
अपराजिता -148
अनिर्वान के ये सब बताने के साथ ही पुलिस के दो कर्मचारी अपने साथ एक लड़की को लेकर वहां चले आये..
वहां मौजूद लोग आश्चर्य से उस लड़की को देखने लगे.. लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्यचकित धीरेन्द्र था..
उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी… तो क्या इसका मतलब मान्या ज़िंदा थी ?
पुलिस कर्मियों के साथ आयी लड़की ने दुपट्टे से अपना चेहरा छिपा रखा था, लेकिन डील डौल से वो मान्या की कद काठी की ही लग रही थी..
इसका मतलब मान्या वाकई ज़िंदा थी ? अगर वो आज तक जिन्दा थी तो उसके सामने क्यों नहीं आयी ? किस बात का इंतज़ार था उसे ?
और वो रह कहाँ रही थी ?
धीरेन्द्र सोच में पड़ गया और अनिर्वान ने बोलना जारी रखा !
“मान्या खुद में उलझी सी मन ही मन धीरेन्द्र को अपनी बातों में उलझा कर अखंड से बदला लेने की सोचने लगी..
और फिर इसने जो सोचा, उस बात ने सिर्फ अखंड ही नहीं रेशम का जीवन भी बर्बाद कर दिया..
मान्या का दिमाग लगातार इसी तरफ काम कर रहा था, की कैसे भी हो उसे अखंड का घमंड तोडना है, लेकिन अखंड का घमंड था किस बात में.. ?
उसने अखंड सिंह परिहार की पूरी खोजबीन शुरू कर दी.. इतने सालों में आज तक अखंड के चरित्र पर कभी कोई दाग नहीं लगा था..
वो उस यूनिवर्सिटी का ऐसा निर्भीक दमदार सशक्त उम्मीदवार था, जिसे हर राजनैतिक पार्टी अपने पाले में मिला लेना चाहती थी….
जहाँ लड़के राजनीति में घुसने के लिए अलग अलग पार्टी के आला कमान के पांव पूजते नजर आते थे, वहीँ यहाँ पार्टी के लोग अखंड के पांव पड़ कर उसे अपनी पार्टी में मिलाने के इच्छुक नजर आ रहे थे…।
तो ये बात थी!!
यही उसके घमंड का कारण था !!
और उसके घमंड को तोड़ने के लिए, उसे नीचे गिराने के लिए, उसकी आँखों की ताब झुकाने के लिए उसे ऐसे धक्का देना था कि वो कभी उठ ही ना पाए..
मान्या ने उस यूथ फेस्ट वाले महीने बड़े शातिर तरीके से अखंड पर नजर रखी, और अपना पूरा प्लान तैयार कर अपने भाई के पास पहुँच गयी..
इस पूरे महीने में उसने इस बात पर भी गौर किया था कि रेशम की क्लास का लड़का पंकज भी किसी बात पर रेशम और अखंड से चिढ़ा बैठा था..
मान्या को अपनी उंगलियों में नचाने के लिए एक और कठपुतली नजर आने लगी थी..
उसने पंकज से दोस्ती कर ली..
मान्या सुंदर थी, धनवान थी स्टाइलिश थी, उसमे ऐसी कोई कमी नहीं थी कि कोई भी उससे दोस्ती के लिए मना करता..
पंकज और मान्या की भी दोस्ती हो गया !
इसी बीच किसी बात पर अखंड और पंकज की बहस हुई और अखंड ने पंकज को थप्पड़ लगा दिया, उस बात पर मान्या अखंड से भिड़ गयी और उसे खूब खरी खरी सुना कर वो पंकज को साथ लिए निकल गयी..
उसी वक्त गांव से दीपक आया हुआ था, उसने पंकज के लिए लड़ती मान्या को देखा और उसके दिमाग में ये लड़की कुलबुलाने लगी..
हालाँकि मान्या और पंकज के बीच सिर्फ दोस्ती थी और कुछ नहीं..।
मान्या ने धीरे धीरे अखंड के बारे में सब पतासाजी शुरू कर दी..
वो अपनी पूरी तैयारी कर सीधा धीरेन्द्र के पास पहुँच गयी..
धीरेन्द्र उस वक्त अपने कुछ गुर्गों के साथ बैठा हंसी मजाक कर रहा था..
मान्या के पहुँचते ही सब उसे देख शांत हो गए..
