
अपराजिता -160
ये गयी नहीं अब तक ? वो सोच ही रहा था कि उसकी अम्मा ने उसे देख लिया और वहीँ से आवाज़ लगा दी..
“रे अखंड.. इधर आजा बेटा ! कहाँ चला गया था तू शाम से ?”
एक ठंडी सी आह भर कर अखंड वहीँ चला आया..
“कुछ काम से निकल गए थे अम्मा !” उसने धीमे से रेशम की तरफ देखा और अपने हाथ जोड़ दिए..
रेशम ने भी निसंकोच अपने हाथ जोड़ दिए..
अखंड जितना ही रेशम को देखने से बचता था, रेशम उतनी ही निर्भीक दृष्टी से उसे देख पाती थी..
अब उसके मन के अंदर छिपा बैठा सारा डर तिरोहित हो चुका था..
“भाई साहब आपकी थाली परस लाएं ?” कुसुम ने पानी का गिलास अखंड को पकड़ा कर पूछ लिया..
“नहीं, हम खाना खा चुके हैं !” अखंड कुसुम से भी ज़रूरत भर की ही बात करता था..
जानें कैसा स्वभाव हो गया था लड़के का..
वो चाह कर भी खुद को बदल नहीं पा रहा था..
“अच्छा ! मीठा ले आते हैं !” कह कर कुसुम रसोई में चली गयी..
वो एक बडी सी ट्रे में वहां बैठे सभी के लिए ठंडी खीर ले आयी..
“खा लीजिये भैया, आज छोटी ठकुराइन ने पहली बार बनायी है.. बनायी क्या है बिगाड़ी है कह लीजिये !” यज्ञ ने कुसुम को छेड़ दिया..
“अच्छा.. बिगाड़ी है ना, तो अब आपको चखने को भी नहीं मिलेगी !”
कुसुम ने यज्ञ की कटोरी छीन ली..
“ये तो गलत है, चखने तो दो.. तब तो हम निर्णय दे पाएंगे !”
“अरे आपके पास इतनी फुरसत कहाँ ? आपने तो बिना चखे ही घोषणा कर दी, खीर बिगाड़ दी गयी है !”
“खीर तो बहुत टेस्टी बनी है।” रेशम ने एक चम्मच मुहं में डाल कर कहा और मुस्कुराने लगी..
“है ना.. लेकिन छोटे ठाकुर को तो लग रहा बिगड़ गयी तो अब आप बताइये डॉक्टर साहिबा, इन्हे खीर दी जाये या नहीं.. !”
‘हमारी फरियाद लगा दीजिये डॉक्टर साहब, हमारी मैडम बडी खूंखार है, ऐसे अब हमे खीर नहीं मिलने वाली, लेकिन आपने अर्ज़ी लगायी तो शायद मिल जाये.. !”
यज्ञ भी खूब मजे ले रहा था..
“अच्छा ऐसा क्यों ?” रेशम पूछ बैठी
“क्यूंकि आप चीफ गेस्ट हो आज !” यज्ञ ने बोला और रेशम ने हंसते हुए ट्रे में से कटोरी उठा कर यज्ञ के हाथ में रख दी..
उन सब को हँसते बोलते देखता बैठा अखंड भी हल्के हल्के मुस्कुरा रहा था..
रात ढलने लगी थी..
रेशम वहाँ से जाने के लिए खड़ी हो गयी..
अखंड ने यज्ञ की तरफ देखा, कि यज्ञ रेशम को छोड़ आये, लेकिन यज्ञ ने धीरे से आंखे छोटी छोटी कर अखंड को ही चले जाने का इशारा कर दिया..
उतनी रात में अकेले ड्राइवर के साथ भेजने का सवाल ही नहीं उठता था, इसलिए अखंड ने अपनी गाडी निकाली और उन लोगो को छोड़ने के लिए ले आया..
रेशम की माँ पीछे बैठ गयी.. वहाँ मौजूद सभी से विदा लेकर रेशम भी गाड़ी में बैठने जा रही थी कि, अखंड की माँ ने कुसुम को कुछ इशारा किया और कुसुम एक पैकेट ले आयी..
अखंड की माँ ने वो पैकेट रेशम के हाथ में रख दिया..
“इसकी क्या ज़रूरत थी आंटी ?”
“ज़रूरत थी !” शचीरूपा ने गंभीर स्वर में कहा और रेशम ने झुक कर उनके पैर छू लिए..
अखंड अपलक नेत्रों ने उन्ही दोनों को देख रहा था..
