
अपराजिता -154
“लेकिन ये तो बताओ कि बिना गोली वाली गन से निशाना लगाओगे कैसे ?”
अनिर्वान के ऐसा बोलते ही धीरेन्द्र सकपका गया..
उसने गन को उलट पुलट कर देखना शुरू कर दिया और उसके बाद गन की जाँच करने के लिए उसने सामने खड़े बाबूराव की तरफ गन तानी और एक फायर कर दिया…
उसकी आंखे फटी रह गयी, क्यूंकि गन में वाकई गोली नहीं थी.. उसका फायर बेकार गया था…।
वो आंखे फाड़े अनिर्वान की तरफ देखने लगा..
“क्या है ये ?” उसने चीखवकर पूछा.
“ए तमीज से पूछ, अभी साहब का दिमाग उखड़ा ना तो तुझे उखाड कर फेंक देंगे !”
“अबे मतलब, बिना गोली की गन लेकर कौन सा पुलिस वाला तफरीह करता है ?”
“अनिर्वान भारद्वाज !” अनिर्वान के ऐसा बोलते ही वो अनिर्वान की तरफ देख कर बाबूराव की तरफ देखने लगा..
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“हाँ, यही हैं हमारे साहब अनिर्वान भारद्वाज ! और अब साहब बताएँगे कि ऐसा उन्होंने क्यों किया ?”
धीरेन्द्र आँख फाड़ कर अनिर्वान की तरफ देखने लगा..
“हाँ तो मिस्टर क्रिमिनल माइंड, मिस्टर हत्यारे, आप को क्या लगा आप खुद अपनी मर्जी से भाग रहे है… आप दरअसल समझ ही नहीं पाए कि न्यायालय से भागने के विचार आपके मन में जिस कारण भी आए हो, लेकिन उसके बाद आपने जो सब किया वह आपसे करवाया गया है, हमारे द्वारा।
आपको क्या लगता है मिस्टर धीरेंद्र प्रजापति, आप इतनी आसानी से अनिर्वान भारद्वाज की रिवाल्वर निकाल कर किसी भी लड़की पर तान लेंगे और मेरे रहते किसी को गन पॉइंट पर लेकर आप वहां से निकाल सकते थे?
जिस वक्त तुम्हारी बहन मान्या ऊपर की तरफ भागी उस वक्त क्या करना चाहिए वाला सवाल आँखों में लिए मेरे साथ चल रहे पुलिस वालों ने मेरी तरफ देखा, और मैंने उन्हें ऊपर जाने का इशारा कर दिया। वह सब ऊपर चले गये।
तब तुम्हें लगा मैं अकेला बचा हूं, मैं क्या कर लूंगा?
मैं तो जानबूझकर तुम्हारे साथ चल रहा था कि तुम मेरी गन निकलो और इसीलिए मैंने गन तुम्हारी तरफ ही रखी थी।
मैं जो चाहता था तुमने वही किया। रेशम बगल से निकल रही थी, तुमने उसे गन पॉइंट पर ले लिया। मैं तो चाहता था कि तुम मुझे गन पॉइंट पर लेकर निकलो, लेकिन कोई बात नहीं रेशम को भले ही तुमने गन पॉइंट पर लिया लेकिन मेरी रिवाल्वर थी और मुझे पता था कि उसमें गोली तो है नहीं।
इसलिए मैं जानता था कि रेशम का कोई नुकसान नहीं होना है। और इसीलिए जब रेशम ज्यादा जोर से चीख रही थी तो मैं खुद उसे मना कर रहा था वो शांत रहे…।
बस उस वक्त एक ही बात का डर था कि कहीं तुम जैसा पागल इंसान गुस्से में रेशम को नुकसान ना पहुंचा दे, बस इसीलिए उसे चुप रहने बोल रहा था..
तुमने रेशम को गन पॉइंट पर लेकर गाडी की तरफ रुख किया और इत्तेफाक से तुम मेरे ड्राइवर को ही बुला बैठे..
लेकिन जाना तो मैं चाहता था तुम्हारे साथ, क्यूंकि शिकार तो तुम थे मेरे..
इसीलिए ड्राइवर के लिए मैंने कह दिया कि उसे गाड़ी चलानी नहीं आती..
मैं चाहता ही था आगे होकर तुम मुझे साथ ले लो और वही हुआ, तुमने अपने काल को ही साथ ले लिया… !”
“काल नहीं महाकाल कहिये सर !” बाबूराव ने तड़का लगा दिया.
