
जीवनसाथी -3 भाग -93
खिड़की पर खड़ी कली को घर के सामने लगे ऊँचे दरख्त के नीचे खड़ा शौर्य नजर आ गया..
वो आंखे झपक कर उसे देखने लगी..
उसने दो तीन बार अपनी आँखों को साफ़ किया, और तभी सारिका ने उसे आवाज़ लगा दी..
“कली चलो, तुम्हारे डैडा तैयार हो गए हैं !”
कली ने हामी भरी और वापस एक नजर वहाँ खड़े लड़के पर डाल दी….
लेकिन वहां कोई और खड़ा था..
कली ने अपने माथे पर हाथ मारा और बाहर निकल गयी…
उसके डैडा बाहर गाडी निकाल कर उसका इंतज़ार कर रहे थे..
वो भी मुस्कुराती हुई जाकर गाड़ी में सवार हो गयी..
गाडी आगे बढ़ते ही उसने उस पेड़ की तरफ देखा, एक बार फिर मुस्कुराता हुआ शौर्य नजर आने लगा…
वो भी हल्का सा मुस्कुरा कर रह गयी..
उसे कॉलेज में उतार कर वासुकी अपने ऑफिस निकल गया…
कॉलेज पहुँच कर वो अपने दोस्तों के साथ क्लास में चली गयी..
वहां क्लास में उसके बाकी साथी, दोस्त भी मौजूद थे, सब उसके पास आकर उससे मिलने जुलने लगे..
वो बहुत दिन बाद कॉलेज लौटी थी तो क्लास के साथियों में उत्साह बना हुआ था..
एक नए लड़के ने क्लास ज्वाइन कि थी वो भी उससे मिलने उसके पास चला आया..
“हाय कली.. आई एम शौर !”
कली का दिल धक से रह गया इस नाम को सुन कर..
“शौर्य ?”
“नो नो.. नॉट शौर्या, इट्स शौर.. !”
“ओह्ह ओके.. नाइस नेम !”
वो मुस्कुरा कर रह गयी.. कुछ देर में ही प्रोफेसर आ गए और क्लास शुरू हो गयी..
कली को लगा था घर से निकलेगी, बाहर लोगो से मिलेगी तो उसके मन को ठंडक मिलेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं था..
उसका मन अब भी कहीं नहीं लग रहा था, एक अजब सी उदासी उसके मन मस्तिष्क पर तारी थी..
उसकी समझ से परे था कि क्या ऐसी ही हालत शौर्य की भी होगी ? या उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा होगा..।
****
महल से लोग हर्ष के घर पर पहुँच चुके थे..
आज हर्ष और शौर्य भी अपना काम निपटा कर आ गए थे..
शौर्य का मन अजीब सा हो रहा था, घर के बड़ो से ना तो वो कुछ बोल पा रहा था और ना चुपचाप सब कुछ देख पा रहा था..
उसके भाइयों ने उसके मन की व्यथा समझ तो ली थी, लेकिन अब इतनी जल्दी किया भी क्या जा सकता था यही सब सोच कर उस ने खुद को किस्मत के भरोसे छोड़ दिया था।
हर्ष और शौर्य फ़्लैट पर पहुंचे और उनकी माओं ने मुस्कुरा कर उनका स्वागत किया।
हालाँकि अपने पुरे परिवार को अपने पास देख कर भी वो खुल कर हंस नहीं पा रहा था।
बांसुरी उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ ले गयी..
“तेरे मन में कुछ चल रहा है तो बता दे शौर्य.. ऐसे गुमसुम सा रहेगा तो मैं कैसे समझ पाऊँगी कि तू खुश है या नहीं ?”
“मुझे प्रियदर्शिनी से शादी नहीं..
शौर्य कुछ बोल पाता उसके पहले उसकी बडी माँ वहाँ चली आयी.. आते ही उन्होंने शौर्य का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसका माथा चूम लिया..
“हमारे लाड़कुंवर.. हम जानते थे आप हमें कभी अफ़सोस करने का मौका नहीं देंगे.. सच कहे तो हर्ष आपसे बड़े ज़रूर हैं लेकिन समझदारी आप में ही ज्यादा है शौर्य.. आपने कभी अपनी बडी मॉम को दुःख नहीं पहुँचाया है उल्टा हमारा संबल बन कर खड़े रहे हैं.. ।
कैसे समझाये आपको कि आपने इस सगाई के लिए हाँ बोल कर हम पर कितना बड़ा उपकार किया है।
बेटा हमेशा खुश रहो, अपनी ज़िन्दगी में वो सब पा लो जो पाना चाह्ते हो..
तुम्हारी ज़िन्दगी से हर अनचाही बात दूर हट जाये, यही आशीर्वाद देते हैं…
उन्होंने उसके सर पर हाथ रख दिया..
बांसुरी और शौर्य दोनों ही कुछ नहीं कह पाए..
शौर्य के चेहरे पर फीकी सी मुस्कान चली आयी..
रूपा आज बहुत खुश थी, उसके चेहरे से प्रसन्नता टपक रही थी.. उसे खुश देख कर बांसुरी भी खुश थी।
वो दोनों आपस में कुछ बातें करती वहाँ से निकल गयी..