रेशम मुड़ कर आयी और अखंड के बगल वाली सीट में बैठ गयी..
एक मुलायम सा खुशबु वाला झोंका अखंड को सहला गया..
उसने धीरे से गाडी आगे बढ़ा ली…
****
सुबह भावना अपने रोज़ के अभ्यास से उठ कर रसोई में गयी तब तक राजेंद्र अपनी चाय बना चुका था..
उसे रसोई में देख राजेंद्र ने पूछ लिया..
“तुम भी पियोगी ? “
भावना ने ना में गर्दन हिला दी..
उसकी ना सुनने के बाद राजेंद्र अपनी चाय लेकर बाहर चला आया… अख़बार उठा कर वो बालकनी में जा बैठा..
उसके जाते ही भावना ने दूध गरम करने रखा और सब्ज़ी काटते हुए उसने अपने लिए पानी गरम करने रख दिया..
“दीदी मैं कुछ मदद कर दूँ ?” गेंदा के सवाल पर भावना उसे देखने लगी..
“हम्म.. नहीं तुम जाओ आराम कर लो.. मैं नाश्ता बना कर आती हूँ.. तुम्हारा नाश्ता भी लेती आउंगी !”
गेंदा हमेशा से परिश्रमी लड़की रही थी, उसे बिना काम किये बैठे बैठे खाने की आदत नहीं थी.. इसलिए उसे बहुत संकोच हो रहा था..
“आपके साथ ही खाएंगे हम… !”
“अच्छी बात है !” भावना वापस पलटी और काट रखी भिंडी उसने छौंक दी….
पराठे का आटा भी उसने लगा लिया था, वो एक बार बाहरले कमरे में झांक आयी..
राजेंद्र नहाने चला गया था !
उसने फटाफट मेज साफ़ की और पानी का गिलास रख कर चली गयी..
राजेंद्र के तैयार होकर आते ही उसने नाश्ता परोस कर रख दिया..
इतनी देर में उसकी चाय भी खौल चुकी थी..
“चाय ले आये ?” कान में शहद घोलता सा सवाल पूछ के भावना खड़ी यही और राजेंद्र ने हाँ में गर्दन हिला दी..
उसे चाय दे कर भावना रसोई साफ़ करने लगी..
राजेंद्र ने अपना नाश्ता निपटाया और प्लेट्स उठा कर किचन सिंक में डालने के बाद वो वहीँ से अपने हॉस्पिटल निकल गया.. ना जाते समय उसने कुछ कहा ना ही भावना ने कुछ पूछा ?
गेंदा ही धीमे कदमो से बाहर तक चली आयी..
वो खिड़की पर खड़ी राजेंद्र को अपना सफ़ेद कोट हाथ में लटकाये जाते देखती रही..
जानें क्यों उसे राजेंद्र का सूखा सा चेहरा देख कर उस पर दया हो आयी..
कैसी अजीब लड़की थी भावना भी.. देवता जैसा लड़का मिला लेकिन उसे संजो कर रखना नहीं आ रहा..
जिस हीरे को मुकुट में संवार लेना चाहिए उसे धूल कर रखा है..
ऐसे तो उसके वक्त के एक एक पल को अपनी उंगलियों पर बांध रखा है। कब उसे नाश्ता परोसना है, कब चाय देनी, कब वो फल खाता है.. जब इतने सुचारु रूप से गृहस्थी चला ले रहे हैं दोनों, तो आपस में बात कर लेने से दोनों को कौन रोके दे रहा है !
गेंदा ने बचपन से राजेंद्र को देखा था..
बचपन में गेंदा की मां उसे भगवान के चमत्कारों की कहानी सुनाया करती थी और जाने किस विश्वास में उसे राजेंद्र में भगवान नजर आने लगे थे..
उसकी नजर में आज तक राजी ने कभी कुछ गलत नहीं किया था, और इसीलिए उसे लगता था राजेंद्र हर उस ख़ुशी का हक़दार है, जो एक आम इंसान के जीवन में रंग भर सकती है..।
कुछ सोच कर गेंदा भावना के पास चली आयी..
अब तक में भावना ने दो कप में चाय और दो प्लेट में नाश्ता निकाल लिया था..
“आओ गेंदा नाश्ता कर ले !”
“वो तो ठीक है दीदी, लेकिन हम आपसे कुछ पूछना चाहते थे.. पूछ सकते हैं ?”
“हाँ पूछो ना ?”
“आपने अपने लिए आगे क्या सोचा है ?”
“हम्म फ़िलहाल तो यही कि मन लगा कर पढ़ना है जिससे मेडिकल की पढाई करने के लायक बन सके !
