अपराजिता -145

cropped-image_editor_output_image-1308354985-17130075838927033677653559779808.jpg

अपराजिता -145

    एक छोटे से विचार को लेकर शुरू की थी ये कहानी और लिखते लिखते यहाँ तक पहुँच गयी..
वो छोटा सा विचार था सोशल मिडिया डिफेमिंग, यानी किसी का नाम गलत तरीके से खराब करना ! जो की अखंड सिंह परिहार के साथ हुआ..
जिसका बहुत बुरा परिणाम अखंड और रेशम को झेलना पड़ा..
एक दूसरा छोटा सा विचार था जातिगत भेदभाव !!
इस मुद्दे को दिखाने के लिए मैंने राजेंद्र और कुसुम के चरित्र रचे..
एक ठाकुर परिवार की नकचढ़ी लड़की का एक हीन जाति के डॉक्टर युवक से प्रेम संबंध !
कुसुम शुरू से जानती थी कि घर पर कोई तैयार नहीं होगा, इसलिए अपनी शादी के दिन वो राजेंद्र के साथ भाग जाती है। जहाँ उसके भाई और भाई के गुंडे उन दोनों को पकड़ लेते हैं..।

यहाँ पर कुछ पाठको ने आपत्ति जताई और कहा कि अब आगे कहानी पढ़ने लायक नहीं रह गयी।
क्यूंकि कुसुम को ज़बरदस्ती के विवाह बंधन में बंधना पड़ा, अब क्या फायदा कहानी पढ़ने का.. ?

  इस बात को कुछ लोगों ने भुनाया भी कि माफिया गैंगस्टर प्रेम कहानियों की तरह मैंने एक ज़बरदस्ती की शादी दिखा दी..
वाकई उन लोगो से पूछना चाहती हूँ कि अपने आस पास ही नजर दौड़ा कर देख ले और पास मौजूद पांच महिलाओं से पूछ ले कि क्या उन्होंने अपनी पसंद क़ी  शादी की है ?

कुछ लोगो ने ज़बरदस्त ऑब्जेक्शन उठाया कि मुझे कुसुम कि ज़बरन शादी नहीं करवानी थी, अब उसे मन मार कर रहना होगा, अपने प्यार से दूर रहना होगा.. और ऐसा कहने वाले कुछ गिने चुने प्रबुद्ध पाठक वर्ग ने कहानी क्या, मुझे ही पढ़ना छोड़ दिया, जिसके लिए मैं उनका धन्यवाद कहती हूँ..!

क्यूंकि लेखन मेरे लिए मुझसे जुडी वो वस्तु है, जिसमे मैं किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहती..!!
बिल्कुल नही!!

कोई मुझे ये बताये कि ऐसा क्यों लिखा, नहीं लिखना था, इसकी जगह वो लिखना था, ऐसा ज्ञान देने वाले लोगो को नमस्कार !!.

लिखते समय लेखक अपने मन की कहानी को शब्दों का रूप देता है।
         लेखन में कमियां बताइये, उसे मैं सहर्ष स्वीकार करुँगी और सुधारूंगी भी, लेकिन मेरी कहानी और प्लाट में बदलाव तो मैं कभी नहीं करने वाली..।

कहानी से ठाकुर सरनेम हटाने की भी महा बेवकूफाना अड्वाइज़ मुझे दी गयी थी, जिसके बाद प्लेटफॉर्म से कहानी हटाना मुझे ज्यादा आसान और सम्मानजनक काम लगा !!

तो इस तरह छोटे से विचार से शुरू हुई कहानी ने इतने मोड देखे कि लिखा जाने वाला प्लेटफॉर्म तक बदल गया… ।

जिस प्लेटफॉर्म पर शुरू किया था, कभी पहले सोचा नहीं था कि ये वहां पूरी नहीं हो पायेगी, बल्कि कहीं और पूरी होगी।
लेकिन जैसे कहते हैं दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम, वैसे ही हर कहानी पर लिखा है पढ़ने वाले का नाम और कहाँ रची जायेगी उस प्लेटफॉर्म का नाम !!

