में हमारी गैंग से मिलना हुआ। इधर उधर की बातें चल ही रही थी कि किसी ने कहा__” अरे इशिता ने हेयर कट लिया है ,देखा क्या किसी ने”?
मेरे अलावा तो वहाँ सारी ही फेसबुक की कर्मठ और ईमानदार जुझारू सिपाही थी। सभी ने बड़ी मुस्तैदी से विकी कौशल के ” हाई सर” की तरह ही जवाब दिया!!
” हाँ देखा ना! कमर से नीचे तक लम्बे बाल थे, अब बोलो क्या ज़रूरत थी काटने की?”
मेरा कलेजा मुहँ को आ गया। हाय जिसकी लम्बी घनी ज़ुल्फ़ों ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी थी, उसने इतना बड़ा निर्णय लिया कैसे , मुझसे रहा नही गया __ ” इतने सुंदर बाल कटवा दिये? क्यों भई ? उसके पति ने भी मना नही किया?”
” उसका पति तो चमचा है उसका , जो वो बोलती है वही करता है”
” हाय पर इतने सुंदर बाल? किस लेंथ का हेयर कट लिया ,,मेरा मतलब सिर्फ सेट करवाया होगा ना ?”
” ना रे बाबा!! उसने तो पूरा कानों तक कट करवाया है? बॉब्ड हेयरकट!”
” क्या?” मेरे चेहरे के असमंजस और इतनी बड़ी सी क्या सुन सभी को और आनंद मिल रहा था…. आखिर बात शुरु करने का उददेश्य पूरा हुआ था। गॉसिप सकारात्मक जा रही थी। उन सब के लम्बे चौड़े ग्रुप में एक मेरी जैसी अज्ञानी भी थी जिसे समय समय पर वे लोग अपने फेसबुकिया ज्ञान से प्रकाशित करते रहते थे।
” अरे कुछ नही ,बस फैशन की बात है। हर लेटेस्ट ट्रेंड उसे फॉलो करना होता है। “
” पर ऐसा भी क्या जो इतने सुंदर बाल कटवा दिये?” मै अब भी रोने को तैयार बैठी थी।
” कुछ लोग ऐसे ही होतें हैं। उसकी पिछली प्रोफाइल पिक नही देखी क्या? मलमल कॉटन साड़ी को जो गले से घुमा के सामने लिया था,वो सेम पोज़ काव्यांजली साड़ी की ऑनलाइन मॉडल से कॉपी किया था उसने बस बालों का फर्क था।
मॉडल के बाल कंधे तक ही थे, बस इसने भी हेयर कट करवा लिया।”
अब सभी सुर से सुर मिला कर तार सप्तक में इशिता की हेयर स्टाइल की बुराई करने में लग गयी। और मैं एक बार फिर चुपके से निकल गयी……
पर उस रात बहुत देर तक मुझे नींद नही आयी। इशिता के लम्बे घने बाल रह रह कर जेहन में घूमते रहे,पर जाने क्यों इशिता से मेरा मोह भंग हो गया।
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कुछ दिनो बाद ऑफिस से लौट रही थी कि सोसायटी गेट पर ही अपने दोनों हाथों में शॉपिंग बैग्स थामे सड़क के किनारे अन्दर की तरफ जाती इशिता दिख गयी। मैंने उसके पास जाकर अपनी कार रोकी और उसे लिफ्ट ऑफर कर दी__
” ओई जो ओपरना दी ! की होलो?”
मैंने मुस्कुरा कर उसका अभिवादन स्वीकारा
” कैसी हो इशिता? बहुत दिनों से दिखी नही”
” मैं तो यहीं हूँ दी! आप अपने ऑफिस में बिज़ी रहते हो, कहीं नज़र ही नही आते हो।”
” न्यू हेयर कट तुम पर सूट कर रहा है, प्यारी लग रही हो।”
” आभार दी! लम्बे बालों में एक सी हेयर स्टाइल बना बना के बोर हो गयी थी, तो सोचा नीचे से थोड़े कटवा कर सेट करा लूँ।
तब बिस्वजीत बोले जब कटवा ही रही हो तो एक साथ पूरा 12 इन्च कटवा लो “
” 12 इन्च ही क्यों ??”