अगर भगवान ने चाहा तो डॉक्टर भी बन जायेंगे.. !”
गेंदा खिड़की से बाहर देखने लगी..
“और कुछ ?” उसने बाहर देखते हुए ही सवाल किया
“और कुछ मतलब ?”
“अच्छा बताइये, आप मांग में रोज़ सिंदूर लगाती है ?”
“हाँ !”
“ये सिंदूर सुहागने काहे सजाती है ?”
“देखो गेंदा हम ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हमारी अम्मा कहती थी, कि माथे पर सिंदूर लगाने से भगवान का आशीर्वाद पति पर बना रहता है और सोहाग की उमर लम्बी होती है !”
“अच्छा मतलब आप डॉक्टर साहब की उम्र लम्बी करना चाहती है ?”
इस बात का एकदम से भावना कोई जवाब नहीं दे पायी..
“यही बात है ना दीदी ?”
“हम्म, यही समझ लो !”
“नहीं ऐसे कैसे समझ ले ? जो सही बात है वो बताइये !”
“तुम जानना क्या चाहती हो ?”
“हम आप दोनों के बीच क्या है वो नहीं जानना चाहते, वो जान कर हमें कोई लाभ भी नहीं.. हम बस ये चाहते हैं कि डॉक्टर साहब सदा खुश रहे…
उन्होंने अपने जीवन में बहुत कष्ट देखे हैं दीदी.. बहुत छुटपन में उन्होंने माता पिता को खो दिया था..
जिस बच्चे के सर से माँ बाप का साया एक साथ उठ जाता है ना, उसका दर्द कोई नहीं समझ सकता..
दादा जी ने पाल पोस कर लायक बनाया लेकिन जब उनकी सेवा कर के उनका ऋण चुकाने का मौका मिला वो सिधार गए..।
बहुत मेहनत की है डॉक्टर साहब ने बचपन से..।
वो पढ़ने में बहुत होशियार थे, तो उनकी क्लास के कुछ बच्चे उन्हें तंग करने के अलग अलग उपाय ढूंढा करते थे.. कभी उनकी कॉपी फाड़ देते थे, कभी पेन्सिल तोड़ कर फेंक देते थे..।
डॉक्टर साहब गरीब थे, बार बार अपने दादा जी से ये सब खरीदने की जिद नहीं कर सकते थे। इसलिए स्कूल के बाद वाले समय में एक ढाबे में टेबल पर पटका मारने और बर्तन साफ़ करने का काम किया करते थे..।
बहुत बार ढाबे का मालिक उनके शांत और मेहनती स्वभाव से खुश होकर उन्हें खाना दे दिया करता था, लेकिन खाना लेकर जाने से बाबा को पता चल जायेगा और फिर वो नाराज़ होकर काम छुड़वा देंगे, ये सोच कर अपने हिस्से के उस खाने को गली में इधर उधर घूमते बेज़ुबान जानवरो को खिला देते थे..
डॉक्टर साहब बहुत अच्छे हैं दीदी..
पहली बार उनके जीवन में खुशियाँ दस्तक दे रही है..।
हमने तो उन्हें हमेशा ही देखा है.. इतना तो वो उस कुसुम के साथ की दोस्ती के समय खुश नहीं रहते थे जितना आपसे ब्याह के बाद नजर आने लगे है..।
दीदी हम उम्र में आपसे बहुत छोटे है, अनपढ़ भी है लेकिन हमारी अम्मा हमेशा हमें समाज की अच्छी बुरी बातो को समझाती रहती है..
वही आपसे कह रहे हैं..
आपको एक अच्छा जीवन और देवता सामान जीवन साथी मिला है.. उन्हें मत खोइए !
देखिये ये आपका जीवन है, हम आपको ज्ञान देने वाले कोई नहीं होते लेकिन हमको इतना तो समझ आ ही गया है की आप दोनों साथ ज़रूर है, लेकिन आपके बीच पति पत्नी का कोई रिश्ता नहीं है !
आखिर कौन सी बात है जिसके कारण आप दोनों एक दूसरे से इतना संकोच करते हैं ?
कौन है जो आप लोगो को रोक रहा है ?”
गेंदा बड़े ध्यान से भावना की तरफ देख रही थी..
भावना के चेहरे पर मायूसी छलक आयी..