“अरे क्या हुआ, हमें देख सब चुप क्यों हो गए.. हँसिये हंसाइए, यही एक जीवन तो मिला है..।
बस ऐसे हँसते खेलते निकाल दीजिये ! “
मान्या के आवाज़ की कड़वाहट धीरेन्द्र को महसूस होने लगी..
“क्या हुआ मान्या ? नाराज़ हो क्या किसी बात पर !”
“नहीं हम काहे नाराज होने लगे ? हमें क्या लेना देना, आपका जीवन है, चाहे जैसे निकाल दीजिये.. वहां दूसरी पार्टी का वो गुंडा रात दिन एक कर के नेता बनने की तैयारी में लगा है, और आप बैठ कर हंसी मजाक करते रहिये बस !”
“कौन, परिहार ?”
“और कौन ?”
“अरे… वो कुछ भी कर ले, इस बार विधायक जी का हाथ हमारे सर पर है! चिंता मत करो, हम ही जीतेंगे !”
“आप कौन सा नशा कर के बैठे हैं भैया.. ?
अपने में मोहाये रहते हैं.. किसी का भी हाथ आपके सर पर रहे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता..! मतदान की प्रक्रिया में अंदर जाने के बाद ये आपके साथ हंसने खेलने वाले लड़के भी कहीं परिहार के नाम का बटन दबा के आ गए ना, तो पीछे आप कुछ नहीं कर पायेंगे !”
धीरेन्द्र सोच में पड़ गया उसने अपने साथ बैठे लड़को की तरफ देखा, सब के सब ना में गर्दन हिलाने लगे..
“कुछ पक्का और मजबूत सोचिये.. कोई ऐसा इंतजाम सोचिये कि अंदर जाने के बाद परिहार को चाहने वाले लड़के भी उसकी जगह आपके नाम पर मुहर लगा कर आये..
बहुत हो गया छात्र राजनीति का खेल..
ये बस क्रिकेट की रणजी ट्रॉफी जैसा है, इसे खेला ही जाता है मुख्य टीम में चुने जाने के लिए !
और सही उम्र में जिस क्रिकेटर का चुनाव मुख्य टीम में नहीं हुआ, फिर वो सिर्फ रणजी ही खेलता रह जाता है… मोहन अस्वकर की तरह, यही बनना है क्या आपको?”
अपनी बहन की जलीकटी सुन धीरेन्द्र सोच में पड़ गया..
मान्या वापस जहर उगलने लगी..
“बहुत हो गया यूनिवर्सिटी का इलेक्शन और यहाँ की उठापटक, अब समय आ गया है यहाँ से ऊपर उठ कर सोचने का..
उसके लिए सबसे पहले ज़रूरी है अपने प्रतिद्वंदी को पछाड़ दो..
जैसे भी हो वो आपके सामने खड़ा ही ना हो सके। ये इंतज़ाम करने की सोचिये… क्यूंकि एक बात तो है अगर अखंड आपके सामने खड़ा हुआ तो जीतेगा वही !
आप जितनी भी तैयारी कर लीजियेगा, लेकिन आप उससे नहीं जीत सकते !”
धीरेन्द्र ने अपने साथ बैठे लड़को को निकलने का इशारा कर दिया, वो सब एक एक कर उठ कर चले गए..
और मान्या वापस बोलने लगी..
“आप सुन और समझ रहे हैं ना हम कहना क्या चाह रहे ?”
“साफ़ साफ़ बताओ कहना क्या चाहती हो ?”
“अखंड का नाम बहुत है यहाँ, उसे हराना आपके बस की बात ही नहीं। चाहे विधायक आपके पीछे कितना भी पैसा रुपया बहा दे..।
चाहे आप सोच ले कि आप वोट खरीद सकते हैं, लेकिन आप हारेंगे ही !”
“तुम हमारी बहन हो या उसकी.. इत्ती देर से उसका नाम जपे जा रही हो !”
“आपकी बहन हैं इसलिए आपकी चिंता हो रही..। कॉलेज का माहौल बिगड़ा पड़ा है उस लड़के के चक्कर में..। जिसे देखो उसे हीरो बना रखा है, और इसीलिए अब हमें उसके नाम से भी चिढ हो रही है !”
“क्या करना चाहिए हमें, बताओ ?”
“उसकी इज्जत मिट्टी में मिलानी है, चाहे जैसे मिलाइये !”
“मतलब ?”
“मतलब ऐसा कुछ करना है कि वो लड़का कहीं मुहं दिखने लायक ना रहे…।
हर कोई उसके नाम पर थूके और मतदान करने वाला चाह कर भी उसके नाम के आगे का बटन ना दबा सके !”