” कैन्सर पेशेंट को डोनेट करने के लिये दी!
पूरा 12 इंच का दरकार होता है ना विग बनाने के लिये। एक संस्था है, जो कैन्सर पेशेंट्स को फ़्री विग प्रदान करती है। विग के लिये 12 इंच लेंथ चाहिए ना, इसिलिए पूरा कट कर के देना पड़ा। पहले जब कैंची चली तो मेरे आंसू आ गये, पर बिस्वजीत ने मुझे संभाल लिया।
वो बोले कि” इन बालों की तुमसे ज्यादा ज़रूरत उन्हें है, तुम्हारे तो साल छै महीने मे फिर से लम्बे हो ही जायेंगे, पर तुम्हारा ये छोटा सा डोनेशन उन औरतों के लिये बहुत कीमती हो जायेगा।” बस दी उनकी बात मान ली मैंने… आखिर उन्हे भी दुर्गा पूजा में बाल लहराते हुए दुनूची करने का हक है ना दी।
देखा दी ,मैं और बिस्वजीत एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही इमोशनल अत्याचार करतें हैं”…आंखों में आई नमी को उसने अपनी मुस्कान से छिपा लिया।।
” खूब भालो ! हम दोनों भी ऐसे ही हैं इशिता ,हम भी खूब इमोशनल अत्याचार करतें हैं एक दूजे पर। तभी तो गाड़ी पटरी पर सही दौड़ती है।।”
” अच्छा दी, ये लुक भी तो सूट कर रहा है ना मुझ पर?”
” बिल्कुल ,बहुत सूट कर रहा इशिता ! खूब दारूण”
” ओ माँ!! आपको भी बांग्ला आता है ?”
उसकी बात सुन मैं मुस्कुराने लगी__
” प्यार की हर बोली मुझे समझ आती है, फिर चाहे सामने वाला बांग्ला में बोले या किसी और भाषा में।”
इशिता की बिल्डिंग के सामने उसे उतार कर मैं अपने विंग की ओर मुड़ गयी। शाम की चाय के साथ पतिदेव को सुनाने के लिये एक और मीठा किस्सा तैयार था।।
aparna….

Is it true story?
Bahut pyara kissa h,,pehle nhi pta tha 12 inche wala matter ,abhi 1month pehle hi mene bhi apne baal uda diye,2 saal se nhi kataye the, ab mujhse sambhale nhi jate the. Parlour wali ro rhi thi😆,,mai apko pratilipi pr bahut Miss krti hu.
खूब भालो 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
💕❤💕💕💕💕❤❤❤❤
Nice story
Bahut hi pyari si kahani😍😍😍😍😍😍😍
Nice ji
खूब दारुण ❤️❤️❤️
मुझे इस शब्द का अर्थ तो नहीं पता करो यह बात जरूर समझ में आई कि यह लघु कथा बेहद खूबसूरत थी बिना किसी की स्थिति को जाने समझे हम उसे इंसान को जज करने बैठ जाते हैं बिना यह सोचे समझे कि किन परिस्थितियों में उसने यह फैसला दिया होगा और जब हमें पता चलता है तो खुद में ही पछतावा करने के अलावा हम कुछ नहीं कर पाते इशिता के साथ ही ऐसी ही सोच बन गई थी पर जब सामने से मिलना हुआ तो सारी बात सामने भी आई और दिल को तसल्ली भी मिली।
इतनी प्यारी लघु कथा देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद डॉक्टर साहिबा ❤️❤️❤️🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰
बहुत ही खूबसूरत कहानी 👌👌