
जीवनसाथी -3 भाग -101
उतनी देर में वासुकी ने वापस दरवाज़ा खटखटा दिया..
अपने दिल की धड़कनो को संयत करने की कोशिश करती कली इधर उधर शौर्य को छुपाने की जगह ढूंढने लगी, और दीवार से लग कर खड़ा शौर्य मजे से मुस्कुराता खड़ा रहा..
“अरे जाओ ना तुम.. ओह्ह गॉड मैं क्या करूँ अब ?”
“जाओ जाकर दरवाज़ा खोलो !”
“डैडा क्या सोचेंगे ?”
“ये भी तुम सोच लोगी तो डैडा क्या सोचेंगे !”
“ओह्ह स्टॉप इट,ये व्हाट्सप्प के जोक्स क्रेक करना बंद करो ! अभी बताओ मैं क्या करूँ.. !”
“जाकर दरवाज़ा खोलो कली !” शौर्य ने परम शांति से कहा
दरवाज़े पर होती दस्तक को अब अनसुना नहीं किया जा सकता था, घबराहट में पलके झपकती कली दरवाज़े पर पहुँच गयी और दरवाज़ा खोल दिया उसने..
सामने वासुकी खड़ा था..
“क्या हुआ, दरवाज़ा खोलने में इतना वक्त लगा दिया ?”
कली मुहं फाड़ कर जम्भाई लेने लगी..
“वो ज़रा आँख लग गयी थी डैडा !”
“क्या ? अभी दस मिनट पहले तुम मुझे बुलाने मेरे कमरे में आयी थी, कह रही थी डिनर लग गया है, और एक फ़ोन आया तुम बात करती कमरे में आयी और तुम्हारी आँख लग गयी.. ?”
“हम्म… वो.. पता नहीं कैसे हुआ, लेकिन सच में आँख लग गयी थी!”, वो दरवाज़े पर खड़ी अपनी सफाई दी जा रही थी, अपनी बात की सच्चाई बताने के लिए उसने एक बार फिर जम्भाई ले ली..
उसी वक्त उसका मोबाइल बजने लगा, लेकिन वो अपनी जगह से हट कर अंदर नहीं जा सकती थी.. उसे लगा वो दरवाज़े से हटी तो कहीं वासुकी कमरे में ना चला आये, और कमरे में मौजूद शौर्य को देख ना ले..
“फ़ोन बज रहा है तुम्हारा !”
“हाँ हाँ.. अभी लेकर आती हूँ, आप चलिए, मैं आयी !”
कली धीरे से मुड़ कर अंदर पलट रही थी, कि उसके पीछे से वासुकी भी अंदर चला आया..
कली घबरा गयी, लेकिन कमरे में शौर्य नहीं था..
उसने राहत की साँस ली और अपना मोबाइल उठा लिया फ़ोन रीना का था.. वो अगले दिन के कॉलेज की पूछताछ कर रही थी..
वासुकी ने अंदर रखी पानी की खाली बोतल उठा ली और बाहर निकल गया.. -“जल्दी आओ !”
कली ने रीना से बाद में बात करती हूँ कह कर फ़ोन पटका और भाग कर खिड़की पर खड़ी हो गयी..
उसे पिछले गेट के बाहर खड़ी शौर्य की गाडी नजर आ गयी..
शौर्य उसमे बैठा कली का ही इंतज़ार कर रहा था..
कली को देखते ही उसने हाथ हिला दिया, उसे देख कर कली के चेहरे पर मुस्कान चली आयी.. उसने भी हाथ हिला दिया..
शौर्य की गाड़ी आगे बढ़ गयी..।
कली खाने की टेबल पर बैठी बैठी मुस्कुरा रही थी..
सरु ने उसे देखा लेकिन कहा कुछ नहीं..
कली अपने कमरे में पहुँचने की जल्दी में थी। उसे शौर्य से बातें करनी थी, इसलिए उससे कुछ खाया भी नहीं जा रहा था.. जैसे तैसे दो चार निवाले निगल कर वो अपने कमरे में भाग गयी..
वासुकी खाने के बाद दर्श के साथ वापस कुछ काम निपटाने ऑफिस पहुँच गया..
अपने कमरे में पहुँच कर कली ने शौर्य के दिए नए नंबर पर मेसेज भेजा ही था कि सरु वहाँ चली आयी.. कली फ़िलहाल सारिका को नहीं बताना चाहती थी कि कुछ देर पहले शौर्य उसके कमरे में आया था इसलिए उसने बात घुमा दी..