“पर ऐसा क्या किया जा सकता है ?”
‘आप इतने तो भोले नहीं है, क्या एक एक बात आपको समझाये ?
एक लड़की है, जिसे वो पसंद करता है !”
“हाँ जानते हैं.. मेडिकल में है !”
“हाँ तो उसी लड़की की मदद से कुछ करिये !”
“वो हमारी मदद काहे करेगी ?”
मान्या ने अपने माथे पर हाथ मार लिया..
“लगता नहीं कि आप हमारे भाई है… उस लड़की के नाम के साथ परिहार का नाम जोड़ कर खराब तो किया जा सकता है ना।
जैसे, ये अफवाह तो फैलाई जा सकती है ना कि उस लड़की के साथ परिहार ने ज्यादती की, उसकी इज्जत पर हाथ डाला वगैरह वगैरह.. !”
“पर वो लड़की ये झूठ क्यों बोलेगी ?”
“वो झूठ नहीं बोलेगी, वो सच ही बोलेगी ! क्यूंकि परिहार का नाम लेकर उसके साथ ये सब मैं करुँगी… ।
किसी अँधेरे कमरे में उसे परिहार के नाम से बुलाना है, और उसके बाद उसके दिमाग में ये बैठाना है कि उसके साथ गलत करने वाला परिहार है..।”
और एक एक कर मान्या ने अपना पूरा प्लान अपने भाई को बता दिया…
धीरेन्द्र की आंखे चमक गयी..।
“हमारे दिमाग में काहे नहीं आया ये आईडिया ? अगर ये काम सफल हो गया तो अखंड सिंह परिहार मुहं छिपाता फिरेगा सब से….
वैसे इस सब में उस लड़की का क्या कसूर ?”
“गेंहू के साथ घुन भी पिसता ही है.. और अगर आपको इतना धर्मात्मा बनना है ना, तो फिर बैठे रहिये हाथ पर हाथ धरे…।
अपनी आँखों से परिहार को आगे बढ़ते देखिएगा और फिर अपने हाथ से विधायक बन चुके परिहार को पुष्पगुच्छ भेंट कीजियेगा !”
धीरेन्द्र चुप रह गया..
“आज कोई ब्लड डोनेशन कैम्प हुआ है.. अब कल आप परिहार के नाम से उस लड़की को फूल भिजवाइए !”
उसके बाद मान्या ने एक एक कर धीरेन्द्र को क्या क्या करवाना है सब कुछ समझा दिया..
उसके बताये अनुसार वो सब कुछ करता चला गया..
जिस वक्त रेशम को स्टोर रूम में बुलाया गया उस वक्त वहाँ अकेली मान्या ही मौजूद थी.. उसी ने रेशम को आवाज़ बदलने वाले एप में करी गयी रिकॉर्डिंग की मदद से उसे डराना धमकाना जारी रखा…।
वो धीरेन्द्र का इंतज़ार नहीं कर सकी..
कुछ देर बाद जब पिछले दरवाज़े से धीरेन्द्र आ गया तब दोनों भाई बहन रेशम को बेहोश कर वहाँ से भाग निकले….
उस वक्त तो धीरेन्द्र पलट कर वापस अपने चेलों के साथ अखंड को रंगे हाथ पकड़ने वहां चला आया, लेकिन मान्या घर चली गयी..
घर पर मान्या और धीरेन्द्र के लिए एक सरप्राइज उनका इंतज़ार कर रहा था..।
वो थी धीरेन्द्र की बडी बहन सान्या !!
सान्या अपने बाक़ी दोनों भाई बहन से बिलकुल अलग थी..।
उसका ध्यान फालतू की पंचायत में कभी नहीं लगता था… वो अपने आप में जीने और मस्त रहने वाली लड़की थी..।
बस उससे अपने पुरे जीवन में एक ही भूल हुई थी.. वो भी भूल धीरेन्द्र की नजर में भूल थी..
सान्या ने अपनी पसंद के लड़के से शादी कर ली थी.. !
सान्या ने जिस लड़के को पसंद किया था, वो गैरजात का था..
सान्या का परिवार इस अंतर्जातीय प्रेम संबंध को मानने को तैयार ना था.. उन लोगो की माँ बहुत पहले ही एक बीमारी की भेंट चढ़ चुकी थी और पिता जी ने जब सुना की उनकी बडी लड़की किसी दूसरे समाज के लड़के से ब्याह करना चाहती है, उन्होने उसे कमरे में बंद कर दिया और इसके लिए रिश्ता ढूंढने लगे..।
लेकिन वो अपनी मर्ज़ी उस पर थोप पाते, इसके पहले ही अनहोनी हो गयी..