शाम के कुछ पहले ही वो लोग वहाँ से होटल के लिए निकल गए…
प्रियदर्शिनी का परिवार वहाँ पहले ही पहुँच चुका था..
प्रियदर्शिनी अपने कम्मरे में तैयार हो रही थी..
रूपा ने सोचा एक बार प्रियदर्शिनी से मिल लेना चाहिए, वो उसके कमरे की तरफ निकल गयी..
कमरे के दरवाज़े पर वो पहुंची और उसकी नजर खुले दरवाज़े पर चली गयी..
“पता नहीं दरवाज़ा कैसे खुला छोड़ दिया इन लोगो ने !”
रूपा अंदर दाखिल हुई..
प्रेसिडेंशियल सूट कमरा था.. बहार वाला हॉल खाली था, अंदर वाले बैडरूम में प्रियदर्शिनी तैयार हो रही थी, साथ ही उसकी माँ भी वहाँ मौजूद थी…
उन दोनों कि बातें बाहर खड़ी रूपा के कानो में भी पड़ने लगी..
कुछ देर सुनने के बाद रूपा ने सोचा उसे अंदर जाना चाहिए फिर कुछ सोच कर वो वापस लौट गयी..।
उसे उस वक्त माँ बेटी को टोकना सही नहीं लगा…
सगाई के लिए सभी लोग हॉल में जमा होने लगे थे.. हालाँकि बाहर वालों को यहाँ नहीं बुलाया गया था..ये कार्यक्रम निहायत ही निजी था.. सिर्फ महल के लोग, प्रियदर्शिनी का परिवार और कुछ बेहद करीबी लोग!!
वहां मौजूद सभी लोग प्रियदर्शिनी और शौर्य का इंतज़ार कर रहे थे…
कुछ देर में ही प्रियदर्शिनी वहां चली आयी..
शौर्य पहले ही वहां पहुँच चुका था, वो अपने भाइयों के साथ एक तरफ की टेबल पर बुझा सा बैठा था..
उसका मन बहुत ख़राब सा हो रहा था..
उसे लग रहा था सब कुछ उसके हाथ से निकलता जा रहा है..
“चिंता मत कर शौर्य… सब ठीक होगा !”
हर्ष ने बोला, और वो बिना कुछ बोले बैठा रहा..
उसने धनुष की तरफ देखा, धनुष चुप बैठा ज़रूर था, लेकिन उसकी आंखे देख कर लग रहा था जैसे वो कुछ सोच रहा है..
सब अपनी अपनी जगह पर मौजूद थे..
कुछ देर में ही युवराज और राजा साहब भी चले आये…
राजा साहब शौर्य के नजदीक चले आये..
“क्या हुआ शौर्य ? खुश नहीं हो ?”
शौर्य ने राजा साहब की तरफ देखा और उसकी आंखे भरने लगी, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया..
“नहीं, ऐसा कुछ नहीं !”
“लग तो नहीं रहे !”
“आप कब से मुझमे इतनी रूचि लेने लगे ?” बोलना तो चाहा लेकिन शौर्य बोल नहीं पाया.. उसका दिल करता था अपने पिता का दिल दुखा दे, लेकिन चाह कर भी वो ऐसा नहीं कर पाता था..।
राजा साहब ने धीरे से उसका हाथ थाम लिया..
“कभी कभी जब खुद को रास्ता नहीं सूझता ना, उस वक्त खुद को रास्ते के मोड़ो के हवाले छोड़ देना चाहिए, तब वो रास्ता ही हमें सही मंजिल तक ले जाता है..।
एक बात हमेशा याद रखना बेटा, तुम्हारा जो भी निर्णय हो अगर वो तुम्हारे लिए सही होगा तो तुम्हारे उस फैसले में, मैं और तुम्हारी माँ हमेशा तुम्हारा साथ देंगे !”
उसने अपने पिता कि तरफ देखा और उनके गले से लगने के लिए आगे बढ़ने को था कि राजा साहब का फ़ोन बजने लगा और उसके बालों को सहला कर वो एक तरफ निकल गए..
स्टेज पर खड़ी रूपा ने शौर्य को भी ऊपर स्टेज पर बुलवा लिया..
शौर्य सकुचा कर ऊपर चला गया..
रूपा के एक तरफ प्रियदर्शिनी खड़ी थी और दूसरी तरफ शौर्य..
रूपा ने दोनों का हाथ पकड़ रखा था..
रूपा धीरे से मुस्कुरा रही थी.. उसने सब की तरफ देखते हुए बोलना शुरू किया..
“आप सभी हमारे एक निमंत्रण पर यहाँ तक चले आये उसके लिए आप सब का आभार..
आप सभी ये सोच रहे होंगे कि आखिर हमने आप सब को यहाँ क्यों बुलाया..सोचा तो हमने बहुत कुछ था, कि आज जश्न होगा लेकिन ईश्वर कि मर्जी के बिना पत्ता भी कहाँ हिलता है..?