सरु बहुत देर तक वहाँ बैठी उससे इधर उधर की बातें करती रही, और इस सब में कली को शौर्य से बात करने का मौका नहीं मिला..
अगली सुबह कली अपने कॉलेज के लिए तैयार हो गयी..
उसके डैडा ही उसे छोड़ा करते थे..वो उनके साथ कॉलेज निकल गयी..
****
इन सब से दूर न्यूहेम के सिटी सेंटर की सबसे ऊपरी मंजिल पर बने रेस्त्रां के बार में बैठा भदौरिया अपना चौथा व्हिस्की का गिलास गले में उड़ेलता हुआ जबान से जहर भी उगल रहा था..
उसके सामने “ग्लैम एरा “का ब्रितानी मालिक बैठा था, और उसके ठीक बगल में एक जापानी कॉस्मेटिक कम्पनी का चीफ बैठा था..
ये सारे लोग ट्यूलिप में शेयर होल्डर थे इसलिए किसी को इस बात से फर्क नहीं पड़ता था की प्रोडक्ट कैसा बना है इन सब को बस महंगे दामों पर सामान मार्किट में उतारना और बेचना था…
भदौरिया शौर्य की बात के बाद भड़का हुआ था…
अगर उसे उस मीटिंग के प्रोटोकॉल और बाकी लोगो का डर नहीं होता तो वो शायद वहीँ शौर्य पर गोली चला चुका होता, लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाया..
अभी भी वो शौर्य को कोस रहा था…
उसके साथ बैठे दोनों लोग और भी ज्यादा खतरनाक थे.. उनमे से जापानी चीफ ने लगातार उसकी बकवास सुनाने के बाद उसे टोक दिया की वो एक बार में उसे खत्म क्यों नहीं कर देता !
भदौरिया खुद यही चाह रहा था लेकिन उसे सबसे बड़ा डर वासुकी का था..
वासुकी से ये दोनों लोग पहले ही चिढ़ते थे, उसका नाम सुन कर इन दोनों की नाराज़गी और भी ज्यादा बढ़ गयी…
और आखिरकार ढेर सारी बहस और बातचीत के बाद यही निर्णय लिया गया की शौर्य के इण्डिया वापस लौटने के पहले ही उसे मार दिया जाये..
इस काम की ज़िम्मेदारी भदौरिया ने ले ली..
अब उन तीनो के चेहरों पर मुस्कान थी..
भदौरिया अपने आदमियों को फ़ोन करने लगा !
****
कली होने डैडा के साथ कॉलेज पहुँच गयी !
क्लास में बैठे दोस्त उसका इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन वो खुद अपने आप में होती तब तो किसी से मिलती, उसका मन तो पिछली रात की उस छोटी सी मुलाकात पर ही ठहर कर रह गया था.. !
उसके मन से जैसे शौर्य निकल ही नहीं पा रहा था… कितना अलग लग रहा था इस बार वो..।
पहले जब मिली थी तब में और अभी में ऐसा क्या अंतर आ गया था..?
अंतर आ गया था और वह अंतर था उसके खुद के नजरिये का।
इसके पहले इंडिया में जब वह शौर्य से मिली थी, तब वह उसे नहीं जानती थी। दोनों के बीच धीरे-धीरे मुलाकाते हुई, जान पहचान हुई और दोस्ती का बीज डला था। इंडिया से लौटने के बाद उसे पता भी नहीं चला कि कब उसके दिल में बोया हुआ दोस्ती का बीज जुदाई का खाद पानी पाकर प्यार की बेल बनकर लहराने लगा था। और इस बार शौर्य से मिलते ही उसे यकीन हो गया था कि वह शौर्य से बहुत ज्यादा प्यार करने लगी थी।
शायद शौर्य का भी यही हाल था। इसलिए उसे देखने के लिए वह तुरंत उसके घर पर चला आया था। अपने आप में खोई कली मुस्कुरा रही थी कि उसके बगल में बैठी रीना ने उसे कोहनी मार दी।
” क्या हुआ? क्या सोच सोच कर मुस्कुरा रही है?”
“कुछ नहीं, कुछ भी तो नहीं।”
” चल अब इतना तो झूठ मत बोल। कहीं तेरा वह इंडिया वाला प्रिंस वापस तो नहीं आ गया है?”
