अतिथि-11

अतिथि -11

  उस शाम फिर मंजरी और विम्मो वापस नहीं गए.. रात ज्यादा हो जाने से सुलोचना और बाक़ी सब ने उन्हें वहीँ रोक लिया..

  
   ****

  दोपहर के वक्त काम निपटा कर माधव को कहीं साइट विजिट के लिए जाना था कि उसी वक्त प्रणय चला आया..

“अबे बहुत काम करते हो यार तुम.. ऐसे इस ऑफिस की आदत न बिगाड़ देना !”

प्रणय और माधव में अब खासी दोस्ती हो गयी थी, जिससे जरा बेतकल्लुफी और बढ़ गयी थी..

उसकी बात सुन माधव ने कप्यूटर स्क्रीन से नजरे हटा कर प्रणय की तरफ देखा..

“इतना काम सर पर लदा हुआ है कि क्या कहूं ?”
एक
“कुछ मत कहो, चलो चाय सुट्टा मार कर आते है !”

“नहीं हो पायेगा.. मुझे साइट देखने जाना है !”

“मेरे ही साथ जाना है, चलो न चाय पीकर निकल लेंगे.. ये एक्सेल शीट आकर भरते रहना !”

एक तरह से खींच कर प्रणय, माधव को साथ लिए निकल गया…

दोनों हमेशा की तरह सामने वाली बिल्डिंग पर मौजूद टी स्टॉल पर पहुँच गए…
माधव की नजर वहां पहुँचते ही एक बारगी इधर उधर दौड़ी लेकिन फिर उसने खुद को समेट लिया..

इधर हफ्ते भर से उसका डिंकी के घर जाना नहीं हो पाया था।  सुबह जल्दी ही ऑफिस के लिए निकलना हो जाता था, और शाम ढले देर तक ऑफिस का काम निपटाने के बाद फिर लगता था घर जाकर बस सो जाये..। 
वैसे वो डिंकी की तरफ अपने मन को उलझने भी नहीं देना चाहता था..
असल में दे ही नहीं सकता था !!

कभी कभी ज़िंदगी बेवजह भी कितनी कठिन सी लगने लगती है..वो खुद के ख़यालो में खोया बैठा था कि, प्रणय ने उसकी तरफ चाय का प्याला बढ़ा दिया..
माधव ने चाय का प्याला थामा ही था कि उसका फोन अडबजने लगा..
फ़ोन उसके छोटे भाई का था.. उसने फ़ोन उठा लिया..

“बोलो सागर !”

“भैया कैसे है आप ? आपको आज के दिन की खूब सारी बधाइयाँ… हैप्पी बर्थडे भैया !”

“मैं तो भूल ही गया था भाई.. थैंक्स.. वैसे कहाँ हो अभी ?”

“कॉलेज से घर लौट रहा हूँ, मम्मी का फ़ोन आया था, कह रही थी आपके पसंदीदा मोतीचूर के लड्डू लेकर आऊँ.. मंदिर में चढ़ायेंगी !”

“हम्म.. माँ भी न !” माधव हल्के से मुस्कुरा कर रह गया..

“वाह गुरु तो ये बात छिपाये बैठे हो.. हैप्पी बर्थडे ! आज की पार्टी तुम्हारी तरफ से !”

“बिलकुल, शाम को घर आ जाओ !”

“नहीं नहीं.. तुम पीते तो हो नहीं, घर पर तुम्हारी दाल रोटी खाने कौन आएगा ? हमे तो पार्टी बाहर ही चाहिए !”

“तब तो फिर छुट्टी वाले दिन का इंतज़ार करना पड़ेगा !” माधव ने गर्दन एक तरफ झुका कर अपनी अलग सी अदा से कहा और प्रणय उसकी बात पर सहमति जता गया..
लेकिन तभी प्रणय की नजर माधव के पीछे से आती हुई डिंकी पर पड़ी..

प्रणय ने धीरे से माधव के पैर पर ऊँगली से इशारा करना शुरू कर दिया..

“गुरु तुम्हारी सुमन आ रही है.. !”

“कौन ?” माधव चौंक गया..

“अबे यार तुम्हारे अंकल की डॉटर !”

“डिंकी ?”

  डिंकी का नाम लेते हुए माधव पलट गया, उसी वक्त डिंकी ठीक उसके पीछे पहुँच कर खड़ी हो गयी..

“बड़े दिनों बाद नजर आये आप.. कहाँ व्यस्त थे ?”

“बस यही ऑफिस में !”

“ऑफिस आते थे और चाय नहीं पीते थे ?”

“पी लेता था वहीँ.. ऑफिस में भी मिलती है न !”..