धीरेन्द्र बड़े ध्यान से उन दोनों की बात सुन रहा था… वो सीधे चल कर अनिर्वान के पास पहुँच गया..
“देखिये सर हम आपको मालामाल कर सकते हैं..। बहुत पैसा है हमारे पास..
टिकट हमको मिलने वाला है, उसके बाद जब हम विधायक हो जायेंगे तब आपका प्रोमोशन से लेकर सारे लाभ आपको दिलवाते रहेंगे..।
आपका पूरी ज़िंदगी का ठेका हमारा हुआ..
बस अभी हमको यहाँ से निकल जाने दीजिये !”
अनिर्वान हल्का सा मुस्कुरा उठा….
“देखो धीरेन्द्र बाबू, पुलिस वाले को रिश्वत ऑफर करने का चार्ज भी तुम पर ठोक सकते हैं, लेकिन अब कुछ भी चार्ज लगाने का कोई फायदा नहीं है, जानते हो क्यों ?”
“क्यों ?”
“क्यूंकि अब यहाँ से कहाँ वापस कोर्ट कचहरी करने जायेंगे…? जानते हो पूरे भारत में लंबित रहने वाली सभी कोर्ट केस की संख्या बढ़कर 5 करोड़ हो गई है, जिसमें जिला और उच्च न्यायालयों में 30 से भी अधिक वर्षों से लंबित 169,000 मामले शामिल हैं।
अब जैसे तैसे तो तुम्हारा मामला सुलटा है, और तुम्हे सजा दे दी गयी है, वापस तुम्हे ले गए तो कोर्ट कचहरी के निलंबित मामलो की सँख्या में इजाफा ही होना है और कुछ नहीं..
इसलिए बाबू अब तुम्हारा फैसला तो यही होगा.. !”
“क्या मतलब ?”
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अनिर्वान ने धीरेन्द्र की तरफ से मुहं फेर लिया और रेशम को देखने लगा..
“रेशम…. जिस वक्त तुम्हारे साथ स्टोर रूम में ये दरिंदा था, उस वक्त इससे बदला लेने के लिए तुम्हारे दिमाग में क्या विचार आया था ?”
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रेशम एकदम से सोच में पड़ गयी..
“अरे सोच क्या रही हो… सामने तुम्हारा गुनहगार खड़ा है, तुमने जो कुछ भी उस वक्त सोचा था वो सब अभी कर सकती हो.. ! अगर इसकी आँख फ़ोड़नी थी, या इसके बाल खींच कर तोड़ देने थे या आँखों में धूल फेंकनी थी, जो सब तुम्हारा मन हो वो कर लो !”
रेशम चुप खड़ी रही.. मन में तो उसके भी बहुत सारी बातें चल रही थी, लेकिन वह संकोच के कारण एक जगह खड़ी रह गई थी।
ऐसा नहीं था कि इतना लंबा समय हो जाने के कारण उसके अंदर का गुस्सा या रोष कम हो गया था, बल्कि अंदर ही अंदर वह रोज बढ़कर नासूर बन गया था।
अभी वह भले ही उस हादसे के डर से बाहर आ गई थी, लेकिन उसके साथ ऐसा करने वाले इंसान से अब भी उसके दिल में बेहद नफरत थी। वह चाहती तो थी कि उस बिना गोली वाली गन को लेकर उसमें गोलियां भरकर अपने सामने धीरेंद्र को गोलियों से भून दे।
लेकिन थी तो वह एक संकोची लड़की ही। हाथ में गन ले लेना इतना भी आसान नहीं होता…।
यही तो फर्क होता है असल जिंदगी में और किस्मों कहानियों में ।
यह कोई कहानी या फिल्म थोड़ी थी कि हीरोइन पुलिस वाले के उत्साहित करते ही उसकी गन लेकर विलन को गोलियों से भून दे।
यह तो असल जिंदगी थी, जहां सामने वाले को मार देने के बाद उसी गिल्ट में जिंदगी भर गुजार देने का विचार भी तकलीफ देता है।
रेशम अपने दोनों हाथ बंधे चुपचाप खड़ी थी कि तभी दूर से उसे अपनी नाम की पुकार सुनाई देने लगी। उसने पलट कर देखा अथर्व जोर-जोर से उसकी तरफ देखकर हाथ हिला रहा था..
“अरे अब ये बाबू यहाँ काहे आ गए ?” बाबूराव बोल पड़ा..
