जीवनसाथी -3 भाग -110

जीवनसाथी -3 भाग 110

रास्ता बिल्कुल सुनसान था इसलिए अपने पैरों की सहायता से फोन को धीरे से अपनी तरफ खिसका कर शौर्य फोन उठाने के लिए झुका ही था कि तभी स्पीड ब्रेकर पर गाड़ी जरा उछल गई… कहीं गाड़ी का संतुलन न बिगड़ जाए इसलिए हड़बड़ा कर शौर्य ने गाड़ी को संभालने की कोशिश की,और एक तरफ को मोड दी, और उसी वक्त रॉंग साइड से आती हुईं एक लम्बी सी लॉरी ने शौर्य की गाड़ी को ज़ोरदार टक्कर मार दी..

शौर्य की गाडी ज़ोर से उछली और ब्रिज से पलट कर नीचे नदी में गिर गयी..

लॉरी वाले ने गाडी को धीमा किया और जब तसल्ली कर ली कि गाडी अपने चालक और सवारी के साथ नदी में गिर चुकी है, तब एक ठंडी सी आह के साथ उसने अपने मालिक को फ़ोन लगा लिया..

“बॉस काम हो गया है !”

“हम्म गुड !” दूसरी तरफ से तुरंत फ़ोन रख दिया गया..

शौर्य अपनी रानी मॉम का फ़ोन उठाने के पहले ही गाडी सहित जलसमाधि लेने निकल चुका था..

****

“फ़ोन नहीं उठा रहे है शौर्य..!” रूपा ने बेबसी से बांसुरी की तरफ देखा..

“सो गया होगा भाभी साहब.. वहाँ काम भी कर रहा है आजकल.. उसे इस सब की आदत नहीं है ना !” बोल कर बांसुरी मुस्कुरा उठी, लेकिन उसे ऐसा लगा ये मुस्कान अंदर से आयी ही नहीं.. कितने यत्न से उसे इस झूठी मुस्कान को ओढ़ना पड़ा था..

कहने को तो बोल गयी बांसुरी, लेकिन उसका मन भी अजीब सा हो गया.. इतने दिन में कभी भी ऐसा नहीं हुआ था कि उससे बात किये बिना उसका बेटा सो गया हो..
फिर भी वो रूपा और “फू साहब” के सामने सामान्य ही बनी रहना चाहती थी.. इसलिए उसने कुछ नहीं कहा! लेकिन मन ही मन ये निर्णय ज़रूर ले लिया कि अगले ही दिन प्रेम और निरमा से मिल कर वो और उसके साहब शौर्य के पास चले जायेंगे..
जानें क्यों उसका दिल घबराने लगा था !

***

वासुकी अपने कमरे में सोया पड़ा था कि उसका फ़ोन बजने लगा….
वासुकी की नींद कच्ची ही होती थी, उसने फ़ोन तुरंत उठा लिया..

“भदौरिया ने अपना काम कर दिया !”

इतना सुनते ही वासुकी झटके से उठ बैठा..

“क्या ? क्या कह रहे हो ?”

“उसने शौर्य प्रताप की गाडी का एक्सीडेंट करवा दिया है !”

गुस्से में वासुकी के माथे पर बल पड़ गए…
उसने तेज़ी से अपनी बंधी मुट्ठी को पलंग पर मारा और फुर्ती से उठ बैठा.. !

शौर्य प्रताप सिर्फ राजा साहब का ही बेटा या कली का दोस्त ही बस तो नहीं था..

उसमे जितना अंश राजा साहब का था उतना ही रानी बांसुरी का भी तो था..!

उस दिन बिज़नेस मीटिंग हॉल में जब वो इतने लोगों के बीच अकेला खड़ा भदौरिया के ख़िलाफ़ बोल रहा था, तब बिलकुल कुछ सालो पहले वाली जिलाधीश बांसुरी ही उसके भीतर से बोलती नजर आ रही थी..!

ऐसे ही विधायक के साले को मिले फ्लाईओवर के टेंडर के ख़िलाफ़ ढेर सारे लोगों के बीच अकेली ही वो शेरनी गरज उठी थी…

साले साहब ने सोचा भी नहीं होगा  कि ब्रिज की बनवाई में प्रयोग किये जा रहे कच्चे माल को कोई कलेक्टर जाँच भी सकता है..
बांसुरी अकेली उस कच्चे माल को जांचती तो शायद फिर भी गलती कर जाती, लेकिन उसने अपने साथ दो सिविल इंजिनीयर्स के साथ साथ माल सप्लाई करने वाले ठेकेदारों की जोड़ी भी पकड़ राखी थी..।

सभी ने संयुक्त स्वर में सामान के सस्ते और घटिया होने पर मुहर लगा दी थी.. ।
हालाँकि वहाँ मौजूद युवा इंजीनियर ने उस निर्भीक कलेक्टरनी को विधायक के साले का महत्व बता कर चुप रहने की दबी ढंकी सी सलाह भी दे दी, लेकिन बांसुरी ने कब किसी गलत बात को सुन कर चुप रहना सीखा था..?