धीरेंद्र के पिता ने अपने बहन बहनोई की मदद से एक रिश्ता ढूंढा और लड़के वालों को घर पर खाने पर बुला लिया।
घर पर सारे लोग तैयारी में लगे थे। धीरेंद्र भी भाग भाग कर तैयारी देख रहा था। मान्या भी अपने कमरे में खुद को सजाते बैठी थी।
लेकिन इन लोगों में से किसी का भी ध्यान सान्या के कमरे की तरफ नहीं गया। लड़के वाले आए और मिलना जुलना और बातों का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ देर बाद जब वर पक्ष ने लड़की को देखने की मंशा जाहिर की, तब धीरेंद्र के पिता ने मान्या को ऊपर जाकर सान्या को लेकर आने का इशारा कर दिया।
सान्या के कमरे में पहुंचने के बाद मान्या को वहां उसका लिखा एक खत मिला, जिसमें सान्या ने साफ स्पष्ट शब्दों में लिखा था कि वह घर छोड़कर अपने प्रेमी के साथ भाग रही है, और अब उसका इस घर से कोई संबंध नहीं है।
मान्या वह पत्र लेकर सीधा नीचे चली गई। और मेहमानों की मौजूदगी में ही उसने जोर-जोर से उस पत्र को पढ़कर सुना दिया। यह जानते ही कि सान्या घर से भाग चुकी है लड़के वाले अपनी जगह पर खड़े हो गए।
धीरेंद्र के पिता को ढेर सारी बातें सुनाने के बाद वह लोग वहां से चले गए। धीरेंद्र के पिता यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए कुछ तो उनकी तबीयत पहले से ही खराब थी और कुछ सान्या का दिया यह धक्का उन्हें हृदयाघात दे गया..।
सान्या ने भी जानबूझकर ऐसा कुछ नहीं किया था, लेकिन वह जानती थी कि उसके पास और कोई उपाय भी नहीं बचा था..।
घर से भाग कर उसने अपनी प्रेमी के साथ शादी कर ली। शादी के तुरंत बाद ही मान्या का उसके पास फोन आ गया और उसे मालूम चल गया कि उसके पिता की तबीयत बिगड़ गई है।
अपने पिता की तबीयत के बारे में जानने के बाद वह अपने पति के साथ अस्पताल पहुंच गयी…
लेकिन अपने से चार साल बड़ी बहन को भी धीरेंद्र ने अपनी उंगली के नीचे दबाए रखा और अपनी जिद से उसने सान्या को पिताजी से मिलने नहीं दिया।
रो धोकर सान्या अपने नए नवेले पति के साथ वापस लौट गई। तबीयत में थोड़ा सुधार होते ही पिता को लेकर धीरेंद्र और मान्या घर वापस आ गये।
धीरे-धीरे दिन बीतने लगे, लेकिन इस घर के किसी सदस्य ने सान्या को उसकी करनी के लिए माफ नहीं किया। कुछ दिनों बाद दोबारा दिल का दौरा पड़ा और धीरेंद्र के पिता हमेशा के लिए उन सब को छोड़कर चले गए…।
धीरेंद्र के पिता के विधायक जी से अच्छे संबंध थे, और उनका हाथ हमेशा ही धीरेन्द्र के सर पर था..
धीरेन्द्र भी राजनीति में कैरियर बनाना चाहता था, इसलिए वो विधायक जी के साथ जुड़ कर अपना काम करने लगा..
धीरे धीरे उस घर के लोगो ने उस घर की बडी बेटी को भुला दिया…
आज इतने सालों बाद सान्या को घर पर देख मान्या चौंक गयी..
दोनों सगी बहने थी बावजूद खुद में खोयी मान्या का इतने साली बाद सान्या को देख कर भी दिल नहीं पिघला..
वो अपने साथ दो छोटे बच्चो को लेकर आयी थी..
उन बच्चो को देख कर मान्या ने मुहं बना लिया व्यंग से उसके होंठ टेढ़े हो गए..
“छोड़ कर भाग गया ना तुम्हारा पति, वापस आ गयी ना घर ! क्या मिला तुम्हे इस तरह से लौट कर ? “
“पागल हो क्या मान्या, हम तुम सब से मिलने आये हैं.. हमें तुम सब की याद आती है !”