” क्या?”
कली आंखें फाड़े रीना को देखने लगी।
लेकिन दिल ही दिल में यही बात चल रही थी कि इन सबको सब कुछ कैसे पता चल जाता है? क्या उसके चेहरे पर शौर्य का नाम लिखा है?
तभी सामने बैठा डैरिक उसे घूर कर देखने लगा।
” साफ-साफ बताओ प्रिंसेस क्या बात है? अगर तुम्हारा प्रिंस यहां आ गया है, तो एक बार हमसे भी मिलवा दो।”
‘”सोचती हूं ।”
“इसका मतलब वह वाकई आया है।”
रीना उछल पड़ी। कली ने धीरे से उसकी तरफ देखकर हां में गरदन हिला दी।
” प्लीज प्लीज उसे बुला ना।”
” वह यहां नहीं आएगा।”
” क्यों नहीं आएगा? यह कॉलेज है सबके लिए ओपन है, वह भी आ सकता है।”
” लेकिन वह अपनी पढ़ाई पूरी कर चुका है।”
” कली प्लीज यार, कम ऑन! तुम इतनी बेवकूफ तो नहीं हो। क्या इस कॉलेज में सिर्फ पढ़ने वाले स्टूडेंट आते हैं, और कोई नहीं।”
कली ने उसकी तरफ देखा और धीरे से अपना फोन निकाल कर शौर्य को मैसेज करने लगी।
शौर्य को वह मैसेज कर रही थी कि रीना ने उसके हाथ से फोन छीन कर शौर्य के नंबर पर कॉल लगा दिया।
” अगर उसने मैसेज नहीं देखा तो? कॉल पर बात कर लेना ठीक रहेगा।”
” पर इतनी सुबह वह जागा भी होगा या नहीं?”
” अगर तेरे चक्कर में इंडिया से यहां तक आ गया है, तो उसे नींद कहां आ रही होगी?”
रीना को घूर कर कली ने उसके हाथ से फोन छीन लिया।
शौर्य की अलसाई हुई सी गुड मॉर्निंग उसके कानों में रस घोल गई।
“क्या कर रहे थे ?”कली ने पूछा
“इस वक्त पर कोई क्या करता है? सो रहा था।”
” कल मैंने सोचा भी नहीं था कि ऐसे अचानक पहुंच जाओगे?”
” अब देखते जाओ, तुमने जो जो नहीं सोचा होगा, वह सब करता चला जाऊंगा।”
” अच्छा कुछ ज्यादा ही ओवर कॉन्फिडेंट नहीं हो रहे हो?”
” इसमें ओवर कॉन्फिडेंट होने की क्या बात है? मैं हूं इतना काबिल।”
” अच्छा अगर इतने काबिल हो तो अभी मेरे कॉलेज में पहुंच कर दिखाओ।”
” अभी?”
” हां अभी।”
” लेकिन अभी?”
” समझ गई, नहीं पहुंच सकते ना,?
वैसे भी तुम जिस फ्लैट का एड्रेस बता रहे थे, वहां से मेरा कॉलेज बहुत दूर है। इसलिए तुम्हारा नहीं आना ही ठीक है।”
” और अगर आ जाऊं तो? मुझे क्या मिलेगा?
मेरे साथ घूमने चलोगी?”
” पागल हो क्या? क्लास मिस कर दूंगी?”
” तो फिर बुला क्यों रही हो? मैं आकर अकेला तुम्हारी कैंटीन में बैठा रहूंगा।”
” कैंटीन में बैठकर करोगे भी क्या?”
” वही तो कह रहा हूं, भले कैंटीन से तुम्हारी क्लास नजर आती हो, तब भी मुझे जाकर अकेले ही बैठना है।”
कली शौर्य की बात सुनकर चौंक गई। उसने खिड़की से बाहर देखा, शौर्य बाहर खड़ा था। उसने हाथ हिला दिया। कली मुंह फ़ाड़े उसे देखती रही। कली के साथ-साथ उसके सारे दोस्त क्लास से बाहर देखने लगे।
उसी समय क्लास टीचर चले आए, उन्हें देखते ही उछलकर कली खड़ी हो गई..
कली ने बाहर जाने के लिए पूछा और धीरे से बाहर निकल गयी. उसके पीछे एक एक कर उसके सरे दोस्त भी बाहर निकल गए..