“गेंदा, हम सच कहे तो हमने अपनी तरफ से बहुत बार कोशिश की, लेकिन हर बार उनकी तरफ कदम बढ़ाने पर हमारी सखी कुसुम का चेहरा हमारे सामने चला आता है..।
कभी हम उनकी पसंदीदा सब्जी बनाते है और खाते वक्त उनके चेहरे पर जो संतुष्टि के भाव आते है तब लगता है झट से आगे बढ़ कर पूछ ले कि सब्जी कैसी बनी, लेकिन चुप रह जाते हैं.. ।
कभी जब वो तैयार होकर अस्पताल के लिए निकलने वाले होते हैं, ऐसे में उन्हें देख कर लगता है उनके कान के पास एक काला टीका लगा दे और उनकी नजर उतार ले, लेकिन फिर खुद को रोक लेते हैं.. ..
जब वो शाम में हमारे हाथ की चाय पीने की फरमाइश करते हैं, तब भी लगता है उनके बाजु में बैठ कर उनका हाथ थाम ले, लेकिन फिर हम रह जाते हैं..
हमें ऐसा लगता है जैसे हम कुसुम का हक छीन रहे हैं..
हम जानते हैं डॉक्टर साहब ने कुसुम से जितना प्यार किया है, उतना हमसे कभी नहीं कर सकते..।
और इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता..।
अब तुम ही बताओ क्या किसी इंसान को दो बार प्यार हो सकता है ?”
“हाँ हो सकता है !”
भावना ने अपनी बात ख़त्म की ही थी कि उसकी बात के बाद एक आवाज़ हवा में गूंज गयी..
भावना ने पलट कर देखा, दरवाज़े पर कुसुम खड़ी थी..
क्रमशः

एक खूबसूरत भाग …एक तरफ रेशम और अखण्ड की सहजता ,कुसुम यज्ञ की चुहलबाजी और दूसरी तरफ भावना के मन के भाव खुलकर सामने आना ,कुसुम ने एकदम सही समय पर एंट्री ली है ,जब वो यज्ञ के साथ आगे बढ़ चुकी है लेकिन उसकी सहेली उसकी भावना आज भी एक अपराधबोध से ग्रसित है और अपने रिश्ते में आगे नहीं बढ़ पा रही।
यकीनन अब कुसम को भी धक्का लगा होगा जानकर की भावना उसकी सोचकर ही अपने रिश्ते में पहल करने से झिझक रही है ।
अव वही समझाएगी भावना को और तब वो राजेन्द्र के साथ अपनी जिंदगी का सफर मुक्कममल तरीके से तय कर पायेगी
गेंदा के जरिए ही सही पर जो एक झिझक है राजेन्द्र और भावना के बीच वो शायद खतम हो जाए अब ।🙄🙄🙄🙄
हर व्यक्ति को अपना जीवन जीने का अधिकार है और अब तो कुसुम भी अपने भरे पूरे परिवार में व्यस्त हो गई है तो फिर क्या दिक्कत है कि वह दोनों अपना जीवन भी सुचारू रूप से चले।🌝🌝🌝🌝
Aj गेंदा ने बिल्कुल सही समझाइश दी है भावना को और कुसुम भी अब समझा ही देगी सखी को।🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂
आज तो गेंदा ने गजब सवाल उठाए , अच्छा किया जो ये सब भावना के दिल से निकल रहा है , ओर दूसरा की हम सोचे कि ये सब बाते राजी सुन ले तो कैसा होता , पर कोई नहीं अब इस भावना के ढीले पेंच कुसुम कसेगी ,❤️🫠🫠🫠😘
अब कुसुम ओर गैंदा इन दोनो को पटरी पर लाएंगे 👍👌👌👌👌
रेशम के मन का डर खत्म हुआ अखंड के साथ नॉर्मली बातचीत की ऐसा लग रहा आगे जाकर ये दोनों अच्छे दोस्त साबित होंगे और शायद अब अखंड भी अपनी ज़िन्दगी में आगे बड़ सके।
भावना के मन की बात कुसुम ने सुन ली अब तो कुसुम ही उसे समझाएगी, अब राजेंद्र और भावना की ज़िन्दगी की गाड़ी आगे बढ़ेगी।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻
Very nice part
What a twist…nice one
Bahut Sundar part ❤️❤️❤️❤️
वाह मतलब की मज़ा आ गया। कईं दिनों से बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी अपराजिता का।मैं सच बता रही हूं अगर ऑडियो कॉमेंट का विकल्प होता तो खूब सीटी बजाती।😚😚 गेंदा के आने से ही सही भावना और राजेंद्र पास तो आयेंगे।अब आ गईं हैं कुसुम कुमारी सारे मन के मैल धो डालने के लिए❤️
Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Badhiya part 👌