आज से कुछ दिनों पहले हमारी सहेली गीता की बेटी के साथ हमने अपने बेटे हर्ष की सगाई तय की थी। लेकिन किन्हीं कारणवश गीता और उसके परिवार ने इस सगाई को तोड़ दिया..।
उस वक्त हम सोच में पड़ गए कि हमारे रुतबे, हमारे पैसों के बावजूद इस परिवार ने हमारा साथ क्यों नहीं दिया ?
इन्हे हम पर और हमारे बेटे पर ज़रा सा भी विश्वास नहीं था ?
ये बात सच साबित हुई.. इन्हे वाकई हमारे बेटे पर विश्वास नहीं था और वो इन्होने अपनी हरकत से दिखा दिया !”
“अरे.. रूपा ये सब क्या है ?”
गीता अचानक बोल पड़ी..
और रूपा उसे मुस्कुराते हुए देखने लगी..
“हम बुराई नहीं कह रहे हैं गीता, जो कह रहे मन से कह रहे हैं… हमारी बात तो खत्म होने दो..।
इनके रिश्ता तोड़ने के बाद हम कहीं गहरे तक टूट गए थे।
हमें लगा हमारा मान सम्मान सब चला गया.. हमारे पास हमारा कुछ नहीं बचा और तभी से दिमाग में ये बात चलने लगी कि कैसे भी हो इस रिश्ते को वापस जोड़ना होगा और तब हमारा ध्यान हमारे छोटे बेटे शौर्य पर गया..
हम जानते है शौर्य कभी हमारी बात नहीं टाल सकता.. इसलिए हमने उसे मनाया और वापस एक बार फिर गीता की तरफ प्रस्ताव भेजा..
इस बार गीता के परिवार ने हमारा प्रस्ताव मान लिया और शौर्य से प्रियदर्शिनी के विवाह के लिए तैयार हो गए…
हमें लगा उन लोगो के इस प्रस्ताव को मान लेने से हमें करार आ जायेगा, हम खुश भी थे !
बहुत खुशियों के साथ हम तैयारियों में लग गए.. हमारे साथ हमारी देवरानी यानी शौर्य की माँ भी खुश दिख रही थी, लेकिन कहीं कुछ तो कमी थी.. जो हम पकड़ नहीं पा रहे थे।
और तब हमने अपने सबसे अच्छे दोस्त कम सलाहकार को बुलवा लिया..।
कुंवर सा, यानी हमारे देवर कुमार !
आप सब के चहेते राजा साहब !!
इन्हे बुलवाने के बाद हमने इनके साथ बैठ कर देर तक बातें की, और हमेशा कि तरह इन्होने हमें बातों में उलझा ही लिया..
इनका कहा मान कर हम इस बात के लिए तैयार हो गए कि हम ये सगाई रोक देंगे..
क्यूंकि कुमार का कहना था कि अगर लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद भी करते हैं, तब भी उन्हेँ एक मौका देना चाहिए.. इसलिए सगाई कुछ समय बाद में करनी चाहिए..
बस यही सब सोच कर हम सभी को लेकर यहाँ चले तो आये, लेकिन सोचा इस कार्यक्रम के पहले ही हम गीता के कमरे में जाकर उससे और प्रियदर्शिनी से बात कर लेते हैं..।
वैसे भी यहाँ पहुँचने वाले मेहमानो को अब तक नहीं पता था कि हमने उन्हेँ किस लिए बुलवाया था.. इसलिये सोचा पहले प्रियदर्शिनी से एक बार बात कर लेते है..
लेकिन जब हम प्रियदर्शिनी के कमरे में पहुंचे तब वहां हमने जो सुना….
जीवनसाथी क्रमशः

Aree aree घनघोर सस्पेंस क्या सुन लिया रूपा रानी सा ने।मक्तलक अपर्णा जी के दिमाग का जवाब नहीं क्या लिखते हो मज़ा आ गया।too good
🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
शौर्य बेटा आँखों पर लगा चश्मा उतारो और देखो राजा हमेशा तुम्हारे पीछे खड़ा है जताता नहीं है पर तुम्हारे चेहरे और आवाज से समझ जाता हे कि तुम खुश नही है
रूपा ने समझदारी से काम लिया पर उसकी हड़बडाहट की आदत उसे हमेशा गलत बना देती है
Awesome 👍🏻 shayad Rajasaab ki baat ke chalte agar badiranisa Priyadarshini ke room Mai baat karne gai aur kuch sun liya jo Shaurya ke haq Mai kuch faisla badiranisa ne liya toh shayad Shaurya ke dil mai Rajasaab ke liye jagah ban jaye
Kashmir yatra jaisi rahi Dr shaiba.
Bahut badhiya 🥰🥰👌👌 part
Bahut khub …story sahi ja rahi ….priydarshini ki pol khulne wali h usse kewal paise me interest h aur kisi me nahi ….
ओह, बहुत बढ़िया भाग रानी रूपा ने प्रियदर्शिनी के कमरे के बाहर कुछ सुना है ।।।।।
😳😳👌👌
Bhut hi interesting part ❤️❤️
🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