“मैं यहाँ की बात पूछ रही, यहाँ क्यों नहीं आते थे ?”

“तुम रास्ता देखती थी क्या ?” माधव ने मजाक में बोला और अपना प्याला रखने उठ गया, डिंकी हलके से मुस्कुरा कर दूसरी तरफ देखने लगी..

माधव ने पलट कर देखा, वो रेलिंग की तरफ देखती खड़ी थी, उसके बाल हवा में लहरा रहे थे, कितना शांत कितना सौम्य था ये चेहरा..
ऐसा चेहरा जिसे देख कोई भी आपने दुःख दर्द भूल जाये….

माधव डिंकी के पास पहुँचता उसके पहले प्रणय उस तक पहुँच गया..
प्रणय बातों का उस्ताद था, दिखने में भी ठीक ठाक था.. लेकिन उसकी सबसे बड़ी खासियत थी बातो के जाल बुनने का…
ऑफिस के बड़े बड़े काम वो सिर्फ अपनी जबान के भरोसे कर लेता था, या करवा लेता था !

और आज वो अपने मायाजाल के साथ डिंकी के पास खड़ा था..
पता नहीं क्यों, लेकिन पल भर के लिए माधव के दिल में सांप लोट गए..
वो तुरंत वहां पहुँच गया, लेकिन उन दोनों की बात सुन वो गहन आश्चर्य में दूब गया..

प्रणय डिंकी को माधव के जन्मदिन के बारे में बता रहा था..
माधव के वहां पहुँचते ही डिंकी ने नाराज़गी से माधव की तरफ देखा..

“आपने बताया नहीं आज आपका जन्मदिन है !”

“ये भी कोई बताने वाली बात है ?”

“है… क्यों नहीं ? आपके घर जन्मदिन नहीं मनाते क्या ?”

“हम्म.. मनाते है ! लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हूँ !”

“लेकिन आपने माता पिता के लिए हमेशा बच्चे ही रहेंगे !”

“यहाँ माता पिता साथ तो नहीं है न !”

माधव यूँ ही कह गया, और डिंकी चुप रह गयी..
डिंकी को उसके ऑफिस से एक लड़की ने आवाज़ देकर बुला लिया और माधव और प्रणय भी ऑफिस लौट गए..
आज रोज़ की तुलना में काम जल्दी ख़त्म हो गया और माधव घर चला गया..

उसका रूममेट अपने घर गया हुआ था, अँधेरी सी शाम में फ़्लैट का दरवाज़ा खोल कर अंदर घुसते ही माधव को अजीब से अकेलेपन ने घेर लिया..

“इससे अच्छा तो प्रणय के साथ पार्टी ही कर लेता ! उसे ज़बरदस्ती मना कर दिया !”
अपने आप से बात करता हुआ माधव कपड़े बदल कर रसोई में खुद के लिए चाय बनाने घुस गया..

चाय बना कर उसने बालकनी का दरवाज़ा खोला ही था कि दरवाज़े की घंटी बज गयी..

प्रणय ही हो सकता है, ये सोच कर वो दरवाज़े तक पहुँच गया.. उसने दरवाज़ा खोला ही था सामने खड़ी डिंकी पर उसकी नजर पड़ी और वो चौंक गया..

“तुम.. यहाँ ?” माधव दरवाज़े पर खड़ा था..

“यही से भेज देंगे क्या ?अंदर नहीं बुलाएँगे ?”

माधव को अकेले घर में डिंकी को अंदर बुलाना अजीब लग रहा था कि डिंकी के पीछे से चिंटू प्रकट हुआ और दरवाजे पर खड़े माधव की बांह के नीचे से जगह बना कर अंदर भाग गया….

माधव भी चिंटू के पीछे अंदर चला आया…

डिंकी अपने साथ एक बड़ा सा झोला लायी थी.. उसने झोला एक तरफ रखा और फिर उसमे से निकाल कर एक एक वस्तु वहां टेबल पर रखती चली गयी..
उसने और चिंटू ने मिल कर ढेर सारे गुब्बारे फुलाना शुरू कर दिया.. उन दोनों की देखा देखी माधव भी उनकी मदद करने लगा..
कोई बलून फ़ूट रहा था तो कोई हद से ज्यादा बड़ा फूल रहा था, एक दूसरे के साथ हंसी मजाक करते हुए बातों ही बातों में वो कमरा रंगबिरंगे बलून्स से भर गया..

माधव के मन में शाम के वक्त अकेलेपन के कारण जो उदासी घिर आयी थी, अब उड़नछू हो चुकी थी..
गुब्बारे फुला लेने के बाद डिंकी ने बैग से केक का डिब्बा निकाला और सुंदर से केक को टेबल पर सजा दिया..