“उनकी बीवी को ये उठा लाया है, कैसे नहीं आते ?” अनिर्वान ने कहा और अथर्व की तरफ घूम गया…
“अथर्व वही रुक जाओ… यहाँ मत आओ… यहाँ हम लोग सब संभाल लेंगे !
लेकिन अनिर्वान के रोकने पर भी अथर्व भागता हुआ वहाँ चला आया..
वो तेज़ी से उस तरफ आता जा रहा था और उसी समय धीरेन्द्र ने उस पुरानी सी इमारत में पड़ी एक पुरानी सी कांच की बोतल उठा कर उसे वही एक खम्बे से लगा कर फ़ोड़ दी और अथर्व की तरफ तेज़ी से भागा.. ।
जब तक में बाबूराव और अनिर्वान उसे पकड़ पाते धीरेन्द्र ने खींच कर अथर्व को अपने काबू में ले लिया, और दूसरे हाथ में पकड़ रखा कांच का टुकड़ा अथर्व की गर्दन पर गड़ा दिया..
खून छलक कर बह चला…
रेशम तेज़ी से चिल्ला कर अथर्व की तरफ दौड़ पड़ी..
“रुक जाओ इंस्पेक्टर साहब… बहुत बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे ना.. इतने लाख केस पेंडिंग है फलाना ढिकाना..तो अब सुनो हमारा भी केस पेंडिंग ही पड़े रहने देना… तुम बड़ा होशियार समझ रहे थे ना खुद को.. ।
अब हमें पकड़ कर दिखाओ.. हम इस लड़के को लेकर जा रहे हैं … देखना हमारे पीछे कोई नहीं आना, वरना.. !”
कह कर उसने अथर्व की गर्दन में वापस कांच चुभा दिया वो भी गहराई तक..
खून और तेज़ी से बलबलाने लगा… खून की धार लगातार बहती चली जा रही..
रेशम परेशान सी उसी तरफ बढ़ने लगी.. उसे आते देख कर धीरेन्द्र कांच के टुकड़े को हवा में लहराने लगा..
“रुक जा लड़की वरना ये नहीं बचेगा.. !”
रेशम पल भर को खड़ी रह गयी, तभी दूसरी तरफ से अनिर्वान और बाबूराव को बढ़ते देख धीरेन्द्र उस तरफ कांच का टुकड़ा लहराने लगा कि उसी वक्त एक पत्थर आकर उसके हाथ पर पड़ा और उसके हाथ से कांच का टुकड़ा नीचे गिर गया…
उसके हाथ पर इतनी ज़ोर से पत्थर का नुकीला हिस्सा लगा कि वो कलबला गया। एक भद्दी सी गाली देकर वो अपना वो टुकड़ा ढूंढने नीचे झुका कि तभी उसके माथे पर दूसरा पत्थर का टुकड़ा आकर पड़ा..
वो कुछ समझ पाता कि रेशम के हाथ से अगला पत्थर का टुकड़ा उसके गाल पर पड़ा..
बाबूराव उसे रोकने आगे बढ़ रहा था कि अनिर्वान ने उसे रोक दिया..
गुस्से में पागल रेशम चीखती हुई धीरेन्द्र की तरफ बढ़ी और आगे बढ़ कर उसे ज़ोर से धक्का दे दिया..
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अथर्व उसे रोकने आगे बढ़ा लेकिन रेशम के सर पर भूत सवार था..।
उसने अथर्व का हाथ झटक दिया और वही पड़े एक पत्थर को उठा कर धीरेन्द्र के चेहरे पर दे मारा…
धीरेन्द्र गुस्से में पगला गया था… उसने भी अपना हाथ इधर उधर फैलाया और ज़मीन पर पड़े पत्थर को उठा कर रेशम के माथे पर दे मारा..
पर इस वक्त रेशम पर सवार गुस्से में उसे अपना दर्द तक महसूस नहीं हो रहा था..
ऐसा लग रहा था जैसे उस पर देवी सवार हो गयी है..
उसके माथे से बहता खून उसके सिंदूर के साथ मिल कर पुरे माथे को लाल कर गया था.. थोड़ा खून नाक पर से बहते हुए चेहरे के निचले हिस्से को भी लाल कर गया था.. लेकिन उसे अब जैसे खुद का होश ही नहीं था..
अपने खुद के लिए सौ बार ललकारे जाने पर भी जो चुपचाप संकोच में खड़ी थी, अपने पति की जान पर बनते देख सावित्री की तरह लड़ गयी थी यमराज से..