“झूठ मत बोलो, हम सब की नहीं इस घर की याद आती है.. तुम्हें इस घर का लालच वापस लेकर आया है। पहले जब अपनी मर्जी की शादी करनी थी तब तो तुम्हारा दिमाग कुंद हो गया था… बाद में जब तुम्हारा पति धोखा देकर भाग गया तो तुम अपना मुहं उठाये यहाँ वापस चली आयी.. है ना ?”
“छि तुम वाकई कभी अपनी छोटी सोच से ऊपर नहीं उठ सकती। मान्या बचपन से हर बात पर तुम हमे कंपटीशन करती आई थी, लेकिन हमने हमेशा तुम्हें छोटी बहन समझ कर तुम्हारी छोटी-छोटी गलतियों को माफ कर दिया। आज भी तुम अपनी उस संकुचित बुद्धि से ज्यादा कुछ सोच ही नहीं पाती हो।
हमारे पति ने हमे कोई धोखा नहीं दिया, हम खुद उनसे इजाजत लेकर यहां तुम सबसे मिलने आए हैं। उनकी सोच तो इतनी बड़ी है कि तुम उनकी सोच को कभी पा भी नहीं सकती।
जब हमने उनसे पूछा कि क्या हम अपने घर जा सकते हैं, अपने भाई बहनों से मिलने तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हमने उनसे शादी जरूर की है, लेकिन उनका हम पर प्रेम भरा हक है, हमें अपना जीवन जीने की पूरी आजादी है। हम किसी से मिलना चाहते हैं, किससे बात करना चाहते हैं, यह तय करने वाले वह कोई नहीं होते, और वह खुद हमे अपने साथ लेकर आए। लेकिन धीरू उन्हें देखकर नाराज ना हो जाए इसलिए वह बाहर ही हमें और बच्चों को छोड़कर चले गए।
यह दोनों हमारे बच्चे हैं मान्या.. !”
“तो हम क्या करें ? तुम्हारे बच्चे है तो तुम पालो ! हमारे सर पर मढ़ने क्यों ले आयी ? अब समझ में आया तुम्हारे पति को भी हमारा यह बड़ा सा बंगला नजर आ गया होगा, उसने सोचा होगा अगर तुम्हें इस घर से दूर कर दिया तो यह पूरा घर दो हिस्सों में ही बंटेगा आधा हमारा और आधा धीरेंद्र भाई का..।
इसीलिए तुम्हें यहां भेजा है, जिससे तुम अपने हिस्से की दावेदारी पेश कर सको।
हमे इतना मूर्ख मत समझो सान्या.. हम तुम्हे घर की हिस्सेदारी में शामिल नहीं होने देंगे…
बल्कि कायदे से देखा जाए तो ये घर हमारा है..।
पापा हमेशा कहते थे उनके सारे खेत और ज़मीन धीरू के है और ये घर हमारा !”
सान्या और मान्या की बातों के बीच धीरेन्द्र भी वहाँ पहुँच चुका था, पर दोनों ही बहनो का ध्यान उस पर नहीं गया था..।
क्रमशः

अरे देवा,,, ये अलग ही स्यापा,,,, क्या लडकी है ये मान्या,,% और इसकी सोच,,, महादेव बचाएं ऐसे लोगों से,, जिसने खुद लडकी होकर एक लडकी को बदनाम किया, ऊपर वाला न्याय तो करता ही है भले से देर हो।
षड्यंत्र कारी मान्या ने क्या खूब प्लानिंग की और रेशम के साथ साथ अखंड को भी बर्बाद कर दिया। पर शायद वो किसी की सगी नही है तभी तो अपनी सगी बहन के साथ भी अच्छा व्यवहार नही किया।
निरी दुर्बुद्धि है ये मान्या ,घनघोर षड्यन्त्रकारी इसने तो धीरेन्द को भी पीछे छोड़ दिया।
इंसान का अच्छा होना भी गुनाह है ,अच्छा है तो उसकी अच्छाई खटकती है लोगों की आखों मे
और फिर ऐसे लोग आपको नेस्तानाबूद करने में जी जान से जुट जाते हैं।लालची लड़कीं जब अपनी ही बहन की न हुई तो रेशम या किसी और कि क्या ही होती।
Agla part bhi de do mam🤗🤗🤗
Super part…..accha hai sach ka khulasa to huwa
Missing you so much 😢
Amazing part hai doctor sahiba
Please next part jaldi dijiye
Eagerly waiting for next part
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