आप सभी पाठक जो मेरे साथ कहानी में शुरू से बने रहे और आज तक बने हैं, उन सभी का ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूँ..
आशा करती हूँ अब आपको ब्लॉग पर भी पहले से  ज्यादा मज़ा आ रहा होगा..।

ब्लॉग को और बेहतर करने में हम लोग लगे हुए हैं… जिससे आपका पठन पाठन निरंतर मनोरंजक होता रहे…

आज इतना सब पढ़ कर आप लोग समझ ही गए होंगे की अपराजिता का अंतिम पड़ाव आपके सामने प्रस्तुत करने जा रही हूँ…
विभिन्न पड़ावों से गुजरकर अपराजिता अपने सोपान पर पहुँचने वाली है.. हालाँकि कहानी समाप्त होने के बाद भी आप सब के मन में ढेर सारे सवाल कुलबुला सकते हैं.. या फिर ये बात भी चल सकती है कि कहानी को और आगे बढ़ाना था, जल्दी में समापन किया आदि इत्यादि, लेकिन मेरे ख्याल से कहानी की खूबसूरती ही इस बात में छिपी है की पढ़ते हुए लगे की काश थोड़ी और बडी होती कहानी, कुछ और एपिसोड्स लिखे होते !!

आज भी शादी डॉट कॉम को पढ़ने के बाद लोग कहते हैं दो तीन एपिसोड्स और लिखे जा सकते थे.. !

चलिए ये सब बातें छोड़ कर अब कहानी पर आते हैं.. !

अब तक आपने पढ़ा…

  गेंदा के साथ अपमानजनक व्यवहार करने के बाद वीर और अनंत थाने में धर लिए गए हैं..
इन्ही सारी जानकारी के लिए जब अनिर्वान ने रेशम को भी थाने में बुलवाया तब वहाँ पहले से मौजूद अखंड को देख कर रेशम परेशान हो गयी, लेकिन बाद में एक एक कर बातें धीरे धीरे सुलझती चली गयी और गीता और गोलू के सारी बात को समझाने से रेशम को समझ में आ गया कि उसके साथ हुए बुरे बर्ताव का ज़िम्मेदार अखंड नहीं बल्कि कोई और है..
उसने दिल से अखंड को माफ़ ही नहीं किया बल्कि खुद भी आगे बढ़ कर उससे माफ़ी मांग ली…

लेकिन इतने सबके बावजूद अभी एक राज बाकी था कि आखिर अखंड के नाम से रेशम को डराने वाला धीरेंद्र था या कोई लड़की…

अब आगे…

अगला भाग कल दोस्तों.. थोड़ा लिखा है थोड़ा बाकी है, एडिट नहीं कर पायी इसलिए अगला भाग कल आ जायेगा.. !

4.8 60 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

79 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Yashoda Sharma
Yashoda Sharma
1 year ago

दूर हुई गलतफेमी,, शायद अब जीना आसान हो दोनों के लिऐ
बाकी मजा आ गया जो दोनों को सजा मिली अनिर्वान से

sarika Tripathi
sarika Tripathi
1 year ago

kahani aapne bahot Sundar likhi h.or jinko b ye shaadi ka accha ni lga wo log shayad love marriage k hi paksh me honge…Aaj b bahot si ldkiya ,ldke h jo apna pyaar ni pa pate h pr jisse unke maa baap shaadi krte h usme b kabhi na kabhi pyaar mil hi jata h….or kuch logon k Karan Mera b kitna nuksaan hua …na jane kitne mahine Maine wait Kiya hr story ka…pr koi ni ab khush hu Roz padhke….aapki sabhi stories kabil-e-taarif h…