अब उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था…।।
ऐसा लग रहा था जिन जिन को बिना किसी गलती के धीरेन्द्र ने मौत के घाट उतारा था वो सब उस घाट को चढ़ कर वापस चले आये थे और रेशम के अंदर घुस कर उससे बदला ले रहे थे..
रेशम के माथे पर पत्थर मारने के बाद भी जब रेशम पर कोई असर नहीं हुआ, तब उसे आंखे फाडे देखते धीरेन्द्र अगला पत्थर देखने लगा कि तभी रेशम ने उसे धक्का देकर वापस नीचे गिरा दिया और हाथ में एक बड़ा सा पत्थर लेकर उसके माथे पर धमाधम वार करने लगी… ऐसा लग रहा था वो उसका चेहरा कुचल देगी..
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धीरेन्द्र को बुरी तरीके से दर्द महसूसए हो रहा था, खुद को बचाने के लिए उसने रेशम को ज़ोर से धक्का देकर गिराया और भागने लगा…
रेशम ने वहीँ पड़े बांस के टुकड़े को उठाया और घुमा कर धीरेन्द्र के पैरों पर निशाना लगा कर ऐसे घुमा कर मारा की धीरेन्द्र पलटी खा कर गिरा..
और फिर जो हुआ वो किसी ने पहले कभी नहीं देखा था..
क्रमशः

औरत अपने लिए शायद ही खड़ी होती है पर बात उसके पति या बच्चें पर आ जाएं तो काली भी बन जाती है।
कोर्ट में सही सजा नही मिलने के बाद भी रेशम ने अपने लिए कोई कदम नहीं उठाया जब अनिर्बान ने सजा देने की बात कही पर चोटिल अर्थव को देखकर उसमें जानें कहां से इतनी हिम्मत आ गई की वो धीरेंद्र को चोट देने सी पीछे नहीं हटी।एक अपराजित की जीत।
शानदार 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👌👌👌❤️❤️❤️
इसे कहते हैं फैसला on d spot …भले ही ये सब न्यायिक प्रक्रिया के तहत जायज ठहराया जाए या नहीं लेकिन दिली सुकून इसी से हासिल होता है ।न्याय पाने में मिली देरी वैसे ही कम असर करती है उस पर थोड़ी बहुत सजा पाकर दुर्दांत अपराधी मजे करते हैं।
अनिर्वाण की अदालत में पेशी और सजा एक साथ मुकर्रर होते हैं और रेशम की तरह अगर हर औरत को मौका मिले तो हर औरत अपने भीतर के दबे आक्रोश को यूँ ही निकाल देना चाहती है ।जो जाने कितनी नजरों बदनीयतों के चलते उसके अंदर बरसोंस जमा हुआ है ,एक बारगी रेशम अपने लिए तो जाने भी देती लेकिन अपने पति का रक्त देखके उसके रक्त में उबाल आ गया अब तो खैर नहीं प्रजापति की …होना भी यही चाहिए था
Super power of women’s
धीरेन्द्र खुद को बड़ा चालाक समझ रहा था अब निकली सारी हेकड़ी बाहर ज़ब पता चला कोर्ट से भगाने से लेकर अब तक का सारा खेल अनिर्वाण ने ही खेला है, कुत्ता साला..,।
रेशम इतनी मासूम है वो क्या सज़ा देगी धीरेन्द्र को.. 🤔पर ये क्या.. 😲😲😲👏🏻👏🏻ये रेशम ही है ना… शाबाश रेशम ,आज दिखा दो इस कुत्ते को इसकी असली औकात…।
बहुत लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।
Awesome aise logo ke saath aisa hi hona chahiye
In logo ki yehi saza hai
👏👏👏👏👏👏👏👏👏🙏🙏🙏🙏🙏🙏👌👌👌👌👌👌👌
वाह वाह वाह आज आई रेशम के अंदर की अपराजिता बाहर।क्या चंडी रूप धरा है। महिषासुर के मर्दन के लिए।आज तो धीरेंद्र ज़िंदा वापस नहीं जाएगा।मैं सोच रही हूं अपराजिता खत्म हो जाएगी तो मेरे दिन कैसे बीतेंगे।
Wow, Resham fantastic. Don’t let him.
Zabardast part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
Aaj to resham sach main hi shaktiswaroop bann gayi hai..per atharv thik ho bas