कली मुस्कुरा कर शौर्य के सामने जाकर खड़ी हो गयी…।
शौर्य ने कली के पीछे उसके दोस्तों को देखा और कली से इशारे में ‘यह लोग कौन है ‘पूछ लिया।
कली उन लोगों का परिचय करवाती उसके पहले वह सब खुद अपना परिचय देने लगे। सबसे हाथ मिलाते मिलाते शौर्य ने अपना भी परिचय दे दिया..
“मेरा नाम शौर्य है, शौर्य प्रताप..।”
“हम सब जानते हैं आपका नाम शौर्य प्रताप सिंह बुंदेला है। आप राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला के बेटे हैं, और फिलहाल लंदन में हमारी कली से मिलने आए हैं..।”
रीना की इस बेवकूफी पर कली अपनी जबान काट कर रह गई।
यह क्या बोल गई रीना, उसने शौर्य की तरफ देखा। शौर्य भी कली की तरफ ही देख रहा था। कली की आंखों में देखते हुए उसने पूछा।
“लंदन घुमाओगी मुझे?”
कली उसे क्या जवाब देती, क्योंकि वह खुद कभी लंदन अकेले घूमी नहीं थी। वह कुछ कहती उसके पहले शौर्य ने अपनी हायाबूसा की तरफ इशारा कर दिया। कली ने देखा और आंखें फाड़ कर शौर्य को देखने लगी।
” तुम बाइक पर आए हो?” शौर्य ने मुस्कुरा कर गर्दन हां में हिला दी। एक बार फिर कली के दोस्तों की तरफ देखकर उसने हाथ हिला कर उन सब से इजाजत ली और अपनी बाइक पर सवार हो गया।
कली पहली बार हायाबूसा में सवार हो रही थी। उसने एक बार बाइक की पिछली सीट पर हाथ फिराया और उसके बाद शौर्य के कंधों को पड़कर उसके पीछे सवार हो गए।
शौर्य ने गाड़ी एक झटके से आगे बढ़ा दी.. ।
क्रमशः

Shaurya befikar ho kar ghum rha h ….jabki uske dushman peeche lag chuke h…ye toh Pucca h shaurya bhi apne pita ke nakshe kadam per h ….bas thoda befikar h
हायाबूसा not bad
राजा जी की झलक शौर्य की पार्सनेल्टी में दिखती भी है
बाँसुरी की royal infield को चलाने की खवाईश को उन्होंने शादी से पहले ही पूरी कर दी थी
और ये शौर्य भी हायाबूसा लेकर आया कलि के लिए
पर यहाँ शौर्य की सेफ़्टी ज्यादा जरुरी है
उम्मीद है विक्रम साये की तरह आसपास मंडराता रहेगा
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐🧿🧿🍫🍫🍫💃🏻💃🏻💃🏻
Wow shaurya toh kuch jayada hi tez nikla matlab itna toh uske pita ne bhi kabhi basuri ke sath ghumne jane ka nahi socha.achha laga.kali ne toh kabhi bahri duniya nahi dekhi ab shaurya ke sath dekhegi to aur bhi khubsurat lagega use bus shaurya ki jaan ko koi khatra na ho
Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
यार यह राजा साहब का लाड़ला तो राजा साहब से भी ज्यादा खतरनाक है 😬😬😬😬😬😬कैसे अचानक से कली के कमरे में आ गया और दरवाजा खोलने के लिए भी कह दिया बेचारी कली की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई थी यही सोच कर कि अगर डेड ने शौर्य को देख लिया तो क्या होगा पर शौर्य की डेरिंग कुछ ज्यादा ही बढ़ती चली जा रही है पता नहीं यह लड़का आगे और क्या करने वाला है 😳😳😳😳😳😳😳
बात करते-करते में ही कॉलेज भी पहुंच गया और गाड़ी पर बैठा कर घूमने भी निकल गया पर अब मुझे भदोरिया का डर लग रहा है वह क**** इंसा कॉस्मेटिक के चक्कर में शौर्य को कुछ भी कर सकता है कोई भी नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए विक्रम को ज्यादा ध्यान देना होगा
शौर्य को देखकर एक ही बात दिमाग में आई 🤭🤭🤭🤭🤭🤭
बहुत तेज़ हो रहे हो 😁😁😁😁😁😁
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊
Beautiful part
Awesome part ❤️❤️
Beautiful part 👍👍👍👍