Upasna Dubey
Upasna Dubey
1 year ago

आज जाकर पुनः वापसी कर पाई हूँ,कलम… कलमकार की व्यक्तिगत क्षमता रुचि और सोच पर चलती है और उसकी सार्थकता इसी में है ,अगर पाठकों की सोच से कलम ढलने लगती तो आज न जाने कितने ही साहित्यकारों को हम पढ़ने स वंचित रह जाते।
उदाहरणार्थ …फतवे के डर से अगर तस्लीमा नसरीन ने इस्लामी मुद्दों पर लिखनाछोड़ दिया होता तो सोचिए समाज और पाठक वर्ग क्या खो देता।
एक व्यवहारिक बात बोलती हूं… सुनिए सबकी करिए मन की शेष आप स्वयं समझदार हैं।
चलिए अब चलें अपराजिता की तरफ तो कहानी के शीर्षक में ही उसकी पटकथा छूपी हुई है ….अपराजिता की प्रथम समीक्षा में ही लिखा था मैंने…वह जो विपरीत परिस्थितियों में लड़कर भी हार न माने जीत कर ही दम ले वह होती है अपराजिता तब अगर कहानी की नायिकाओं को अनुकूल हालात ही मिलते तो क्योंकर वह अपराजिता बनती ।
अपराजिता….कहानी अपने आप मे बहुत सारे संदेश समेटे हुये है जरूरत है बस गहराई में उतरने की ।

Neeta
Neeta
1 year ago

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏👌👌👌👌aap ki Kahaani se bahut motivation milta h… Aur kisi ne sach hi kha h books aap ki friends hoti h… Bs aap ki kahanio me sab k sab humare dost ban gye h ❤❤❤❤❤❤❤❤….. Jinkey bina hum adhure h
Thank ❤ Dr Sahib 🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡💛💛💛💛💛💛💚💚💚💚💚💚💚💚💚💚🥰🥰🥰🥰🥰🥰😘😘😘😘😘😘🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

असली अपराजिता तो आप हो अपर्णा….😊कहानी एक छोटे से विचार से शुरू होकर कितने उतार चढ़ाव से गुजरी है फिर भी कहानी हर मोड़ पर अपनी लय से चलती रही और आपके अपने सच्चे पाठक जो समझते है आपकी लेखनी कभी गलत नहीं हो सकती, उनका विश्वास हर मोड़ पर सच साबित हुआ।
आपके सच्चे पाठक आज भी आपके साथ है, यही आपकी जीत है।
कहानी बेशक अपने अंतिम पड़ाव की ओर बड़ रही है फिर भी मन करता है कि कुछ भाग और आ जाए, मन भरता नहीं ♥️। आज का भाग भी बहुत सुन्दर था 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻।

Shikha nagpal
Shikha nagpal
1 year ago

Kahani acchi ho to readers kisi bhi platform per pahunch jayenge aur aapki kahaniyan toh Dil ko chuti hain.

Jyoti K
Jyoti K
1 year ago

सबसे पहले जीवन साथी पढ़ी थी…..उसके last part में लगा कि जैसे मेरे college का last day हो और ये लोग फिर नहीं मिलेंगे…….फिर जीवन साथी 2 आ गया😍
आप अपराजिता के ख़त्म होने पर ऐसा लग रहा है……
कदे न कदे फेर मिलांगे😍🥰😁😁🥹

Manju
Manju
1 year ago

Intjar hai mam.kon hai vo ladki.

Soma ( J T)
Soma ( J T)
1 year ago

Ye kahani mujhe bahut pasand aayi or real v lagi… Ap jo likhti h wo fantasy ni hoti.. Blki real life me jo hota h wohi hoti h.. Isliy ek judav sa mehsus hota h.. Lgta h jaise apni hi story likhi gyi h…. Bahut hi achi story.. Aage v is tarah ki stories late rhiyga mam

Aruna
Aruna
1 year ago

👌👌👌👌👌👌