जिस वक्त मीटिंग कक्ष में उसने बोलना शुरू किया, तब उस गोल मेज के एक किनारे बैठे वासुकी की नजर बांसुरी से हट नहीं पा रही थी..

जितनी प्रबल वक्ता उतनी ही कुशल प्रबंधक !!

बातो ही बातों में साले साहब के काम की धज्जियाँ उड़ा कर उसने तुरंत ही उस काम का जिम्मा वासुकी और इसकी कम्पनी के नाम कर दिया था..
कुछ पलों के लिए तो वासुकी चकित रह गया था !!

“मैंने आपका काम देखा है मिस्टर अनिरुद्ध वासुकी ! आप ईमानदारी से काम करते है.. टेंडर में आपकी पोज़िशन इनके ठीक नीचे थी..।
इन्होने सामान में जितनी मिलावट की, उसके बाद इनकी कम्पनी से मैं ये काम नहीं करवा सकती, आपका नंबर अगला होने से ही ये प्रोजेक्ट आपको दिया जा रहा है, आशा करती हूँ आप मुझे असंतुष्ट नहीं करेंगे !”

अपनी दो टूक बात कह कर फिर वो वहां से लम्बे लम्बे डग भरती बाहर निकल गयी थी, और वो किसी प्रस्तर प्रतिमा सा अपनी जगह खड़ा रह गया था..।

बांसुरी जब बोलती तब लगातार बोलती, लेकिन जब चुप बैठती तब बीच बीच में कुछ सोचते वक्त उसका खुद का ध्यान नहीं जाता और वो अपने पैने कैनाइन को अपनी ही जीभ से टटोलती रहती.. ।
या कभी अपनी दोनों उंगलियों के बीच कलम को फंसा कर गोल गोल घुमाने लगती..

बस वैसे ही शौर्य भी उस दिन बातों के बीच अपनी दो उंगलियों में कलम गोल घुमा रहा था, कभी अपने नुकीले कैनाइन को जीभ से टटोल रहा था.. , इन सभी बातों में ही तो बांसुरी की झलक दिखा जाता था ये लड़का..

आखिर शौर्य बांसुरी का बेटा था!!

ऐसे कैसे वो अपने होते हुए बांसुरी के बेटे के शरीर पर खरोच भी आने दे सकता था.. ?

वो झटके से खड़ा हुआ और अपना लम्बा सा ओवरकोट हाथ में  लिए फ़ोन पर बात करते कमरे से बाहर निकल गया..

“कहाँ हुआ एक्सीडेंट, वो ठीक तो है ना ?”

“ब्रिज पर लारी ने उसकी गाड़ी को ठोका है, गाडी पलट कर नदी में गिर गयी है.. ।”

“पागल हो क्या, तुम मुझे फ़ोन कर के बताने की जगह  उसकी गाड़ी और उसे बचाने की कोशिश करो ना.. ।”

“बॉस आपके कहने से पहले ही हमारे गोताखोर और हमारी बोट्स उसे ढूंढने निकल चुके है… मैंने तो बस आपको खबर की है.. आप आराम कीजिये !”

“आराम… हुंह !! मैं वहीँ आ रहा हूँ, लोकेशन तुरंत भेजो !”

वासुकी का “मैं वही आ रहा हूँ” सुनते ही उसका आदमी ज़रा घबरा गया, क्यूंकि जितना बढ़ चढ़ कर उसने अपनी तैयारी बताई थी, वैसा यहां कुछ नहीं था..।

न तो उसके गोताखोर वहां पहुंचे थे और न ही कोई बोट्स..
उसे इतनी ही जानकारी थी कि वासुकी इस लड़के पर नजर रखवा रहा था, क्यों किसलिए ये सब उसे मालूम नहीं था..
इसलिए  उसने बहुत ही कैज़ुअल अप्रोच में इस बात को लिया था..

वासुकी का फ़ोन आते ही वो समझ गया जिस लड़के को वो साधारण समझ रहा था वो उतना भी साधारण नहीं था… उसने तुरंत अपने लोगो का फ़ोन घुमाना शुरू कर दिया…।

उसके फ़ोन के बाद एक एक कर बोट्स और गोताखोर वहां पहुँचने लगे…

वासुकी के पहुंचने तक में कुछ पहुँच गए थे, कुछ पहुँच रहे थे लेकिन बदहवास से वासुकी का ध्यान इस वक्त सिर्फ शौर्य पर था..।

ढेर सारी पेट्रोमैक्स के उजाले में यहाँ से वहाँ तक गोताखोर और तैराक अपने काम में लगे हुए थे, लेकिन अब तक किसी को सफलता नहीं मिली थी.. !

****

सुबह सुबह प्रेम बगीचे में बैठा अख़बार पढ़ रहा था कि निरमा उसके और अपने लिए चाय लिए वहां चली आयी..
बांसुरी दूर से चलती हुईं वहां तक आयी लेकिन कुछ सोच कर वापस मुड़ गयी..
निरमा और प्रेम एक दूसरे में इतने व्यस्त थे कि उन दोनों का ही ध्यान इस बात पर नहीं गया ।

बांसुरी लौट कर महल की सीढ़ियां चढ़ रही थी कि अंदर से बाहर निकलती रूपा से टकराते हुए बची..