माधव किसी काम से रसोई में गया हुआ था..
वो रसोई से वापस आया और टेबल पर छोटी छोटी मोमबत्तियों के बीच सजा केक देख उसका चेहरा खिल उठा..

उसके आते ही डिंकी ने उसके हाथ में चाकू पकड़ा दिया..

“जल्दी से केक काटिये, उसके बाद डिनर के लिए घर चलना है आपको.. मम्मी ने बुलाया है !”

“अरे आप सब बिना वजह परेशान हो रहे है !”

माधव ने औपचारिकत में कहा..

“अपनों के लिए कुछ करना आपके घर में परेशान होना माना जाता है क्या ? हमारे यहाँ इसे ख़ुशी मनाना माना जाता है !” डिंकी ने चाकू उसके हाथ में देते हुए कहा..

माधव ने धीमे से मुस्कुरा कर चाकू हाथ में लिया और केक काट दिया..

“पता नहीं कितने साल बाद केक काट रहा हूँ !” माधव ने कहा और डिंकी उसके चेहरे के पास झुक आयी..

.”कितने साल बाद !”

उसके शरारत भरे सवाल पर माधव कुछ बोल नहीं पाया… कितने पास चली आयी थी वो, उसका दिल धड़क कर रह गया..
उसने केक काटा और पहला टुकड़ा चिंटू के मुहं में ठूंस दिया..

अगले टुकड़ा उसने डिंकी की तरफ बढ़ा दिया, डिंकी मुहं खोलती उसके पहले उसके हाथो में टुकड़ा थमा कर वो चिंटू की तरफ घूम गया.. “एक पीस और हो जाये ?”
.”हो जाये !” चिंटू ने हंस कर कहा और माधव चिंटू के लिए वापस केक काटने लगा..

क्रमशः

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Nisha
Nisha
1 year ago

Dinki ki bholi harkatein madhav ka dil chura rahi hain

Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

ये तो गलत बात है माधव ….डिंकी ने सब तैय्यारी की एक पीस केक तो बनता था उसको खिलाना
उसकी भी अल्हड उम्र का इंतजार है वो केक का टुकडा

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

अरे माधव भोले भंडारी हो तुम लड़की खुद केक लेकर तुम्हारे पास आई है और तुमने उससे बिना खिलाए उसके भाई को ही दोबारा खिला दिया
😊😊😊😊😊😊
मुझे लगता है डींकी माधव को पसंद करने लगी है तभी तो वह चाय के बारे में उससे पूछ रही थी शायद इंतजार भी करती होगी😍😍😍😍❤️❤️❤️🥰🥰🥰🥰🥰
अच्छा जवाब दिया डिकी है माधव को के अपनों के लिए कुछ करना खुशी कहलाता है

कांति
कांति
1 year ago

माधव का जन्मदिन तो डिंकी ने शानदार तरीके से मनाया। कहां कमरे में अकेला सबको याद कर रहा था।
माधव और प्रणय की अच्छी दोस्ती हो गई है और माधव का मन भी लगने लगा।

Geeta sidpara
Geeta sidpara
1 year ago

Very very nice part 👌👌

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

डिंकी और माधव अब अच्छे दोस्त बन चुके है और दोस्त,दोस्त का जन्मदिन ना मनाए ये कैसे हो सकता है भलाऔर घर से बाहर रहने वाले बच्चों के जीवन मे दोस्त ही परिवार की कमी पूरी करते है 😊।हमारी तरफ से भी जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई माधव को 👏।चलो अब सुलोचना जी ने क्या क्या बनाया है माधव के वो देखते है 😊।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌।

CHANDER MITTAL
CHANDER MITTAL
1 year ago

माधव को डिंकी का और डिंकी को माधव का इंतज़ार रहता है। क्या बात है एक नयी प्रेम कहानी जन्म ले रही है? लग तो ऐसा ही रहा है। डिंकी का उसके लिए फ़िक्र करना कोई साधारण बात तो नहीं है ऐसे ही चाय कि टपरी पर बैठकर एक दुसरे का इंतज़ार करना, ये नए रिश्ते के पनपने कि निशानी है। वैसे अच्छा लग रहा है एक थोड़ा गंभीर एक झल्ली लड़की है, जोड़ी खूब जमेगी। 

Jagruti
Jagruti
1 year ago

Bahut bahut badhiya part

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

माधव बाबू को जन्मदिन मुबारक।माधव की तरह ही स्वीट सा भाग👌🏻👌🏻

Neeta
Neeta
1 year ago

💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