“निरमा के घर से आ रही हो ? बता दिया उसे हर्ष की कुंडली के बारे में ?”

रूपा के सवाल पर बांसुरी उसे देख कर चुप रह गयी..

“बांसुरी हमारी एक बात का जवाब दोगी ?”

“पूछिए भाभी साहब !”

“एक तरफ तो तुम्हे कुंडली गणना पर विश्वास नहीं है, दूसरी तरफ तुम कुंडली में लिखी बातों को मानती भी हो ? क्यों ?”..

“मैंने निरमा और प्रेम भैया से कुछ नहीं कहा !”

बांसुरी की इस बात पर रूपा उसे देखती रही फिर कुछ सोच कर बोल उठी..
.
“नहीं वो मतलब नहीं था हमारा, हम बस ये कहना चाह्ते थे कि निरमा और प्रेम को आज शाम चाय पर बुला कर उन्हें ये सारी बातें बता देंगे !”
.
बांसुरी के चेहरे के भाव बदल गए, वाकई उसकी जेठानी कभी कभी अपने स्वभाव से उसे चमत्कृत कर देती थी… हल्के से मुस्कुरा कर बांसुरी ने हाँ में गरदन हिला दी..

“आओ चलो नाश्ता करने चलते है !”

बांसुरी और रूपा खाने वाले कमरे की ओर बढ़ चली.. वहां टेबल पर तरह तरह के नाश्ते सजने लगे थे.. नौकर चाकर इधर उधार दौड़ते हुए नाश्ते लगाने में लगे हुए थे..

बांसुरी मुस्कुरा तो रही थी पर दिल में घबराहट सी लगी हुईं थी..
उसने पानी का गिलास उठा कर मुहं से लगाया और उसके हाथ से गिलास छूट गया..

कांच का गिलास छन से गिर कर टूट गया..

“हे भगवान ये कैसा अशुभ हो गया सुबह सुबह !” फू साहब के मुहं से निकल गया !”

“कांच टूटना तो शुभ होता है ‘फू साहब’, हमारी माँ साहब हमेशा कहा करती थी कि अगर कुछ अशुभ होने वाला है तो कांच टूटने से उसकी आन चली जाती है..।
मतलब जो बुरा होने वाला हो वो कट जाता है..
घबराओ मत बांसुरी, सब शुभ होगा !”..

रूपा ने बांसुरी के कंधे पर हाथ रखा और उसके बगल वाली कुर्सी खींच कर बैठ गयी..

क्रमशः

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Seema kawatra
Seema kawatra
1 year ago

सही कहा रूपा ने कोई बला टली

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

बांसुरी का मन बेचैन होना ही था आखिर माँ है वो शौर्य की उसके ही जिस्म का टुकड़ा आज ज़िन्दगी और मौत के दौराहे पर खड़ा है।
वासुकी ने एक समय बांसुरी की प्राणो की रक्षा करते हुए अपनी नेहा की जान गवा दी थी तो अब..कैसे वो बांसुरी के बेटे को कुछ होने देगा,हमें पता है वासुकी.शौर्य को बचा लेगा।

Nisha
Nisha
1 year ago

Ma ka dil toh bechain hoga hi na.vasuki ji jaan laga dega shaurya ko dhundne me bus wo thik rahe

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Dr Aperna ji Shouraya puri tarah se Skushal ho,ye dua hai hum sabhi pathako ki taraf se Vikram to bahosh Mila picnic per aaya larko ko,ab Jagdish hi little Master ka bhi pata lag Jay,Waiting for the next part eagerly.

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

भले ही शक्लों सूरत से शौर्य अपने पिता का बेटा है हूबहू उन्हीं की तरह दिखता है पर आदते तो उसने अपनी मां से ही पाई है ना।
वह भी अपनी मां की तरह चुलबुला और प्यार है उसकी मां भी तो धीर गंभीर नहीं थी धीर गंभीर तो उसके पिता थे उसकी मां तो हमेशा ही अपनी शरारतों से अपनी बातों से उसके पिता का दिल मोह लेती थी।😍😍😍😍😍😍😍
आज भी जब उन दोनों की बातें याद करते हैं तो मन खुशी से भर उठता है।
पर शोर्या के लिए मन बहुत घबरा रहा है पता है कि उसे कुछ नहीं होगा पर एक डर भी लगा है की बांसुरी को जब यह पता चलेगा तो उसे पर क्या बीतेगी

Rashmi Hasija
Rashmi Hasija
1 year ago

Maa ne bete ki Bala taal di

Neeta ahirwar
Neeta ahirwar
1 year ago

Mam
Ab kya hoga
Shoury thik ho jaye

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Bahut hi Bari garbar ho gyi hai Dr Aperna ji,dil dhuk sa ho gya,Vasuki ji Shorya ko kuch nahi honaya dang,bacha hi langa,For God all is well,Waiting for the next part

Poonam upadhyay
Poonam upadhyay
1 year ago

Bahut sundar